ताराबल

श्री ताराबल

— जन्म नक्षत्र से वर्तमान नक्षत्र की दूरी का प्रभाव —

ताराबल क्या है?

ताराबल नक्षत्र शक्ति का मूल्यांकन है। २७ नक्षत्रों को जन्म नक्षत्र से ९ "ताराओं" में बाँटा गया है — कुछ शुभ, कुछ अशुभ। मुहूर्त चयन में चन्द्रबल के साथ ताराबल भी अनिवार्य है।

नव तारा

1

जन्म (जन्म)

शरीर, प्राण — चोट या रोग का जोखिम

मिश्रित
2

सम्पत् (सम्पत्ति)

धन एवं समृद्धि लाता है

उत्तम
3

विपत् (विपत्ति)

विपत्ति एवं बाधाएँ — टालें

अशुभ
4

क्षेम (क्षेम (कल्याण))

कल्याण, सुख-शान्ति

शुभ
5

प्रत्यरि (शत्रु)

शत्रुता, विरोध, संघर्ष — टालें

अशुभ
6

साधक (साधक)

सिद्धि, लक्ष्य प्राप्ति

शुभ
7

वध (वध (मृत्यु))

मृत्यु, विनाश — पूर्णतः वर्जित

अति अशुभ
8

मैत्र (मित्र)

मित्रता, सहयोग, सामंजस्य

शुभ
9
🌟

परम मैत्र (परम मित्र)

सर्वोत्तम मित्रता, दिव्य कृपा — सर्वश्रेष्ठ

🌟 सर्वोत्तम
🔄

तारा चक्र — नक्षत्र संख्याएँ

२७ नक्षत्र ९ ताराओं में पुनरावृत्त — प्रत्येक तारा ३ बार आती है

1

जन्म

📜 1, 10, 19
2

सम्पत्

📜 2, 11, 20
3

विपत्

📜 3, 12, 21
4

क्षेम

📜 4, 13, 22
5

प्रत्यरि

📜 5, 14, 23
6

साधक

📜 6, 15, 24
7

वध

📜 7, 16, 25
8

मैत्र

📜 8, 17, 26
9

परम मैत्र

📜 9, 18, 27🌟
🌟

कैसे जाँचें?

  1. 1. अपनी जन्म नक्षत्र (२७ में से) जानें।
  2. 📅2. कार्य के दिन का नक्षत्र देखें।
  3. 🔢3. जन्म नक्षत्र से वर्तमान नक्षत्र की संख्या गिनें।
  4. 4. गिनती को ९ से भाग दें — शेषफल ही "तारा" है।
  5. 🌟5. यदि शेष ० हो तो ९वाँ तारा (परम मैत्र — सर्वोत्तम)।
  6. 6. ३, ५, ७ ताराओं से बचें — विपत्, प्रत्यरि, वध।
🎨

शक्ति वर्गीकरण

🌟

सर्वोत्तम

उत्तम

शुभ

मिश्रित

अशुभ

अति अशुभ

— ताराबल अनुकूल हो, नक्षत्र देव कृपा सदा साथ —

ताराबल = ताराओं (नक्षत्रों) का बल। ज्योतिष में जब किसी कार्य के लिए मुहूर्त निकाला जाता है — तब जातक के जन्म-नक्षत्र और उस-दिन के नक्षत्र के बीच की दूरी से ताराबल देखा जाता है। यदि ताराबल अनुकूल — कार्य सिद्ध। यदि प्रतिकूल — विघ्न।

नौ ताराओं का क्रम: जन्म-तारा, सम्पत-तारा, विपत-तारा, क्षेम-तारा, प्रत्यरि-तारा, साधक-तारा, वध-तारा, मित्र-तारा, परम-मित्र-तारा। तीन ताराएँ अनुकूल नहीं — विपत, प्रत्यरि, वध। 9 दिन का चक्र पूरा होकर पुनः जन्म-तारा से शुरू।

ताराबल की गणना-विधि

सूत्र: (आज का नक्षत्र-संख्या - जन्म-नक्षत्र-संख्या + 1) / 9 = शेष = ताराबल। शेष 0 (या 9) = परम-मित्र। शेष 1 = जन्म। 2 = सम्पत्। 3 = विपत् (अशुभ)। 4 = क्षेम। 5 = प्रत्यरि (अशुभ)। 6 = साधक। 7 = वध (अशुभ)। 8 = मित्र।

