शब्दकोष

पंचांग एवं ज्योतिष शब्दकोष

60+ संस्कृत/हिन्दी शब्दों का सरल भाषा में परिचय — पंचांग, मुहूर्त, ज्योतिष, संस्कार, उपाय।

पंचांग

पञ्चाङ्ग(Panchanga)

हिन्दू कैलेंडर के पाँच अंग — तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार। शाब्दिक अर्थ: "पाँच अंग"।

तिथि(Tithi)

चन्द्र-दिवस। सूर्य एवं चन्द्र के देशान्तरों के 12° अन्तर के बराबर एक तिथि। माह में 30 तिथियाँ — 15 शुक्ल + 15 कृष्ण।

नक्षत्र(Nakshatra)

चन्द्र-भवन। आकाश के 360° को 27 बराबर भागों (13°20′ प्रत्येक) में बाँटकर निकाला गया। चन्द्रमा प्रत्येक नक्षत्र में लगभग 24 घंटे रहता है।

योग(Yoga)

सूर्य एवं चन्द्र के देशान्तरों के योगफल पर आधारित पंचांग का तीसरा अंग। 27 योग — कुछ शुभ (सिद्धि, ध्रुव) कुछ अशुभ (व्यतीपात, वैधृति)।

करण(Karana)

अर्ध-तिथि। एक तिथि में दो करण होते हैं। 11 प्रकार — 7 चर एवं 4 स्थिर। विष्टि (भद्रा) करण को अशुभ माना जाता है।

वार(Vaara)

सप्ताह का दिन। सात ग्रहों से शासित — रवि (सूर्य), सोम (चन्द्र), मंगल (मंगल), बुध, गुरु, शुक्र, शनि।

पक्ष(Paksha)

चन्द्र मास का अर्ध-भाग। शुक्ल पक्ष (बढ़ता चन्द्र) — अमावस्या से पूर्णिमा तक; कृष्ण पक्ष (घटता चन्द्र) — पूर्णिमा से अमावस्या तक।

मास(Maasa)

चन्द्र मास — लगभग 29.5 दिन। 12 मास का एक वर्ष। हिन्दू मासों के नाम: चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ, फाल्गुन।

अधिक मास(Adhik Maasa)

अधिमास — लगभग प्रत्येक 32-33 चन्द्र मासों में जोड़ा जाने वाला 13वाँ मास, जिससे चन्द्र-वर्ष को सौर-वर्ष से समायोजित किया जा सके। पुरुषोत्तम मास भी कहलाता है।

अमावस्या(Amavasya)

अमावस्या — चन्द्र मास का अन्तिम दिन; सूर्य एवं चन्द्र समान देशान्तर पर। पितृ-कर्म, तर्पण, श्राद्ध हेतु शुभ।

पूर्णिमा(Purnima)

पूर्णिमा — पूर्ण चन्द्र। शुक्ल पक्ष का अन्तिम दिन। सत्यनारायण व्रत, गुरु पूर्णिमा, शरद पूर्णिमा हेतु महत्वपूर्ण।

एकादशी(Ekadashi)

चन्द्र मास की 11वीं तिथि (दोनों पक्षों में)। विष्णु-व्रत हेतु अत्यन्त शुभ — वर्ष में लगभग 24 एकादशियाँ।

संकष्टी(Sankashti)

कृष्ण-पक्ष की चतुर्थी — गणेश-व्रत हेतु शुभ। चन्द्रोदय के पश्चात् व्रत-पारण।

खगोलीय

अयनांश(Ayanamsa)

सायन (tropical) एवं निरयण (sidereal) राशिचक्रों के बीच का कोणीय अन्तर। 2026 में Lahiri Ayanamsa लगभग 24°15′।

लाहिरी अयनांश(Lahiri Ayanamsa)

भारत सरकार की 1955 Calendar Reform Committee द्वारा अपनाया गया मानक अयनांश। चित्रा-तारा को सन्दर्भ-बिन्दु मानता है।

सायन(Sayana)

उष्णकटिबंधीय (tropical) राशिचक्र — पश्चिमी ज्योतिष में प्रयुक्त, वसन्त-सम्पात-बिन्दु (vernal equinox) पर आधारित।

