दीपावली 2026

दीपावली कैलेंडर

दीपों का पंच-दिवसीय महापर्व

🪔

दीपावली 2026 — पंच-दिवसीय पर्व

6 – 10 नवम्बर 2026

धनतेरस से भाई दूज तक

1
💰

धनतेरस

📜 6 नवम्बर 2026 (शुक्र)

07:08 PM – 08:25 PM

धन्वन्तरि जयन्ती — सोना, चाँदी, बर्तन क्रय

2
🪔

नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली)

📜 7 नवम्बर 2026 (शनि)

04:30 AM – 06:00 AM

हनुमान पूजा, अभ्यंग स्नान

3
🪔

लक्ष्मी पूजा (दीपावली)

📜 8 नवम्बर 2026 (रवि)

06:48 PM – 08:23 PM

मुख्य दीपावली — लक्ष्मी-गणेश पूजा, दीपक

4
🐄

गोवर्धन पूजा / अन्नकूट

📜 9 नवम्बर 2026 (सोम)

06:42 AM – 08:51 AM

गोवर्धन उत्थान — अन्नकूट भोग

5
🤝

भाई दूज

📜 10 नवम्बर 2026 (मंगल)

01:30 PM – 03:48 PM

बहन का भाई को तिलक — यमुना-यम कथा

🪔

लक्ष्मी पूजा विधि

  1. 1

    घर की सम्पूर्ण सफाई — माँ लक्ष्मी के स्वागत हेतु।

  2. 2

    द्वार पर रंगोली व तोरण सजाएँ।

  3. 3

    चौकी पर लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापित करें।

  4. 4

    कलश स्थापना — धन व आभूषण रखें।

  5. 5

    षोडशोपचार पूजा करें।

  6. 6

    खील-बताशे व खीर का भोग अर्पण करें।

  7. 7

    प्रदोष काल (सूर्यास्त बाद) में पूजा सर्वोत्तम।

  8. 8

    घर में सर्वत्र दीपक प्रज्वलित करें।

⚠️

दिवाली पर ध्यान रखें

तीव्र पटाखे फोड़ने से बचें (पर्यावरण व स्वास्थ्य)।

मांसाहार व मद्यपान वर्जित।

क्रोध व झगड़े से दूर रहें।

जुआ — कुछ परम्पराओं में पारिवारिक खेल मात्र।

शुभ दीपावली · माँ लक्ष्मी की कृपा सदा बनी रहे

दीवाली (दीपावली) — हिन्दू धर्म का सबसे बड़ा एवं सबसे प्रिय त्यौहार। संस्कृत में "दीपावली" का अर्थ है "दीपों की पंक्ति"। यह 5-दिवसीय उत्सव है जो कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से कार्तिक शुक्ल द्वितीया तक चलता है। 2026 में मुख्य दीवाली 8 नवम्बर (रविवार) — अमावस्या के दिन।

दीवाली का धार्मिक महत्व विविध है — उत्तर भारत में भगवान राम के 14-वर्षीय वनवास के बाद अयोध्या वापसी का उत्सव। दक्षिण भारत में नरकासुर पर भगवान कृष्ण की विजय। पूर्व भारत में माँ काली की पूजा। पश्चिम (गुजरात) में नववर्ष। जैन समुदाय में महावीर का निर्वाण-दिवस। सिख समुदाय में बंदी छोड़ दिवस। यह एक त्यौहार जो पूरे भारत को जोड़ता है। इस लेख में 2026 के दीवाली पर्व के सभी 5 दिनों का सटीक मुहूर्त, पूजा विधि, एवं आधुनिक उत्सव-शैली का विस्तार।

दीवाली 2026 — 5-दिवसीय कैलेंडर

दिन 1 — 7 नवम्बर 2026 (शनिवार): धनतेरस / धन त्रयोदशी (कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी)। प्रदोष काल पूजा 5:35-7:05 PM। भगवान धन्वन्तरि एवं माँ लक्ष्मी पूजन। नये धातु-वस्तुएँ, सोना-चांदी क्रय का सर्वश्रेष्ठ दिन। यम दीप दान संध्या में।

