ग्रह गोचर 2026

नवग्रह गोचर

— वर्ष २०२६ के मुख्य ग्रह राशि परिवर्तन —

🪐

गोचर क्या है?

ग्रहों का एक राशि से दूसरी राशि में जाना "ग्रह गोचर" कहलाता है। प्रत्येक गोचर का प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुण्डली के अनुसार पड़ता है — कोई शुभ, कोई अशुभ। मुख्य गोचर का अध्ययन भविष्य की दिशा निश्चित करने में सहायक है।

🪐

नवग्रह — राशि परिवर्तन अवधि

☀️

सूर्य

१ माह

🌙

चन्द्र

२.२५ दिन

🔴

मंगल

१.५ माह

🟢

बुध

२१ दिन

🟡

गुरु

१२ माह

💎

शुक्र

२८ दिन

🪐

शनि

२.५ वर्ष

🐍

राहु

१८ माह

☄️

केतु

१८ माह

14जनवर
☀️

मकर संक्रान्ति

सूर्य: DhanuMakara

☀️

प्रभाव

उत्तरायण प्रारम्भ, फसल

13फरवर
☀️

कुम्भ संक्रान्ति

सूर्य: MakaraKumbha

☀️

प्रभाव

आध्यात्मिक एकाग्रता

14मार्
☀️

मीन संक्रान्ति

सूर्य: KumbhaMeena

☀️

प्रभाव

खरमास समाप्ति

14अप्र
☀️

मेष संक्रान्ति

सूर्य: MeenaMesha

☀️

प्रभाव

सौर नववर्ष, विशु

14मई
🟡

गुरु कर्क प्रवेश

गुरु: MithunaKarka

🟡

प्रभाव

गुरु उच्च — परम शुभ

15मई
☀️

वृषभ संक्रान्ति

सूर्य: MeshaVrishabha

☀️

प्रभाव

ग्रीष्म ऋतु प्रारम्भ

15जून
☀️

मिथुन संक्रान्ति

सूर्य: VrishabhaMithuna

☀️

प्रभाव

मानसून प्रारम्भ

16जुला
☀️

कर्क संक्रान्ति

सूर्य: MithunaKarka

☀️

प्रभाव

दक्षिणायन प्रारम्भ

17अगस्
☀️

सिंह संक्रान्ति

सूर्य: KarkaSimha

☀️

प्रभाव

सूर्य स्वगृह — बलवान

6सितम
🔴

मंगल स्वगृह

मंगल: TulaVrishchika

🔴

प्रभाव

बलवान मंगल — साहस, क्रिया

17सितम
☀️

कन्या संक्रान्ति

सूर्य: SimhaKanya

☀️

प्रभाव

पितृ पक्ष प्रारम्भ

17अक्ट
☀️

तुला संक्रान्ति

सूर्य: KanyaTula

☀️

प्रभाव

सूर्य नीच

16नवम्
☀️

वृश्चिक संक्रान्ति

सूर्य: TulaVrishchika

☀️

प्रभाव

मंगल-शासित — ऊर्जा

16दिसम
☀️

धनु संक्रान्ति

सूर्य: VrishchikaDhanu

☀️

प्रभाव

खरमास प्रारम्भ

— नवग्रह कृपा से, मार्ग सदा प्रशस्त हो —

ग्रह-गोचर = ग्रहों का गति/संक्रमण (transit)। जब कोई ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में जाता है — तब "गोचर" कहलाता है। प्रत्येक ग्रह की अपनी गति: चन्द्रमा सबसे तेज (2.25 दिन/राशि), सूर्य 30 दिन, बुध 30 दिन, शुक्र 30 दिन, मंगल 45 दिन, बृहस्पति 12 महीने, शनि 2.5 वर्ष, राहु-केतु 18 महीने।

2026 में अनेक महत्त्वपूर्ण-गोचर: शनि का मीन में जाना, बृहस्पति का मिथुन में जाना, राहु-केतु का स्थान-परिवर्तन (कुम्भ से मकर — मार्च 2026)। ये गोचर सब राशियों पर बड़ा प्रभाव डालेंगे। इस लेख में 9-ग्रह के 2026 गोचर, राशि-वार फल और उपाय।

