27 नक्षत्र विवरण

सप्तविंशति नक्षत्र विवरण

27 नक्षत्र — चंद्र भवन

२७ नक्षत्रों का सम्पूर्ण विवरण

प्रत्येक नक्षत्र १३°२०' का होता है। चन्द्रमा लगभग २७.३ दिनों में सभी २७ नक्षत्रों से गुज़र जाते हैं — प्रत्येक नक्षत्र अपने देवता, स्वामी ग्रह, स्वभाव एवं प्रतीक के साथ अद्वितीय शक्ति रखता है।

🌟

नक्षत्र स्वभाव वर्गीकरण

लघु/क्षिप्र

🔥

उग्र

मिश्र

स्थिर

🌸

मृदु

🔥

तीक्ष्ण

💨

चर

1
🐴

अश्विनी

Ashwini

लघु/क्षिप्र

देवता

अश्विनी कुमार

स्वामी

🪐 केतु

प्रतीक

Horse head

अंश

0.0° — 13.3°

— महत्व —

उपचार और गति। चिकित्सा, यात्रा के लिए शुभ।

|| नक्षत्र 1/27 ||
2
⚔️

भरणी

Bharani

🔥 उग्र

देवता

यमराज

स्वामी

🪐 शुक्र

प्रतीक

Yoni

अंश

13.3° — 26.7°

— महत्व —

परिवर्तन और संयम। अनुशासन का दिन।

|| नक्षत्र 2/27 ||
3
🔥

कृत्तिका

Krittika

मिश्र

देवता

अग्नि देव

स्वामी

🪐 सूर्य

प्रतीक

Flame

अंश

26.7° — 40.0°

— महत्व —

अग्नि द्वारा शुद्धि। कार्तिकेय को समर्पित।

|| नक्षत्र 3/27 ||
4
🌾

रोहिणी

Rohini

स्थिर

देवता

ब्रह्मा जी

स्वामी

🪐 चंद्र

प्रतीक

Cart/Chariot

अंश

40.0° — 53.3°

— महत्व —

उर्वरता और विकास। कृषि, विवाह के लिए सर्वश्रेष्ठ।

|| नक्षत्र 4/27 ||
5
🦌

मृगशिरा

Mrigashira

🌸 मृदु

देवता

सोम (चंद्र)

स्वामी

🪐 मंगल

प्रतीक

Deer head

अंश

53.3° — 66.7°

— महत्व —

खोज और अन्वेषण। यात्रा, शोध के लिए शुभ।

|| नक्षत्र 5/27 ||
6
💧

आर्द्रा

Ardra

🔥 तीक्ष्ण

देवता

रुद्र (शिव)

स्वामी

🪐 राहु

प्रतीक

Teardrop

अंश

66.7° — 80.0°

— महत्व —

तूफान और नवीनीकरण। भगवान शिव को समर्पित।

|| नक्षत्र 6/27 ||
7
🏠

पुनर्वसु

Punarvasu

💨 चर

देवता

अदिति (देवमाता)

स्वामी

🪐 गुरु

प्रतीक

Bow/Quiver

अंश

80.0° — 93.3°

— महत्व —

वापसी और पुनर्स्थापना। गृह-प्रवेश के लिए शुभ।

|| नक्षत्र 7/27 ||
8
🌸

पुष्य

Pushya

लघु

देवता

बृहस्पति

स्वामी

🪐 शनि

प्रतीक

Flower/Udder

अंश

93.3° — 106.7°

— महत्व —

सर्वाधिक शुभ नक्षत्र। सभी कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ।

|| नक्षत्र 8/27 ||
9
🐍

आश्लेषा

Ashlesha

🔥 तीक्ष्ण

देवता

नाग देवता

स्वामी

🪐 बुध

प्रतीक

Coiled serpent

अंश

106.7° — 120.0°

— महत्व —

रहस्यमय ज्ञान। तंत्र, शोध के लिए अनुकूल।

|| नक्षत्र 9/27 ||
10
👑

मघा

Magha

🔥 उग्र

देवता

पितृ देवता

स्वामी

🪐 केतु

प्रतीक

Royal throne

अंश

120.0° — 133.3°

— महत्व —

राज-सत्ता और पितृ। पितृ-कर्म के लिए शुभ।

|| नक्षत्र 10/27 ||
11
🎭

पूर्वा फाल्गुनी

Purva Phalguni

🔥 उग्र

देवता

भग (भाग्य देवता)

