ग्रह-स्थिति (Planet Positions) — किसी विशेष-तिथि और समय पर 9 ग्रहों की राशि-स्थिति। ज्योतिष का आधार। प्रत्येक ग्रह 12 राशियों में से किसी एक में होगा — कुछ अपनी-राशि में (श्रेष्ठ), कुछ उच्च (सर्वश्रेष्ठ), कुछ नीच (अशुभ), कुछ शत्रु-राशि में।
हमारा साइट लाहिरी अयनांश + जीन मीयस (NASA-grade) एल्गोरिथम से वास्तविक-समय की सटीक ग्रह-स्थिति देता है। मई 2026 का सूर्य वृषभ में, चन्द्रमा बदलता रहता है (हर 2.25 दिन), बृहस्पति मिथुन में (14 मई के बाद), शनि कुम्भ में, राहु-केतु कुम्भ-सिंह में (नवम्बर तक), मंगल बदलते राशि में।
✦ 9 ग्रहों की मूल-स्थितियाँ
सूर्य: स्व-राशि सिंह। उच्च मेष (10°), नीच तुला (10°)। मित्र-राशि कर्क, धनु, मीन। शत्रु-राशि वृषभ, मकर, कुम्भ।
चन्द्रमा: स्व-राशि कर्क। उच्च वृषभ (3°), नीच वृश्चिक (3°)। मित्र मेष, मिथुन, सिंह, कन्या, धनु, मीन। शत्रु कोई नहीं।
मंगल: स्व मेष-वृश्चिक। उच्च मकर (28°), नीच कर्क (28°)। मित्र सिंह, धनु, मीन। शत्रु बुध-शुक्र की राशियाँ।
बुध: स्व मिथुन-कन्या। उच्च कन्या (15°), नीच मीन (15°)। मित्र वृषभ, तुला। शत्रु चन्द्र की राशि।
बृहस्पति: स्व धनु-मीन। उच्च कर्क (5°), नीच मकर (5°)। मित्र मेष, सिंह, वृश्चिक। शत्रु बुध-शुक्र की राशियाँ।
शुक्र: स्व वृषभ-तुला। उच्च मीन (27°), नीच कन्या (27°)। मित्र मिथुन, मकर, कुम्भ। शत्रु रवि-चन्द्र की राशियाँ।
शनि: स्व मकर-कुम्भ। उच्च तुला (20°), नीच मेष (20°)। मित्र मिथुन, कन्या। शत्रु मेष, सिंह, वृश्चिक।
राहु: कुछ कहते — स्व मिथुन/कन्या (बुध-राशि), उच्च वृषभ। केतु: स्व धनु/मीन, उच्च वृश्चिक। (तंत्र-शास्त्र भिन्न मत)।
✦ मई 2026 की ग्रह-स्थिति
सूर्य: 14 मई तक मेष (उच्च-राशि — सबसे शुभ)। 14 मई से वृषभ। 14 जून से मिथुन।
चन्द्रमा: हर 2.25 दिन में नई राशि। उदाहरण — 1 मई कर्क-स्व-राशि, 2-3 मई सिंह, 4-5 मई कन्या, 6-7 मई तुला, 8-9 मई वृश्चिक-नीच। पञ्चांग देखें।
मंगल: मई में मिथुन। शुभ। जून-जुलाई में कर्क — नीच (विवाह आदि स्थगित)।
बुध: 7 मई तक मेष, 7 मई से वृषभ, 21 मई से मिथुन-स्व-राशि। 11 जून-1 जुलाई वक्री।
बृहस्पति: 14 मई तक वृषभ, 14 मई से मिथुन-स्व-राशि (शुभ-काल शुरू)।
शुक्र: मई में वृषभ-स्व-राशि। शुभ-योग। विवाह-यात्रा-कला सब शुभ।
शनि: कुम्भ-स्व-राशि। साढ़ेसाती कुम्भ-राशि वालों पर।
राहु: कुम्भ। केतु: सिंह। नवम्बर 2026 में मकर-कर्क।
✦ ग्रह-स्थिति का प्रभाव
उच्च-स्थिति (Exalted): ग्रह सबसे शक्तिशाली। उत्तम-फल। उदा. — सूर्य मेष में → व्यक्ति आत्मविश्वासी, नेता, यशस्वी। बृहस्पति कर्क में → ज्ञान-धन-स्वास्थ्य।
नीच-स्थिति (Debilitated): सबसे कमजोर। अशुभ-फल। उदा. — सूर्य तुला में → आत्मविश्वास-कमी, पिता-कष्ट। शुक्र कन्या में → प्रेम-वैवाहिक-कष्ट। पर "नीच-भंग-राज-योग" से नीच भी राज-योग बन सकता है।
