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नक्षत्र-आधारित ~96 मिनट का अशुभ काल · राहु काल से भिन्न · आज का सटीक समय पंचांग में
✦ Varjyam · Varjya Kaal · Varjyam Kalam ✦
वर्ज्यम् (Varjya Kaal / Varjyam Kalam) वैदिक पंचांग का एक अशुभ काल है, जो लगभग 1.6 घंटे (96 मिनट) का होता है। यह राहु काल से भिन्न है — राहु काल वार पर निर्भर करता है, जबकि वर्ज्यम् उस दिन के नक्षत्र पर आधारित होता है। चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, उसके निश्चित भाग (अंकुशक) में यह काल पड़ता है — इसलिए प्रत्येक दिन वर्ज्यम् का समय बदलता रहता है।
वर्ज्यम्
Varjyam
आधार: नक्षत्र-आधारित
अवधि: ~96 मिनट
प्रत्येक नक्षत्र का अलग अंकुशक भाग; प्रतिदिन समय बदलता है।
राहु काल
Rahu Kaal
आधार: वार-आधारित
अवधि: ~90 मिनट
सूर्योदय–सूर्यास्त को 8 भागों में बाँटकर; प्रत्येक वार का निश्चित स्लॉट।
गुलिक काल
Gulika
आधार: वार-आधारित
अवधि: ~90 मिनट
शनि-पुत्र गुलिक से सम्बंधित; राहु काल से भिन्न क्रम में आता है।
प्रत्येक नक्षत्र की कुल अवधि को उस नक्षत्र के निश्चित गुणक से गुणा करके वर्ज्यम् का प्रारम्भ समय निकाला जाता है। उदाहरण के लिए अश्विनी नक्षत्र का वर्ज्यम् 50वें मुहूर्त-अंश पर, तो मघा का 30वें अंश पर पड़ता है। 27 नक्षत्रों के अलग-अलग गुणक होते हैं, इसलिए गणना थोड़ी जटिल है। आज का सटीक वर्ज्यम् समय जानने के लिए पंचांग पेज देखें।
नया व्यापार, दुकान या उद्यम का शुभारम्भ
विवाह, सगाई व अन्य मांगलिक संस्कार
दूर की यात्रा का प्रस्थान
शल्य चिकित्सा (सर्जरी) या नया उपचार
महत्वपूर्ण अनुबंध, समझौते व हस्ताक्षर
गृह प्रवेश व नया वाहन/संपत्ति क्रय
पहले से चल रहे कार्य जारी रखना
ध्यान, मंत्र जप व पूजा-पाठ
दैनिक दिनचर्या व नित्यकर्म
आपातकालीन व अपरिहार्य कार्य
अध्ययन व आत्म-चिंतन
➤ वर्ज्यम् क्या होता है?
वर्ज्यम् (Varjya Kaal) प्रतिदिन का एक ~96 मिनट का अशुभ काल है, जो उस दिन के नक्षत्र के विशिष्ट भाग (अंकुशक) पर आधारित होता है। इस समय में नए व शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।
➤ वर्ज्यम् में क्या नहीं करना चाहिए?
विवाह, यात्रा-प्रस्थान, नया व्यापार आरम्भ, अनुबंध, गृह प्रवेश, शल्य चिकित्सा व अन्य मांगलिक कार्य वर्ज्यम् के दौरान नहीं करने चाहिए। दैनिक कार्य व पहले से चल रहे काम जारी रखे जा सकते हैं।
➤ वर्ज्यम् और राहु काल में क्या अंतर है?
राहु काल वार (दिन) पर आधारित होता है और प्रत्येक सप्ताह एक ही क्रम में आता है। वर्ज्यम् नक्षत्र पर आधारित होता है — चंद्रमा जिस नक्षत्र में हो उसके अनुसार समय प्रतिदिन बदलता है।
➤ वर्ज्यम् किस आधार पर तय होता है?
27 नक्षत्रों में से प्रत्येक का एक विशिष्ट अंश (मुहूर्त-अंक) वर्ज्यम् माना गया है। नक्षत्र की कुल अवधि को उस नक्षत्र के निर्धारित गुणक से गुणा करके वर्ज्यम् का प्रारम्भ समय निकाला जाता है।
✦ नक्षत्रों का सम्मान करो, वर्ज्य काल से बचो ✦
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