ग्रहण 2026

सूर्य एवं चन्द्र ग्रहण

वर्ष 2026 के समस्त ग्रहण योग

ग्रहण योग 2026

चार महान खगोलीय घटनाएँ — दो सूर्य ग्रहण और दो चन्द्र ग्रहण — सूतक काल और दृश्यता सहित।

📜

ग्रहण नियम एवं सूतक काल

सूर्य ग्रहण से पहले 12 घंटे का सूतक काल लगता है
🌙चन्द्र ग्रहण से पहले 9 घंटे का सूतक काल लगता है
🚫ग्रहण के दौरान भोजन, पूजा वर्जित होती है
🛁ग्रहण के बाद स्नान करना अत्यंत शुभ
🤰गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी रखनी चाहिए
📿मंत्र जप, ध्यान और दान का विशेष महत्व
☀️

वलयाकार सूर्य ग्रहण

17 फरवरी 2026

☀️ सूर्य

दृश्यता क्षेत्र

अंटार्कटिका, दक्षिणी अफ्रीका

भारत में अदृश्य · सूतक नहीं
ॐ चन्द्र-सूर्य देवाय नमः
🌑

पूर्ण चन्द्र ग्रहण

3 मार्च 2026

🌙 चन्द्र

दृश्यता क्षेत्र

एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत, अमेरिका

भारत में दृश्य · सूतक काल मान्य
ॐ चन्द्र-सूर्य देवाय नमः
🌑

पूर्ण सूर्य ग्रहण

12 अगस्त 2026

☀️ सूर्य

दृश्यता क्षेत्र

ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस

भारत में अदृश्य · सूतक नहीं
ॐ चन्द्र-सूर्य देवाय नमः
🌗

आंशिक चन्द्र ग्रहण

28 अगस्त 2026

🌙 चन्द्र

दृश्यता क्षेत्र

अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, पूर्वी प्रशांत

भारत में अदृश्य · सूतक नहीं
ॐ चन्द्र-सूर्य देवाय नमः

केवल भारत में दृश्य ग्रहण का सूतक काल मान्य होता है। अदृश्य ग्रहण में सूतक नहीं लगता।

ग्रहण काल में जप-दान, होय पाप का अवसान

ग्रहण = सूर्य या चन्द्रमा का तेज ढक जाना। सूर्य-ग्रहण (सूर्यग्रहण) — अमावस्या को, जब चन्द्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। चन्द्र-ग्रहण (चन्द्रग्रहण) — पूर्णिमा को, जब पृथ्वी सूर्य और चन्द्रमा के बीच आ जाती है। पौराणिक कथा में राहु-केतु सूर्य-चन्द्रमा को निगल लेते हैं — खगोल-विज्ञान में पृथ्वी या चन्द्रमा की छाया।

इस लेख में हम 2026 के सभी सूर्य/चन्द्र ग्रहणों की सटीक तिथियाँ, समय (IST), दृश्यता-क्षेत्र, सूतक-काल और धार्मिक मान्यताएँ बता रहे हैं। साथ ही गर्भवती स्त्रियों, मन्दिर-दर्शन, भोजन और पूजा-नियम भी।

2026 के सभी ग्रहण — पूर्ण तालिका

2026 में कुल 4 ग्रहण होंगे — 2 सूर्य-ग्रहण + 2 चन्द्र-ग्रहण। यह वर्ष ग्रहण-दृष्टि से अत्यन्त महत्त्वपूर्ण क्योंकि अगस्त 2026 का सूर्य-ग्रहण उत्तरी गोलार्ध में पूर्ण-ग्रहण होगा।

1) पूर्ण चन्द्र-ग्रहण — 3 मार्च 2026 (मंगलवार) — फाल्गुन-पूर्णिमा (होलिका-दहन के अगले दिन)। समय: रात्रि 10:30 (IST) से 14:36 तक। दृश्यता: एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, प्रशान्त-महासागर। भारत में आंशिक-दृश्य। सूतक: ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू।

2) कुंडलाकार सूर्य-ग्रहण — 17 फरवरी 2026 (मंगलवार) — माघ-अमावस्या। समय: दोपहर 03:43 (IST) से 06:25 तक। दृश्यता: अंटार्कटिका, दक्षिण अफ्रीका। भारत में अदृश्य — इसलिए सूतक मान्य नहीं।