उदाहरण: जन्म-नक्षत्र पुष्य (8) है। आज का नक्षत्र चित्रा (14)। (14 - 8 + 1) / 9 = 7/9 = शेष 7 = वध-तारा (अशुभ)। दूसरा उदाहरण: जन्म रोहिणी (4), आज पुनर्वसु (7)। (7-4+1)/9 = 4 = क्षेम-तारा (शुभ)।

27 नक्षत्र: 1-अश्विनी, 2-भरणी, 3-कृत्तिका, 4-रोहिणी, 5-मृगशिरा, 6-आर्द्रा, 7-पुनर्वसु, 8-पुष्य, 9-आश्लेषा, 10-मघा, 11-पूर्व-फाल्गुनी, 12-उत्तर-फाल्गुनी, 13-हस्त, 14-चित्रा, 15-स्वाति, 16-विशाखा, 17-अनुराधा, 18-ज्येष्ठा, 19-मूल, 20-पूर्वाषाढ़ा, 21-उत्तराषाढ़ा, 22-श्रवण, 23-धनिष्ठा, 24-शतभिषा, 25-पूर्व-भाद्रपद, 26-उत्तर-भाद्रपद, 27-रेवती।

नौ ताराओं का फल

1) जन्म-तारा: अपने ही नक्षत्र पर। मध्यम — कुछ कार्य शुभ, कुछ अशुभ। शुभ — पूजा, ध्यान, ज्ञान-अर्जन। अशुभ — यात्रा, बड़ा निवेश, विवाह।

2) सम्पत-तारा: सम्पत्ति-वृद्धि-दायी। श्रेष्ठ-शुभ। नया व्यापार, गृह-प्रवेश, धन-निवेश, विवाह सर्वोत्तम। 3) विपत-तारा: अशुभ। यात्रा-दुर्घटना, धन-हानि। नये कार्य न करें।

4) क्षेम-तारा: कुशल-कल्याण। शुभ। दैनिक-कार्य, भागीदारी, मित्र-मिलन। 5) प्रत्यरि-तारा: शत्रु-बाधा, विरोध। अशुभ। नया कार्य, यात्रा, विवाद वर्जित।

6) साधक-तारा: साधना-सिद्धि। शुभ। मन्त्र-दीक्षा, साधक-कार्य, आध्यात्मिक-यात्रा सर्वोत्तम। 7) वध-तारा: अशुभतम। कोई शुभ-कार्य न करें — दुर्घटना का खतरा।

8) मित्र-तारा: मित्र-सहयोग। शुभ। साझेदारी, मेल-जोल, सामाजिक-समारोह। 9) परम-मित्र-तारा: सर्वश्रेष्ठ-शुभ। हर शुभ-कार्य सिद्ध। विवाह, गृह-प्रवेश, यात्रा, व्यापार-प्रारम्भ।

अशुभ-ताराओं के उपाय

विपत-तारा उपाय: गुरु-पूजा, बृहस्पति-मन्त्र "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" 108 बार। पीला वस्त्र, पीली मिठाई दान। पीपल-वृक्ष को जल-अर्पण।

प्रत्यरि-तारा उपाय: शनि-पूजा, शनि-मन्त्र "ॐ शं शनैश्चराय नमः" 108 बार। तेल-तिल-काली-वस्तु दान। हनुमान-चालीसा 11 बार। शनिवार-व्रत।

वध-तारा उपाय: मृत्युञ्जय-मन्त्र "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे" 108 बार। महा-मृत्युञ्जय-यन्त्र धारण। शिव-अभिषेक। रुद्राक्ष पहनें। महामृत्युञ्जय-जप 1.25 लाख — विशेष परिस्थितियों में।

सामान्य उपाय: जन्म-नक्षत्र-स्वामी-ग्रह की पूजा। जन्म-नक्षत्र-वृक्ष को जल। नवग्रह-स्तोत्र-पाठ। कुछ नहीं करें वैसा कार्य जो ताराबल के विरुद्ध हो — स्थगित करें।

ताराबल और चन्द्रबल — अंतर

ताराबल: नक्षत्र-आधारित। 9-दिन का चक्र। दैनिक बदलता है। सूक्ष्म-दृष्टि।

चन्द्रबल: राशि-आधारित। 12-राशि का चक्र। 2.25 दिन में बदलता है। स्थूल-दृष्टि।

दोनों मिलकर शुभ — सर्वोत्तम मुहूर्त। केवल ताराबल/चन्द्रबल — मध्यम। दोनों अशुभ — कार्य न करें।

