ग्रहण = सूर्य या चन्द्रमा का तेज ढक जाना। सूर्य-ग्रहण (सूर्यग्रहण) — अमावस्या को, जब चन्द्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। चन्द्र-ग्रहण (चन्द्रग्रहण) — पूर्णिमा को, जब पृथ्वी सूर्य और चन्द्रमा के बीच आ जाती है। पौराणिक कथा में राहु-केतु सूर्य-चन्द्रमा को निगल लेते हैं — खगोल-विज्ञान में पृथ्वी या चन्द्रमा की छाया।
इस लेख में हम 2026 के सभी सूर्य/चन्द्र ग्रहणों की सटीक तिथियाँ, समय (IST), दृश्यता-क्षेत्र, सूतक-काल और धार्मिक मान्यताएँ बता रहे हैं। साथ ही गर्भवती स्त्रियों, मन्दिर-दर्शन, भोजन और पूजा-नियम भी।
✦ 2026 के सभी ग्रहण — पूर्ण तालिका
2026 में कुल 4 ग्रहण होंगे — 2 सूर्य-ग्रहण + 2 चन्द्र-ग्रहण। यह वर्ष ग्रहण-दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण क्योंकि अगस्त 2026 का सूर्य-ग्रहण उत्तरी गोलार्ध में पूर्ण-ग्रहण होगा।
1) पूर्ण चन्द्र-ग्रहण — 3 मार्च 2026 (मंगलवार) — फाल्गुन-पूर्णिमा (होलिका-दहन के अगले दिन)। समय: रात्रि 10:30 (IST) से 14:36 तक। दृश्यता: एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, प्रशान्त-महासागर। भारत में आंशिक-दृश्य। सूतक: ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू।
2) कुंडलाकार सूर्य-ग्रहण — 17 फरवरी 2026 (मंगलवार) — माघ-अमावस्या। समय: दोपहर 03:43 (IST) से 06:25 तक। दृश्यता: अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका। भारत में अदृश्य — इसलिए सूतक मान्य नहीं।
3) पूर्ण सूर्य-ग्रहण — 12 अगस्त 2026 (बुधवार) — श्रावण-अमावस्या। समय: रात्रि 08:34 (IST) से 11:09 तक। दृश्यता: उत्तरी अमेरिका, यूरोप (आइसलैंड, स्पेन, उत्तरी रूस में पूर्ण)। भारत में अदृश्य — सूतक मान्य नहीं।
4) आंशिक चन्द्र-ग्रहण — 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) — श्रावण-पूर्णिमा (रक्षाबन्धन के 11 दिन बाद)। समय: प्रातः 09:36 (IST) से 11:06 तक। दृश्यता: अधिकांश अमेरिका, प्रशान्त-महासागर। भारत में अदृश्य — सूतक मान्य नहीं।
✦ सूर्य-ग्रहण का धार्मिक महत्त्व
पौराणिक कथा (समुद्र-मन्थन, भागवत-पुराण): अमृत-वितरण के समय राहु ने छल से अमृत-पान कर लिया। सूर्य-चन्द्रमा ने पहचान कर विष्णु को बताया। विष्णु ने सुदर्शन-चक्र से राहु का सिर काट दिया। पर अमृत-पान के कारण सिर-धड़ अमर। सिर — राहु, धड़ — केतु। दोनों ने सूर्य-चन्द्रमा को शत्रु माना — पूर्णिमा-अमावस्या को निगलते हैं — ग्रहण।
