सम्पत्ति क्रय मुहूर्त

श्री सम्पत्ति क्रय मुहूर्त

— भूमि, मकान एवं फ्लैट क्रय के शुभ मुहूर्त —

🏡

सम्पत्ति क्रय मुहूर्त २०२६

नवीन सम्पत्ति, भूमि, मकान या फ्लैट क्रय हेतु वर्ष २०२६ के शुभ दिन — तिथि, नक्षत्र एवं विशेष महत्व सहित।

🌟

शुभ संयोग

पुष्य, हस्त, रोहिणी, अनुराधा, उत्तरा, उत्तराषाढ़ नक्षत्र
📅
द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी तिथि
🪐
सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार
🪔
अक्षय तृतीया, धनतेरस, दीवाली विशेष शुभ
🌟
गुरु बलवान हो, चन्द्र-शुक्र अनुकूल हों

वर्ष २०२६ के शुभ मुहूर्त

1
🏡

5 जनवरी 2026 (सोम)

🏡 मुहूर्त

तिथि

📜 पौष कृष्ण द्वितीया

नक्षत्र

पुष्य

सोम-पुष्य योग — सर्वोत्तम

ॐ श्री लक्ष्म्यै नमः
2
🏡

1 फरवरी 2026 (रवि)

🏡 मुहूर्त

तिथि

📜 माघ पूर्णिमा

नक्षत्र

पुष्य

माघ पूर्णिमा एवं पुष्य

ॐ श्री लक्ष्म्यै नमः
3
🏡

20 अप्रैल 2026 (सोम)

अक्षय तृतीया

🏡 मुहूर्त

तिथि

📜 अक्षय तृतीया

नक्षत्र

रोहिणी

अक्षय तृतीया — अक्षय फल

ॐ श्री लक्ष्म्यै नमः
4
🏡

21 मई 2026 (गुरु)

🏡 मुहूर्त

तिथि

📜 वैशाख शुक्ल पंचमी

नक्षत्र

पुष्य

गुरु-पुष्य योग — अति शुभ

ॐ श्री लक्ष्म्यै नमः
5
🏡

18 जून 2026 (गुरु)

🏡 मुहूर्त

तिथि

📜 आषाढ़ शुक्ल चतुर्थी

नक्षत्र

पुष्य

गुरु-पुष्य योग

ॐ श्री लक्ष्म्यै नमः
6
🏡

12 अगस्त 2026 (बुध)

🏡 मुहूर्त

तिथि

📜 आषाढ़ अमावस्या

नक्षत्र

पुष्य

बुध-पुष्य

ॐ श्री लक्ष्म्यै नमः
7
🏡

8 सितम्बर 2026 (मंगल)

🏡 मुहूर्त

तिथि

📜 भाद्रपद कृष्ण द्वादशी

नक्षत्र

पुष्य

पुष्य नक्षत्र

ॐ श्री लक्ष्म्यै नमः
8
🏡

6 नवम्बर 2026 (शुक्र)

धनतेरस

🏡 मुहूर्त

तिथि

📜 धनतेरस

नक्षत्र

हस्त

धनतेरस — सम्पत्ति क्रय हेतु श्रेष्ठ

ॐ श्री लक्ष्म्यै नमः
9
🏡

8 नवम्बर 2026 (रवि)

दीवाली

🏡 मुहूर्त

तिथि

📜 दीवाली / लक्ष्मी पूजा

नक्षत्र

स्वाती

दीपावली — सम्पत्ति हेतु श्रेष्ठ

ॐ श्री लक्ष्म्यै नमः
10
🏡

20 दिसम्बर 2026 (रवि)

🏡 मुहूर्त

तिथि

📜 मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी

नक्षत्र

अश्विनी

मोक्षदा एकादशी

ॐ श्री लक्ष्म्यै नमः
🪙

क्रय के समय करें

🐘
श्री गणेश पूजा से कार्य आरम्भ करें।
🥥
नारियल, गुड़ एवं हल्दी का दान करें।
🪷
अग्निकोण में लक्ष्मी पूजा करें।
✍️
अभिजित मुहूर्त में हस्ताक्षर करें।
🛕
पंडित से वास्तु शान्ति करवाएँ।
🧭
शुभ दिशा एवं वास्तु शास्त्र का पालन करें।