दिन 2 — 8 नवम्बर 2026 (रविवार): नरक चतुर्दशी / छोटी दीवाली / रूप चौदस। प्रातः अभ्यंग स्नान (तेल से मालिश के बाद स्नान)। दक्षिण भारत में मुख्य दीवाली इसी दिन। भगवान कृष्ण की नरकासुर पर विजय। काली चौदस — माँ काली की पूजा।

दिन 3 — 8 नवम्बर 2026 (रविवार): मुख्य दीवाली / लक्ष्मी पूजन (कार्तिक अमावस्या)। प्रदोष काल लक्ष्मी पूजन 5:30-8:05 PM। निशीथ काल पूजन 11:55 PM-12:45 AM। महानिशीथ काल मध्यरात्रि। माँ लक्ष्मी, गणेश, सरस्वती, कुबेर पूजन।

दिन 4 — 9 नवम्बर 2026 (सोम): गोवर्धन पूजा / अन्नकूट (कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा)। भगवान कृष्ण की इन्द्र पर विजय। 56 भोग — गाय, गोवर्धन पर्वत की मिट्टी से बनी आकृति की पूजा। उत्तर भारत में विशेष महत्व। गुजरात नववर्ष — विक्रम संवत 2083 का प्रारम्भ।

दिन 5 — 10 नवम्बर 2026 (मंगल): भाई दूज / यम द्वितीया (कार्तिक शुक्ल द्वितीया)। बहनें भाइयों को तिलक करके लम्बी आयु की कामना। भाइयों द्वारा बहनों को उपहार। यम-यमी की कथा।

दिन-3: मुख्य लक्ष्मी पूजन — सटीक मुहूर्त

अमावस्या तिथि प्रारम्भ: 8 नवम्बर 2026 सायं 1:35 PM। अमावस्या तिथि समाप्त: 9 नवम्बर 2026 प्रातः 4:00 AM। मुख्य लक्ष्मी पूजन: 8 नवम्बर शाम (प्रदोष काल), अमावस्या सक्रिय।

प्रदोष काल लक्ष्मी पूजन (दिल्ली): सायंकाल 5:30 PM से 8:05 PM (अवधि 2.5 घंटे)। प्रदोष काल = सूर्यास्त के आसपास का काल — माँ लक्ष्मी की कृपा-प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ समय। गृहस्थ परिवारों हेतु सबसे लोकप्रिय।

वृष लग्न मुहूर्त: 6:00 PM-7:55 PM। वृष शुक्र की राशि — माँ लक्ष्मी का सर्वश्रेष्ठ लग्न। यदि उपलब्ध तो सबसे शुभ। सिंह लग्न मुहूर्त: 12:50 AM-3:00 AM (9 नवम्बर मध्यरात्रि)। तांत्रिक साधकों के लिए।

निशीथ काल मुहूर्त: 11:55 PM से 12:45 AM (अवधि 50 मिनट)। यह "महानिशीथ काल" — मध्यरात्रि का काल। तांत्रिक एवं विशेष उच्च-स्तर साधकों हेतु। माँ काली एवं तंत्र-साधना।

महानिशीथ काल: मध्यरात्रि 12:00-12:45 AM। कुम्भ लग्न में महानिशीथ — सबसे शक्तिशाली। केवल विशेष साधकों हेतु — सामान्य परिवारों के लिए प्रदोष काल पर्याप्त।

दीवाली लक्ष्मी पूजन की पूर्ण विधि

पूर्व-तैयारी: घर की सफाई 1 सप्ताह पहले से। नये पर्दे, बिस्तर। पूजा-स्थल पूर्व अथवा उत्तर मुख। चौकी पर लाल/पीला वस्त्र। माँ लक्ष्मी (बाएँ), गणेश (दाएँ — माँ लक्ष्मी के दाएँ), सरस्वती (माँ लक्ष्मी के बाएँ) की मूर्तियाँ/चित्र। कुबेर भी रख सकते हैं।

