राहु काल गाइड

✦ राहु काल ✦

✦ दैनिक अशुभ काल · यमगंड · गुलिक काल ✦

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✦ राहु काल क्या है?

राहु काल (Rahu Kalam) वैदिक ज्योतिष में प्रतिदिन आने वाला एक अशुभ समय है, जो लगभग 1.5 घंटे (90 मिनट) का होता है। यह समय राहु ग्रह के प्रभाव में माना जाता है। इस अवधि में कोई भी नया या शुभ कार्य आरम्भ करना वर्जित है।

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✦ राहु कौन है?

वैदिक ज्योतिष में राहु एक छाया ग्रह है — यह कोई भौतिक पिंड नहीं, बल्कि चंद्रमा की कक्षा का उत्तरी छेदन बिंदु (North Lunar Node) है। पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन के समय राहु ने देवताओं का भेष बनाकर अमृत पी लिया था। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर काट दिया — कटा हुआ सिर राहु बना और धड़ केतु बना। राहु को भ्रम, बाधा, और अचानक परिवर्तन का कारक माना जाता है।

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✦ गणना विधि

राहु काल की गणना सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 8 बराबर भागों में विभाजित करके की जाती है। प्रत्येक दिन राहु काल एक निश्चित क्रम में आता है।

✦ प्रत्येक दिन का राहु काल ✦

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सोमवार (Monday)

दूसरा भाग · 2nd slot

🚫 7:30 AM – 9:00 AM
♂️

मंगलवार (Tuesday)

सातवाँ भाग · 7th slot

🚫 3:00 PM – 4:30 PM
☿️

बुधवार (Wednesday)

पाँचवाँ भाग · 5th slot

🚫 12:00 PM – 1:30 PM

गुरुवार (Thursday)

छठा भाग · 6th slot

🚫 1:30 PM – 3:00 PM
♀️

शुक्रवार (Friday)

चौथा भाग · 4th slot

🚫 10:30 AM – 12:00 PM

शनिवार (Saturday)

तीसरा भाग · 3rd slot

🚫 9:00 AM – 10:30 AM
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रविवार (Sunday)

आठवाँ भाग · 8th slot

🚫 4:30 PM – 6:00 PM

✦ अनुमानित समय दिल्ली के लिए। सटीक समय सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर — स्थान के अनुसार बदलता है। ✦

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✦ याद रखने का सूत्र ✦

✦ "मा-बु-गु-शु-शा-रा-सो" ✦

Mother Brings Good Sweets Saturday Rarely Sunday Monday

क्रम: सोमवार (7:30) → मंगलवार (3:00) → बुधवार (12:00) → गुरुवार (1:30) → शुक्रवार (10:30) → शनिवार (9:00) → रविवार (4:30)

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✦ यमगंड व गुलिक काल ✦

✦ राहु काल के अतिरिक्त, दो अन्य अशुभ काल भी प्रतिदिन आते हैं —

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यमगंड (Yamaganda)

यमराज (मृत्यु के देवता) से जुड़ा अशुभ काल। यह भी दिन को 8 भागों में बाँटकर निर्धारित — पर अलग क्रम में।

गुलिक काल (Gulika Kaal)

गुलिक को शनि ग्रह का पुत्र माना जाता है। कुछ ज्योतिषाचार्य इसे राहु काल से भी अधिक अशुभ मानते हैं।

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✦ राहु काल में क्या न करें ✦

नया व्यापार या दुकान का शुभारम्भ

नई यात्रा पर प्रस्थान

विवाह, सगाई व अन्य शुभ संस्कार

नया वाहन या संपत्ति का क्रय

महत्वपूर्ण अनुबंध या समझौते

नई नौकरी या कार्य का प्रारम्भ

✦ राहु काल में क्या कर सकते हैं ✦

पहले से चल रहे कार्य जारी रखना

दैनिक दिनचर्या

ध्यान, पूजा व मंत्र जप (विशेषकर राहु मंत्र)