स्वामी

🪐 शुक्र

प्रतीक

Front legs of bed

अंश

133.3° — 146.7°

— महत्व —

आनंद और सृजनशीलता। विवाह, कला के लिए शुभ।

|| नक्षत्र 11/27 ||
12
🤝

उत्तरा फाल्गुनी

Uttara Phalguni

स्थिर

देवता

अर्यमा (सूर्य देव)

स्वामी

🪐 सूर्य

प्रतीक

Back legs of bed

अंश

146.7° — 160.0°

— महत्व —

मित्रता और संरक्षण। विवाह के लिए उत्तम।

|| नक्षत्र 12/27 ||
13

हस्त

Hasta

लघु

देवता

सवितृ (सूर्य)

स्वामी

🪐 चंद्र

प्रतीक

Hand/Palm

अंश

160.0° — 173.3°

— महत्व —

कौशल और शिल्प। हस्तशिल्प, व्यापार के लिए शुभ।

|| नक्षत्र 13/27 ||
14
💎

चित्रा

Chitra

🌸 मृदु

देवता

विश्वकर्मा

स्वामी

🪐 मंगल

प्रतीक

Bright jewel

अंश

173.3° — 186.7°

— महत्व —

सौंदर्य और वास्तुकला। निर्माण, कला के लिए शुभ।

|| नक्षत्र 14/27 ||
15
🌿

स्वाती

Swati

💨 चर

देवता

वायु देव

स्वामी

🪐 राहु

प्रतीक

Young plant/Coral

अंश

186.7° — 200.0°

— महत्व —

स्वतंत्रता और लचीलापन। यात्रा, व्यापार के लिए शुभ।

|| नक्षत्र 15/27 ||
16
🎯

विशाखा

Vishakha

मिश्र

देवता

इन्द्र-अग्नि

स्वामी

🪐 गुरु

प्रतीक

Triumphal arch

अंश

200.0° — 213.3°

— महत्व —

दृढ़ संकल्प और उद्देश्य। लक्ष्य प्राप्ति के लिए शुभ।

|| नक्षत्र 16/27 ||
17
🪷

अनुराधा

Anuradha

🌸 मृदु

देवता

मित्र देव

स्वामी

🪐 शनि

प्रतीक

Lotus

अंश

213.3° — 226.7°

— महत्व —

भक्ति और मित्रता। साझेदारी के लिए शुभ।

|| नक्षत्र 17/27 ||
18

ज्येष्ठा

Jyeshtha

🔥 तीक्ष्ण

देवता

इन्द्र देव

स्वामी

🪐 बुध

प्रतीक

Earring/Umbrella

अंश

226.7° — 240.0°

— महत्व —

नेतृत्व और अधिकार। प्रभार लेने के लिए शुभ।

|| नक्षत्र 18/27 ||
19
🌳

मूल

Mula

🔥 तीक्ष्ण

देवता

निऋति देवी

स्वामी

🪐 केतु

प्रतीक

Tied roots

अंश

240.0° — 253.3°

— महत्व —

मूल कारण और उत्पत्ति। शोध, उपचार के लिए अनुकूल।

|| नक्षत्र 19/27 ||
20
💧

पूर्वाषाढ़ा

Purva Ashadha

🔥 उग्र

देवता

अपः (जल देवता)