पूजा सामग्री: कलश, आम के पत्ते, नारियल, सिंदूर, हल्दी, अक्षत, फूल (विशेषतः कमल, गुलाब, गेंदा), धूप, दीप (मिट्टी का दिया, घी का), 11 मिट्टी के दीप, दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल, मिठाई (खासतौर पर खीर, बर्फी, लड्डू), फल, सूखे मेवे, धान का खील, बताशे, सोने-चांदी के सिक्के।

पूजा क्रम (शाम 5:30 PM): 1) स्नान, स्वच्छ वस्त्र। 2) पूजा-स्थल शुद्ध। 3) घी का दीप जलाएँ। 4) गणेश पूजन — संकट विघ्न नाश हेतु। 5) कलश स्थापना। 6) माँ लक्ष्मी पूजन — षोडशोपचार पूजन (16 चरण): आवाहन, आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गन्ध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, स्तोत्र, प्रदक्षिणा।

विशेष पूजा: कुबेर पूजन — धन के खजांची। बही-खाता पूजन — व्यापारिक खातों की पूजा। यंत्र पूजन — श्री यंत्र, लक्ष्मी यंत्र। तिजोरी पूजन — घर की तिजोरी पर लक्ष्मी जी का तिलक।

मन्त्र-जाप: श्री सूक्त (16 श्लोक) — सबसे प्रभावी लक्ष्मी मन्त्र। कनकधारा स्तोत्र (आदि शंकराचार्य रचित) — स्वर्ण-वृष्टि हेतु। महालक्ष्मी अष्टकम। "ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः" 108 बार। "ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः"।

दीप जलाना: पूजा के बाद घर के बाहर 11/21/108 दीप जलाएँ। मुख्य द्वार पर रंगोली। तुलसी के पास दीप। पूरी रात दीप जलते रहें — माँ लक्ष्मी का आगमन।

दीवाली के व्यापारिक एवं आर्थिक महत्व

दीवाली व्यवसायों के लिए वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण समय। भारत के व्यापारिक चक्र में "दीवाली से दीवाली" एक वित्तीय वर्ष। पुराने बही-खातों का बंद, नये खातों का खोलना। "मुहूर्त ट्रेडिंग" — स्टॉक एक्सचेंज विशेष शुभ समय में 1 घंटे का सत्र।

मुहूर्त ट्रेडिंग 2026: BSE एवं NSE पर 8 नवम्बर शाम (अनुमानित 6:15-7:15 PM)। निवेशकों द्वारा प्रतीकात्मक खरीद — माँ लक्ष्मी की कृपा हेतु। हालांकि बाजार बंद रहता है पूर्ण दिन।

व्यापारी पूजा (व्यापारिक प्रतिष्ठानों में): दुकान/ऑफिस की सफाई। बही-खाता पूजन। तिजोरी पूजन। ग्राहकों को उपहार। कर्मचारियों को बोनस। नये व्यापारिक संकल्प।

धनतेरस का आर्थिक महत्व: भारत में सोना खरीद का सबसे बड़ा दिन। 2025 के अनुमान — पूरे भारत में दीवाली पर 50,000+ करोड़ रुपये के सोने की बिक्री। "नये" वस्तुएँ खरीदने का दिन — वाहन, सम्पत्ति, इलेक्ट्रॉनिक्स, बर्तन।

दीवाली का क्षेत्रीय वैविध्य

उत्तर भारत: मुख्य लक्ष्मी पूजन। पटाखे, मिठाइयाँ, उपहार। राम के अयोध्या वापसी का उत्सव। राम लीला 9-10 दिन तक।