2026 के मुख्य ग्रह-गोचर

शनि-गोचर: 29 मार्च 2025 से शनि कुम्भ-राशि में था। 2026 में शनि कुम्भ में रहेगा। पुनः 2027 में मीन में जायेगा। शनि का साढ़ेसाती: कुम्भ-राशि वाले प्रथम-चरण, मकर वाले द्वितीय-चरण, धनु वाले अन्तिम-चरण।

बृहस्पति-गोचर: 1 मई 2025 से बृहस्पति वृषभ में था। 14 मई 2026 से मिथुन-राशि में जायेगा। 12 महीने मिथुन में। मिथुन-कन्या-धनु-मीन के लिए विशेष। बृहस्पति-शुभ-योग।

राहु-केतु-गोचर: 18 मई 2025 से राहु कुम्भ-केतु सिंह में हैं। 28 नवम्बर 2026 से राहु मकर-केतु कर्क में जायेंगे। 18-महीने का चक्र।

मंगल-गोचर 2026: जनवरी मेष, फरवरी-मार्च वृषभ, अप्रैल-मई मिथुन, जून-जुलाई कर्क (नीच), अगस्त-सितम्बर सिंह, अक्टूबर-नवम्बर कन्या, दिसम्बर तुला।

शुक्र-गोचर 2026: 12 राशियों में चक्र। दिसम्बर 2026 — शुक्र-वक्री। बुध 2026 में 4 बार वक्री होगा।

शनि साढ़े-साती और ढैय्या

साढ़ेसाती = 7.5 वर्ष। जब शनि चन्द्र-राशि से 12वीं, अपनी राशि (1वीं), और 2वीं राशि में हो — कुल 7.5 वर्ष। तीन ढाई-वर्ष के चरण।

2026 में: कुम्भ-राशि वाले — साढ़ेसाती का तीसरा-अंतिम चरण (सबसे कठिन, स्वास्थ्य-व्यय)। मकर-राशि वाले — द्वितीय-चरण (मध्यम)। धनु-राशि वाले — प्रथम-चरण (सूचक — हलचल शुरू)।

ढैय्या = 2.5 वर्ष शनि का प्रभाव। चन्द्र-राशि से 4वीं या 8वीं राशि पर। 2026 में: वृष (8वीं — दीर्घ-शनि), सिंह (4वीं — कण्टक-शनि)। यदि साढ़ेसाती और ढैय्या दोनों — कण्टकीय-समय।

शनि-उपाय: हनुमान-चालीसा 11 बार शनिवार को। शनि-स्तोत्र-पाठ। दशरथ-कृत-शनि-स्तोत्र। तेल-तिल-काली-वस्तुएँ दान। पीपल-वृक्ष को जल। नीलम-रत्न (केवल ज्योतिषी-परामर्श से)।

बृहस्पति-गोचर का प्रभाव

14 मई 2026 से बृहस्पति मिथुन में: मिथुन-राशि वाले के लिए — गुरु-स्व-राशि (मूल-त्रिकोण नहीं)। शुभ। ज्ञान-वृद्धि, यात्रा, सम्पत्ति। कन्या-राशि (4थी) — गृह-निर्माण, माता-सम्बन्धी सुख। धनु-राशि (7वीं) — विवाह-योग, साझेदारी। मीन-राशि (10वीं) — कैरियर-वृद्धि, पदोन्नति।

मेष (3री) — पराक्रम, छोटे भाई-बहन से लाभ। वृषभ (2री) — धन-वृद्धि। कर्क (12वीं) — विदेश-यात्रा-व्यय। सिंह (11वीं) — आय-वृद्धि, मित्र-लाभ। तुला (9वीं) — भाग्योदय। वृश्चिक (8वीं) — आकस्मिक-लाभ।

मकर (6थी) — स्वास्थ्य-कर्ज-शत्रु पर ध्यान। कुम्भ (5वीं) — सन्तान-शिक्षा-लाभ।

गुरु-शुभ-कार्य: 14 मई से 2027 तक — विवाह, गृह-प्रवेश, नया व्यापार, उपनयन, यज्ञ — श्रेष्ठ। बृहस्पति-स्तोत्र, पीला-वस्त्र, हल्दी, चना दान।