खगोल-विज्ञान: सूर्य-ग्रहण तब जब चन्द्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आता है (केवल अमावस्या को सम्भव)। पूर्ण-ग्रहण — चन्द्रमा सम्पूर्ण सूर्य ढक देता है (दुर्लभ — कुछ मिनट)। आंशिक — आंशिक छिप जाता है। कुंडलाकार (अन्नुलर) — चन्द्रमा सूर्य से छोटा दिखता है, बीच में सूर्य की अंगूठी।
सूतक-नियम (सूर्य-ग्रहण): ग्रहण से 12 घंटे पूर्व सूतक शुरू, ग्रहण-समाप्ति तक। सूतक-काल में मन्दिर के कपाट बन्द, मूर्ति-स्पर्श वर्जित। भोजन-पकाना/खाना वर्जित (विशेष परिस्थितियों में बच्चे, रोगी, गर्भवती छूट)। दूध-दही में तुलसी-पत्र डालकर दूषण से बचाव। ग्रहण-समाप्ति पर स्नान, घर-शुद्धि, दान-पुण्य।
✦ चन्द्र-ग्रहण का धार्मिक महत्त्व
चन्द्र-ग्रहण = केतु द्वारा चन्द्रमा का ग्रसन (आध्यात्मिक)। खगोल — पृथ्वी की छाया चन्द्रमा पर पड़ती है (केवल पूर्णिमा को)। पूर्ण चन्द्र-ग्रहण में चन्द्रमा रक्त-वर्ण (Blood Moon) — पृथ्वी के वायुमण्डल से नीला प्रकाश छनकर लाल पहुँचता है (Rayleigh scattering)।
सूतक-नियम (चन्द्र-ग्रहण): ग्रहण से 9 घंटे पूर्व सूतक शुरू। नियम सूर्य-ग्रहण जैसे ही — मन्दिर बन्द, भोजन वर्जित। चन्द्र-ग्रहण कमजोर मन (मानस) पर अधिक प्रभाव — ध्यान, मन्त्र-जप का विशेष महत्त्व।
गर्भवती स्त्रियों के लिए: ग्रहण-काल में बाहर न निकलें (किरणें भ्रूण पर प्रभाव डाल सकती हैं — पारम्परिक मान्यता)। चाकू-कैंची से कुछ न काटें (बच्चे पर निशान/कटाव — पारम्परिक मान्यता)। गोबर का छोटा सा कुम्हार-वस्तु पेट पर रखें। ग्रहण के बाद स्नान कर पुराने कपड़े दान।
✦ ग्रहण में क्या करें — दान, मन्त्र, ध्यान
ग्रहण-काल में करें: गायत्री-मन्त्र, महा-मृत्युञ्जय-मन्त्र, इष्ट-देव मन्त्र-जप — साधारण से 1000 गुना फलदायी। हरि-नाम-स्मरण। पवित्र-नदी (गंगा, यमुना) में स्नान। दान — तिल, गुड़, वस्त्र, अन्न, गाय (सबसे उत्तम)। ध्यान। शान्त-चिन्तन।
मन्त्र-जप: सूर्य-ग्रहण में "ॐ घृणि सूर्याय नमः" (1008 बार)। चन्द्र-ग्रहण में "ॐ सोम सोमाय नमः" (1008 बार)। राहु-केतु शान्ति के लिए — "ॐ रां राहवे नमः", "ॐ कें केतवे नमः" (108 बार)। श्री-सूक्त, हनुमान-चालीसा।
ग्रहण-समाप्ति पर: तुरन्त स्नान (ठण्डे जल से उत्तम)। घर-शुद्धि — गंगाजल छिड़कें। पुराने पके भोजन को फेंक दें। नया-ताजा भोजन बनायें। तुलसी-पत्र-वाला दूध-दही उपयोग कर सकते हैं। पीपल-वृक्ष को जल-अर्पण।
✦ ग्रहण के दौरान क्या न करें
क्या न करें: 1) नंगी आँख से सूर्य-ग्रहण न देखें (अंधापन का खतरा — Solar Retinopathy)। केवल विशेष Solar Filter चश्मे या pinhole-projection से देखें। 2) भोजन न करें (रोगी, बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती छूट)। 3) नये कार्य न शुरू करें (विवाह, गृह-प्रवेश, यज्ञ)। 4) सोयें नहीं (तामसिक प्रवृत्ति बढ़ती है)। 5) मूर्ति-स्पर्श न करें।