3) पूर्ण सूर्य-ग्रहण — 12 अगस्त 2026 (बुधवार) — श्रावण-अमावस्या। समय: रात्रि 08:34 (IST) से 11:09 तक। दृश्यता: उत्तरी अमेरिका, यूरोप (आइसलैंड, स्पेन, उत्तरी रूस में पूर्ण)। भारत में अदृश्य — सूतक मान्य नहीं।

4) आंशिक चन्द्र-ग्रहण — 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार) — श्रावण-पूर्णिमा (रक्षाबन्धन के 11 दिन बाद)। समय: प्रातः 09:36 (IST) से 11:06 तक। दृश्यता: अधिकांश अमेरिका, प्रशान्त-महासागर। भारत में अदृश्य — सूतक मान्य नहीं।

सूर्य-ग्रहण का धार्मिक महत्त्व

पौराणिक कथा (समुद्र-मन्थन, भागवत-पुराण): अमृत-वितरण के समय राहु ने छल से अमृत-पान कर लिया। सूर्य-चन्द्रमा ने पहचान कर विष्णु को बताया। विष्णु ने सुदर्शन-चक्र से राहु का सिर काट दिया। पर अमृत-पान के कारण सिर-धड़ अमर। सिर — राहु, धड़ — केतु। दोनों ने सूर्य-चन्द्रमा को शत्रु माना — पूर्णिमा-अमावस्या को निगलते हैं — ग्रहण।

खगोल-विज्ञान: सूर्य-ग्रहण तब जब चन्द्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आता है (केवल अमावस्या को सम्भव)। पूर्ण-ग्रहण — चन्द्रमा सम्पूर्ण सूर्य ढक देता है (दुर्लभ — कुछ मिनट)। आंशिक — आंशिक छिप जाता है। कुंडलाकार (अन्नुलर) — चन्द्रमा सूर्य से छोटा दिखता है, बीच में सूर्य की अंगूठी।

सूतक-नियम (सूर्य-ग्रहण): ग्रहण से 12 घंटे पूर्व सूतक शुरू, ग्रहण-समाप्ति तक। सूतक-काल में मन्दिर के कपाट बन्द, मूर्ति-स्पर्श वर्जित। भोजन-पकाना/खाना वर्जित (विशेष परिस्थितियों में बच्चे, रोगी, गर्भवती छूट)। दूध-दही में तुलसी-पत्र डालकर दूषण से बचाव। ग्रहण-समाप्ति पर स्नान, घर-शुद्धि, दान-पुण्य।

चन्द्र-ग्रहण का धार्मिक महत्त्व

चन्द्र-ग्रहण = केतु द्वारा चन्द्रमा का ग्रसन (आध्यात्मिक)। खगोल — पृथ्वी की छाया चन्द्रमा पर पड़ती है (केवल पूर्णिमा को)। पूर्ण चन्द्र-ग्रहण में चन्द्रमा रक्त-वर्ण (Blood Moon) — पृथ्वी के वायुमण्डल से नीला प्रकाश छनकर लाल पहुँचता है (Rayleigh scattering)।

सूतक-नियम (चन्द्र-ग्रहण): ग्रहण से 9 घंटे पूर्व सूतक शुरू। नियम सूर्य-ग्रहण जैसे ही — मन्दिर बन्द, भोजन वर्जित। चन्द्र-ग्रहण कमजोर मन (मानस) पर अधिक प्रभाव — ध्यान, मन्त्र-जप का विशेष महत्त्व।

गर्भवती स्त्रियों के लिए: ग्रहण-काल में बाहर न निकलें (किरणें भ्रूण पर प्रभाव डाल सकती हैं — पारम्परिक मान्यता)। चाकू-कैंची से कुछ न काटें (बच्चे पर निशान/कटाव — पारम्परिक मान्यता)। गोबर का छोटा सा कुम्हार-वस्तु पेट पर रखें। ग्रहण के बाद स्नान कर पुराने कपड़े दान।

ग्रहण में क्या करें — दान, मन्त्र, ध्यान

ग्रहण-काल में करें: गायत्री-मन्त्र, महा-मृत्युञ्जय-मन्त्र, इष्ट-देव मन्त्र-जप — साधारण से 1000 गुना फलदायी। हरि-नाम-स्मरण। पवित्र-नदी (गंगा, यमुना) में स्नान। दान — तिल, गुड़, वस्त्र, अन्न, गाय (सबसे उत्तम)। ध्यान। शान्त-चिन्तन।

