पंचक 2026

पंचक

5 दिन का अशुभ काल · चन्द्र अन्तिम 5 नक्षत्रों में

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पंचक क्या है?

जब चन्द्रमा कुम्भ या मीन राशि में हो — धनिष्ठा (अन्तिम 2 पाद), शतभिषा, पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद, रेवती के 5 नक्षत्रों में — तब पंचक काल होता है।

✦ 5 दिन कुछ कार्य वर्जित — अन्य कार्य स्वीकार्य

📅 2026 के सभी पंचक काल

⚠️1

पंचक 1

प्रारम्भ

21 जनवरी

समाप्त

25 जनवरी

⚠️2

पंचक 2

प्रारम्भ

17 फरवरी

समाप्त

21 फरवरी

⚠️3

पंचक 3

प्रारम्भ

16 मार्च

समाप्त

20 मार्च

⚠️4

पंचक 4

प्रारम्भ

13 अप्रैल

समाप्त

17 अप्रैल

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पंचक 5

प्रारम्भ

10 मई

समाप्त

14 मई

⚠️6

पंचक 6

प्रारम्भ

7 जून

समाप्त

11 जून

⚠️7

पंचक 7

प्रारम्भ

4 जुलाई

समाप्त

8 जुलाई

⚠️8

पंचक 8

प्रारम्भ

31 जुलाई

समाप्त

4 अगस्त

⚠️9

पंचक 9

प्रारम्भ

27 अगस्त

समाप्त

31 अगस्त

⚠️10

पंचक 10

प्रारम्भ

24 सितम्बर

समाप्त

28 सितम्बर

⚠️11

पंचक 11

प्रारम्भ

21 अक्टूबर

समाप्त

25 अक्टूबर

⚠️12

पंचक 12

प्रारम्भ

17 नवम्बर

समाप्त

21 नवम्बर

⚠️13

पंचक 13

प्रारम्भ

15 दिसम्बर

समाप्त

19 दिसम्बर

🌟

पंचक के 5 प्रकार

🤒

रोग पंचक

रविवार को प्रारम्भ

👑

राज पंचक

सोमवार को प्रारम्भ

🔥

अग्नि पंचक

मंगलवार को प्रारम्भ

💀

मृत्यु पंचक

शनिवार को प्रारम्भ

🥷

चोर पंचक

शुक्रवार को प्रारम्भ

⚠️

पंचक में वर्जित कार्य

  • दक्षिण दिशा यात्रा
  • घास, लकड़ी, ईंधन एकत्र करना
  • खाट, चारपाई बनवाना
  • घर का छप्पर डालना
  • शव दाह संस्कार (विशेष विधि चाहिए)

पंचक में स्वीकार्य

  • नित्य पूजा-पाठ, मन्त्र जप
  • विद्या आरम्भ
  • चिकित्सा व औषधि सेवन
  • दान-पुण्य व सेवा कार्य

— पंचक रहित दिन उत्तम मुहूर्त —

पंचक — 5 नक्षत्रों का समूह: धनिष्ठा (अन्तिम-आधा), शतभिषा, पूर्व-भाद्रपद, उत्तर-भाद्रपद, रेवती। चन्द्रमा कुम्भ-मीन राशि में होने पर पंचक। मास में 1 बार आता है, 5 दिन तक। पंचक-काल में कुछ कार्य वर्जित — पारम्परिक मान्यता।

पंचक-रहित-मुहूर्त = वह समय जब पंचक न हो। पंचक-वर्जित-कार्यों के लिए पंचक-रहित-तिथि देखी जाती है। 2026 में 12 पंचक-काल आएंगे — हर महीने एक। इस लेख में पूर्ण-तालिका, वर्जित-कार्य, और अपवाद।

पंचक क्या है?

5 नक्षत्र मिलकर "पंचक" बनाते हैं — धनिष्ठा (दूसरा-चरण), शतभिषा, पूर्व-भाद्रपद, उत्तर-भाद्रपद, रेवती। चन्द्रमा इन 5 नक्षत्रों में से किसी एक में हो — तब पंचक।

खगोल: ये 5 नक्षत्र कुम्भ-राशि (शतभिषा, पूर्व-भाद्रपद आधे) और मीन-राशि (पूर्व-भाद्रपद आधे, उत्तर-भाद्रपद, रेवती) में हैं। चन्द्रमा कुम्भ-मीन में लगभग 5 दिन — यही पंचक-काल।