टालने योग्य काल

  • राहु काल, यमगंड एवं गुलिक काल
  • भद्रा, पंचक, अमावस्या (कुछ अपवादों को छोड़कर)
  • खरमास (मीन एवं धनु संक्रान्ति काल)
  • मंगल एवं शनि अत्यन्त बलवान वाले दिन
  • चतुर्दशी, अष्टमी एवं ग्रहण काल

— नवीन सम्पत्ति, सदा समृद्धि एवं वास्तु शान्ति —

सम्पत्ति क्रय मुहूर्त — जीवन के सबसे बड़े आर्थिक निर्णयों में से एक। मकान, ज़मीन, फ्लैट, अथवा वाणिज्यिक सम्पत्ति की खरीद से पहले शुभ मुहूर्त देखना भारतीय परम्परा का अभिन्न अंग है। यह केवल अंधविश्वास नहीं — यह व्यावहारिक एवं मनोवैज्ञानिक दोनों दृष्टियों से लाभकारी है।

शास्त्रों के अनुसार सम्पत्ति "स्थावर" (अचल) सम्पत्ति है — यह जीवन भर साथ रहती है। इसलिए इसका क्रय एवं प्रवेश शुभ नक्षत्र, तिथि, एवं मुहूर्त में होना चाहिए। एक गलत मुहूर्त पारम्परिक रूप से दीर्घकालिक अशुभ प्रभाव लाने वाला माना जाता है।

सम्पत्ति क्रय के लिए शुभ मुहूर्त के नियम

शुभ नक्षत्र: पुष्य (नक्षत्रों का राजा), हस्त, रोहिणी, अनुराधा, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तर भाद्रपद, श्रवण, धनिष्ठा, स्वाती, मृगशिरा, चित्रा, रेवती। इनमें पुष्य, हस्त, अनुराधा, एवं तीनों उत्तरा सर्वोत्तम। वर्जित: भरणी, कृत्तिका, आर्द्रा, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, पूर्व भाद्रपद।

शुभ तिथि: शुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी सर्वोत्तम। चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी (रिक्ता) पूर्णतः वर्जित। पूर्णिमा एवं अमावस्या टाली जाती हैं। द्वितीय एवं द्वादशी सर्वाधिक शुभ — द्वितीया धन-वृद्धि, द्वादशी विष्णु-कृपा।

शुभ वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार। सबसे शुभ — गुरुवार (बृहस्पति, ज्ञान + सम्पत्ति) एवं शुक्रवार (शुक्र, धन + सौंदर्य)। मंगलवार एवं शनिवार वर्जित। रविवार सरकारी सम्पत्ति हेतु अनुकूल।

शुभ मास: माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ, मार्गशीर्ष — पाँच मास सर्वोत्तम। श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक (चातुर्मास) — सम्पत्ति क्रय वर्जित। पौष — मलमास के समान — वर्जित।

शुभ ग्रह स्थिति: गुरु एवं शुक्र दोनों बलवान होने चाहिए — अस्त (combust), वक्री (retrograde), बालावस्था (infant) में नहीं। चन्द्रमा कुंडली के 4थे, 7वें, 9वें, 10वें, 11वें घर में हो — सर्वश्रेष्ठ। राहु-केतु से मुक्त नक्षत्र में चन्द्र हो।

विशेष शुभ पर्व सम्पत्ति क्रय हेतु

अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया, 20 अप्रैल 2026) — पूरे वर्ष का सबसे शुभ दिन। बिना मुहूर्त देखे सम्पत्ति क्रय। पारम्परिक रूप से सोना, चांदी, सम्पत्ति इस दिन खरीदी जाती है। शास्त्रों में कहा है कि इस दिन किया गया कोई भी कार्य "अक्षय" (अनन्त) फल देता है।

धनतेरस (कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी, 7 नवम्बर 2026) — दिवाली से दो दिन पूर्व। धन्वन्तरि भगवान का पर्व, धन-वैद्य के देवता। नये धातु-वस्तुएँ (सोना, चांदी, बर्तन, औज़ार) तथा सम्पत्ति खरीदना अत्यंत शुभ।

दिवाली (कार्तिक अमावस्या, 8 नवम्बर 2026) — माता लक्ष्मी का पर्व। नये घर में प्रवेश, सम्पत्ति का दस्तावेज़ हस्ताक्षर — विशेष शुभ। लक्ष्मी पूजन के साथ नये घर का उद्घाटन।