राहु-केतु गोचर 2026

28 नवम्बर 2026 से राहु मकर-राशि और केतु कर्क-राशि में जायेंगे। 18-महीने तक यहीं रहेंगे। बड़ा-गोचर — सब राशियों पर प्रभाव।

राहु मकर: 10वीं राशि — कैरियर/पद। मकर-राशि वाले के लिए राहु अपनी ही राशि — कुछ शुभ, कुछ अशुभ। मेष (10वीं), कर्क (7वीं), तुला (4थी), कुम्भ (12वीं) — विशेष ध्यान।

केतु कर्क: कर्क-राशि वाले के लिए — केतु जन्म-राशि में। आध्यात्मिक-जागरण, कुछ सम्बन्ध-कष्ट। मेष (4थी), तुला (10वीं), मकर (7वीं), कुम्भ (6थी) — विशेष।

राहु-केतु उपाय: दुर्गा-सप्तशती-पाठ। महामृत्युञ्जय-जप। राहु-केतु-शान्ति-पाठ। भगवान-नागराज-पूजा। कुष्मांड-पूजा। काली-तिल और गोमेद/लहसुनिया (केवल ज्योतिषी-परामर्श से)।

गोचर देखने की विधि

मूल नियम: गोचर का फल "जन्म-चन्द्र-राशि" से देखें (जन्म-नक्षत्र की राशि)। कुछ ज्योतिषी जन्म-लग्न से भी देखते हैं — दोनों मिलाकर।

सूत्र: यदि गोचर-ग्रह जन्म-राशि से शुभ-स्थान (1, 2, 3, 6, 7, 10, 11) में हो — शुभ-फल। यदि अशुभ-स्थान (4, 5, 8, 12) में हो — अशुभ। 9वीं — मध्यम।

सर्वोत्तम-गोचर: बृहस्पति 2nd/5th/9th/11th, शुक्र 1st/4th/7th/10th, बुध 2nd/4th/8th/10th/11th, चन्द्रमा 1st/3rd/6th/7th/10th/11th, सूर्य 3rd/6th/10th/11th।

अशुभ-गोचर: शनि 1st/4th/8th/10th, मंगल 4th/7th/8th/12th, राहु-केतु 1st/4th/5th/8th/9th/12th।

2026 राशि-वार सम्पूर्ण-फल

मेष: बृहस्पति-कृपा (3री), शनि-शान्त। कुल मिलाकर अच्छा वर्ष। नया कार्य, यात्रा शुभ।

