ताराबल = ताराओं (नक्षत्रों) का बल। ज्योतिष में जब किसी कार्य के लिए मुहूर्त निकाला जाता है — तब जातक के जन्म-नक्षत्र और उस-दिन के नक्षत्र के बीच की दूरी से ताराबल देखा जाता है। यदि ताराबल अनुकूल — कार्य सिद्ध। यदि प्रतिकूल — विघ्न।
नौ ताराओं का क्रम: जन्म-तारा, सम्पत-तारा, विपत-तारा, क्षेम-तारा, प्रत्यरि-तारा, साधक-तारा, वध-तारा, मित्र-तारा, परम-मित्र-तारा। तीन ताराएँ अनुकूल नहीं — विपत, प्रत्यरि, वध। 9 दिन का चक्र पूरा होकर पुनः जन्म-तारा से शुरू।
✦ ताराबल की गणना-विधि
सूत्र: (आज का नक्षत्र-संख्या - जन्म-नक्षत्र-संख्या + 1) / 9 = शेष = ताराबल। शेष 0 (या 9) = परम-मित्र। शेष 1 = जन्म। 2 = सम्पत्। 3 = विपत् (अशुभ)। 4 = क्षेम। 5 = प्रत्यरि (अशुभ)। 6 = साधक। 7 = वध (अशुभ)। 8 = मित्र।
उदाहरण: जन्म-नक्षत्र पुष्य (8) है। आज का नक्षत्र चित्रा (14)। (14 - 8 + 1) / 9 = 7/9 = शेष 7 = वध-तारा (अशुभ)। दूसरा उदाहरण: जन्म रोहिणी (4), आज पुनर्वसु (7)। (7-4+1)/9 = 4 = क्षेम-तारा (शुभ)।
27 नक्षत्र: 1-अश्विनी, 2-भरणी, 3-कृत्तिका, 4-रोहिणी, 5-मृगशिरा, 6-आर्द्रा, 7-पुनर्वसु, 8-पुष्य, 9-आश्लेषा, 10-मघा, 11-पूर्व-फाल्गुनी, 12-उत्तर-फाल्गुनी, 13-हस्त, 14-चित्रा, 15-स्वाति, 16-विशाखा, 17-अनुराधा, 18-ज्येष्ठा, 19-मूल, 20-पूर्वाषाढ़ा, 21-उत्तराषाढ़ा, 22-श्रवण, 23-धनिष्ठा, 24-शतभिषा, 25-पूर्व-भाद्रपद, 26-उत्तर-भाद्रपद, 27-रेवती।
✦ नौ ताराओं का फल
1) जन्म-तारा: अपने ही नक्षत्र पर। मध्यम — कुछ कार्य शुभ, कुछ अशुभ। शुभ — पूजा, ध्यान, ज्ञान-अर्जन। अशुभ — यात्रा, बड़ा निवेश, विवाह।
2) सम्पत-तारा: सम्पत्ति-वृद्धि-दायी। श्रेष्ठ-शुभ। नया व्यापार, गृह-प्रवेश, धन-निवेश, विवाह सर्वोत्तम। 3) विपत-तारा: अशुभ। यात्रा-दुर्घटना, धन-हानि। नये कार्य न करें।
4) क्षेम-तारा: कुशल-कल्याण। शुभ। दैनिक-कार्य, भागीदारी, मित्र-मिलन। 5) प्रत्यरि-तारा: शत्रु-बाधा, विरोध। अशुभ। नया कार्य, यात्रा, विवाद वर्जित।
6) साधक-तारा: साधना-सिद्धि। शुभ। मन्त्र-दीक्षा, साधक-कार्य, आध्यात्मिक-यात्रा सर्वोत्तम। 7) वध-तारा: अशुभतम। कोई शुभ-कार्य न करें — दुर्घटना का खतरा।
8) मित्र-तारा: मित्र-सहयोग। शुभ। साझेदारी, मेल-जोल, सामाजिक-समारोह। 9) परम-मित्र-तारा: सर्वश्रेष्ठ-शुभ। हर शुभ-कार्य सिद्ध। विवाह, गृह-प्रवेश, यात्रा, व्यापार-प्रारम्भ।
✦ अशुभ-ताराओं के उपाय
विपत-तारा उपाय: गुरु-पूजा, बृहस्पति-मन्त्र "ॐ बृं बृहस्पतये नमः" 108 बार। पीला वस्त्र, पीली मिठाई दान। पीपल-वृक्ष को जल-अर्पण।
प्रत्यरि-तारा उपाय: शनि-पूजा, शनि-मन्त्र "ॐ शं शनैश्चराय नमः" 108 बार। तेल-तिल-काली-वस्तु दान। हनुमान-चालीसा 11 बार। शनिवार-व्रत।
वध-तारा उपाय: मृत्युञ्जय-मन्त्र "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे" 108 बार। महा-मृत्युञ्जय-यन्त्र धारण। शिव-अभिषेक। रुद्राक्ष पहनें। महामृत्युञ्जय-जप 1.25 लाख — विशेष परिस्थितियों में।
सामान्य उपाय: जन्म-नक्षत्र-स्वामी-ग्रह की पूजा। जन्म-नक्षत्र-वृक्ष को जल। नवग्रह-स्तोत्र-पाठ। कुछ नहीं करें वैसा कार्य जो ताराबल के विरुद्ध हो — स्थगित करें।