पूर्व-निर्धारित बैठकें

आपातकालीन कार्य

✦ आज का राहु काल देखें

अपने शहर के अनुसार आज का सटीक राहु काल, यमगंड व गुलिक काल जानने के लिए पंचांग पेज पर जाएँ।

✦ समय का सम्मान करो, शुभ मुहूर्त में कार्य आरम्भ करो ✦

राहु काल — दिन का वह समय जिसे शास्त्रों में अत्यंत अशुभ माना गया है। पारम्परिक हिन्दू ज्योतिष के अनुसार इस अवधि में कोई भी नया कार्य आरम्भ करना वर्जित है। राहु एक छाया ग्रह है — पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब देवताओं और असुरों ने अमृत को बाँट रहे थे, राहु ने देवताओं का भेष धारण कर अमृत पी लिया। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर काट दिया — कटा हुआ सिर "राहु" बना और शरीर "केतु"।

राहु काल को "काल हानि" अथवा "अशुभ काल" भी कहते हैं। दैनिक समय का लगभग 1/8 भाग — यानी सूर्योदय से सूर्यास्त तक की अवधि का आठवाँ हिस्सा — राहु के प्रभाव में आता है। प्रत्येक वार के लिए यह एक निश्चित खण्ड में आता है, परंतु इसकी सटीक समय-सीमा स्थान-स्थान बदलती है क्योंकि सूर्योदय एवं सूर्यास्त के समय में भी अंतर होता है।

राहु काल की गणना

राहु काल की गणना सरल है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 8 बराबर भागों में बाँटा जाता है। फिर प्रत्येक वार के लिए विशिष्ट खण्ड राहु काल कहलाता है। मंगलवार को 2रा खण्ड, शुक्रवार को 3रा, बुधवार को 4था, गुरुवार को 5वाँ, शनिवार को 6ठा, सोमवार को 7वाँ, और रविवार को 8वाँ — रविवार का राहु काल सबसे अंतिम होता है।

उदाहरण के लिए, यदि दिल्ली में सूर्योदय 5:42 AM और सूर्यास्त 6:55 PM है — कुल दिन की अवधि 13 घंटे 13 मिनट = 793 मिनट। 793 ÷ 8 = 99.13 मिनट प्रति खण्ड। मंगलवार का राहु काल खण्ड 2 में, यानी 5:42 AM + 99.13 = 7:21 AM से 9:00 AM तक होगा।

अनेक लोग राहु काल के लिए "1:30-3:00 PM मंगलवार" जैसे निश्चित समय याद रखते हैं — यह गलत है। यह केवल औसत है। आपके वास्तविक स्थान और दिनांक के अनुसार समय 30-60 मिनट तक बदल सकता है। ग्रीष्मकाल में दिन लम्बे होने से राहु काल भी 90+ मिनट तक होता है, शीतकाल में 70 मिनट तक भी कम हो सकता है।

याद रखने का सरल सूत्र है — "मंगल शुक्र बुध गुरु, शनि सोम रवि प्रिय" — यह सात वारों के राहु काल खण्ड का क्रम है (2, 3, 4, 5, 6, 7, 8)। प्रत्येक वार के लिए सम्बन्धित खण्ड में राहु काल आता है।

राहु काल में क्या वर्जित है

राहु काल में पारम्परिक रूप से निम्न कार्य वर्जित माने गए हैं — विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, यात्रा आरम्भ (विशेषतः लम्बी यात्रा), नवीन व्यवसाय आरम्भ, दुकान खोलना, महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर, बड़े वित्तीय निवेश, ऋण लेना अथवा देना, चिकित्सा प्रक्रिया आरम्भ, मुंडन एवं संस्कार, पूजा-अनुष्ठान का प्रारम्भ।