निरयण(Nirayana)

निरयण (sidereal) राशिचक्र — वैदिक ज्योतिष में प्रयुक्त, स्थिर तारा-समूहों पर आधारित।

स्फुट(Sphuta)

किसी ग्रह की किसी क्षण की वास्तविक स्थिति (longitude)।

लग्न(Lagna)

जन्म-समय पर पूर्व-क्षितिज पर उदित राशि। जन्म-कुण्डली का प्रथम भाव (ascendant)।

चन्द्र लग्न(Chandra Lagna)

चन्द्रमा की राशि से प्रारम्भ होने वाला कुण्डली-विश्लेषण। Moon sign-based reference।

राशि(Rashi)

राशिचक्र के 12 भाग — मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ, मीन। प्रत्येक राशि 30°।

भाव(Bhava)

जन्म-कुण्डली का एक "घर"। 12 भाव — प्रत्येक जीवन के एक क्षेत्र (आत्म, धन, परिवार, सुख, सन्तान, स्वास्थ्य आदि) से सम्बन्धित।

मुहूर्त

मुहूर्त(Muhurta)

शुभ कार्यों हेतु निर्धारित अनुकूल समय-खण्ड। शास्त्रीय रूप से 1 मुहूर्त = 48 मिनट; एक दिन में 30 मुहूर्त।

चौघड़िया(Choghadiya)

दिन एवं रात्रि को 8-8 भागों में बाँटकर शुभ-अशुभ सूक्ष्म-काल निर्धारण। 7 नाम — अमृत, शुभ, लाभ, चर, रोग, काल, उद्वेग।

अभिजित(Abhijit)

मध्याह्न के आसपास का 48-मिनट का सर्वाधिक शुभ-काल। बुधवार एवं दक्षिण-दिशा यात्रा में अमान्य।

ब्रह्म मुहूर्त(Brahma Muhurta)

सूर्योदय से लगभग 96 मिनट पूर्व का काल — ध्यान, अध्ययन, साधना हेतु आदर्श।

प्रदोष(Pradosha)

सूर्यास्त के पश्चात् 48 मिनट — शिव-पूजा हेतु शुभ। त्रयोदशी-तिथि के सन्ध्या-काल को प्रदोष व्रत कहते हैं।

अशुभ-काल

राहु काल(Rahu Kaala)

दिन के 8 भागों में से एक निश्चित 1.5-घंटे का अशुभ-खण्ड (वार-वार पर बदलता है)। नये कार्य आरम्भ हेतु वर्जित।

यमगण्ड(Yamaganda)

राहु काल जैसा ही अशुभ काल — दिन का अन्य 1/8 खण्ड, यम-शासित।

गुलिक(Gulika)

शनि-पुत्र गुलिक का काल — दिन के 1/8 भाग में अशुभ अन्तराल। वार-अनुसार बदलता है।

भद्रा(Bhadra)

विष्टि करण का दूसरा नाम — शुभ कार्यों हेतु वर्जित अर्ध-तिथि।

व्यतिपात(Vyatipata)

अशुभ योगों में सबसे प्रबल। शुभ कार्य पूर्णतः वर्जित। पितृ-तर्पण हेतु शुभ माना जाता है।

वैधृति(Vaidhriti)

अशुभ योग — शुभ कार्यों हेतु वर्जित।

पञ्चक(Panchaka)

पाँच नक्षत्रों (धनिष्ठा से रेवती तक) का काल जिसमें कुछ कार्य (दक्षिण यात्रा, लकड़ी संग्रह, छत-निर्माण आदि) वर्जित।

दोष

मंगल दोष(Mangala Dosha)

मंगल का जन्म-कुण्डली के 1, 2, 4, 7, 8 या 12 भाव में होना। मांगलिक भी कहलाता है।

काल सर्प योग(Kaal Sarp Yoga)

जब सभी 7 ग्रह राहु-केतु के अक्ष के एक ओर हों।

साढ़े साती(Sade Sati)

शनि का गोचर में चन्द्र-राशि से 12वें, 1वें (जन्म-राशि), एवं 2रे भाव में 7.5-वर्षीय भ्रमण।

नाड़ी दोष(Nadi Dosha)

