कृष्ण जन्माष्टमी 2026

श्री कृष्ण जन्माष्टमी

नंदलाल कन्हैया का प्राकट्योत्सव

4सितम्बर2026

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी

रोहिणी नक्षत्र — मध्य रात्रि १२ बजे श्री कृष्ण जन्म

🌙 अष्टमीरोहिणी🪈 शुक्रवार

मुख्य समय

🌙

अष्टमी प्रारम्भ

5 Sep 03:37 AM

🌅

अष्टमी समाप्त

6 Sep 05:54 AM

🪔

निशिथ काल पूजा

11:57 PM - 12:43 AM

🍽

पारण समय

6 Sep after sunrise

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जन्माष्टमी की कथा

द्वापर युग में मथुरा के राजा कंस के अत्याचार से पीड़ित पृथ्वी की रक्षा हेतु भगवान विष्णु ने देवकी और वसुदेव के घर ८वीं संतान के रूप में अर्धरात्रि को कारागार में जन्म लिया। उस समय बिजली कड़की, कारागार के द्वार खुल गये, पहरेदार सो गये। पिता वसुदेव शिशु कृष्ण को टोकरी में रखकर यमुना पार कर गोकुल में नन्द-यशोदा के पास छोड़ आये। वहीं उनकी बाल-लीलाएँ प्रारम्भ हुईं।

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पवित्र मंत्र

🪈🪈🪈🪈

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

श्री वासुदेव को प्रणाम

🪈🪈🪈🪈

हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे।

हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥

महामंत्र — हृदय को पवित्र करता है

🪈🪈🪈🪈

कृष्णाय वासुदेवाय, हरये परमात्मने।

प्रणत क्लेशनाशाय, गोविन्दाय नमो नमः॥

गोविन्द — परमात्मा, शरणागत के क्लेश हरण करते हैं — उन्हें बारम्बार प्रणाम

📜

पूजा विधि

  1. दिन भर निर्जला/फलाहारी उपवास।
  2. सायंकाल स्नान कर पूजा स्थल सजाएँ।
  3. कृष्ण की मूर्ति या लड्डू गोपाल का झूला सजाएँ।
  4. मध्य रात्रि १२ बजे श्री कृष्ण जन्मोत्सव।
  5. पंचामृत व गंगाजल से अभिषेक करें।
  6. नये वस्त्र पहनाकर श्रृंगार करें।
  7. माखन-मिश्री, फल, पंजीरी का भोग अर्पण करें।
  8. आरती व मंत्र — "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"।
  9. अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण।
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उत्सव परम्पराएँ

🏺

दही हाण्डी

महाराष्ट्र

मटकी फोड़ — गोविंदा समूह

🎭

रासलीला

उत्तर भारत

कृष्ण लीला नाटक

🛕

जन्मस्थान दर्शन

मथुरा-वृंदावन

विशाल मन्दिर आयोजन

🪈

इस्कॉन कीर्तन

विश्वव्यापी

२४ घंटे कीर्तन

जय श्री कृष्ण · बजे मुरली · हो मंगल आज

कृष्ण जन्माष्टमी — भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव। भाद्रपद कृष्ण अष्टमी (कुछ शाखाओं में रोहिणी नक्षत्र-संयोग पर) मनाया जाता है। 2026 में कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितम्बर (शुक्रवार) — रात्रि 12:00 बजे (मध्य रात्रि) कृष्ण जन्म। अष्टमी तिथि एवं रोहिणी नक्षत्र दोनों मध्य रात्रि पर सक्रिय।

भगवान कृष्ण का जन्म 5,000+ वर्ष पूर्व मथुरा के कारागार में, राजा कंस के अत्याचार के समय, मध्य रात्रि में, अष्टमी तिथि एवं रोहिणी नक्षत्र में, वृषभ लग्न में हुआ। माता देवकी एवं पिता वसुदेव। कंस के डर से कृष्ण को रात्रि में ही गोकुल में नन्द-यशोदा के पास पहुँचाया गया। कृष्ण ने आगे चलकर कंस-वध, गोवर्धन-धारण, द्वारका-स्थापना, महाभारत-गीता-उपदेश, एवं अन्य लीलाएँ कीं।