6) यौन-सम्बन्ध वर्जित (गर्भ धारण से बचें)। 7) दर्पण/शीशे में न देखें। 8) कैंची, चाकू, सुई से कुछ न काटें। 9) तेल, मसालेदार-गरिष्ठ भोजन तैयार न करें। 10) ग्रहण के बाद बिना स्नान कुछ न खायें।
✦ ग्रहण और राशि-फल
3 मार्च 2026 चन्द्र-ग्रहण (कन्या-राशि, पूर्व-फाल्गुनी-नक्षत्र): शुभ — मेष, मिथुन, वृश्चिक, मकर। मध्यम — वृषभ, सिंह, कर्क, कुम्भ। अशुभ — कन्या, धनु, मीन (उपाय आवश्यक)।
17 फरवरी 2026 सूर्य-ग्रहण (कुम्भ-राशि, धनिष्ठा-नक्षत्र): शुभ — मेष, मिथुन, सिंह, धनु। मध्यम — वृषभ, कर्क, कन्या, तुला। अशुभ — कुम्भ, वृश्चिक, मकर, मीन।
अशुभ-राशि वाले उपाय करें: ग्रहण-दिन व्रत, हनुमान-चालीसा 11 बार, राहु-केतु-शान्ति-पाठ, गाय को गुड़-चना, गरीबों को कम्बल-वस्त्र-दान, पीपल-पूजा।
📊2026 के सभी 4 ग्रहण — सम्पूर्ण तालिका
| क्रम | प्रकार | दिनांक | समय (IST) | भारत-दृश्यता | सूतक |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | पूर्ण चन्द्र-ग्रहण | 3 मार्च 2026 (मंगल) | रात्रि 10:30 - प्रातः 02:36 | ✓ आंशिक (चाँद ढलने पर) | मान्य (9 घंटे पूर्व) |
| 2 | कुंडलाकार सूर्य-ग्रहण | 17 फरवरी 2026 (मंगल) | दोपहर 03:43 - सायं 06:25 | ✗ अदृश्य | मान्य नहीं |
| 3 | पूर्ण सूर्य-ग्रहण | 12 अगस्त 2026 (बुध) | रात्रि 08:34 - 11:09 | ✗ अदृश्य | मान्य नहीं |
| 4 | आंशिक चन्द्र-ग्रहण | 28 अगस्त 2026 (शुक्र) | प्रातः 09:36 - 11:06 | ✗ अदृश्य | मान्य नहीं |
केवल 3 मार्च का चन्द्र-ग्रहण भारत में दृश्य — इसी का सूतक मान्य।
📊सूतक-काल नियम — सूर्य बनाम चन्द्र-ग्रहण
| नियम | सूर्य-ग्रहण | चन्द्र-ग्रहण |
|---|---|---|
| सूतक-प्रारम्भ | ग्रहण से 12 घंटे पूर्व | ग्रहण से 9 घंटे पूर्व |
| मन्दिर-स्थिति | कपाट बन्द | कपाट बन्द |
| भोजन | पकाना/खाना वर्जित | पकाना/खाना वर्जित |
| अपवाद (खाना) | बच्चे, रोगी, गर्भवती, बुजुर्ग | समान |
| दूध-दही-पानी | तुलसी-पत्र डालकर शुद्ध | समान |
| मूर्ति-स्पर्श | पूर्ण-वर्जित | पूर्ण-वर्जित |
| ग्रहण-समाप्ति पर | स्नान + घर-शुद्धि + दान | समान |
| मुख्य-प्रभाव | शरीर/स्थूल पर | मन/मानसिक पर |
| विशेष-जप | सूर्य-मन्त्र (ॐ घृणि सूर्याय नमः) | चन्द्र-मन्त्र (ॐ सोम सोमाय नमः) |
📋ग्रहण-काल में करने योग्य 7-चरण साधना
- 1
सूतक-प्रारम्भ से पूर्व
सूतक से 1 घंटा पहले स्नान। पूजा-स्थल में पुष्प-दीप। दूध-दही में तुलसी-पत्र डाल दें। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती, रोगियों के लिए हल्का-भोजन तैयार रखें।