✦ ताराबल और चन्द्रबल — अंतर
ताराबल: नक्षत्र-आधारित। 9-दिन का चक्र। दैनिक बदलता है। सूक्ष्म-दृष्टि।
चन्द्रबल: राशि-आधारित। 12-राशि का चक्र। 2.25 दिन में बदलता है। स्थूल-दृष्टि।
दोनों मिलकर शुभ — सर्वोत्तम मुहूर्त। केवल ताराबल/चन्द्रबल — मध्यम। दोनों अशुभ — कार्य न करें।
पंचक-शुद्धि: तिथि-वार-नक्षत्र-योग-करण के साथ ताराबल भी देखा जाता है। पाँचों शुभ = सर्वोत्तम पंचाङ्ग। अधिकांश शुभ = श्रेष्ठ। अधिकांश अशुभ = कार्य स्थगित।
✦ ताराबल कब देखें — मुख्य कार्य
अनिवार्य ताराबल-देखने वाले कार्य: 1) विवाह 2) गृह-प्रवेश 3) नींव/शिलान्यास 4) यज्ञ-दीक्षा 5) मन्त्र-दीक्षा 6) नये व्यवसाय का प्रारम्भ 7) लम्बी यात्रा 8) नया वाहन-खरीद 9) नया मकान-खरीद 10) मुण्डन/उपनयन।
दैनिक कार्य में नहीं: साधारण-यात्रा, खरीद-बेचान, खाना-बनाना — इनमें ताराबल आवश्यक नहीं। केवल विशेष-कार्यों में।
द्विगुणित-शुभ: यदि सम्पत् + परम-मित्र दोनों मिलें — दशमाह में एक बार ही ऐसा संयोग। कुछ ज्योतिषी कहते — ऐसे दिन कोई भी शुभ-कार्य 100% सिद्ध।
📊9 ताराओं का सम्पूर्ण-वर्गीकरण — फल एवं उपयोग
| तारा | सूत्र-शेष | फल | श्रेष्ठ-कार्य | उपाय (अशुभ-तारा) |
|---|---|---|---|---|
| 1. जन्म-तारा | 1 | मध्यम | पूजा, ध्यान, ज्ञान-अर्जन | दूब-दान |
| 2. सम्पत्-तारा | 2 | ✓✓ श्रेष्ठ-शुभ | विवाह, गृह-प्रवेश, धन-निवेश | — |
| 3. विपत्-तारा | 3 | ✗ अशुभ | कुछ-नया-नहीं | गुरु-पूजा, बृहस्पति-मन्त्र, पीला-दान |
| 4. क्षेम-तारा | 4 | ✓ शुभ | दैनिक-कार्य, साझेदारी, मित्र-मिलन | — |
| 5. प्रत्यरि-तारा | 5 | ✗ अशुभ | कोई-नहीं | शनि-पूजा, हनुमान-चालीसा, तेल-दान |
| 6. साधक-तारा | 6 | ✓ शुभ | मन्त्र-दीक्षा, साधना, आध्यात्मिक-यात्रा | — |
| 7. वध-तारा | 7 | ✗✗ अशुभतम | कुछ-नया-न | महा-मृत्युञ्जय 108 बार, शिव-अभिषेक |
| 8. मित्र-तारा | 8 | ✓ शुभ | साझेदारी, मेल-जोल, सामाजिक-समारोह | — |
| 9. परम-मित्र-तारा | 0/9 | ✓✓✓ सर्वश्रेष्ठ | हर-शुभ-कार्य 100% सिद्ध | — |
3, 5, 7 = अशुभ-तारा (विपत्/प्रत्यरि/वध)। बाकी सब-शुभ। 27 नक्षत्र / 9 तारा = 3 चक्र।
📊ताराबल बनाम चन्द्रबल — तुलना
| पहलू | ताराबल | चन्द्रबल |
|---|---|---|
| आधार | नक्षत्र-गणना (27 नक्षत्र) | राशि-गणना (12 राशि) |
| चक्र-अवधि | 9 दिन | 2.25 दिन × 12 = 27 दिन |
| गति | तेज (1 दिन में बदलता) | मध्यम (2.25 दिन) |
| विशेष-कार्य | विवाह, गृह-प्रवेश, मुण्डन | दैनिक-राशिफल, गोचर |
| सूत्र | (आज-नक्षत्र - जन्म-नक्षत्र + 1) / 9 | चन्द्र-राशि से आज-राशि कितने भाव में |
| शुभ-स्थिति | सम्पत्/परम-मित्र | 1, 3, 6, 7, 10, 11वीं राशि |
| अशुभ-स्थिति | विपत्/प्रत्यरि/वध | 4, 8, 12वीं राशि |
| मुख्य-उपयोग | मुहूर्त-शुद्धि | दैनिक-गतिविधि-शुभता |
📋ताराबल निकालने एवं उपयोग की 5-चरण विधि
- 1
अपना जन्म-नक्षत्र पता करें
जन्म-तिथि, समय, स्थान से। हमारे "जन्म-नक्षत्र कैल्कुलेटर" पर मुफ्त। 27 नक्षत्रों में से एक।
- 2
जन्म-नक्षत्र की संख्या (1-27)
क्रम: अश्विनी=1, भरणी=2, ..., रेवती=27। उदाहरण: पुष्य = 8।
- 3
आज-का-नक्षत्र देखें