व्यावहारिक रूप से सामान्य दैनिक कार्य — ऑफिस जाना, स्कूल जाना, खाना खाना, सोना — राहु काल में किए जा सकते हैं। केवल विशेष "नया" अथवा "महत्वपूर्ण" कार्य वर्जित है। यदि कोई कार्य पहले से चल रहा हो (जैसे यात्रा), तो उसे जारी रखने में दोष नहीं।

कुछ ज्योतिषाचार्यों के अनुसार राहु काल में कुछ विशेष कार्य अनुकूल हैं — शत्रु-नाश, दुष्ट-शक्ति निवारण, ऋण-वसूली, गुप्त मन्त्र-जाप, तांत्रिक साधना। यह "विरुद्ध-राशि" सिद्धान्त है — राहु जिन कार्यों के लिए अशुभ है, उनके विपरीत कार्यों के लिए अनुकूल।

राहु काल की पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार राहु एक असुर था — पिता विप्रचित्ति, माता सिंहिका। समुद्र मंथन से जब अमृत निकला, भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत बाँटना आरम्भ किया। राहु ने देवता का भेष बनाकर अमृत की कुछ बूँदें पी लीं — परंतु सूर्य और चंद्र ने उसे पहचान लिया और भगवान विष्णु को बता दिया।

विष्णु ने सुदर्शन चक्र से राहु का सिर काट दिया। परंतु तब तक अमृत उसके कण्ठ में पहुँच चुका था — इसलिए सिर अमर हो गया। यही कटा हुआ सिर "राहु" है, और शरीर "केतु"। दोनों चन्द्र की कक्षा के दो छेदन-बिंदु हैं — राहु उत्तर बिन्दु (north node) और केतु दक्षिण बिन्दु (south node)। ज्योतिष में ये "छाया-ग्रह" कहलाते हैं।

सूर्य और चंद्र के विश्वासघात के कारण राहु ने प्रतिज्ञा ली कि वह सूर्य और चंद्र को निगलता रहेगा — यही ग्रहण (eclipse) की पौराणिक व्याख्या है। आधुनिक खगोल विज्ञान में राहु-केतु चन्द्रमा की कक्षा के नोड हैं — जब सूर्य, पृथ्वी, और चंद्र इन नोडों के पास हों, ग्रहण होता है।

राहु काल से सम्बन्धित अन्य अशुभ काल

राहु काल के समान दो और अशुभ काल हैं — यमगण्ड और गुलिक काल। यमगण्ड (यमराज का काल) भी दिन के 8वें भाग का एक खण्ड है, परंतु अलग वार-क्रम से: रविवार 4, सोमवार 3, मंगलवार 2, बुधवार 1, गुरुवार 7, शुक्रवार 6, शनिवार 5।

गुलिक काल (गुलिक शनि का पुत्र है) भी दिन का एक भाग है — रविवार 6, सोमवार 5, मंगलवार 4, बुधवार 3, गुरुवार 2, शुक्रवार 1, शनिवार 7। तीनों — राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल — समान रूप से अशुभ माने जाते हैं और इनमें नये कार्य से बचा जाना चाहिए।

इसके अतिरिक्त "विष्टि करण" (भद्रा) भी अशुभ है — यह करण के 8 चर प्रकारों में से एक है जो प्रत्येक मास में 8 बार आता है। भद्रा में शुभ कार्य वर्जित। हमारा कैलकुलेटर सभी अशुभ कालों — राहु, यमगण्ड, गुलिक, भद्रा — को एक साथ दिखाता है।

राहु काल के व्यावहारिक उपाय

यदि राहु काल में कोई कार्य अनिवार्य हो जाए — जैसे आपातकालीन यात्रा, चिकित्सा, अथवा बैठक — तो कुछ उपाय किए जा सकते हैं। हनुमान चालीसा का पाठ, "ॐ रां राहवे नमः" मन्त्र का 108 बार जाप, अथवा हनुमान जी की प्रार्थना — राहु के अशुभ प्रभाव को कम करते हैं।