पंचक-शुद्धि: तिथि-वार-नक्षत्र-योग-करण के साथ ताराबल भी देखा जाता है। पाँचों शुभ = सर्वोत्तम पंचाङ्ग। अधिकांश शुभ = श्रेष्ठ। अधिकांश अशुभ = कार्य स्थगित।

ताराबल कब देखें — मुख्य कार्य

अनिवार्य ताराबल-देखने वाले कार्य: 1) विवाह 2) गृह-प्रवेश 3) नींव/शिलान्यास 4) यज्ञ-दीक्षा 5) मन्त्र-दीक्षा 6) नये व्यवसाय का प्रारम्भ 7) लम्बी यात्रा 8) नया वाहन-खरीद 9) नया मकान-खरीद 10) मुण्डन/उपनयन।

दैनिक कार्य में नहीं: साधारण-यात्रा, खरीद-बेचान, खाना-बनाना — इनमें ताराबल आवश्यक नहीं। केवल विशेष-कार्यों में।

द्विगुणित-शुभ: यदि सम्पत् + परम-मित्र दोनों मिलें — दशमाह में एक बार ही ऐसा संयोग। कुछ ज्योतिषी कहते — ऐसे दिन कोई भी शुभ-कार्य 100% सिद्ध।

📊9 ताराओं का सम्पूर्ण-वर्गीकरण — फल एवं उपयोग

तारासूत्र-शेषफलश्रेष्ठ-कार्यउपाय (अशुभ-तारा)
1. जन्म-तारा1मध्यमपूजा, ध्यान, ज्ञान-अर्जनदूब-दान
2. सम्पत्-तारा2✓✓ श्रेष्ठ-शुभविवाह, गृह-प्रवेश, धन-निवेश
3. विपत्-तारा3✗ अशुभकुछ-नया-नहींगुरु-पूजा, बृहस्पति-मन्त्र, पीला-दान
4. क्षेम-तारा4✓ शुभदैनिक-कार्य, साझेदारी, मित्र-मिलन
5. प्रत्यरि-तारा5✗ अशुभकोई-नहींशनि-पूजा, हनुमान-चालीसा, तेल-दान
6. साधक-तारा6✓ शुभमन्त्र-दीक्षा, साधना, आध्यात्मिक-यात्रा
7. वध-तारा7✗✗ अशुभतमकुछ-नया-नमहा-मृत्युञ्जय 108 बार, शिव-अभिषेक
8. मित्र-तारा8✓ शुभसाझेदारी, मेल-जोल, सामाजिक-समारोह
9. परम-मित्र-तारा0/9✓✓✓ सर्वश्रेष्ठहर-शुभ-कार्य 100% सिद्ध

3, 5, 7 = अशुभ-तारा (विपत्/प्रत्यरि/वध)। बाकी सब-शुभ। 27 नक्षत्र / 9 तारा = 3 चक्र।

📊ताराबल बनाम चन्द्रबल — तुलना

पहलूताराबलचन्द्रबल
आधारनक्षत्र-गणना (27 नक्षत्र)राशि-गणना (12 राशि)
चक्र-अवधि9 दिन2.25 दिन × 12 = 27 दिन
गतितेज (1 दिन में बदलता)मध्यम (2.25 दिन)
विशेष-कार्यविवाह, गृह-प्रवेश, मुण्डनदैनिक-राशिफल, गोचर
सूत्र(आज-नक्षत्र - जन्म-नक्षत्र + 1) / 9चन्द्र-राशि से आज-राशि कितने भाव में
शुभ-स्थितिसम्पत्/परम-मित्र1, 3, 6, 7, 10, 11वीं राशि
अशुभ-स्थितिविपत्/प्रत्यरि/वध4, 8, 12वीं राशि
मुख्य-उपयोगमुहूर्त-शुद्धिदैनिक-गतिविधि-शुभता

📋ताराबल निकालने एवं उपयोग की 5-चरण विधि

  1. 1

    अपना जन्म-नक्षत्र पता करें

    जन्म-तिथि, समय, स्थान से। हमारे "जन्म-नक्षत्र कैल्कुलेटर" पर मुफ्त। 27 नक्षत्रों में से एक।

  2. 2

    जन्म-नक्षत्र की संख्या (1-27)