स्वामी

🪐 शुक्र

प्रतीक

Elephant tusk/Fan

अंश

253.3° — 266.7°

— महत्व —

अजेयता। शुद्धि-कर्म के लिए शुभ।

|| नक्षत्र 20/27 ||
21
🏆

उत्तराषाढ़ा

Uttara Ashadha

स्थिर

देवता

विश्वेदेव

स्वामी

🪐 सूर्य

प्रतीक

Elephant tusk/Small bed

अंश

266.7° — 280.0°

— महत्व —

अंतिम विजय। स्थायी उपलब्धियों के लिए शुभ।

|| नक्षत्र 21/27 ||
22
👂

श्रवण

Shravana

💨 चर

देवता

भगवान विष्णु

स्वामी

🪐 चंद्र

प्रतीक

Ear/Three footprints

अंश

280.0° — 293.3°

— महत्व —

श्रवण और शिक्षा। भगवान विष्णु को समर्पित।

|| नक्षत्र 22/27 ||
23
🥁

धनिष्ठा

Dhanishtha

💨 चर

देवता

अष्ट वसु

स्वामी

🪐 मंगल

प्रतीक

Drum

अंश

293.3° — 306.7°

— महत्व —

धन और संगीत प्रतिभा। उत्सवों के लिए शुभ।

|| नक्षत्र 23/27 ||
24
💫

शतभिषा

Shatabhisha

💨 चर

देवता

वरुण देव

स्वामी

🪐 राहु

प्रतीक

Empty circle

अंश

306.7° — 320.0°

— महत्व —

सौ वैद्य। चिकित्सा, रहस्यवाद के लिए अनुकूल।

|| नक्षत्र 24/27 ||
25
🔥

पूर्वा भाद्रपद

Purva Bhadra

🔥 उग्र

देवता

अजैकपाद (शिव रूप)

स्वामी

🪐 गुरु

प्रतीक

Front of funeral cot

अंश

320.0° — 333.3°

— महत्व —

आध्यात्मिक अग्नि। आध्यात्मिक साधना के लिए शुभ।

|| नक्षत्र 25/27 ||
26
🧘

उत्तरा भाद्रपद

Uttara Bhadra

स्थिर

देवता

अहिर्बुध्न्य (ब्रह्मांडीय नाग)

स्वामी

🪐 शनि

प्रतीक

Back of funeral cot

अंश

333.3° — 346.7°

— महत्व —

गहराई और ज्ञान। ध्यान, विवाह के लिए शुभ।

|| नक्षत्र 26/27 ||
27
🐟

रेवती

Revati

🌸 मृदु

देवता

पूषण (पोषक देव)

स्वामी

🪐 बुध

प्रतीक

Fish/Drum

अंश

346.7° — 360.0°

— महत्व —

यात्रा पूर्णता और रक्षा। यात्रा के लिए शुभ।

|| नक्षत्र 27/27 ||

— सप्तविंशति नक्षत्रों की शक्ति, जीवन में सर्वमंगल —

नक्षत्र — संस्कृत शब्द जिसका अर्थ है "जो कभी क्षीण न हो" — आकाश के 27 निश्चित खण्ड हैं जिनसे होकर चन्द्रमा अपनी 27.3 दिवसीय कक्षा में गुज़रता है। प्रत्येक नक्षत्र 13°20' का आकाशीय भाग है। नक्षत्र वैदिक खगोल विज्ञान की सम्भवतः सबसे प्राचीन एवं विशिष्ट अवधारणा है — पश्चिमी ज्योतिष में 12 राशि हैं, परंतु वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्र अधिक सूक्ष्म वर्गीकरण देते हैं।

नक्षत्र का अध्ययन हजारों वर्षों से भारतीय ज्योतिष का आधार रहा है। ऋग्वेद में 27 नक्षत्रों का उल्लेख है, यजुर्वेद में उनके देवताओं का। इस लेख में हम सम्पूर्ण 27 नक्षत्रों — उनके स्वामी ग्रह, देवता, स्वभाव, गण, पाद, एवं ज्योतिषीय महत्व का विस्तृत अध्ययन करेंगे।

27 नक्षत्रों की पूरी सूची

1. अश्विनी (0°-13°20') — स्वामी केतु, देवता अश्विन कुमार, चिह्न अश्व का सिर। चर स्वभाव। उपचार, चिकित्सा, यात्रा हेतु शुभ। 2. भरणी (13°20'-26°40') — स्वामी शुक्र, देवता यमराज, चिह्न योनि। उग्र स्वभाव। तीव्र कार्य, अनुशासन, परिवर्तन। 3. कृत्तिका (26°40'-40°) — स्वामी सूर्य, देवता अग्नि, चिह्न ज्वाला/उस्तरा। मिश्र स्वभाव। शुद्धि, अग्नि-कार्य।