मन्त्र-जप: सूर्य-ग्रहण में "ॐ घृणि सूर्याय नमः" (1008 बार)। चन्द्र-ग्रहण में "ॐ सोम सोमाय नमः" (1008 बार)। राहु-केतु शान्ति के लिए — "ॐ रां राहवे नमः", "ॐ कें केतवे नमः" (108 बार)। श्री-सूक्त, हनुमान-चालीसा।

ग्रहण-समाप्ति पर: तुरन्त स्नान (ठण्डे जल से उत्तम)। घर-शुद्धि — गंगाजल छिड़कें। पुराने पके भोजन को फेंक दें। नया-ताजा भोजन बनायें। तुलसी-पत्र-वाला दूध-दही उपयोग कर सकते हैं। पीपल-वृक्ष को जल-अर्पण।

ग्रहण के दौरान क्या न करें

क्या न करें: 1) नंगी आँख से सूर्य-ग्रहण न देखें (अंधापन का खतरा — Solar Retinopathy)। केवल विशेष Solar Filter चश्मे या pinhole-projection से देखें। 2) भोजन न करें (रोगी, बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती छूट)। 3) नये कार्य न शुरू करें (विवाह, गृह-प्रवेश, यज्ञ)। 4) सोयें नहीं (तामसिक प्रवृत्ति बढ़ती है)। 5) मूर्ति-स्पर्श न करें।

6) यौन-सम्बन्ध वर्जित (गर्भ धारण से बचें)। 7) दर्पण/शीशे में न देखें। 8) कैंची, चाकू, सुई से कुछ न काटें। 9) तेल, मसालेदार-गरिष्ठ भोजन तैयार न करें। 10) ग्रहण के बाद बिना स्नान कुछ न खायें।

ग्रहण और राशि-फल

3 मार्च 2026 चन्द्र-ग्रहण (कन्या-राशि, पूर्व-फाल्गुनी-नक्षत्र): शुभ — मेष, मिथुन, वृश्चिक, मकर। मध्यम — वृषभ, सिंह, कर्क, कुम्भ। अशुभ — कन्या, धनु, मीन (उपाय आवश्यक)।

17 फरवरी 2026 सूर्य-ग्रहण (कुम्भ-राशि, धनिष्ठा-नक्षत्र): शुभ — मेष, मिथुन, सिंह, धनु। मध्यम — वृषभ, कर्क, कन्या, तुला। अशुभ — कुम्भ, वृश्चिक, मकर, मीन।

अशुभ-राशि वाले उपाय करें: ग्रहण-दिन व्रत, हनुमान-चालीसा 11 बार, राहु-केतु-शान्ति-पाठ, गाय को गुड़-चना, गरीबों को कम्बल-वस्त्र-दान, पीपल-पूजा।

📊2026 के सभी 4 ग्रहण — सम्पूर्ण तालिका

क्रमप्रकारदिनांकसमय (IST)भारत-दृश्यतासूतक
1पूर्ण चन्द्र-ग्रहण3 मार्च 2026 (मंगल)रात्रि 10:30 - प्रातः 02:36✓ आंशिक (चाँद ढलने पर)मान्य (9 घंटे पूर्व)
2कुंडलाकार सूर्य-ग्रहण17 फरवरी 2026 (मंगल)दोपहर 03:43 - सायं 06:25✗ अदृश्यमान्य नहीं
3पूर्ण सूर्य-ग्रहण12 अगस्त 2026 (बुध)रात्रि 08:34 - 11:09✗ अदृश्यमान्य नहीं
4आंशिक चन्द्र-ग्रहण28 अगस्त 2026 (शुक्र)प्रातः 09:36 - 11:06✗ अदृश्यमान्य नहीं