पुराण-कथा: रावण की मृत्यु के बाद उसकी बहन शूर्पणखा ने श्राप दिया — "जो कोई पंचक में मरेगा, उसके परिवार में 5 और लोग मरेंगे।" यह "मृत्यु-पंचक" का मूल। पारम्परिक भय।

5 प्रकार के पंचक

1. रोग-पंचक: रविवार से शुरू होने वाला पंचक। रोग-वृद्धि का संकेत। चिकित्सा-कार्य में सावधानी। यात्रा वर्जित।

2. राज-पंचक: सोमवार से शुरू। "राज" अर्थ शुभ। राजा-दरबार-सरकारी-कार्य के लिए शुभ। नौकरी-योग बढ़ता।

3. अग्नि-पंचक: मंगलवार से शुरू। आग, दुर्घटना का खतरा। निर्माण-कार्य वर्जित। चूल्हा-गैस-बिजली में सावधानी।

4. चोर-पंचक: शुक्रवार से शुरू। चोरी, धन-हानि का खतरा। नया लेन-देन, यात्रा वर्जित।

5. मृत्यु-पंचक: शनिवार से शुरू। मृत्यु-तुल्य कष्ट। इस-काल में मृत्यु = परिवार में 5 और मृत्यु। सबसे अशुभ। बुधवार/गुरुवार से शुरू = "नियमित" पंचक — मध्यम।

पंचक में 5 वर्जित-कार्य

1. दक्षिण-दिशा यात्रा: पंचक में दक्षिण न जायें। यम-दिशा। यदि अनिवार्य — हनुमान-चालीसा पाठ कर निकलें, घर वापस आते समय भी।

2. ईंधन-संग्रह (लकड़ी, कोयला, गोबर-गाँव-छप्पर): पंचक में कोई ज्वलनशील-वस्तु संग्रह न करें — आग का डर।

3. बिस्तर-निर्माण (खाट, चारपाई): पंचक में नया बिस्तर न बनवायें — रोग का संकेत।

4. छप्पर-छत निर्माण (मकान की छत): पंचक में छत न डलवायें — परिवार में मृत्यु-तुल्य कष्ट।

5. शव-संस्कार: पंचक में मृत्यु हो तो सीधे संस्कार न करें। 5 आटे की मूर्ति बनवायें — शव के साथ अग्नि-दाह। अन्यथा परिवार में 5 मृत्यु पारम्परिक मान्यता।

अन्य वर्जित: दीर्घ-यात्रा, नया मकान-खरीद, विवाह की पक्की-तिथि, गृह-प्रवेश, यज्ञोपवीत, मुण्डन।

2026 के पंचक-काल — पूर्ण तालिका

जनवरी: 8 जनवरी (बृहस्पति) रात्रि 03:14 से 13 जनवरी (मंगल) दोपहर 02:18 तक। फरवरी: 4 फरवरी (बुध) सायं 06:42 से 9 फरवरी (सोम) रात्रि 09:30 तक। मार्च: 4 मार्च (बुध) सायं 08:48 से 9 मार्च (सोम) प्रातः 12:14 तक।

अप्रैल: 1 अप्रैल (बुध) रात्रि 11:32 से 5 अप्रैल (रवि) दोपहर 02:00 तक। 29 अप्रैल (बुध) रात्रि 04:18 से 4 मई (सोम) तक। मई: 26-30 मई।

जून: 22-26 जून। जुलाई: 19-23 जुलाई। अगस्त: 16-20 अगस्त। सितम्बर: 12-16 सितम्बर।

अक्टूबर: 9-13 अक्टूबर। नवम्बर: 6-10 नवम्बर। दिसम्बर: 3-7 दिसम्बर। 30 दिसम्बर-3 जनवरी 2027।

सटीक-समय (मिनट तक) पंचांग में देखें। समय स्थान-वार बदलता।

पंचक के अपवाद

सब कार्य वर्जित नहीं! पंचक के अपवाद: 1) माता-दुर्गा-पूजा, माँ-काली-साधना — पंचक में श्रेष्ठ। 2) हनुमान-पूजा, मन्त्र-जप — कोई दोष नहीं। 3) तन्त्र-साधना के लिए पंचक का तीव्र-समय। 4) गुप्त-नवरात्रि (पंचक के साथ) — विशेष शक्ति।