- 2
सूतक-काल शुरू
मन्दिर-कपाट बन्द। मूर्ति-स्पर्श वर्जित। नया-कार्य न शुरू करें। मन्त्र-जप, ध्यान, स्तोत्र-पाठ शुरू करें।
- 3
ग्रहण-काल — मन्त्र-जप
सूर्य-ग्रहण: "ॐ घृणि सूर्याय नमः" 1008 बार। चन्द्र-ग्रहण: "ॐ सोम सोमाय नमः" 1008 बार। साथ में गायत्री-मन्त्र, महामृत्युञ्जय।
- 4
पवित्र-नदी स्नान (यदि सम्भव)
गंगा/यमुना/किसी पवित्र-नदी में स्नान करें। यदि नदी न हो — घर के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान।
- 5
दान-पुण्य
तिल, गुड़, वस्त्र, अन्न का दान। गाय-दान सर्वोत्तम। पीपल-वृक्ष को जल अर्पण।
- 6
ग्रहण-समाप्ति पर तुरन्त स्नान
ठण्डे-जल से स्नान सर्वोत्तम। पुराने-कपड़े बदलें। घर में गंगाजल छिड़कें।
- 7
पुनः-पूजा एवं ब्राह्मण-भोज
घर-शुद्धि के बाद पुनः-पूजा। मन्दिर-दर्शन। पुराना पका भोजन फेंक दें — नया-ताज़ा बनायें। ब्राह्मण को भोजन/दक्षिणा।
⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें
✗ नंगी-आँख से सूर्य-ग्रहण देखना
क्यों: Solar Retinopathy का जोखिम — स्थायी-अंधापन। सामान्य धूप-चश्मा, X-ray film, smoked-glass — सब अपर्याप्त। आँख की रेटिना पर सूर्य की किरणों का जलन-असर।
✓ सही उपाय: केवल ISO 12312-2 प्रमाणित Solar Eclipse Glasses, Welder's Helmet (#14+), या Pinhole Projection (कागज में सुराख से छाया देखें) से देखें।
✗ गर्भवती-स्त्रियाँ ग्रहण में बाहर निकलना/चाकू-कैंची चलाना
क्यों: पारम्परिक-मान्यता: ग्रहण-किरणें भ्रूण पर प्रभाव। चाकू-कैंची से बच्चे पर निशान/कटाव। आधुनिक-वैज्ञानिक-दृष्टि: कोई शारीरिक-हानि नहीं — पर मानसिक-शान्ति के लिए नियम-पालन उचित।
✓ सही उपाय: घर के अन्दर रहें। चाकू-कैंची-सुई न चलायें। मानसिक मन्त्र-जप करें। गोबर/मिट्टी का छोटा-कुम्हार पेट पर रखें (परम्परा)। ग्रहण के बाद स्नान।
✗ ग्रहण में सोना
क्यों: सूतक-काल मन-शुद्धि-काल। सोने से तामसिक-प्रवृत्ति बढ़ती। मन्त्र-जप, ध्यान का अवसर खो जाता।
✓ सही उपाय: ग्रहण-काल जागे रहें। मन्त्र-जप, ध्यान, स्तोत्र-पाठ करें। यदि अति-थकान — हल्का-विश्राम चलेगा पर पूर्ण-निद्रा नहीं।
✗ ग्रहण-समाप्ति बिना-स्नान कुछ खाना
क्यों: ग्रहण-काल अशुद्धि का काल। बिना-शुद्धि भोजन — अशुभ। शास्त्र: "ग्रहण-स्नान-अनिवार्य"।
✓ सही उपाय: ग्रहण-समाप्ति पर तुरन्त स्नान। पुराना भोजन फेंकें। नया-ताज़ा बनायें। तुलसी-पत्र-वाला दूध-दही प्रयोग कर सकते हैं।
✗ अदृश्य-ग्रहण का सूतक मानकर सब रोक देना