वृषभ: बृहस्पति 2nd (धन-वृद्धि)। शनि 10th (कैरियर-दबाव)। मिश्रित।

मिथुन: बृहस्पति लग्न में। शुभ। आत्मविश्वास, स्वास्थ्य-वृद्धि। नये कार्य।

कर्क: बृहस्पति 12th (व्यय-विदेश)। केतु लग्न में (नवम्बर से)। सावधानी।

सिंह: बृहस्पति 11th (आय-वृद्धि)। राहु 6th (शत्रु-नाश)। शुभ।

कन्या: बृहस्पति 10th (पद-वृद्धि)। शनि 6th (कर्ज-शत्रु पर विजय)। उत्तम।

तुला: बृहस्पति 9th (भाग्योदय)। शुभ-वर्ष। यात्रा, धर्म, उच्च-शिक्षा।

वृश्चिक: बृहस्पति 8th (अप्रत्याशित)। मिश्रित। साधना-काल।

धनु: साढ़ेसाती-प्रथम-चरण। बृहस्पति 7th (विवाह-साझेदारी शुभ)।

मकर: साढ़ेसाती-द्वितीय-चरण (मध्यम)। राहु लग्न में (नवम्बर)। चुनौती।

कुम्भ: साढ़ेसाती-अन्तिम-चरण (कठिन)। पर अन्त की ओर।

मीन: बृहस्पति 4th (घर-वाहन-शुभ)। केतु 5th (सन्तान-ध्यान)।

📊9 ग्रहों की 2026 गोचर-गति — पूर्ण-तालिका

ग्रहएक राशि में अवधि2026 की मुख्य-गतिविशेष-घटना
सूर्य~30 दिन (1 राशि)मेष-वृषभ-मिथुन-...क्रम-गति14 जनवरी (मकर-संक्रान्ति), 14 अप्रैल (मेष-संक्रान्ति)
चन्द्रमा~2.25 दिनदैनिक राशि-परिवर्तन12 राशि का चक्र 27 दिन में
मंगल~45 दिनमेष→वृषभ→मिथुन→कर्क(नीच)→सिंह→कन्या→तुलाजून-जुलाई कर्क में नीच (विवाह-वर्जित)
बुध~30 दिन (वक्री-समय अधिक)4 बार वक्रीजून, अक्टूबर, दिसम्बर में वक्री
बृहस्पति~12 महीने (1 राशि)वृषभ→मिथुन14 मई 2026: मिथुन-प्रवेश (12-महीना-काल)
शुक्र~30 दिन12-राशि चक्रदिसम्बर में वक्री
शनि~2.5 वर्ष (1 राशि)कुम्भ में पूरा-2026साढ़े-साती: कुम्भ-मकर-धनु
राहु~18 महीने (1 राशि)कुम्भ→मकर28 नवम्बर 2026: मकर-प्रवेश
केतु~18 महीनेसिंह→कर्क28 नवम्बर 2026: कर्क-प्रवेश

सबसे-तेज: चन्द्रमा (2.25 दिन)। सबसे-धीमा: शनि (2.5 वर्ष)।

📊गोचर-शुभ-अशुभ — चन्द्र-राशि से भाव-स्थिति

ग्रहशुभ-स्थान (शुभ-फल)अशुभ-स्थान (दोष)विशेष-टिप्पणी
सूर्य3, 6, 10, 114, 5, 8, 9, 12पिता/यश-पद
चन्द्र1, 3, 6, 7, 10, 114, 5, 8, 12मन/माता/मानसिक-शान्ति
मंगल3, 6, 111, 4, 7, 8, 12मांगलिक-दोष-कारक
बुध2, 4, 6, 8, 10, 111, 3, 5, 7, 9, 12व्यापार/संचार
बृहस्पति2, 5, 7, 9, 111, 3, 4, 6, 8, 10, 12धन/सन्तान/ज्ञान
शुक्र1, 2, 3, 4, 5, 8, 9, 11, 126, 7, 10विवाह/सुख/कला
शनि3, 6, 111, 2, 4, 5, 7, 8, 9, 10, 12साढ़े-साती/ढैय्या
राहु3, 6, 10, 111, 4, 5, 8, 9, 12अप्रत्याशित-घटनाएँ
केतु3, 6, 111, 4, 5, 8, 9, 12आध्यात्मिक/मोक्ष

📋गोचर-फल देखने की 6-चरण विधि

  1. 1

    अपनी जन्म-राशि (चन्द्र-राशि) पता करें

    जन्म-कुण्डली से। यदि कुण्डली नहीं — हमारा "मूनसाइन-कैल्कुलेटर" मुफ्त। नाम-राशि से भी काम चल सकता पर सटीक-नहीं।

  2. 2

    वर्तमान-गोचर-स्थिति देखें

    पंचांग में 9 ग्रहों की वर्तमान राशि। सबसे-महत्त्वपूर्ण शनि, गुरु, राहु-केतु।

  3. 3

    भाव-गणना

    अपनी जन्म-राशि से वर्तमान-ग्रह-राशि कौन-सा भाव। मेष-राशि वाले के लिए वर्तमान शनि कुम्भ में = 11वें भाव।

  4. 4

    शुभ-अशुभ निर्णय

    ऊपर तालिका से। उदाहरण: शनि 11वें = शुभ। शनि 8वें = दोष (अष्टम-शनि)।

  5. 5

    दशा-संयोजन

    गोचर अकेले नहीं — वर्तमान महादशा-अन्तर्दशा भी। दशा-स्वामी का गोचर अधिक-प्रभावी।

  6. 6

    उपाय-योजना

    अशुभ-गोचर के लिए उस-ग्रह के मन्त्र, दान, व्रत। शनि-दोष: शनिवार-व्रत, हनुमान-चालीसा। मंगल: मंगलवार-व्रत।

⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें

  • सूर्य-राशि से गोचर देखना (पश्चिमी-शैली)