4. रोहिणी (40°-53°20') — स्वामी चन्द्र, देवता ब्रह्मा, चिह्न रथ/गाड़ी। स्थिर स्वभाव। उर्वरता, विकास, विवाह — सर्वश्रेष्ठ नक्षत्रों में। 5. मृगशिरा (53°20'-66°40') — स्वामी मंगल, देवता सोम, चिह्न मृग सिर। मृदु स्वभाव। यात्रा, विवाह, खोज। 6. आर्द्रा (66°40'-80°) — स्वामी राहु, देवता रुद्र, चिह्न अश्रु बिंदु। तीक्ष्ण स्वभाव। गहन कार्य, ध्यान, परंतु सामान्यत: शुभ कार्यों में नहीं।

7. पुनर्वसु (80°-93°20') — स्वामी गुरु, देवता अदिति, चिह्न तरकश/धनुष। चर स्वभाव। पुनर्निर्माण, यात्रा। 8. पुष्य (93°20'-106°40') — स्वामी शनि, देवता बृहस्पति, चिह्न दूध का बर्तन। लघु स्वभाव। नक्षत्रों का राजा — सर्व-कार्य शुभ, विवाह को छोड़कर। 9. आश्लेषा (106°40'-120°) — स्वामी बुध, देवता नाग, चिह्न सर्प। तीक्ष्ण स्वभाव। अशुभ — गुप्त कार्य, छल।

10. मघा (120°-133°20') — स्वामी केतु, देवता पितर, चिह्न सिंहासन। उग्र स्वभाव। पितृ-कार्य, राज-कार्य। 11. पूर्व फाल्गुनी (133°20'-146°40') — स्वामी शुक्र, देवता भग, चिह्न शय्या। उग्र स्वभाव। विवाह वर्जित परंतु सुख-कार्य। 12. उत्तर फाल्गुनी (146°40'-160°) — स्वामी सूर्य, देवता अर्यमा, चिह्न शय्या-पाये। स्थिर स्वभाव। विवाह सर्वोत्तम — शक्तिशाली नक्षत्र।

13. हस्त (160°-173°20') — स्वामी चन्द्र, देवता सविता, चिह्न हाथ। लघु स्वभाव। कौशल-कार्य, हस्त-कला, विवाह — अत्यंत शुभ। 14. चित्रा (173°20'-186°40') — स्वामी मंगल, देवता विश्वकर्मा, चिह्न मणि/मोती। मृदु स्वभाव। निर्माण-कार्य, सुंदरता। 15. स्वाती (186°40'-200°) — स्वामी राहु, देवता वायु, चिह्न तलवार/पौधा। चर स्वभाव। यात्रा, स्वतंत्र निर्णय।

16. विशाखा (200°-213°20') — स्वामी गुरु, देवता इन्द्राग्नि, चिह्न तोरण। मिश्र स्वभाव। पंडाल/मण्डप कार्य। 17. अनुराधा (213°20'-226°40') — स्वामी शनि, देवता मित्र, चिह्न कमल। मृदु स्वभाव। मित्रता, विवाह — श्रेष्ठ। 18. ज्येष्ठा (226°40'-240°) — स्वामी बुध, देवता इन्द्र, चिह्न छत्र/कुण्डल। तीक्ष्ण स्वभाव। अशुभ — विवाह वर्जित।

19. मूल (240°-253°20') — स्वामी केतु, देवता निर्ऋति, चिह्न जड़। तीक्ष्ण स्वभाव। शोध, विश्लेषण, परंतु जन्म से कुछ अशुभ माना जाता है। 20. पूर्वाषाढ़ा (253°20'-266°40') — स्वामी शुक्र, देवता आपस, चिह्न पंखा। उग्र स्वभाव। 21. उत्तराषाढ़ा (266°40'-280°) — स्वामी सूर्य, देवता विश्वेदेव, चिह्न पंखा/हाथी-दाँत। स्थिर स्वभाव। विवाह उत्तम।

22. श्रवण (280°-293°20') — स्वामी चन्द्र, देवता विष्णु, चिह्न कान। चर स्वभाव। शिक्षा, श्रवण-कार्य, यात्रा। 23. धनिष्ठा (293°20'-306°40') — स्वामी मंगल, देवता अष्टवसु, चिह्न ढोल/मुदंग। चर स्वभाव। संगीत, धन-कार्य। 24. शतभिषा (306°40'-320°) — स्वामी राहु, देवता वरुण, चिह्न शतफूल। चर स्वभाव। चिकित्सा, गुप्त शोध।