स्व-राशि (Own): ग्रह अपनी राशि में। श्रेष्ठ। उदा. — चन्द्रमा कर्क में → भावनात्मक-स्थिर, कलाकार, माता-सम्बन्ध शुभ।
मित्र-राशि (Friendly): शुभ-फल। शत्रु-राशि (Enemy): अशुभ। मूल-त्रिकोण (Mool-Trikon): स्व से थोड़ा कम पर बहुत शुभ — सूर्य 0-20° सिंह, चन्द्र 4-30° वृषभ, मंगल 0-12° मेष आदि।
✦ वक्री-ग्रह (Retrograde Planets)
जब ग्रह आकाश में पीछे की ओर चलते हुए दिखे — वक्री। 5 ग्रह वक्री होते हैं — मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि। राहु-केतु सदा वक्री। सूर्य-चन्द्र कभी वक्री नहीं।
वक्री-फल: ग्रह की शक्ति "उल्टी" काम करती है। शुभ-ग्रह वक्री हो तो शुभ-फल कम। अशुभ-ग्रह वक्री हो तो अशुभ-फल कम। पर ज्योतिष-शास्त्र अनुसार वक्री-ग्रह 1.5-गुना शक्तिशाली होते हैं।
2026 के वक्री-ग्रह: बुध — 11 जून-1 जुलाई, 9 अक्टूबर-29 अक्टूबर, 13 दिसम्बर-1 जनवरी 2027। शुक्र — दिसम्बर। मंगल — कोई वक्री नहीं। बृहस्पति — कोई नहीं। शनि — 4 जुलाई-19 नवम्बर (साढ़ेसाती-वालों के लिए — कुछ राहत)।
वक्री-काल में: नये कार्य से बचें। पुराने सुधार करें। यात्रा-संचार-तकनीक में सावधानी (बुध-वक्री)। लम्बा-लेन-देन-सम्बन्ध (शुक्र-वक्री) पर पुनर्विचार।
✦ ग्रह-अस्त (Combust Planets)
जब ग्रह सूर्य के पास आ जाये (कुछ अंशों में) — "अस्त"। ग्रह की शक्ति कम। सीमायें: चन्द्रमा 12°, मंगल 17°, बुध 14° (मार्गी), 12° (वक्री), बृहस्पति 11°, शुक्र 10° (मार्गी), 8° (वक्री), शनि 15°।
अस्त-ग्रह का प्रभाव: फल कम। शुभ-ग्रह अस्त — अधिक हानि। अशुभ-ग्रह अस्त — कम हानि।
विवाह-समय में अस्त-गुरु (बृहस्पति-अस्त) वर्जित — गुरु-अस्त-दोष। शुक्र-अस्त भी वर्जित। 2026 में: गुरु-अस्त 23 अप्रैल-22 मई। शुक्र-अस्त बीच में दो बार।
विशेष: यदि ग्रह सूर्य के साथ युति में (बहुत निकट) — पूर्ण-अस्त। यदि उससे अधिक दूर पर सीमा के अन्दर — आंशिक-अस्त।
✦ जन्म-कुण्डली में ग्रह-स्थिति
जन्म के समय जो ग्रह-स्थिति होती है — वही जीवन-भर का कुण्डली-आधार। 12 भाव × 12 राशि × 9 ग्रह = असंख्य-संयोजन। प्रत्येक व्यक्ति की कुण्डली अद्वितीय।
ग्रह-दशा: विंशोत्तरी-दशा अनुसार 120 वर्ष का चक्र। प्रत्येक ग्रह की दशा-अवधि: सूर्य 6, चन्द्र 10, मंगल 7, राहु 18, बृहस्पति 16, शनि 19, बुध 17, केतु 7, शुक्र 20। जन्म-नक्षत्र से दशा-स्वामी।
अन्तर्दशा: मुख्य-दशा के भीतर उप-काल। उदा. — शनि-दशा (19 वर्ष) में बुध-अन्तर्दशा 2.7 वर्ष। वर्तमान दशा-अन्तर्दशा से जीवन की वर्तमान-स्थिति।
मुख्य योग: राज-योग (सत्ता-यश), धन-योग (सम्पत्ति), विद्या-योग (ज्ञान), सर्व-शुभ-योग (सब शुभ), विपरीत-राज-योग (अशुभ से शुभ)। 100+ योग-प्रकार।
📊9 ग्रहों की उच्च-नीच-स्व-मूलत्रिकोण-स्थिति
| ग्रह | स्व-राशि | उच्च (अंश) | नीच (अंश) | मूल-त्रिकोण |
|---|---|---|---|---|
| सूर्य | सिंह | मेष (10°) | तुला (10°) | सिंह (0-20°) |