केवल 3 मार्च का चन्द्र-ग्रहण भारत में दृश्य — इसी का सूतक मान्य।

📊सूतक-काल नियम — सूर्य बनाम चन्द्र-ग्रहण

नियमसूर्य-ग्रहणचन्द्र-ग्रहण
सूतक-प्रारम्भग्रहण से 12 घंटे पूर्वग्रहण से 9 घंटे पूर्व
मन्दिर-स्थितिकपाट बन्दकपाट बन्द
भोजनपकाना/खाना वर्जितपकाना/खाना वर्जित
अपवाद (खाना)बच्चे, रोगी, गर्भवती, बुजुर्गसमान
दूध-दही-पानीतुलसी-पत्र डालकर शुद्धसमान
मूर्ति-स्पर्शपूर्ण-वर्जितपूर्ण-वर्जित
ग्रहण-समाप्ति परस्नान + घर-शुद्धि + दानसमान
मुख्य-प्रभावशरीर/स्थूल परमन/मानसिक पर
विशेष-जपसूर्य-मन्त्र (ॐ घृणि सूर्याय नमः)चन्द्र-मन्त्र (ॐ सोम सोमाय नमः)

📋ग्रहण-काल में करने योग्य 7-चरण साधना

  1. 1

    सूतक-प्रारम्भ से पूर्व

    सूतक से 1 घंटा पहले स्नान। पूजा-स्थल में पुष्प-दीप। दूध-दही में तुलसी-पत्र डाल दें। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती, रोगियों के लिए हल्का-भोजन तैयार रखें।

  2. 2

    सूतक-काल शुरू

    मन्दिर-कपाट बन्द। मूर्ति-स्पर्श वर्जित। नया-कार्य न शुरू करें। मन्त्र-जप, ध्यान, स्तोत्र-पाठ शुरू करें।

  3. 3

    ग्रहण-काल — मन्त्र-जप

    सूर्य-ग्रहण: "ॐ घृणि सूर्याय नमः" 1008 बार। चन्द्र-ग्रहण: "ॐ सोम सोमाय नमः" 1008 बार। साथ में गायत्री-मन्त्र, महामृत्युञ्जय।

  4. 4

    पवित्र-नदी स्नान (यदि सम्भव)

    गंगा/यमुना/किसी पवित्र-नदी में स्नान करें। यदि नदी न हो — घर के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान।

  5. 5

    दान-पुण्य

    तिल, गुड़, वस्त्र, अन्न का दान। गाय-दान सर्वोत्तम। पीपल-वृक्ष को जल अर्पण।

  6. 6

    ग्रहण-समाप्ति पर तुरन्त स्नान

    ठण्डे-जल से स्नान सर्वोत्तम। पुराने-कपड़े बदलें। घर में गंगाजल छिड़कें।

  7. 7

    पुनः-पूजा एवं ब्राह्मण-भोज

    घर-शुद्धि के बाद पुनः-पूजा। मन्दिर-दर्शन। पुराना पका भोजन फेंक दें — नया-ताज़ा बनायें। ब्राह्मण को भोजन/दक्षिणा।

⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें

  • नंगी-आँख से सूर्य-ग्रहण देखना

    क्यों: Solar Retinopathy का जोखिम — स्थायी-अंधापन। सामान्य धूप-चश्मा, X-ray film, smoked-glass — सब अपर्याप्त। आँख की रेटिना पर सूर्य की किरणों का जलन-असर।

    सही उपाय: केवल ISO 12312-2 प्रमाणित Solar Eclipse Glasses, Welder's Helmet (#14+), या Pinhole Projection (कागज में सुराख से छाया देखें) से देखें।

  • गर्भवती-स्त्रियाँ ग्रहण में बाहर निकलना/चाकू-कैंची चलाना

    क्यों: पारम्परिक-मान्यता: ग्रहण-किरणें भ्रूण पर प्रभाव। चाकू-कैंची से बच्चे पर निशान/कटाव। आधुनिक-वैज्ञानिक-दृष्टि: कोई शारीरिक-हानि नहीं — पर मानसिक-शान्ति के लिए नियम-पालन उचित।

    सही उपाय: घर के अन्दर रहें। चाकू-कैंची-सुई न चलायें। मानसिक मन्त्र-जप करें। गोबर/मिट्टी का छोटा-कुम्हार पेट पर रखें (परम्परा)। ग्रहण के बाद स्नान।

  • ग्रहण में सोना

    क्यों: सूतक-काल मन-शुद्धि-काल। सोने से तामसिक-प्रवृत्ति बढ़ती। मन्त्र-जप, ध्यान का अवसर खो जाता।