25. पूर्व भाद्रपद (320°-333°20') — स्वामी गुरु, देवता अज एकपाद, चिह्न शय्या। उग्र स्वभाव। 26. उत्तर भाद्रपद (333°20'-346°40') — स्वामी शनि, देवता अहिर्बुध्न्य, चिह्न शय्या-पाये। स्थिर स्वभाव। विवाह उत्तम। 27. रेवती (346°40'-360°) — स्वामी बुध, देवता पूषा, चिह्न मछली/ढोल। मृदु स्वभाव। यात्रा, अंतिम-संस्कार से बचें।

गण वर्गीकरण — देव, मनुष्य, राक्षस

सत्ताईस नक्षत्र तीन गणों में बँटे हैं — प्रत्येक 9 नक्षत्र। देव गण: अश्विनी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, स्वाती, अनुराधा, श्रवण, रेवती। ये दिव्य, शान्त, सात्विक प्रकृति के हैं। देव गण के व्यक्ति आध्यात्मिक, धार्मिक, परोपकारी होते हैं।

मनुष्य गण: भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पूर्व फाल्गुनी, उत्तर फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद। ये मानवीय, सन्तुलित, राजसिक प्रकृति के हैं। सामान्य मानव गुण-दोष इनमें होते हैं।

राक्षस गण: कृत्तिका, आश्लेषा, मघा, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, धनिष्ठा, शतभिषा। ये उग्र, साहसी, तामसिक प्रकृति के हैं। नाम से "राक्षस" परंतु ये कुछ कार्यों में अत्यंत प्रभावशाली होते हैं — विशेषतः नेतृत्व, साहसिक कार्य, शोध-अनुसंधान।

विवाह में गण का विशेष महत्व है। कुण्डली मिलान में "गण कूट" 6 अंक की होती है। समान गण = 6 अंक (सर्वश्रेष्ठ)। देव-मनुष्य = 5 अंक (अच्छा)। मनुष्य-राक्षस = 1 अंक (खराब)। देव-राक्षस = 0 अंक (वर्जित — विवाह नहीं करना चाहिए)। यह दर्शाता है कि स्वभाव-संगति वैवाहिक सुख का आधार है।

नक्षत्र के पाद एवं नामकरण

प्रत्येक नक्षत्र चार पादों (charans) में बँटा है — प्रत्येक पाद 3°20' का। कुल 27 × 4 = 108 पाद होते हैं। 108 अंक हिन्दू धर्म में अत्यंत पवित्र है — माला में 108 मनके, मन्त्र-जाप 108 बार, पुराणों की संख्या 108।

जन्म नक्षत्र के पाद के अनुसार बच्चे के नाम का पहला अक्षर निर्धारित होता है। उदाहरण: अश्विनी नक्षत्र के 4 पादों के अक्षर — चु, चे, चो, ला। इसी प्रकार सभी 27 नक्षत्रों के 108 अक्षर हैं। यदि बच्चे का जन्म अश्विनी नक्षत्र के दूसरे पाद में हुआ — तो उसका नाम "चे" से प्रारम्भ होगा (जैसे चेतन, चेतना)।

यह 108-अक्षर पद्धति "नक्षत्र-पद नामकरण" कहलाती है। पारम्परिक रूप से नवजात के 11वें दिन (कुछ शाखाओं में 12वें) नामकरण संस्कार किया जाता है। ज्योतिषी जन्म नक्षत्र, पाद, एवं उससे निकलने वाला अक्षर बताता है। माता-पिता उस अक्षर से शुरू होने वाला नाम चुनते हैं।

नक्षत्र स्वभाव — 7 श्रेणियाँ

चर (Movable, 7): स्वाती, पुनर्वसु, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा। यात्रा, गति, परिवर्तन हेतु शुभ। दैनिक कार्य, यात्रा प्रारम्भ, वाहन क्रय इन नक्षत्रों में अनुकूल।

स्थिर (Fixed, 5): रोहिणी, उत्तर फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तर भाद्रपद, अनुराधा। स्थायी कार्य — गृह प्रवेश, कुआँ-खुदाई, वृक्षारोपण, विवाह, भूमि-निर्माण।