कृष्ण जन्माष्टमी 2026 — सटीक मुहूर्त

अष्टमी तिथि प्रारम्भ: 4 सितम्बर 2026 (शुक्रवार) सायं 5:30 PM। अष्टमी तिथि समाप्त: 5 सितम्बर 2026 (शनिवार) रात्रि 4:30 PM। रोहिणी नक्षत्र प्रारम्भ: 4 सितम्बर रात्रि 9:30 PM। रोहिणी समाप्त: 5 सितम्बर रात्रि 9:00 PM।

मध्य रात्रि पूजन (4-5 सितम्बर): रात्रि 11:50 PM से 12:45 AM (अवधि 55 मिनट) — कृष्ण जन्म का सर्वोत्तम समय। निशीथ काल — मध्य रात्रि — जब कृष्ण ने जन्म लिया। पारम्परिक "जन्माष्टमी पूजन" इसी समय।

दिन भर का व्रत: 4 सितम्बर के सूर्योदय से रात्रि 12:00 बजे तक। केवल फलाहार। मध्य रात्रि कृष्ण जन्म के पश्चात् पारण (कुछ करते हैं), अधिकांश 5 सितम्बर सूर्योदय के बाद पारण।

पारण (व्रत खोलना): 5 सितम्बर 2026 — विकल्प 1: नवमी प्रारम्भ के बाद (दोपहर के बाद)। विकल्प 2: रोहिणी समाप्ति के बाद (रात्रि 9 बजे के बाद)। पारम्परिक: सूर्योदय के बाद। प्रत्येक शाखा के नियम अलग।

दही हांडी (5 सितम्बर): महाराष्ट्र-गुजरात में जन्माष्टमी के अगले दिन "दही हांडी" — ऊँची मटकी में दही, जिसे "गोविंदा" समूह तोड़ते हैं — कृष्ण की माखन-चोरी की लीला का स्मरण।

जन्माष्टमी पूजन की पूर्ण विधि

पूर्व-तैयारी: स्नान। पीले/नीले/केसरी वस्त्र। पूजा स्थल पूर्व अथवा उत्तर मुख। चौकी पर पीला वस्त्र। बाल-कृष्ण (लड्डू गोपाल) की मूर्ति। पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी), गंगा जल, तुलसी पत्र, पीले फूल, मोरपंख (कृष्ण-प्रिय), बांसुरी।

झूला (पारम्परिक): कृष्ण को झूले में बैठाकर झुलाना। बच्चों को विशेष आनन्द — झूला सजाएँ फूलों से। मन्दिरों में बड़े झूले।

मध्य रात्रि (11:50 PM): अभिषेक — पंचामृत स्नान, गंगा जल स्नान, चन्दन-तिलक। नये वस्त्र पहनाएँ। मोर मुकुट, गहने। तुलसी पत्र, माखन-मिश्री, पीले फल, मेवे का भोग। 56 भोग (छप्पन भोग) — विशेष परिवारों में।

मन्त्र-जाप: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" — द्वादशाक्षरी मूल मन्त्र। 108 बार। "ॐ कृष्णाय नमः", "हरे राम हरे कृष्ण" महामन्त्र। श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ। कृष्ण लीला कथा।

विशेष आरती: "आरती कुंजबिहारी की..." (राधा-कृष्ण आरती)। पूरे परिवार के साथ। बच्चों को कृष्ण की कहानियाँ सुनाएँ।

भोग: पंजीरी (खासकर धनिया से), मखाने, मेवे, माखन-मिश्री, पीले फल (केला, आम), खीर, हलवा। तुलसी पत्र अनिवार्य भोग में। मांस-मदिरा-प्याज-लहसुन वर्जित।

क्षेत्रीय उत्सव-शैली

मथुरा-वृन्दावन (कृष्ण की जन्मभूमि): विश्व का सबसे बड़ा कृष्ण जन्माष्टमी आयोजन। कृष्ण जन्मभूमि मन्दिर (मथुरा), बांके बिहारी मन्दिर (वृन्दावन), द्वारकाधीश मन्दिर (मथुरा) में लाखों भक्त। रात्रि-भर भजन-कीर्तन। 25-30 लाख भक्त 2 दिनों में।