कुण्डली मिलान में जब वर एवं वधू दोनों एक ही नाड़ी (आद्य/मध्य/अन्त्य) में हों।

भकूट दोष(Bhakoot Dosha)

कुण्डली मिलान में राशि-स्थानान्तर के आधार पर असंगति का दोष।

दशा / दर्शन

महादशा(Mahadasha)

विंशोत्तरी दशा-पद्धति में किसी ग्रह की मुख्य अवधि (कुल 120 वर्ष का चक्र, ग्रह-वार 6 से 20 वर्ष)।

अन्तर्दशा(Antardasha)

महादशा का उप-विभाजन। प्रत्येक महादशा 9 अन्तर्दशाओं में विभाजित — सम्बन्धित ग्रह की उपस्थिति-अवधि।

कर्म(Karma)

कार्य अथवा कर्तव्य; पूर्व-जन्मार्जित संस्कार जो वर्तमान जीवन को प्रभावित करते हैं।

धर्म(Dharma)

धर्म, कर्तव्य, धर्मी जीवन का मार्ग। वैदिक ज्योतिष में 9वें भाव से सम्बन्धित।

पूजा / अनुष्ठान

व्रत(Vrata)

धार्मिक व्रत; निश्चित नियम, उपवास, पूजा से जुड़ा संकल्प।

पूजा(Puja)

आराध्य देवी-देवता की औपचारिक उपासना — मन्त्र, दीप, धूप, नैवेद्य।

मन्त्र(Mantra)

पवित्र वैदिक उच्चारण; शाब्दिक अर्थ "मन को मुक्त करने वाला"।

यन्त्र(Yantra)

ज्यामितीय पूजा-प्रतीक — किसी देवता अथवा ग्रह से सम्बन्धित ऊर्जा का प्रतीक।

तर्पण(Tarpana)

पितृ-कर्म; पूर्वजों को जल-तिल अर्पण। अमावस्या एवं श्राद्ध-पक्ष में मुख्य।

हवन(Havan)

अग्नि में आहुति-यज्ञ; पवित्रीकरण एवं पूजा का प्रमुख रूप।

प्रदक्षिणा(Pradakshina)

देवता या मन्दिर की दक्षिणावर्त परिक्रमा; आदर एवं भक्ति का प्रतीक।

उपाय

रत्न(Ratna)

ज्योतिष-शिफारिस-योग्य रत्न; ग्रह-दोष निवारण हेतु धारण किया जाता है।

रुद्राक्ष(Rudraksha)

शिव-सम्बन्धित बीज; मुख-संख्या (1 से 21) के अनुसार विभिन्न देवताओं से सम्बन्ध।

मुखी(Mukhi)

रुद्राक्ष की प्राकृतिक रेखाओं की संख्या — 1, 2, 3 आदि। 5 मुखी सबसे सामान्य।

संस्कार

नामकरण(Namakarana)

नवजात शिशु का नामकरण-संस्कार; जन्म के 11वें या 12वें दिन।

अन्नप्राशन(Annaprashan)

शिशु को पहली बार अन्न (खिचड़ी) चखाने का संस्कार — लगभग 6 माह की आयु में।

मुण्डन(Mundan)

मुण्डन-संस्कार; शिशु के पहले बाल काटने का अनुष्ठान।

उपनयन(Upanayana)

यज्ञोपवीत-संस्कार; द्विज-समुदाय के बालक को जनेऊ धारण कराना।

विवाह(Vivaha)

विवाह संस्कार — हिन्दू धर्म के 16 संस्कारों में से एक।

गृह प्रवेश(Griha Pravesha)

नये घर में प्रथम प्रवेश का संस्कार; मुहूर्त-शुद्धि एवं वास्तु-पूजा सहित।

दर्शन

योग(Yoga (philosophy))

पतञ्जलि के अष्टांग योग में आत्म-संयम, ध्यान, समाधि की आठ अवस्थाएँ।

प्राणायाम(Pranayama)

श्वास-नियन्त्रण के योगाभ्यास — योग के आठ अंगों में चौथा।

मोक्ष(Moksha)

मुक्ति; जन्म-मरण-चक्र से अन्तिम मुक्ति। हिन्दू दर्शन के चार पुरुषार्थों में सर्वोच्च।

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