दान-पुण्य पंचक में: श्रेष्ठ। ब्राह्मण-भोज, गाय-दान, अन्न-दान। पीपल-वृक्ष को जल। पितृ-तर्पण।

दैनिक-कार्य वर्जित नहीं: साधारण-यात्रा, कार्यालय-कार्य, खरीद-बेचान, खाना-बनाना — सब चलता है। केवल विशेष-शुभ-कार्य और 5 वर्जित-कार्य।

पंचक-दोष-निवारण उपाय

अनिवार्य कार्य पंचक में करना ही पड़े: 1) घर के आगे/पीछे "ॐ नमः शिवाय" लिख दें। 2) हनुमान-चालीसा 11 बार। 3) गायत्री-मन्त्र 108 बार। 4) महा-मृत्युञ्जय-मन्त्र। 5) ब्राह्मण से शान्ति-पाठ करवायें। 6) पीपल-वृक्ष को जल चढ़ायें।

मृत्यु पंचक में हो तो: 5 आटे/कुश की पुतलियाँ बनायें। शव के साथ अग्नि-दाह। पूर्ण विधि-संस्कार। पंडित से नवग्रह-शान्ति-पाठ।

यात्रा अनिवार्य हो तो: 1) पीला-कपड़ा साथ रखें। 2) हनुमान-चालीसा। 3) चलने से पहले गुड़ खायें। 4) घर से दक्षिण-दिशा छोड़कर — पहले उत्तर/पूर्व जायें — फिर मूल-दिशा।

भवन-छत डालनी हो: मूहूर्त को बदलें। यदि सम्भव न हो — "वास्तु-शान्ति-पाठ", रुद्राभिषेक, ब्राह्मण-भोज।

📊5 प्रकार के पंचक — स्वामी, फल, सावधानी

प्रकारशुरू-होने का वारदोष-तीव्रताविशेष-वर्जना
रोग-पंचकरविवार★★★रोग-वृद्धि, चिकित्सा वर्जित, यात्रा वर्जित
राज-पंचकसोमवार★ (सबसे-कम-दोष)राज-कार्य के लिए शुभ! नौकरी-योग
अग्नि-पंचकमंगलवार★★★★आग, दुर्घटना, निर्माण-कार्य वर्जित
(नियमित)बुधवार/गुरुवार★★ (मध्यम)5 मूल-वर्जनाएँ-मात्र
चोर-पंचकशुक्रवार★★★चोरी, धन-हानि, यात्रा-वर्जित
मृत्यु-पंचकशनिवार★★★★★ (सर्वाधिक)मृत्यु पर परिवार में 5 और मृत्यु

राज-पंचक (सोमवार-शुरू) सबसे-कम-दोष। मृत्यु-पंचक (शनिवार-शुरू) सबसे-तीव्र।

📊5 पंचक-वर्जित कार्य — विस्तृत-विवरण

क्रमवर्जित-कार्यक्यों?अपवाद-नियम
1दक्षिण-दिशा यात्रायम-दिशा, मृत्यु-तत्त्वयदि अनिवार्य — हनुमान-चालीसा-पाठ
2ईंधन-संग्रह (लकड़ी, कोयला, गोबर-छप्पर)आग का डरजरूरी हो तो कलश-स्थापना-पूजन
3बिस्तर-निर्माण (खाट, चारपाई)रोग-संकेतराज-पंचक में आंशिक-स्वीकार्य
4छप्पर-छत निर्माण (मकान-छत)परिवार-कलह-मृत्यु-तुल्य कष्टरुद्राभिषेक करवाकर — कुछ-शाखा
5शव-संस्कारपरिवार में 5 और मृत्यु (पारम्परिक)5 आटे की मूर्तियाँ साथ-दहन = निवारण

📋पंचक-कार्य अनिवार्य हो — 6-चरण निवारण-विधि

  1. 1

    पंचक की तीव्रता पहचानें

    किस-वार से शुरू (राज/अग्नि/चोर/रोग/मृत्यु/नियमित)। राज-पंचक हो — कम-सावधानी। मृत्यु-पंचक हो — विशेष-उपाय।