तीक्ष्ण (Sharp/Cruel, 3): आर्द्रा, ज्येष्ठा, मूल, आश्लेषा। तीव्र, उग्र कार्य — शस्त्र-निर्माण, युद्ध, मन्त्र-तंत्र, अभिचार-कर्म। शुभ कार्यों में नहीं।

मृदु (Soft/Tender, 6): मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा, रेवती (कुछ शास्त्रों में हस्त, ज्येष्ठा भी)। कोमल कार्य — कला, संगीत, कविता, विवाह, मित्रता।

उग्र (Fierce, 5): भरणी, मघा, पूर्व फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, पूर्व भाद्रपद। शक्ति-प्रदर्शन, जोखिम लेना, तीव्र निर्णय। हालांकि सामान्य शुभ कार्यों में वर्जित।

मिश्र (Mixed, 2): कृत्तिका, विशाखा। शुभ-अशुभ दोनों कार्य अनुकूल — परिस्थिति पर निर्भर। विशेषतः विशाखा "मण्डप-कार्य" (पंडाल लगाना, समारोह आयोजन) हेतु उत्तम।

लघु (Light/Quick, 5): अश्विनी, पुष्य, हस्त, अभिजित, मार्गशीर्ष (कुछ अनुसार)। हल्के, त्वरित कार्य — व्यापार, विद्या-आरम्भ, कौशल-कार्य।

पुष्य — नक्षत्रों का राजा

पुष्य नक्षत्र को सभी 27 नक्षत्रों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। शास्त्रों में इसे "नक्षत्र-राज" कहा गया है। बृहस्पति देवता एवं शनि स्वामी होने से इसमें ज्ञान, धर्म, एवं स्थायित्व का अद्भुत संयोग है। पुष्य नक्षत्र की हर तिथि सर्व-कार्य-सिद्धि देने वाली मानी जाती है — विवाह को छोड़कर।

विवाह में पुष्य वर्जित होने का कारण: इस नक्षत्र की देवता बृहस्पति एवं स्वामी शनि — दोनों "तपस्वी" प्रकृति के हैं। विवाह "गृहस्थ" जीवन का आरम्भ है — इसलिए पुष्य की तप-शक्ति विवाह-सुख के विपरीत मानी गई। हालांकि अन्य सभी कार्य — गृह प्रवेश, व्यवसाय आरम्भ, सम्पत्ति क्रय, यात्रा — पुष्य में अत्यंत शुभ।

गुरु पुष्य योग (जब गुरुवार को पुष्य नक्षत्र हो) सर्व-कार्य-शुभ माना जाता है — यह वर्ष में 8-12 बार आता है। 2026 में गुरु पुष्य योग: 22 जनवरी, 19 फरवरी, 19 मार्च, 16 अप्रैल, 14 मई, 11 जून, 9 जुलाई, 6 अगस्त, 3 सितम्बर, 1 अक्टूबर, 29 अक्टूबर, 26 नवम्बर, 24 दिसम्बर। इन तिथियों पर सोना, चांदी, सम्पत्ति क्रय अत्यंत शुभ।

📊27 नक्षत्र — सम्पूर्ण गुण-सारणी

क्रमनक्षत्रराशिदेवतागणयोनि
1अश्विनीमेषअश्विन-कुमारदेवअश्व
2भरणीमेषयममनुष्यगज
3कृत्तिकामेष/वृषअग्निराक्षसमेष
4रोहिणीवृषब्रह्मामनुष्यसर्प
5मृगशिरावृष/मिथुनचन्द्रदेवसर्प
6आर्द्रामिथुनरुद्रमनुष्यश्वान
7पुनर्वसुमिथुन/कर्कअदितिदेवमार्जार
8पुष्यकर्कबृहस्पतिदेवमेष
9आश्लेषाकर्कसर्पराक्षसमार्जार
10मघासिंहपितरराक्षसमूषक
11पूर्व-फाल्गुनीसिंहभगमनुष्यमूषक
12उत्तर-फाल्गुनीसिंह/कन्याअर्यमामनुष्यगाय
13हस्तकन्यासूर्यदेवमहिष
14चित्राकन्या/तुलाविश्वकर्माराक्षसव्याघ्र
15स्वातितुलावायुदेवमहिष
16विशाखातुला/वृश्चिकइन्द्र-अग्निराक्षसव्याघ्र
17अनुराधावृश्चिकमित्रदेवमृग
18ज्येष्ठावृश्चिकइन्द्रराक्षसमृग
19मूलधनुनिऋतिराक्षसश्वान
20पूर्वाषाढ़ाधनुअपमनुष्यवानर
21उत्तराषाढ़ाधनु/मकरविश्वेदेवमनुष्यनकुल
22श्रवणमकरविष्णुदेववानर
23धनिष्ठामकर/कुम्भवसुराक्षससिंह
24शतभिषाकुम्भवरुणराक्षसअश्व
25पूर्व-भाद्रपदकुम्भ/मीनअजैकपादमनुष्यसिंह
26उत्तर-भाद्रपदमीनअहिर्बुध्न्यमनुष्यगाय
27रेवतीमीनपूषनदेवगज