राहु शान्ति के लिए पारम्परिक उपाय: शनिवार को नीला अथवा काला वस्त्र दान, मांस-मदिरा का त्याग, सरसों के तेल का दीपक, हनुमान जी की पूजा, गोमेद (Hessonite) रत्न धारण (योग्य ज्योतिषाचार्य के परामर्श से)।

राहु महादशा अथवा अंतर्दशा में कुछ वर्ष विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है। ये काल जीवन में बड़े परिवर्तन, अप्रत्याशित घटनाएँ, अथवा तीव्र आध्यात्मिक अनुभव ला सकते हैं। राहु महादशा 18 वर्ष की होती है — यदि यह आपकी कुंडली में अनुकूल बैठी हो तो विदेश-यात्रा, राजनीति, मीडिया जैसे क्षेत्रों में अप्रत्याशित सफलता मिल सकती है।

📊दैनिक राहु-काल — सप्ताह-वार तालिका

वारराहु-काल (दिल्ली, सामान्य)अवधि8-भाग में स्थान
रविवार04:30 PM - 06:00 PM~90 मिनट8वाँ (अंतिम)
सोमवार07:30 AM - 09:00 AM~90 मिनट2रा
मंगलवार03:00 PM - 04:30 PM~90 मिनट7वाँ
बुधवार12:00 PM - 01:30 PM~90 मिनट5वाँ
गुरुवार01:30 PM - 03:00 PM~90 मिनट6ठा
शुक्रवार10:30 AM - 12:00 PM~90 मिनट4थ
शनिवार09:00 AM - 10:30 AM~90 मिनट3रा

समय स्थान-वार बदलते हैं — हमारी साइट पर 200+ शहरों के लिए सटीक-समय।

📊राहु-काल में क्या-क्या वर्जित — श्रेणी-वार

श्रेणीवर्जितअनुमत
मांगलिक-कार्यविवाह-संस्कार, गृह-प्रवेश, मुण्डन
व्यापारनये व्यापार-प्रारम्भ, बड़े-समझौते-हस्ताक्षरचलते-व्यापार-कार्य
यात्रानया-यात्रा-प्रारम्भ, दीर्घ-यात्रापहले से चल रही यात्रा जारी
वित्तनये-निवेश, बड़े-खरीदारी, वाहन-क्रयदैनिक-खरीदारी
शिक्षापहली-कक्षा-प्रारम्भ, परीक्षा-शुरूपढ़ना, रिवीजन
चिकित्सासर्जरी (आपातकालीन-छोड़कर), नया-उपचार-प्रारम्भपहले से दवा-सेवन
धार्मिकनया-यज्ञ-दीक्षा, मन्त्र-दीक्षा-प्रारम्भदैनिक-पूजा (पूर्व-शुरू)
सामाजिकसगाई, अंगूठी-समारोहसामान्य-मिलन

📋राहु-काल जानने और अनुप्रयोग की 5-चरण विधि

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    स्थानीय-सूर्योदय-सूर्यास्त-समय जानें

    राहु-काल स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त पर आधारित — दिल्ली vs चेन्नई 30-45 मिनट का अंतर। पंचांग में अपने शहर का सूर्योदय देखें।

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    दिवस-अवधि निकालें

    दिन की कुल अवधि = सूर्यास्त - सूर्योदय (मिनट में)। उदाहरण — दिल्ली में 28 अप्रैल 2026: सूर्योदय 5:42 AM, सूर्यास्त 6:55 PM = 793 मिनट।

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    दिन को 8 भागों में बाँटें

    प्रत्येक भाग = कुल-अवधि/8। उदाहरण: 793/8 = ~99 मिनट प्रति-भाग।

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    वार के अनुसार राहु-काल वाला भाग चुनें

    रविवार 8वाँ, सोमवार 2रा, मंगलवार 7वाँ, बुधवार 5वाँ, गुरुवार 6ठा, शुक्रवार 4थ, शनिवार 3रा।