दैनिक-पंचांग में आज-का-नक्षत्र। संख्या निकालें। उदाहरण: चित्रा = 14।
- 4
सूत्र लगायें
(आज-नक्षत्र - जन्म-नक्षत्र + 1) / 9 = शेष = ताराबल। (14-8+1)/9 = 7/9 = शेष 7 = वध-तारा।
- 5
शुभ/अशुभ निर्णय
शेष 1-9 के अनुसार ऊपर तालिका। यदि अशुभ-तारा (3, 5, 7) — कार्य टालें या उपाय करें।
⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें
✗ जन्म-नक्षत्र के बिना ताराबल देखना
क्यों: ताराबल = आज-नक्षत्र की दूरी जन्म-नक्षत्र से। बिना-जन्म-नक्षत्र = ताराबल नहीं।
✓ सही उपाय: पहले जन्म-नक्षत्र पता करें। फिर ताराबल। हमारे कैल्कुलेटर पर दोनों मुफ्त।
✗ वध-तारा के दिन भी मांगलिक-कार्य करना
क्यों: वध-तारा सबसे-अशुभ। मांगलिक-कार्य = विवाह, गृह-प्रवेश, यात्रा-शुरू = वर्जित।
✓ सही उपाय: वध-तारा के दिन केवल दैनिक-कार्य। मांगलिक-कार्य अगले-शुभ-तारा-दिन।
✗ ताराबल छोड़कर केवल चन्द्रबल पर निर्भर
क्यों: मुहूर्त के लिए दोनों आवश्यक। ताराबल = सूक्ष्म। चन्द्रबल = स्थूल। दोनों मिलकर पूर्ण।
✓ सही उपाय: ताराबल + चन्द्रबल + तिथि-वार-योग-करण = सम्पूर्ण-मुहूर्त।
✗ अति-आवश्यक-कार्य भी ताराबल-वर्जना मानना
क्यों: शव-संस्कार, चिकित्सा, सेवा-कार्य = ताराबल-वर्जन-मुक्त। अति-आवश्यक हो तो तारा-शुभ-अशुभ नहीं देखते।
✓ सही उपाय: अनिवार्य-कार्य ताराबल-वर्जना से मुक्त। केवल नया-शुभ-कार्य में देखें।
✗ दूसरे-व्यक्ति का ताराबल अपना मानना
क्यों: प्रत्येक का ताराबल अलग। आपका जन्म-नक्षत्र अलग, साथी का अलग। एक-दिन आपके लिए शुभ-तारा, साथी के लिए अशुभ हो सकता।
✓ सही उपाय: विवाह-गृहप्रवेश-यात्रा में दोनों का ताराबल देखें। दोनों के लिए शुभ-दिन चुनें।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — ताराबल गणना अध्याय
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या ताराबल के बिना मुहूर्त नहीं निकल सकता?▼
मुहूर्त के 5 अंग — तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण। ताराबल नक्षत्र-गणना का विशेष-रूप। अधिकांश मुहूर्त में ताराबल देखा जाता है। पर अति-आवश्यक कार्य (शव-संस्कार, चिकित्सा, सेवा) में ताराबल नहीं देखा जाता।
मुझे अपना जन्म-नक्षत्र नहीं मालूम — कैसे पता करें?▼
जन्म-तिथि, समय, स्थान से ज्योतिषी जन्म-नक्षत्र निकाल सकते हैं। हमारे साइट के "नक्षत्र-कैल्कुलेटर" पर भी मुफ्त गणना। केवल जन्म-तिथि (बिना समय) से सटीक नहीं — समय आवश्यक। समय की त्रुटि हो तो लगभग सही नक्षत्र।
क्या ताराबल हर 9 दिन में दोहराता है?▼
हाँ — 27 नक्षत्र / 9 तारा = 3-बार चक्र। एक नक्षत्र-दिन में एक तारा। यदि आज जन्म-तारा है तो 9 दिन बाद पुनः जन्म-तारा। पर बीच में नक्षत्र बदलते रहते हैं। प्रत्येक दिन एक नया नक्षत्र — एक नई तारा।
वध-तारा के दिन क्या बिल्कुल कुछ न करें?▼
दैनिक-नियमित कार्य (भोजन, स्नान, साधारण-काम) कर सकते हैं। पर कोई नया महत्त्वपूर्ण कार्य — विवाह, यात्रा, बड़ा निवेश, गृह-प्रवेश — टालें। यदि अनिवार्य — मृत्युञ्जय-जप 108 बार के बाद।
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सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।