गुड़ी पाडवा / उगादि (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, 19 मार्च 2026) — हिन्दू नव वर्ष। नये कार्य, नया घर, नई सम्पत्ति आरम्भ हेतु शुभ। दशहरा / विजयादशमी (अश्विन शुक्ल दशमी, 20 अक्टूबर 2026) — विजय का पर्व। नये कार्य आरम्भ। बसंत पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी, 24 जनवरी 2026) — माता सरस्वती का पर्व। शिक्षा, ज्ञान-कार्य, सम्पत्ति।

2026 के मासिक शुभ सम्पत्ति क्रय मुहूर्त

जनवरी 2026: 14 (पुष्य नक्षत्र, सर्वोत्तम), 15, 19, 22, 24 (बसंत पंचमी), 26, 30 जनवरी।

फरवरी 2026: 6, 8, 12, 14, 19, 25, 27 फरवरी।

मार्च 2026: 4, 6, 13, 18, 19 (गुड़ी पाडवा), 20 मार्च। 14 मार्च होलाष्टक से रोक — होली तक।

अप्रैल 2026: 14, 16, 17, 19, 20 (अक्षय तृतीया, सर्वोत्तम), 21, 22, 23, 24, 25, 28 अप्रैल।

मई 2026: 1, 2, 5, 11, 14, 19, 20, 25, 27 मई।

जून 2026: 1, 4 जून — आषाढ़ से पूर्व अंतिम मुहूर्त। 26 जुलाई से चातुर्मास, सम्पत्ति क्रय 4 मास के लिए वर्जित।

नवम्बर 2026: 7 (धनतेरस), 8 (दिवाली), 21 (देवोत्थानी एकादशी), 22, 25, 26, 27, 30 नवम्बर।

दिसम्बर 2026: 2, 3, 4, 9, 11 दिसम्बर। 14 दिसम्बर से पौष — सम्पत्ति क्रय वर्जित।

सम्पत्ति क्रय में वास्तु विचार

सम्पत्ति का दिशा-निर्धारण: मुख्य द्वार उत्तर, ईशान (उत्तर-पूर्व), अथवा पूर्व-मुखी हो — सर्वोत्तम। दक्षिण-मुखी सामान्यतः अशुभ। ईशान कोण में जल-स्रोत (कुआँ, बोरवेल, स्विमिंग पूल), उत्तर-पश्चिम में रसोई, दक्षिण-पश्चिम में मास्टर बेडरूम — आदर्श।

भूमि की जाँच: शुद्ध भूमि — कोई कब्र, श्मशान, अथवा पुरानी मन्दिर के अवशेष नहीं हों। भूमि का ढलान उत्तर-पूर्व की ओर हो — सर्वश्रेष्ठ। चौकोर/आयताकार भूमि शुभ; त्रिकोण/अनियमित आकार वर्जित।

पास के स्थानों का प्रभाव: मन्दिर, स्कूल, अस्पताल — पास होना शुभ। कब्रिस्तान, श्मशान, बूचड़खाना, शराब का बार — अशुभ। पानी का स्रोत (नदी, तालाब) उत्तर-पूर्व में दिखे तो शुभ।

भूमि पूजन: सम्पत्ति खरीदने के बाद, गृह निर्माण से पूर्व "भूमि पूजन" अनिवार्य। शुभ मुहूर्त में भूमि पर पंचभूत-आह्वान, नवग्रह-शान्ति, वास्तु पूजा। यह बाद के सभी निर्माण-कार्यों के लिए शुभ नींव रखता है।

सम्पत्ति क्रय के व्यावहारिक सुझाव

दस्तावेज़ हस्ताक्षर मुहूर्त: रजिस्ट्री दस्तावेज़ हस्ताक्षर का मुहूर्त भी देखना चाहिए। शुभ नक्षत्र, अमृत/शुभ/लाभ चौघड़िया, राहु काल/यमगण्ड से मुक्त समय। दस्तावेज़ पर पहला हस्ताक्षर पुरुष (खरीदार) करे, फिर पत्नी, फिर गवाह।

भुगतान का दिन: चेक/रकम का प्रथम भुगतान शुभ तिथि एवं वार पर हो — गुरुवार/शुक्रवार सर्वोत्तम। बैंक के माध्यम से भुगतान करने पर भुगतान-दिनांक का मुहूर्त देखें।

चाबी प्राप्ति: यदि नये घर की चाबी लेनी है — तो शुभ मुहूर्त में लें। चाबी लेने वाला (खरीदार) पहले स्वयं घर के अंदर जाए, फिर परिवार। दाएँ पैर से प्रवेश। पहले गणेश-पूजन, फिर अन्य।