पश्चिम भारत (गुजरात): नववर्ष का प्रारम्भ। बहीखाता पूजन। चोपड़ा पूजन (व्यापारिक खाते)। लाभ-शुभ। गुजराती परिवारों में 3-दिवसीय उत्सव।

महाराष्ट्र: मुख्य रूप से नरक चतुर्दशी। अभ्यंग स्नान सर्वोपरि। फरल (फरसाण) मिठाइयाँ। पाडवा को पति-पत्नी का त्यौहार।

दक्षिण भारत: दीवाली नरक चतुर्दशी पर मुख्य। प्रातः गंगाजल स्नान। नये वस्त्र। पटाखे प्रातः। तमिलनाडु में "थामिझ नूत्रांडु" (तमिल नववर्ष) नहीं, परंतु दीवाली प्रसिद्ध।

पूर्व भारत (बंगाल/ओडिशा): माँ काली पूजन। कृष्ण चतुर्दशी एवं अमावस्या को काली पूजा। श्यामा पूजा। दुर्गा पूजा के बाद का दूसरा सबसे बड़ा त्यौहार।

पंजाब (सिख समुदाय): बंदी छोड़ दिवस। 6th सिख गुरु — गुरु हरगोबिंद सिंह की ग्वालियर के किले से रिहाई। हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मन्दिर) में दीप-रोशनी।

जैन समुदाय: महावीर निर्वाण दिवस। उपवास, ध्यान, तप। दीवाली रात्रि महावीर का मोक्ष माना जाता है।

पर्यावरण-अनुकूल दीवाली

पटाखों से प्रदूषण: दीवाली के बाद 24-48 घंटे में दिल्ली एवं अन्य शहरों में हवा की गुणवत्ता "खतरनाक" स्तर पर। PM2.5 स्तर 10x अधिक। बच्चों, बुजुर्गों, अस्थमा रोगियों के लिए जोखिम। पशुओं पर भी प्रभाव।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश: "Green crackers" का उपयोग — कम प्रदूषणकारी। समय-सीमा: रात 8-10 PM ही। NCR में पूरे क्रैकर्स पर प्रतिबंध (कई वर्षों से)।

पर्यावरण-अनुकूल विकल्प: 1) मिट्टी के दीप (मिट्टी पर्यावरण-अनुकूल, हस्तनिर्मित) — चीनी झालरों के बजाय। 2) Eco-friendly रंगोली — फूलों, हल्दी, चन्दन, चावल से। 3) उपहार कागज़ — recyclable wrapping। 4) मिठाइयाँ — packaging कम। 5) पटाखे की जगह — संगीत, नृत्य, परिवार-समय।

सकारात्मक उत्सव: माँ लक्ष्मी पूजन घर के अंदर। पटाखे न्यूनतम। दीप-प्रकाश से उत्सव। बच्चों को कहानियाँ — दीवाली का सच्चा अर्थ। पर्यावरण की रक्षा भी एक पुण्य।

📊5-दिवसीय दीपावली-उत्सव 2026 — पूर्ण-तालिका

दिनदिनांकत्यौहार-नाममुख्य-पूजाविशेष-कार्य
16 नवम्बर 2026 (शुक्र)धनतेरसधन्वन्तरि-पूजन, यम-दीपसोना-चांदी-बर्तन-वाहन-खरीदारी
27 नवम्बर (शनि)नरक-चतुर्दशी / छोटी-दीपावलीकाली-पूजन, अभ्यंग-स्नानतेल-स्नान, यम-तर्पण
38 नवम्बर (रवि)मुख्य दीपावली / लक्ष्मी-पूजनमहालक्ष्मी-गणेश पूजनदीप-दान, मिठाई-वितरण
49 नवम्बर (सोम)गोवर्धन-पूजा / अन्नकूटगोवर्धन-गायों की पूजाअन्न-कूट, गाय-पूजन
510 नवम्बर (मंगल)भाई-दूज / यम-द्वितीयाबहन-भाई-पूजाटीका, उपहार-विनिमय