    सही उपाय: ग्रहण-काल जागे रहें। मन्त्र-जप, ध्यान, स्तोत्र-पाठ करें। यदि अति-थकान — हल्का-विश्राम चलेगा पर पूर्ण-निद्रा नहीं।

  • ग्रहण-समाप्ति बिना-स्नान कुछ खाना

    क्यों: ग्रहण-काल अशुद्धि का काल। बिना-शुद्धि भोजन — अशुभ। शास्त्र: "ग्रहण-स्नान-अनिवार्य"।

    सही उपाय: ग्रहण-समाप्ति पर तुरन्त स्नान। पुराना भोजन फेंकें। नया-ताज़ा बनायें। तुलसी-पत्र-वाला दूध-दही प्रयोग कर सकते हैं।

  • अदृश्य-ग्रहण का सूतक मानकर सब रोक देना

    क्यों: शास्त्र-वचन: "ग्रहण-दर्शनात् सूतकम्" — जहाँ ग्रहण दिखे, वहीं सूतक। अदृश्य-ग्रहण का सूतक नहीं। 2026 में 3 में से केवल 1 ग्रहण भारत में दृश्य।

    सही उपाय: पंचांग में "भारत-दृश्य/अदृश्य" देखें। अदृश्य ग्रहण पर सामान्य-दिन-चर्या। दृश्य-ग्रहण पर सूतक-नियम-पालन।

  • ग्रहण-दिन विवाह/गृह-प्रवेश/नया-कार्य

    क्यों: ग्रहण-दिन से 7 दिन पूर्व-पश्चात् सब मांगलिक-कार्य वर्जित। ग्रहण-काल "ब्रह्माण्डीय-अशुद्धि" का काल।

    सही उपाय: ग्रहण-तिथि से 7 दिन की दूरी रखें। 2026 में: मार्च 3, फरवरी 17, अगस्त 12, अगस्त 28 — इन तिथियों के 7 दिन पहले-बाद कोई शुभ-कार्य न करें।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या भारत में 2026 में ग्रहण दिखाई देगा?

2026 के 4 ग्रहणों में से केवल 1 भारत में दिखाई देगा — 3 मार्च 2026 का चन्द्र-ग्रहण (आंशिक रूप से, चाँद ढलने पर)। बाकी 3 ग्रहण भारत से अदृश्य — इसलिए धार्मिक-दृष्टि से सूतक मान्य नहीं। (मान्यता: जो ग्रहण दिखे ही नहीं, उसका सूतक नहीं।)

क्या अदृश्य ग्रहण का सूतक मानना चाहिए?

शास्त्र-वचन: "ग्रहण-दर्शनात् सूतकम्" — जहाँ ग्रहण दिखे, वहीं सूतक। अदृश्य-ग्रहण का सूतक नहीं माना जाता। पर कुछ साधक मानते हैं — वैज्ञानिक-दृष्टि से ग्रहण विश्व-व्यापी। उत्तम — मन्दिर/घर के पुरोहित से पूछें। अधिकांश पंचांग — केवल भारत में दृश्य ग्रहण का सूतक देते हैं।

गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण में क्या करना चाहिए?

पारम्परिक नियम: ग्रहण-काल में घर के अन्दर रहें। चाकू-कैंची-सुई से कुछ न काटें (मान्यता — बच्चे पर निशान)। गोबर/मिट्टी का छोटा कुम्हार पेट पर रखें। मन्त्र-जप करें — "ॐ नमो नारायणाय" या "ॐ नमः शिवाय"। ग्रहण के बाद स्नान कर ब्राह्मण को कुछ दान। आधुनिक-वैज्ञानिक-दृष्टि — ग्रहण से कोई शारीरिक हानि नहीं, मानसिक-शान्ति के लिए नियम पालन।

सूर्य-ग्रहण को आँख से कैसे देख सकते हैं?

कभी भी नंगी आँख से न देखें — स्थायी अंधापन का खतरा (Solar Retinopathy)। केवल इन तरीकों से: 1) ISO 12312-2 प्रमाणित Solar Eclipse Glasses 2) Welder's Helmet (#14 या उच्चतर) 3) Pinhole projection (कागज में सुराख कर छाया देखें) 4) Telescope/Binocular में Solar Filter। सामान्य धूप-चश्मा, X-ray film, स्मोक्ड-ग्लास — सब अपर्याप्त।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।