पैसा बचत हेतु: कुछ पारम्परिक नियम — कभी मंगलवार/शनिवार को सम्पत्ति की कीमत निर्धारित न करें (उच्च होगी)। गुरुवार/शुक्रवार को मूल्य-वार्ता (negotiation) करें — कीमत कम हो सकती है।

📊2026 सम्पत्ति-क्रय शुभ-मुहूर्त — मास-वार

मासशुभ-तिथियाँविशेष-दिनटिप्पणी
जनवरी14, 16, 22, 26, 30पुष्य-नक्षत्र (14 जनवरी)श्रेष्ठ-मास
फरवरी6, 8, 12, 13, 18, 25, 27फाल्गुन शुभ
मार्च4, 6, 13, 18, 20होलाष्टक से पूर्व
अप्रैल14, 16, 17, 19, 20, 21, 22, 23, 24, 25, 28अक्षय-तृतीया (20 अप्रैल)सर्वोच्च-शुभ
मई1, 2, 5, 11, 14, 19, 20, 25, 27ज्येष्ठ शुभ
जून1, 4देवशयनी से पूर्व
जुलाई-अक्टूबर✗ चातुर्मासपूर्ण-वर्जित
नवम्बर21, 22, 25, 26, 27, 30देवउठनी (21 नवम्बर)पुनः-शुभ-काल
दिसम्बर2, 3, 4, 9, 11मार्गशीर्ष शुभ

धनतेरस (6 नवम्बर 2026) — सोना-चांदी-वाहन-सम्पत्ति-खरीद का सबसे-शुभ-दिन।

📊सम्पत्ति-प्रकार-वार दिशा एवं वास्तु-नियम

सम्पत्ति-प्रकारश्रेष्ठ-दिशा-मुखवर्जित-दिशाअतिरिक्त-नियम
आवास-घरपूर्व/उत्तर-मुखदक्षिण/नैऋत्य-मुखईशान कोने में पूजा-स्थल
व्यवसाय-दुकानउत्तर/पूर्व-मुख (बैंकिंग)दक्षिण-मुखमुख्य-द्वार पर तिजोरी नहीं
कारखानादक्षिण/पश्चिम-मुख (आग-कार्य)पूर्व-मुख (फर्नेस के लिए)आग्नेय-कोण में चूल्हा
भूखण्ड (Plot)चौकोर/आयताकारत्रिकोण/अनियमित-आकारपूर्व-उत्तर ढलान शुभ
कृषि-भूमिजल-स्रोत-पासगन्दा-नाला-पासमिट्टी-परीक्षण
कार्यालयमालिक उत्तर-मुख-बैठेंपीठ खिड़की पर नहींपूर्व-दीवार पर सरस्वती

📋सम्पत्ति-क्रय सम्पूर्ण-विधि — 12-चरण

  1. 1

    मुहूर्त-पूर्व-शोध (1-3 माह)

    क्षेत्र-दर-क्षेत्र भूमि/मकान देखें। RERA-पंजीकृत builder। कानूनी-कागजात जाँचें।

  2. 2

    वास्तु-निरीक्षण

    अनुभवी वास्तुविद से। मुख्य-द्वार-दिशा, ईशान-कोण, पूजा-स्थल। विरोधाभास हो तो अन्य-सम्पत्ति।

  3. 3

    ज्योतिषी से अनुकूलता-जाँच

    खरीदार की कुण्डली-वार सम्पत्ति-दिशा अनुकूल? कुछ कुण्डलियों के लिए विशेष-दिशाएँ शुभ।

  4. 4

    मुहूर्त-निर्धारण

    चातुर्मास टालें। शुक्ल-पक्ष शुभ-तिथि। पुष्य/हस्त/अनुराधा/उत्तरा-नक्षत्र। सोम/बुध/गुरु/शुक्र-वार।

  5. 5

    टोकन-राशि-बात

    मुहूर्त-दिन से पहले टोकन। चन्द्र-राशि अनुकूल समय।

  6. 6

    मुख्य-दस्तावेज़ हस्ताक्षर-दिवस

    मुहूर्त-समय अमृत/शुभ/लाभ-चौघड़िया। राहु-काल टालें। अभिजित-मुहूर्त (दोपहर 11:50-12:42) श्रेष्ठ।