गण-वर्गीकरण — देव/मनुष्य/राक्षस। विवाह में देव-राक्षस-संयोग वर्जित।

📊विभिन्न कार्यों के लिए शुभ-नक्षत्र

कार्यसर्वोत्तम-नक्षत्रटालेंविशेष-टिप्पणी
विवाहरोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा-फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तर-भाद्रपद, रेवतीभरणी, कृत्तिका, आश्लेषा, मघा (कुछ), ज्येष्ठा, मूल (कुछ)जन्म-नक्षत्र पूर्ण-वर्जित
गृह-प्रवेशपुष्य, हस्त, अनुराधा, उत्तरा-फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तर-भाद्रपद, रेवतीचित्रा, स्वाति, मघा, मूलपुष्य सर्वश्रेष्ठ
नया-व्यापारपुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूलभरणी, आश्लेषा, ज्येष्ठागुरुपुष्य-योग सर्वोत्तम
यात्रा (दीर्घ)पुनर्वसु, स्वाति, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, अश्विनीभरणी, मूल, ज्येष्ठाचर-नक्षत्र शुभ
मुण्डन/नामकरणमृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवतीभरणी, कृत्तिका, आर्द्रा, आश्लेषा
शिक्षा-प्रारम्भपुष्य, हस्त, श्रवण, रेवती, अश्विनीभरणी, मघा, आश्लेषासरस्वती-स्वामी नक्षत्र
वस्त्र-धारणअश्विनी, चित्रा, स्वाति, हस्त, रेवतीभरणी, ज्येष्ठा
औषधि-सेवन प्रारम्भपुष्य, अश्विनी, हस्त, स्वाति, अनुराधामघा, मूल, आर्द्राअश्विनी सर्वश्रेष्ठ (आरोग्य-नक्षत्र)

📋जन्म-नक्षत्र का व्यावहारिक उपयोग — 6-चरण

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    अपना जन्म-नक्षत्र पता करें

    सटीक जन्म-तिथि-समय-स्थान से। हमारे "जन्म-नक्षत्र कैल्कुलेटर" पर मुफ्त। यदि समय न मालूम — माता/पिता/अस्पताल-रिकॉर्ड से।

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    नक्षत्र-स्वामी एवं देवता जानें

    अपने नक्षत्र का स्वामी-ग्रह (जैसे रोहिणी = चन्द्रमा) एवं देवता (जैसे रोहिणी = ब्रह्मा)। ये आपकी आजीवन-शक्ति-दाता।

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    पाद-नाम पहचानें

    प्रत्येक नक्षत्र के 4 पाद — प्रत्येक का अलग-अक्षर। आपके जन्म-नक्षत्र-पाद से नामकरण-अक्षर। नवजात-नामकरण के लिए विशेष।

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    नक्षत्र-वृक्ष-पूजा

    प्रत्येक नक्षत्र का अपना-वृक्ष। जैसे रोहिणी = जामुन, पुष्य = पीपल। अपने नक्षत्र-वृक्ष को नियमित जल-अर्पण = स्वास्थ्य-समृद्धि।

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    नक्षत्र-दिवस पर विशेष-पूजा

    महीने में लगभग एक-बार आपका जन्म-नक्षत्र-दिन। उस दिन आपके इष्ट-देवता एवं नक्षत्र-स्वामी की पूजा। दान-पुण्य।

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    महत्त्वपूर्ण-कार्य के लिए नक्षत्र-शुद्धि