| चन्द्रमा | कर्क | वृषभ (3°) | वृश्चिक (3°) | वृषभ (4-30°) |
| मंगल | मेष, वृश्चिक | मकर (28°) | कर्क (28°) | मेष (0-12°) |
| बुध | मिथुन, कन्या | कन्या (15°) | मीन (15°) | कन्या (16-20°) |
| बृहस्पति | धनु, मीन | कर्क (5°) | मकर (5°) | धनु (0-10°) |
| शुक्र | वृषभ, तुला | मीन (27°) | कन्या (27°) | तुला (0-15°) |
| शनि | मकर, कुम्भ | तुला (20°) | मेष (20°) | कुम्भ (0-20°) |
| राहु | मिथुन/कन्या (मतान्तर) | वृषभ | वृश्चिक/धनु | — |
| केतु | धनु/मीन (मतान्तर) | वृश्चिक | वृषभ | — |
उच्च = सर्वश्रेष्ठ शक्ति। नीच = न्यूनतम। स्व-राशि-मूल-त्रिकोण भी अति-शुभ।
📊2026 में मुख्य ग्रह-स्थितियाँ
| तिथि | ग्रह-घटना | राशि-स्थिति | प्रभाव |
|---|---|---|---|
| 1 जनवरी 2026 | शनि कुम्भ-स्व-राशि | पूर्ण-वर्ष कुम्भ में | साढ़े-साती: कुम्भ-मीन-मेष |
| 14 जनवरी 2026 | सूर्य मकर-संक्रान्ति | सूर्य धनु→मकर | उत्तरायण-प्रारम्भ |
| 17 फरवरी 2026 | सूर्य-ग्रहण (कुम्भ) | सूर्य कुम्भ | भारत में अदृश्य |
| 3 मार्च 2026 | चन्द्र-ग्रहण | चन्द्रमा कन्या | भारत में आंशिक-दृश्य |
| 14 अप्रैल 2026 | सूर्य मेष-संक्रान्ति | सूर्य उच्च-राशि | सर्वोत्तम-काल |
| 23 अप्रैल 2026 | गुरु-अस्त शुरू | गुरु कुछ-दिन अस्त | विवाह-वर्जित-काल |
| 14 मई 2026 | गुरु वृषभ→मिथुन | गुरु-स्व-राशि | 12-महीना शुभ-काल |
| 11 जून-1 जुलाई | बुध-वक्री | बुध मिथुन | व्यापार-संचार-सावधानी |
| 25 जुलाई 2026 | देवशयनी-एकादशी | विष्णु-निद्रा | चातुर्मास-प्रारम्भ |
| 12 अगस्त 2026 | सूर्य-ग्रहण (पूर्ण) | सूर्य कर्क | उत्तरी-गोलार्ध, भारत-अदृश्य |
| 20 नवम्बर 2026 | देवउठनी-एकादशी | विष्णु-जागरण | चातुर्मास-समाप्त |
| 28 नवम्बर 2026 | राहु-केतु बदलाव | राहु कुम्भ→मकर, केतु सिंह→कर्क | 18-महीना नया-गोचर |
📋ग्रह-स्थिति-विश्लेषण की 7-चरण विधि
- 1
जन्म-कुण्डली निकालें
जन्म-तिथि, समय, स्थान से हमारे कैल्कुलेटर पर मुफ्त। 9 ग्रहों की भाव-स्थिति।
- 2
प्रत्येक ग्रह की स्थिति पहचानें
किस-राशि-में, किस-भाव-में, अंश। उच्च/नीच/स्व/मूल-त्रिकोण/शत्रु/मित्र पहचानें।
- 3
वर्तमान-गोचर देखें
आज की 9 ग्रहों की राशि-स्थिति। हमारी "ग्रह-स्थिति" पेज पर live।
- 4
जन्म से वर्तमान-तुलना
जन्म-समय की स्थिति बनाम वर्तमान। महत्त्वपूर्ण-गोचर — बृहस्पति-शनि-राहु-केतु।
- 5
दशा-काल पहचानें
जन्म-नक्षत्र से वर्तमान-महादशा एवं अन्तर्दशा। दशा-स्वामी का बल देखें।
- 6
योग-दोष-जाँच
राज-योग, धन-योग, विद्या-योग, मांगलिक-दोष, काल-सर्प-योग, कर्तरी-योग।
- 7
फल एवं उपाय
शुभ-योग को उपयोग करें। दोष-शान्ति के लिए मन्त्र-व्रत-दान-रत्न (ज्योतिषी-परामर्श)।
⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें
✗ पुराने/गलत-जन्म-समय से कुण्डली