महाराष्ट्र: "दही हांडी" — मुख्य आकर्षण। ऊँची मटकी (10-12 मीटर) में दही। मानव-स्तम्भ (Human Pyramid) बनाकर "गोविंदा" समूह तोड़ते हैं। मुम्बई में सबसे बड़े आयोजन — लाखों रुपयों के पुरस्कार। 200+ "गोविंदा पथक" (गुट)।

गुजरात: रास-गरबा। कृष्ण-राधा की लीलाओं पर आधारित नृत्य। हाल ही में जन्माष्टमी एवं नवरात्रि के नृत्य मिल जाते हैं।

दक्षिण भारत: "कोलम" (रंगोली) — कृष्ण के पैर के निशान घर के अंदर तक — कृष्ण के घर में आगमन का प्रतीक। मन्दिरों में मूर्ति-झूला।

ओडिशा-बंगाल: "नंदोत्सव" — कृष्ण के जन्म के अगले दिन। नन्द बाबा एवं यशोदा माता ने पुत्र-जन्म पर मनाया। मक्खन-दही का प्रसाद।

विदेश: ISKCON द्वारा विश्वव्यापी आयोजन। जापान, अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया — हर जगह जन्माष्टमी।

कृष्ण जन्म कथा

मथुरा के राजा कंस के पिता उग्रसेन। कंस ने पिता को हटाकर राज्य कब्जा लिया। एक भविष्यवाणी सुनी कि उसकी बहन देवकी का 8वाँ पुत्र उसका वध करेगा। कंस ने देवकी एवं पति वसुदेव को कारागार में डाल दिया।

देवकी के 6 पुत्रों को कंस ने जन्म लेते ही मार डाला। 7वाँ पुत्र बलराम — "गर्भ-स्थानांतरण" से रोहिणी (वसुदेव की दूसरी पत्नी) के गर्भ में चला गया। 8वाँ पुत्र कृष्ण — भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र, मध्य रात्रि में जन्मा।

कारागार के सभी द्वार स्वतः खुल गए। पहरेदार सो गए। वसुदेव कृष्ण को टोकरी में लेकर यमुना नदी पार कर गोकुल पहुँचे — नन्द-यशोदा के घर। यशोदा की पुत्री (योगमाया) को बदलकर अपने साथ ले आए।

कंस ने उस पुत्री (योगमाया) को मारने का प्रयास किया — परंतु वह आकाश में उड़कर देवी-रूप में बोली: "कंस! तुझे मारने वाला पहले ही गोकुल में पहुँच चुका है।"

कृष्ण ने 11 वर्ष की आयु तक गोकुल में नन्द-यशोदा के साथ बाल-लीलाएँ कीं — माखन चोरी, कालिया मर्दन, गोवर्धन धारण। फिर मथुरा जाकर कंस का वध। बाद में महाभारत-गीता-उपदेश।

📊जन्माष्टमी 2026 — सटीक मुहूर्त एवं समय (दिल्ली)

घटनादिनांक-समयअवधिविशेष
अष्टमी-तिथि प्रारम्भ4 सितम्बर 2026 (शुक्र) सायं 5:30 PM23 घंटे
अष्टमी-तिथि समाप्त5 सितम्बर 2026 (शनि) सायं 4:30 PMव्रत-समाप्ति-निर्धारक
रोहिणी-नक्षत्र प्रारम्भ4 सितम्बर रात्रि 9:30 PM23 घंटेजन्म-नक्षत्र
रोहिणी-नक्षत्र समाप्त5 सितम्बर रात्रि 9:00 PM
निशीथ-काल (कृष्ण-जन्म)4-5 सितम्बर रात्रि 11:50 PM-12:45 AM55 मिनटसर्वोत्तम-पूजन-काल
स्मार्त-पारण5 सितम्बर सूर्योदय 6:05 AM के बादगृहस्थ-वर्ग
वैष्णव-पारण5 सितम्बर रात्रि 9:00 PM के बादअष्टमी+रोहिणी समाप्ति-योग
दही-हाण्डी5 सितम्बर 2026 (शनि)दिन-भरमहाराष्ट्र-गुजरात