    विवाह/गृह-प्रवेश/नया-व्यापार के लिए — आपका जन्म-नक्षत्र वर्जित। शुभ-वर्ग (मृदु, स्थिर) चुनें। ताराबल देखें।

⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें

  • अपने जन्म-नक्षत्र पर विवाह तय करना

    क्यों: जन्म-नक्षत्र पर विवाह = "जन्म-दोष"। पारम्परिक-वैवाहिक-कलह-संकेत। विशेषतः वधू के जन्म-नक्षत्र में सर्वथा-वर्जित।

    सही उपाय: दोनों के जन्म-नक्षत्र को छोड़कर शुभ-वर्ग के अन्य नक्षत्रों में विवाह।

  • देव-राक्षस-गण संयोग में विवाह

    क्यों: गण-दोष। यदि वर देव-गण और वधू राक्षस-गण (या उल्टा) — स्वभाव-संघर्ष। पारम्परिक-वर्जना। 36 अंक-मिलान में 6 अंक हानि।

    सही उपाय: समान-गण (देव-देव, मनुष्य-मनुष्य, राक्षस-राक्षस) सर्वोत्तम। देव-मनुष्य या मनुष्य-राक्षस स्वीकार्य।

  • गण्ड-नक्षत्रों (आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती-अश्विनी संधि) में जन्म-संस्कार

    क्यों: गण्ड-मूल जन्म = पारम्परिक मान्यता "अशुभ-संकेत"। अभिजित (28वाँ) में जन्म = ज्येष्ठ-दोष-निवारक माना जाता।

    सही उपाय: गण्ड-मूल में जन्मे बच्चे के लिए 27-दिन के बाद विशेष "गण्ड-शान्ति-पाठ" + सूर्य-पूजा। अधिकांश आधुनिक-ज्योतिषी मानते — उपायों से दोष-नष्ट।

  • नक्षत्र-पाद के बिना नामकरण

    क्यों: नवजात-शिशु का नाम नक्षत्र-पाद-अक्षर से शुरू = परम्परा। यदि उपेक्षा करें — पारम्परिक-मान्यता-विरुद्ध।

    सही उपाय: जन्म-नक्षत्र + पाद से नामकरण-अक्षर। जैसे पुष्य के 4 पाद: हू, हे, हो, ड। बच्चे का नाम इन 4 अक्षरों में से किसी से शुरू।

  • आज के नक्षत्र को अपने जन्म-नक्षत्र से मिलाये बिना ताराबल देखना

    क्यों: ताराबल = आज-के-नक्षत्र की संख्या - जन्म-नक्षत्र की संख्या / 9 का शेष। बिना-जन्म-नक्षत्र = ताराबल नहीं निकल सकता।

    सही उपाय: जन्म-नक्षत्र पता हो — फिर आज-का-नक्षत्र देखकर ताराबल। हमारे ताराबल-कैल्कुलेटर पर मुफ्त।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अपना जन्म नक्षत्र कैसे जानें?

जन्म नक्षत्र निर्धारण के लिए जन्म तिथि, समय, एवं स्थान की आवश्यकता होती है। चन्द्रमा की उस क्षण की निरयण (sidereal) स्थिति देखकर नक्षत्र निकाला जाता है। हमारा janma-nakshatra कैलकुलेटर यह सटीक रूप से बताता है — Lahiri Ayanamsa सहित।

क्या नक्षत्र राशि से अलग है?

हाँ। 12 राशि = 360° में 30°-30° के 12 भाग। 27 नक्षत्र = 360° में 13°20'-13°20' के 27 भाग। एक राशि में लगभग 2.25 नक्षत्र समाते हैं। उदाहरण: मेष राशि में अश्विनी (पूर्ण), भरणी (पूर्ण), कृत्तिका (1 पाद) — कुल 9 पाद।

अभिजित 28वाँ नक्षत्र है क्या?

पारम्परिक रूप से 27 नक्षत्र हैं। कुछ शाखाओं में अभिजित को 28वाँ माना जाता है — उत्तराषाढ़ा एवं श्रवण के बीच का छोटा खण्ड (4° का)। अभिजित का देवता ब्रह्मा है। हालांकि आधुनिक पंचांग में यह केवल समय-दृष्टि से प्रयुक्त होता है, राशि-स्थिति में नहीं।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।