क्यों: 4 मिनट की त्रुटि = 1° लग्न-त्रुटि। 30+ मिनट से लग्न ही गलत हो सकता।
✓ सही उपाय: अस्पताल-रिकॉर्ड, माता/पिता से सटीक-समय। यदि उपलब्ध नहीं — Birth Time Rectification।
✗ सायन-ग्रह-स्थिति (Western) को वैदिक मानना
क्यों: Western = Tropical (सायन)। Vedic = Sidereal (निरयण)। 24°+ का अंतर। पूरी राशि बदल सकती।
✓ सही उपाय: Lahiri Ayanamsa के साथ निरयण-ग्रह-स्थिति। हमारे कैल्कुलेटर पर निरयण-default।
✗ केवल-नीच-ग्रह से डरना (नीच-भंग नहीं देखना)
क्यों: नीच-भंग-राज-योग = नीच-ग्रह से बड़ी-सफलता। केवल नीच-स्थिति से निर्णय अधूरा।
✓ सही उपाय: नीच-भंग की 4 शर्तें देखें: 1) नीच-ग्रह का स्वामी केन्द्र-त्रिकोण में 2) नीच-राशि का स्वामी केन्द्र-त्रिकोण में 3) उच्च-राशि का स्वामी केन्द्र-त्रिकोण में 4) मूल-त्रिकोण-राशि-स्वामी-स्थिति।
✗ वक्री-ग्रह को सदैव-अशुभ मानना
क्यों: वक्री-ग्रह 1.5x शक्तिशाली। शुभ-ग्रह वक्री = अधिक-शुभ। अशुभ-ग्रह वक्री = शक्ति-कम।
✓ सही उपाय: गुरु-शुक्र वक्री हो तो अशुभ-कार्य के लिए। शनि-राहु वक्री = कुछ-राहत।
✗ अस्त-ग्रह को नज़रअन्दाज करना
क्यों: सूर्य के पास ग्रह = अस्त (combust)। शक्ति-कम। विशेष: गुरु-अस्त + शुक्र-अस्त में विवाह-वर्जित।
✓ सही उपाय: 2026 गुरु-अस्त: 23 अप्रैल-22 मई। शुक्र-अस्त: मार्च-मई के बीच। इन-काल विवाह न।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪NASA JPL HORIZONS — विश्व-स्तरीय ग्रह-स्थिति प्रणाली
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मेरे लिए सबसे शुभ ग्रह कौन-सा है?▼
जन्म-कुण्डली से ही पता चलता है। लग्न के स्वामी, 5वें-9वें भाव के स्वामी (त्रिकोण-स्वामी) सबसे शुभ। उच्च-स्व-राशि में हो तो और शुभ। अशुभ — 6वें-8वें-12वें भाव के स्वामी। पर सबकी कुण्डली भिन्न — सटीक के लिए ज्योतिषी से।
पंचांग में ग्रह-स्थिति कैसे देखें?▼
दैनिक-पंचांग में: सूर्योदय-समय की ग्रह-स्थिति। हमारे "ग्रह-स्थिति" पेज पर — रियल-टाइम स्थिति, राशि, अंश-कला, गति (मार्गी/वक्री), अस्त-स्थिति, बल — सब विस्तार से। नक्षत्र भी।
क्या ग्रह सच में हमें प्रभावित करते हैं?▼
पारम्परिक-दृष्टि से — हाँ, ब्रह्माण्ड एक विशाल चुम्बकीय-क्षेत्र, ग्रह-गति का प्रभाव। आधुनिक-वैज्ञानिक-दृष्टि — सिद्ध नहीं (कौसल/Carlson जैसे अध्ययनों में)। पर हजारों-वर्षों के अनुभव-आधारित ज्ञान। श्रद्धा से अपनायें — पर "Free Will" को न भूलें। ग्रह सम्भावना देते हैं, निर्णय आपका।
क्या मैं स्वयं ग्रह-स्थिति निकाल सकता हूँ?▼
जटिल खगोल-गणित आवश्यक — Lahiri Ayanamsa, Jean Meeus algorithms। आम-व्यक्ति के लिए ज्योतिष-सॉफ्टवेयर/वेबसाइट सर्वश्रेष्ठ। हमारे "Planet Positions Calculator" पर रियल-टाइम — मुफ्त। Drik-Panchang, Astro-Sage भी अच्छे।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।