दिल्ली के लिए समय। अन्य-शहर ±15-30 मिनट।

📊कृष्ण-जन्माष्टमी पूजा-सामग्री — Checklist

वर्गसामग्रीविशेष-टिप्पणी
मूर्ति/चित्रबाल-कृष्ण-मूर्ति, झूला, राधा-कृष्ण-चित्रचांदी/पीतल की मूर्ति श्रेष्ठ
स्नान-सामग्रीपंचामृत (दूध-दही-शहद-घी-शक्कर), गंगाजलअभिषेक हेतु
भोग — मुख्यमक्खन-मिश्री, माखन, पंजीरी (धनिया-घी-शक्कर)कृष्ण-प्रिय भोग
भोग — सहायकखीर, हलवा, मेवे, पीले-फल (केला, खरबूजा)56-भोग प्रथा (विशेष)
तुलसीअनिवार्य — हर भोग पर तुलसी-पत्रतुलसी के बिना कृष्ण-भोग अधूरा
फूलपीले-गुलाब, चम्पा, कमलपीला-रंग कृष्ण-प्रिय
वस्त्र (मूर्ति-हेतु)पीला-रेशम, मोर-पंखपीताम्बर-स्वरूप
पाठभगवद्-गीता (अध्याय 1 अनिवार्य), विष्णु-सहस्रनामकथा-श्रवण
वर्जितमांस, मदिरा, प्याज, लहसुन, चावल (व्रत में)सात्विक-नियम

📋कृष्ण-जन्माष्टमी सम्पूर्ण व्रत-विधि — 10-चरण

  1. 1

    सप्तमी-रात्रि (3 सितम्बर)

    सायं हल्का सात्विक भोजन। सूर्यास्त के बाद कुछ नहीं। ब्रह्मचर्य। संकल्प-तैयारी।

  2. 2

    अष्टमी-प्रात: (4 सितम्बर)

    सूर्योदय से पूर्व उठें। स्नान। पीले/श्वेत-वस्त्र। संकल्प: "मैं [नाम] कृष्ण-कृपा हेतु आज जन्माष्टमी का व्रत करता/करती हूँ।"

  3. 3

    पूजा-स्थल तैयारी

    बाल-कृष्ण की मूर्ति/चित्र। झूला (पालना) सजायें। मोर-पंख, बांसुरी। पीले-वस्त्र। कलश-स्थापना।

  4. 4

    दिन-भर व्रत

    पूर्ण-निराहार/फलाहार। चावल-अन्न-दाल वर्जित। फल, दूध, मेवे, सिंघाड़े-कुट्टू-राजगीरे का आटा। पानी अनुमत।

  5. 5

    दिन-भर मन्त्र-जप

    "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" 108 बार × कई-बार। महामन्त्र "हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे..." कीर्तन।

  6. 6

    सायं-कथा-श्रवण

    कृष्ण-जन्म-कथा, भागवत-दशम-स्कन्ध, गीतोपदेश-श्रवण। ISKCON मन्दिर-दर्शन भी श्रेष्ठ।

  7. 7

    मध्य-रात्रि अभिषेक (11:50 PM-12:45 AM)

    निशीथ-काल। कृष्ण-जन्म का समय। पंचामृत-स्नान बाल-कृष्ण को। 16-उपचार पूजन।

  8. 8

    झूला-सेवा

    कृष्ण-मूर्ति को झूले में रखें। हल्का-झुलायें। "मेरो खिलौना" कीर्तन। बच्चों को विशेष-आनन्द।

  9. 9

    मक्खन-मिश्री-भोग + तुलसी

    मुख्य-भोग मक्खन-मिश्री। 56-भोग (विशेष-परिवार में)। हर-भोग पर तुलसी-पत्र। भोग-अर्पण के बाद आरती।