मुख्य लक्ष्मी-पूजन: 8 नवम्बर सायं 6:30 PM - 8:30 PM (दिल्ली)। प्रदोष + अमावस्या-काल।

📊दीपावली लक्ष्मी-पूजा — मुहूर्त चुनाव

मुहूर्तसमय (दिल्ली, 8 नव)श्रेष्ठ-कार्यटिप्पणी
प्रदोष-काल5:42 PM - 8:14 PMमुख्य लक्ष्मी-पूजनसर्वोत्तम (सूर्यास्त + 2.5 घंटे)
वृषभ-लग्न6:18 PM - 8:14 PMस्थिर-लग्न = स्थिर-धनघर-व्यवसाय दोनों के लिए
सिंह-लग्न12:42 AM - 2:55 AMराज-लक्ष्मी-योगव्यवसाय हेतु विशेष
महानिशीथ-काल11:39 PM - 12:30 AMतंत्र-साधनाकाली-साधक
चौघड़िया (शुभ)5:30 PM - 7:00 PMसब शुभ-कार्यअमृत-शुभ-लाभ
अभिजित-मुहूर्त11:54 AM - 12:42 PMदिवस-पूजनगृह-संस्कार

📋लक्ष्मी-पूजन सम्पूर्ण-विधि — 11-चरण

  1. 1

    दीपावली से 1 सप्ताह पूर्व

    घर की पूर्ण-सफाई। पुराना सामान बाहर। नये कपड़े-बर्तन-गहने खरीदें। पूजा-स्थल विशेष-सजावट।

  2. 2

    धनतेरस-दिन (6 नवम्बर)

    धन्वन्तरि-पूजन (चिकित्सा-देवता)। नया-सामान-खरीदारी (सोना, चांदी, बर्तन, वाहन)। सायं यम-दीप मुख्य-द्वार पर।

  3. 3

    दीपावली-प्रात:

    अभ्यंग-स्नान (तेल-मालिश + स्नान)। नये-वस्त्र। घर के मुख्य-द्वार पर रंगोली + तोरण।

  4. 4

    पूजा-स्थल तैयारी

    चौकी पर लाल-वस्त्र। महालक्ष्मी + गणेश-मूर्ति/चित्र। कलश, श्रीयन्त्र, कुबेर-यन्त्र। फूल-मिठाई-दीप।

  5. 5

    सूर्यास्त-समय (5:30 PM)

    घर के सब कोनों में दीपक जलायें। मुख्य-द्वार पर 2 दीपक। तुलसी-मन्दिर पर दीप।

  6. 6

    प्रदोष-काल पूजा-प्रारम्भ (6:30 PM)

    गणेश-स्मरण → कलश-स्थापना → लक्ष्मी-गणेश-षोडशोपचार पूजन। दूध-गंगाजल-अभिषेक।

  7. 7

    श्रीसूक्त + लक्ष्मी-स्तोत्र

    श्रीसूक्त (वैदिक-स्तोत्र) + कनकधारा-स्तोत्र + लक्ष्मी-अष्टोत्तर-शतनाम। 11 या 21 बार।

  8. 8

    दीप-माला आरती

    घर के सब-दीपकों के साथ "ॐ जय लक्ष्मी माता" आरती। बच्चे-बुजुर्ग सब साथ।

  9. 9

    भोग — खीर-पूड़ी-मिठाई

    महालक्ष्मी को खीर, पूड़ी, हलवा, मिठाई-भोग। नारियल-खांड। श्रद्धा-पूर्वक।

  10. 10

    दान + मिठाई-वितरण

    गरीब-दान। पड़ोसी-रिश्तेदार को मिठाई-वितरण। कर्मचारियों को बोनस-उपहार।

  11. 11

    रात्रि-दीप-प्रज्वलन

    पूरी-रात (अधिकांश) दीपक प्रज्वलित। यह "जागरण" लक्ष्मी-वास का संकेत। पटाखे न्यूनतम — पर्यावरण।

⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें

  • अमावस्या-काल छोड़कर पहले लक्ष्मी-पूजन

    क्यों: मुख्य-लक्ष्मी-पूजन अमावस्या-तिथि + प्रदोष-काल = सर्वोत्तम। 8 नवम्बर सायं 5:42 PM बाद ही।

    सही उपाय: पूजा-समय पंचांग में देखें। 8 नवम्बर सायं 6:30 PM - 8:30 PM (दिल्ली) सर्वश्रेष्ठ। समय बदलना नहीं।

  • घर-सफाई न करना/पुराना-सामान रखना

    क्यों: लक्ष्मी "स्वच्छता-प्रिया"। गन्दे-घर में लक्ष्मी प्रवेश नहीं। पारम्परिक-शास्त्र।

    सही उपाय: दीपावली से 1 सप्ताह पूर्व पूर्ण-सफाई। पुराना/अनुपयोगी सामान बाहर। नया-वर्ष-नया-घर।

  • पटाखे-केन्द्रित दीवाली (पर्यावरण-नुकसान)

    क्यों: अत्यधिक-पटाखे = वायु-प्रदूषण, ध्वनि-प्रदूषण। बच्चों-वृद्धों के लिए हानिकारक। दीवाली का असली-अर्थ "दीप" है, "धमाका" नहीं।

    सही उपाय: मिट्टी-दीप (100+) से सजायें। eco-friendly पटाखे (न्यूनतम)। संगीत-नृत्य-परिवार-समय। पर्यावरण-रक्षा भी पुण्य।

  • सोना/चांदी "धनतेरस के बाद" खरीदना

    क्यों: धनतेरस (6 नवम्बर) ही श्रेष्ठ-दिन। पूरे-वर्ष का सबसे-शुभ-धन-खरीदारी-दिन। बाद में खरीदना = सामान्य-शुभ।

    सही उपाय: 6 नवम्बर 2026 — सर्वोत्तम। नहीं हो सके तो — अक्षय-तृतीया (20 अप्रैल 2026) दूसरा-विकल्प।

  • गोवर्धन-पूजा/भाई-दूज छोड़ देना

    क्यों: 5-दिवसीय दीपावली-उत्सव अधूरा। केवल "मुख्य-दीवाली" = आधा-फल। प्रत्येक दिन का अपना-महत्त्व।

    सही उपाय: 5 दिन पूर्ण-मनायें। गोवर्धन-पूजा (9 नवम्बर) — गाय-पूजन। भाई-दूज (10 नवम्बर) — बहन-भाई।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीवाली कब है — 7 अथवा 8 नवम्बर 2026?

7 नवम्बर — धनतेरस। 8 नवम्बर — मुख्य दीवाली (लक्ष्मी पूजन)। 8 नवम्बर शाम-रात्रि अमावस्या काल — इसी समय मुख्य पूजन। 9 नवम्बर — गोवर्धन पूजा। 10 नवम्बर — भाई दूज। पूर्ण 5-दिवसीय उत्सव।

लक्ष्मी पूजा का सबसे शुभ समय कौन सा है?

दिल्ली के लिए: प्रदोष काल 5:30-8:05 PM (गृहस्थ हेतु सबसे लोकप्रिय)। वृष लग्न 6:00-7:55 PM (शुभतम)। निशीथ काल 11:55 PM-12:45 AM (तांत्रिक हेतु)। अन्य शहरों के लिए स्थानीय समय हमारा कैलकुलेटर देता है।

दीवाली पर सोना खरीदना अनिवार्य है?

अनिवार्य नहीं — परंतु पारम्परिक एवं शुभ। धनतेरस (7 नवम्बर 2026) सोना-चांदी क्रय का सर्वोच्च दिन। यदि बजट हो — स्वर्ण आभूषण, सिक्के, कुछ ग्राम भी पर्याप्त। यदि सम्भव न हो — तांबे/पीतल का पात्र भी शुभ।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।