    क्यों: पश्चिमी-ज्योतिष = सूर्य-राशि। वैदिक = चन्द्र-राशि। सूर्य-राशि से गोचर देखना = गलत-फल।

    सही उपाय: चन्द्र-राशि (नक्षत्र-आधारित) से ही गोचर। हमारे कैल्कुलेटर पर मुफ्त।

  • केवल राशिफल/मासिक-राशिफल पढ़कर पूर्ण-निर्णय

    क्यों: मासिक-राशिफल = चन्द्र-राशि-मात्र। आपकी जन्म-कुण्डली के साथ संयोजन नहीं। सामान्य।

    सही उपाय: जन्म-कुण्डली + वर्तमान-दशा + गोचर तीनों मिलाकर। मासिक-राशिफल केवल reference।

  • साढ़ेसाती से अति-भयभीत होना

    क्यों: 25% भारतीय हर समय साढ़ेसाती में। यह "विकास-काल"। अति-भय = स्व-समस्या-निमन्त्रण।

    सही उपाय: साढ़ेसाती के उपाय करें (शनिवार-व्रत, हनुमान-चालीसा)। सकारात्मक-दृष्टिकोण। आध्यात्मिक-उन्नति का अवसर।

  • शनि-राहु-वक्री-काल में बड़े-निर्णय

    क्यों: वक्री-काल में ग्रह-शक्ति "उल्टी"। नये-व्यापार, बड़ा-निवेश में अप्रत्याशित-नुकसान।

    सही उपाय: वक्री-काल में पुराने-कार्य सुधारें, नये-नहीं। 2026 शनि-वक्री: 4 जुलाई-19 नवम्बर। बुध-वक्री: जून, अक्टूबर, दिसम्बर।

  • गुरु-गोचर शुभ-समय छोड़ देना

    क्यों: 14 मई 2026 से गुरु मिथुन में 12 महीने। मिथुन-कन्या-धनु-मीन के लिए विशेष-शुभ-काल। नया-कार्य, विवाह, गृह-प्रवेश सर्वोत्तम।

    सही उपाय: इस-काल में बड़े-शुभ-कार्य करें। पीला-दान, गुरु-स्तोत्र-पाठ, श्रीसूक्त।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में मेरी राशि के लिए कौन-सा गोचर सबसे महत्त्वपूर्ण?

सब राशियों के लिए शनि और बृहस्पति के गोचर सबसे महत्त्वपूर्ण। यदि साढ़ेसाती है — शनि-उपाय। यदि बृहस्पति आपकी राशि से शुभ-स्थान में — विशेष-कार्य करें। राहु-केतु का नवम्बर 2026 गोचर बड़ा-परिवर्तन। राशि-विशेष-फल हमारे "राशिफल" पेज पर।

गोचर-फल कितने समय का होता है?

गोचर-ग्रह जब तक उस राशि में रहता है — उसका फल। चन्द्रमा 2.25 दिन (मासिक), सूर्य/बुध/शुक्र 30 दिन, मंगल 45 दिन, बृहस्पति 12 महीने (एक राशि में), शनि 2.5 वर्ष, राहु-केतु 18 महीने। बड़े गोचर (बृहस्पति, शनि, राहु-केतु) के फल वर्षों तक।

क्या जन्म-कुण्डली के बिना गोचर-फल देखा जा सकता है?

हाँ — चन्द्र-राशि (जन्म-राशि / नाम-राशि) से सामान्य-गोचर देखा जा सकता है। पर सटीक-फल के लिए जन्म-कुण्डली आवश्यक — लग्न, ग्रह-स्थिति, दशा-काल सब का संयोजन। हमारे "जन्म-कुण्डली कैल्कुलेटर" से मुफ्त बनवायें।

गोचर के अशुभ-फल से बचने के उपाय?

सामान्य-उपाय: 1) सम्बन्धित ग्रह की पूजा। 2) उस ग्रह का मन्त्र-जप। 3) उस ग्रह का दान (शनि — तेल-तिल, बृहस्पति — पीली-वस्तु, मंगल — तांबा)। 4) उस ग्रह का व्रत। 5) गायत्री-मन्त्र। 6) महामृत्युञ्जय। 7) ज्योतिषी से व्यक्तिगत-परामर्श।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।