  10. 10

    पारण (5 सितम्बर)

    स्मार्त: सूर्योदय बाद। वैष्णव: रात्रि 9 PM बाद। ब्राह्मण-भोज + दान। हलवा, खीर, फलाहार से पारण।

⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें

  • जन्माष्टमी पर "हल्का चावल/अनाज" खा लेना

    क्यों: व्रत-दिन पूर्ण अन्न-वर्जन। चावल, गेहूँ, दाल कुछ नहीं। शास्त्र-वर्जना। थोड़ा भी अन्न = व्रत-दोष।

    सही उपाय: केवल फलाहार। यदि भूख अधिक — साबूदाना-खिचड़ी, सिंघाड़ा-हलवा, कुट्टू-पकौड़ी, राजगीरा-लड्डू।

  • मध्य-रात्रि-पूजन छोड़कर जल्दी सो जाना

    क्यों: जन्माष्टमी का "मूल" मध्य-रात्रि अभिषेक। निशीथ-काल (11:50 PM-12:45 AM) कृष्ण-जन्म का समय। केवल दिन-व्रत = आधा-फल।

    सही उपाय: मध्य-रात्रि तक जागें। पंचामृत-अभिषेक करें। यदि बच्चे न जग सकें — कम-से-कम मुख्य-व्यक्ति जागकर पूजा।

  • कृष्ण-भोग पर तुलसी-पत्र नहीं रखना

    क्यों: तुलसी कृष्ण-प्रिया। बिना-तुलसी कोई-भी भोग कृष्ण-स्वीकार-नहीं। शास्त्र-नियम।

    सही उपाय: हर-भोग (मक्खन-मिश्री, खीर, फल) पर 1-1 तुलसी-पत्र अनिवार्य। तुलसी-वृक्ष से ताज़ा-पत्र (एकादशी-छोड़कर)।

  • दिन-भर मांस/अंडा खाना और रात्रि-पूजा

    क्यों: व्रत-शुद्धि = सम्पूर्ण-दिन। तामसिक-भोजन से रात्रि-पूजा निष्फल। शुद्ध-तन-मन से ही पूजा।

    सही उपाय: पूरे-दिन (24 घंटे) पूर्ण-शाकाहार + प्याज-लहसुन-त्याग। ब्रह्मचर्य। मन-शुद्धि।

  • पारण-समय छूट जाना

    क्यों: अष्टमी-समाप्ति से पहले पारण आवश्यक। समय-छूटने पर "द्वादशी-दोष" समान — व्रत आधा।

    सही उपाय: स्मार्त: 5 सितम्बर सूर्योदय बाद। वैष्णव: रात्रि 9 PM (अष्टमी+रोहिणी समाप्ति) बाद। समय एक-दिन-पूर्व नोट करें।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कृष्ण जन्माष्टमी 4 अथवा 5 सितम्बर 2026?

मुख्य व्रत 4 सितम्बर। रात्रि 12 बजे कृष्ण जन्म पूजन। 5 सितम्बर सूर्योदय/नवमी प्रारम्भ के बाद पारण। यदि स्मार्त (गृहस्थ) — 4 सितम्बर। यदि वैष्णव — 5 सितम्बर (अष्टमी एवं रोहिणी का योग)।

दही हांडी कब और कैसे?

दही हांडी 5 सितम्बर 2026 — जन्माष्टमी के अगले दिन। "गोविंदा" समूह मानव-स्तम्भ बनाकर ऊँची मटकी (10-12 मीटर) तोड़ते हैं। मुम्बई-पुणे में सबसे बड़े आयोजन। पुरस्कार राशि लाखों रुपये।

जन्माष्टमी पर क्या भोग चढ़ाएँ?

मक्खन-मिश्री (कृष्ण-प्रिय), तुलसी पत्र (अनिवार्य), पंजीरी (धनिया-घी-शक्कर), माखन, खीर, मेवे, पीले फल, हलवा। 56 भोग — विशेष परिवारों में। मांस-मदिरा-प्याज-लहसुन-तामसिक भोजन वर्जित।

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सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।