    क्रम: अश्विनी=1, भरणी=2, ..., रेवती=27। उदाहरण: पुष्य = 8।

  3. 3

    आज-का-नक्षत्र देखें

    दैनिक-पंचांग में आज-का-नक्षत्र। संख्या निकालें। उदाहरण: चित्रा = 14।

  4. 4

    सूत्र लगायें

    (आज-नक्षत्र - जन्म-नक्षत्र + 1) / 9 = शेष = ताराबल। (14-8+1)/9 = 7/9 = शेष 7 = वध-तारा।

  5. 5

    शुभ/अशुभ निर्णय

    शेष 1-9 के अनुसार ऊपर तालिका। यदि अशुभ-तारा (3, 5, 7) — कार्य टालें या उपाय करें।

⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें

  • जन्म-नक्षत्र के बिना ताराबल देखना

    क्यों: ताराबल = आज-नक्षत्र की दूरी जन्म-नक्षत्र से। बिना-जन्म-नक्षत्र = ताराबल नहीं।

    सही उपाय: पहले जन्म-नक्षत्र पता करें। फिर ताराबल। हमारे कैल्कुलेटर पर दोनों मुफ्त।

  • वध-तारा के दिन भी मांगलिक-कार्य करना

    क्यों: वध-तारा सबसे-अशुभ। मांगलिक-कार्य = विवाह, गृह-प्रवेश, यात्रा-शुरू = वर्जित।

    सही उपाय: वध-तारा के दिन केवल दैनिक-कार्य। मांगलिक-कार्य अगले-शुभ-तारा-दिन।

  • ताराबल छोड़कर केवल चन्द्रबल पर निर्भर

    क्यों: मुहूर्त के लिए दोनों आवश्यक। ताराबल = सूक्ष्म। चन्द्रबल = स्थूल। दोनों मिलकर पूर्ण।

    सही उपाय: ताराबल + चन्द्रबल + तिथि-वार-योग-करण = सम्पूर्ण-मुहूर्त।

  • अति-आवश्यक-कार्य भी ताराबल-वर्जना मानना

    क्यों: शव-संस्कार, चिकित्सा, सेवा-कार्य = ताराबल-वर्जन-मुक्त। अति-आवश्यक हो तो तारा-शुभ-अशुभ नहीं देखते।

    सही उपाय: अनिवार्य-कार्य ताराबल-वर्जना से मुक्त। केवल नया-शुभ-कार्य में देखें।

  • दूसरे-व्यक्ति का ताराबल अपना मानना

    क्यों: प्रत्येक का ताराबल अलग। आपका जन्म-नक्षत्र अलग, साथी का अलग। एक-दिन आपके लिए शुभ-तारा, साथी के लिए अशुभ हो सकता।

    सही उपाय: विवाह-गृहप्रवेश-यात्रा में दोनों का ताराबल देखें। दोनों के लिए शुभ-दिन चुनें।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या ताराबल के बिना मुहूर्त नहीं निकल सकता?

मुहूर्त के 5 अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण। ताराबल नक्षत्र-गणना का विशेष-रूप। अधिकांश मुहूर्त में ताराबल देखा जाता है। पर अति-आवश्यक कार्य (शव-संस्कार, चिकित्सा, सेवा) में ताराबल नहीं देखा जाता।

मुझे अपना जन्म-नक्षत्र नहीं मालूम — कैसे पता करें?

जन्म-तिथि, समय, स्थान से ज्योतिषी जन्म-नक्षत्र निकाल सकते हैं। हमारे साइट के "नक्षत्र-कैल्कुलेटर" पर भी मुफ्त गणना। केवल जन्म-तिथि (बिना समय) से सटीक नहीं — समय आवश्यक। समय की त्रुटि हो तो लगभग सही नक्षत्र।

क्या ताराबल हर 9 दिन में दोहराता है?

हाँ — 27 नक्षत्र / 9 तारा = 3-बार चक्र। एक नक्षत्र-दिन में एक तारा। यदि आज जन्म-तारा है तो 9 दिन बाद पुनः जन्म-तारा। पर बीच में नक्षत्र बदलते रहते हैं। प्रत्येक दिन एक नया नक्षत्र — एक नई तारा।

वध-तारा के दिन क्या बिल्कुल कुछ न करें?

दैनिक-नियमित कार्य (भोजन, स्नान, साधारण-काम) कर सकते हैं। पर कोई नया महत्त्वपूर्ण कार्य — विवाह, यात्रा, बड़ा निवेश, गृह-प्रवेश — टालें। यदि अनिवार्य — मृत्युञ्जय-जप 108 बार के बाद।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।