  7. 7

    पंजीकरण

    सरकारी-कार्यालय जायें। पंडित-संकल्प घर पर। शुक्र-गुरु-मुहूर्त।

  8. 8

    चाबी-प्राप्ति

    चाबी लेने का शुभ-मुहूर्त। दाहिने-हाथ से। नारियल फोड़ें।

  9. 9

    पहली-बार-प्रवेश

    गृह-प्रवेश-संस्कार पूर्व-निर्धारित-मुहूर्त। यह अलग-कार्य — गृह-प्रवेश-मुहूर्त लेख देखें।

  10. 10

    गणेश-पूजन (खाली-घर)

    खरीदार पहले अकेला घर में जाये। गणेश-पूजन। रंगोली। दीप।

  11. 11

    वास्तु-शान्ति-पाठ (1 सप्ताह में)

    पंडित से वास्तु-शान्ति-होम। नकारात्मक-ऊर्जा-निवारण।

  12. 12

    गृह-प्रवेश-संस्कार (अलग-मुहूर्त)

    पूर्ण-घर-पूजा। गृहलक्ष्मी-प्रवेश। ब्राह्मण-भोज। यह सम्पत्ति-क्रय से अलग-संस्कार।

⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें

  • चातुर्मास (25 जुलाई-20 नवम्बर 2026) में सम्पत्ति-क्रय

    क्यों: देव-निद्रा-काल। मांगलिक-कार्य वर्जित।

    सही उपाय: देवशयनी से पहले या देवउठनी के बाद। टोकन-स्तर पर लेन-देन हो — पूर्ण-खरीद देवउठनी के बाद।

  • दक्षिण-मुखी मुख्य-द्वार वाली सम्पत्ति

    क्यों: दक्षिण = यम-दिशा। नकारात्मक-वास्तु। पारम्परिक रूप से अशुभ।

    सही उपाय: पूर्व/उत्तर-मुखी सम्पत्ति श्रेष्ठ। दक्षिण-मुखी अनिवार्य हो — विशेष वास्तु-शान्ति + हनुमान-मूर्ति मुख्य-द्वार पर।

  • अनियमित-आकार-भूखण्ड

    क्यों: त्रिकोण/L-आकार/कटे-कोने वाले भूखण्ड वास्तु-दोष। दीर्घकालिक-पारिवारिक-कलह।

    सही उपाय: चौकोर/आयताकार भूखण्ड। पूर्व-उत्तर हल्की-ढलान। दक्षिण-पश्चिम ऊँचा।

  • राहु-काल में दस्तावेज़-हस्ताक्षर

    क्यों: राहु-काल अशुभ। शुभ-तिथि होने पर भी हस्ताक्षर असफल/धोखा-संकेत।

    सही उपाय: दैनिक राहु-काल देखें। उससे बाहर हस्ताक्षर। अमृत/शुभ-चौघड़िया श्रेष्ठ।

  • टोकन-राशि अशुभ-तिथि पर

    क्यों: टोकन = प्रथम-वचन। अशुभ-तिथि पर वचन = बाद-में-समस्या।

    सही उपाय: टोकन भी मुहूर्त-समय पर। पूरी-खरीद-दिन से 1-2 हफ्ते पहले शुभ-तिथि।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सम्पत्ति क्रय मुहूर्त एवं गृह प्रवेश मुहूर्त — दोनों अलग हैं क्या?

हाँ, दोनों अलग हैं। सम्पत्ति क्रय मुहूर्त = खरीद, दस्तावेज़ हस्ताक्षर का समय। गृह प्रवेश मुहूर्त = खरीदी गई सम्पत्ति में पहली बार प्रवेश का समय। दोनों के नियम कुछ समान हैं (शुभ नक्षत्र-तिथि-वार) परंतु चातुर्मास में दोनों ही वर्जित।

क्या रेंट के मकान में रहते हुए सम्पत्ति खरीदी जा सकती है?

हाँ। सम्पत्ति खरीदने का कोई बाधक नहीं — चाहे आप अभी कहीं भी रह रहे हों। केवल खरीद-मुहूर्त एवं बाद का गृह प्रवेश-मुहूर्त शुभ हो। नये घर में प्रवेश तब करें जब उपयुक्त मुहूर्त उपलब्ध हो।

क्या एक से अधिक सम्पत्ति खरीदी जा सकती है?

हाँ। शास्त्रों में कोई संख्या-सीमा नहीं। हालांकि प्रत्येक सम्पत्ति के लिए अलग शुभ मुहूर्त देखना चाहिए। एक ही दिन में एक से अधिक सम्पत्ति खरीदना भी सम्भव यदि शुभ संयोग हो।

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सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।