क्यों: शास्त्र-वचन: "ग्रहण-दर्शनात् सूतकम्" — जहाँ ग्रहण दिखे, वहीं सूतक। अदृश्य-ग्रहण का सूतक नहीं। 2026 में 3 में से केवल 1 ग्रहण भारत में दृश्य।
✓ सही उपाय: पंचांग में "भारत-दृश्य/अदृश्य" देखें। अदृश्य ग्रहण पर सामान्य-दिन-चर्या। दृश्य-ग्रहण पर सूतक-नियम-पालन।
✗ ग्रहण-दिन विवाह/गृह-प्रवेश/नया-कार्य
क्यों: ग्रहण-दिन से 7 दिन पूर्व-पश्चात् सब मांगलिक-कार्य वर्जित। ग्रहण-काल "ब्रह्माण्डीय-अशुद्धि" का काल।
✓ सही उपाय: ग्रहण-तिथि से 7 दिन की दूरी रखें। 2026 में: मार्च 3, फरवरी 17, अगस्त 12, अगस्त 28 — इन तिथियों के 7 दिन पहले-बाद कोई शुभ-कार्य न करें।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪NASA Eclipse Web Site — सम्पूर्ण विश्व ग्रहण-डेटा
- ▪श्रीमद्भागवत पुराण — स्कन्ध 8, राहु-केतु एवं ग्रहण की पौराणिक कथा
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या भारत में 2026 में ग्रहण दिखाई देगा?▼
2026 के 4 ग्रहणों में से केवल 1 भारत में दिखाई देगा — 3 मार्च 2026 का चन्द्र-ग्रहण (आंशिक रूप से, चाँद ढलने पर)। बाकी 3 ग्रहण भारत से अदृश्य — इसलिए धार्मिक-दृष्टि से सूतक मान्य नहीं। (मान्यता: जो ग्रहण दिखे ही नहीं, उसका सूतक नहीं।)
क्या अदृश्य ग्रहण का सूतक मानना चाहिए?▼
शास्त्र-वचन: "ग्रहण-दर्शनात् सूतकम्" — जहाँ ग्रहण दिखे, वहीं सूतक। अदृश्य-ग्रहण का सूतक नहीं माना जाता। पर कुछ साधक मानते हैं — वैज्ञानिक-दृष्टि से ग्रहण विश्व-व्यापी। उत्तम — मन्दिर/घर के पुरोहित से पूछें। अधिकांश पंचांग — केवल भारत में दृश्य ग्रहण का सूतक देते हैं।
गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण में क्या करना चाहिए?▼
पारम्परिक नियम: ग्रहण-काल में घर के अन्दर रहें। चाकू-कैंची-सुई से कुछ न काटें (मान्यता — बच्चे पर निशान)। गोबर/मिट्टी का छोटा कुम्हार पेट पर रखें। मन्त्र-जप करें — "ॐ नमो नारायणाय" या "ॐ नमः शिवाय"। ग्रहण के बाद स्नान कर ब्राह्मण को कुछ दान। आधुनिक-वैज्ञानिक-दृष्टि — ग्रहण से कोई शारीरिक हानि नहीं, मानसिक-शान्ति के लिए नियम पालन।
सूर्य-ग्रहण को आँख से कैसे देख सकते हैं?▼
कभी भी नंगी आँख से न देखें — स्थायी अंधापन का खतरा (Solar Retinopathy)। केवल इन तरीकों से: 1) ISO 12312-2 प्रमाणित Solar Eclipse Glasses 2) Welder's Helmet (#14 या उच्चतर) 3) Pinhole projection (कागज में सुराख कर छाया देखें) 4) Telescope/Binocular में Solar Filter। सामान्य धूप-चश्मा, X-ray film, स्मोक्ड-ग्लास — सब अपर्याप्त।
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सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।