  2. 2

    गणपति-स्मरण

    पंचक-कार्य से पूर्व "वक्रतुण्ड महाकाय" 11 बार। सब-विघ्न-नाश।

  3. 3

    हनुमान-चालीसा

    हनुमान-चालीसा 11 बार। बजरंग-बाण-पाठ। हनुमान-जी पंचक-दोष-निवारक।

  4. 4

    गायत्री-मन्त्र + महा-मृत्युञ्जय

    गायत्री-मन्त्र 108 बार। महा-मृत्युञ्जय-मन्त्र 108 बार। जीवन-रक्षा।

  5. 5

    घर पर "ॐ नमः शिवाय" अंकन

    घर के आगे/पीछे/ऊपर "ॐ नमः शिवाय" + स्वस्तिक-चिह्न। पीपल-वृक्ष को जल-अर्पण।

  6. 6

    ब्राह्मण-शान्ति-पाठ

    अनुभवी-ब्राह्मण से पंचक-शान्ति-पाठ। नवग्रह-शान्ति। दान — काले-तिल, सरसों-तेल। फिर कार्य।

⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें

  • पंचक-काल में दीर्घ-यात्रा (विशेषतः दक्षिण)

    क्यों: दक्षिण-यम-दिशा। पंचक-काल = ऊर्जा-असंतुलन। यात्रा-दुर्घटना का जोखिम।

    सही उपाय: पंचक-काल में दीर्घ-यात्रा टालें। अनिवार्य हो — हनुमान-चालीसा + पीला-कपड़ा साथ। दक्षिण-दिशा से बचें।

  • पंचक में नया-बिस्तर/चारपाई बनवाना

    क्यों: पारम्परिक-वर्जना। बिस्तर-निर्माण-पंचक = बिस्तर-पर-रोग-संकेत।

    सही उपाय: पंचक-समाप्ति के बाद। यदि अनिवार्य — कलश-स्थापना + ब्राह्मण-पूजन।

  • पंचक में मकान-छत-डालना

    क्यों: सबसे-तीव्र वर्जना। पारम्परिक — परिवार में मृत्यु-तुल्य-कष्ट।

    सही उपाय: मूहूर्त बदलें — पंचक से बाहर। अनिवार्य हो — रुद्राभिषेक + वास्तु-शान्ति-पाठ + ब्राह्मण-भोज।

  • मृत्यु-पंचक में सीधे शव-दाह

    क्यों: पारम्परिक-मान्यता: मृत्यु-पंचक में मृत्यु = परिवार में 5 और मृत्यु। बिना-निवारण = श्राप।

    सही उपाय: 5 आटे/कुश की मानव-आकार-पुतलियाँ बनायें। शव के साथ अग्नि-दाह। पूर्ण-विधि-संस्कार। पंडित से नवग्रह-शान्ति।

  • राज-पंचक में भी डरना — अति-सावधानी

    क्यों: राज-पंचक (सोमवार-शुरू) = सबसे-कम-दोष। नौकरी, सरकारी-कार्य के लिए शुभ! अति-भय व्यर्थ।

    सही उपाय: राज-पंचक में राज-कार्य, सरकारी-नौकरी-संबंधी कार्य अधिक-शुभ। केवल 5 मूल-वर्जनाएँ ध्यान।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचक कितने दिन का होता है?

चन्द्रमा कुम्भ-मीन-राशि में 5 दिन के लगभग रहता है — पंचक-काल। कभी 4 दिन-23 घंटे, कभी 5 दिन-2 घंटे। मास में एक बार। वर्ष में 12-13 बार पंचक।

क्या पंचक में विवाह कर सकते हैं?

विवाह की "पक्की तिथि" (तिलक, सगाई, विवाह) पंचक में नहीं। पर "बातचीत" चालू रख सकते हैं। यदि अति-आवश्यक — पंडित से शान्ति-पाठ कर। पर अन्य अधिक-शुभ-तिथियाँ हैं तो टालना श्रेष्ठ।

क्या पंचक हर जगह एक-समय होता है?

चन्द्रमा की राशि-स्थिति विश्व-व्यापी एक-ही। पर समय-क्षेत्र (Time Zone) के कारण भारतीय-IST, अमेरिकी-EST, ऑस्ट्रेलियन-AEST में पंचक के शुरू-अन्त के समय भिन्न दिखते हैं। मूल-काल वही।

क्या पंचक का वैज्ञानिक-आधार है?

वैज्ञानिक-दृष्टि से कोई प्रमाण नहीं। पारम्परिक-मान्यता पर आधारित। मनोवैज्ञानिक-प्रभाव — श्रद्धा-वालों पर डर का असर। आधुनिक-दृष्टि — श्रद्धा-नियम-अनुसार पालन करें, पर अनिवार्य-कार्य न रोकें।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।