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    राहु-काल टाल कर शुभ-कार्य करें

    इस 90 मिनट के काल में नया-कार्य न करें। यदि अनिवार्य — हनुमान-चालीसा 1 बार पाठ कर शुरू करें।

⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें

  • समय-कैलकुलेटर के बिना "मंगलवार 3-4:30 PM" मानना

    क्यों: राहु-काल स्थान-वार बदलता है। दिल्ली में 3 PM जो राहु-काल हो — चेन्नई में नहीं हो। 30-45 मिनट का अंतर सामान्य।

    सही उपाय: अपने शहर के सूर्योदय/सूर्यास्त से सटीक राहु-काल निकालें। हमारी साइट पर 200+ शहर।

  • राहु-काल में दैनिक कार्य भी रोकना

    क्यों: राहु-काल केवल "नया-शुभ-कार्य" वर्जित — दैनिक कार्य चलते रहें। ऑफिस, स्कूल, खाना, सोना — सब सामान्य।

    सही उपाय: केवल विवाह-गृहप्रवेश-नया-व्यापार-यात्रा-शुरू वर्जित। बाकी सब सामान्य।

  • राहु-काल में बड़े-निवेश का निर्णय

    क्यों: राहु ग्रह "धोखा-भ्रम-अप्रत्याशित-नुकसान" का कारक। राहु-काल में किया गया निवेश-निर्णय "धोखा" का संकेत।

    सही उपाय: बड़े-निवेश-निर्णय शुभ-चौघड़िया (अमृत/शुभ/लाभ) में लें। राहु-काल में केवल अध्ययन-विश्लेषण।

  • राहु-काल में नया-वाहन-घर-संपत्ति-खरीद

    क्यों: राहु-काल में खरीदा गया सामान "अप्रत्याशित-समस्या" का कारक। पारम्परिक-मान्यता।

    सही उपाय: खरीद-समय शुभ-मुहूर्त चुनें। यदि बुकिंग पहले की है — डिलीवरी/पजेशन शुभ-समय में लें।

  • पुराने-पंचांग से निश्चित-समय देखना

    क्यों: पुराने-पंचांग में अनुमानित-निश्चित-समय हो सकता है। राहु-काल मौसमी (Seasonal) बदलता है — गर्मी में अधिक-लम्बा, सर्दी में छोटा।

    सही उपाय: दैनिक-पंचांग देखें (स्थान-वार-दिनांक-वार)। हमारे कैल्कुलेटर पर सटीक-समय।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या राहु काल वैज्ञानिक है?

राहु काल पारम्परिक हिन्दू ज्योतिष की अवधारणा है — आधुनिक विज्ञान इसे पुष्टि नहीं देता। हालांकि, करोड़ों लोग सहस्राब्दियों से इसे मानते आ रहे हैं — यह सांस्कृतिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभाव अवश्य रखता है। हम तथ्य प्रस्तुत करते हैं — मानना अथवा न मानना व्यक्तिगत निर्णय है।

क्या राहु काल में दैनिक कार्य भी वर्जित हैं?

नहीं। ऑफिस जाना, स्कूल जाना, खाना खाना — सब सामान्य कार्य अनुमत हैं। केवल "नया" अथवा "विशेष" कार्य — विवाह, गृह प्रवेश, व्यवसाय आरम्भ, यात्रा आरम्भ — वर्जित है। पहले से चल रहे कार्यों को जारी रखना दोष-रहित है।

क्या राहु काल का समय शहर के अनुसार बदलता है?

हाँ। राहु काल सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर है। दिल्ली में राहु काल का समय चेन्नई से लगभग 30-45 मिनट अलग होगा क्योंकि दोनों के सूर्योदय-सूर्यास्त भिन्न हैं। हमारा कैलकुलेटर 200+ शहरों के लिए स्थानीय समय देता है।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।