अभिजित मुहूर्त — दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ काल। संस्कृत में "अभिजित" का अर्थ है "विजयी" अथवा "अजेय"। शास्त्रों के अनुसार सम्पूर्ण दिन को 30 मुहूर्तों में बाँटा जाता है — प्रत्येक 48 मिनट का। इन 30 मुहूर्तों में से 8वाँ दिन-मुहूर्त "अभिजित" कहलाता है, जो स्थानीय सौर मध्यान्ह (solar noon) के ठीक मध्य में आता है। यह दिन का सबसे शक्तिशाली एवं शुभ काल माना जाता है।
अभिजित मुहूर्त का सबसे प्रसिद्ध उल्लेख रामायण में है — भगवान राम का राज्याभिषेक अभिजित मुहूर्त में होने वाला था (कैकेयी के वरदान से पूर्व)। महाभारत में भी अनेक स्थानों पर अभिजित मुहूर्त की महिमा वर्णित है। मुहूर्त चिन्तामणि (16वीं शताब्दी) के लेखक राम दैवज्ञ ने अभिजित को "सर्व-कार्य-सिद्धि-दायक" कहा है।
✦ अभिजित मुहूर्त की वैदिक अवधारणा
वेदों में 28वाँ नक्षत्र "अभिजित" का उल्लेख है — उत्तराषाढ़ा एवं श्रवण के बीच का छोटा खण्ड (4°)। इसका देवता ब्रह्मा है। पारम्परिक 27 नक्षत्रों में अभिजित को नहीं गिना जाता — यह केवल समय-दृष्टि से प्रयुक्त होता है। मध्यान्ह के समय जब सूर्य ठीक माथे पर होता है, तब अभिजित नक्षत्र सक्रिय होता है — इसी क्षण को "अभिजित मुहूर्त" कहा गया।
खगोलीय रूप से अभिजित मुहूर्त सूर्य के स्थानीय मध्यान्ह पर केन्द्रित है। यह "True Solar Noon" है, घड़ी के 12:00 बजे का मध्यान्ह नहीं। दिल्ली में मार्च-सितम्बर के बीच स्थानीय मध्यान्ह 12:10-12:25 PM के बीच होता है, मुम्बई में 12:30-12:45 PM के बीच (देशांतर के अनुसार)। अभिजित मुहूर्त इस मध्यान्ह से 24 मिनट पूर्व प्रारम्भ होकर 24 मिनट पश्चात् समाप्त होता है — कुल 48 मिनट।
शास्त्रीय रूप से अभिजित मुहूर्त 30-मुहूर्त-विभाजन का 8वाँ है। दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) को 15 मुहूर्तों में बाँटें — मध्य का 8वाँ अभिजित। प्रत्येक मुहूर्त 1/15 दिन-अवधि का है। ग्रीष्मकाल में दिन लम्बे होने से अभिजित भी 50+ मिनट का होता है, शीतकाल में 40 मिनट तक छोटा।
✦ अभिजित मुहूर्त की सटीक गणना
अभिजित मुहूर्त की गणना 4 चरणों में: 1) स्थानीय सूर्योदय एवं सूर्यास्त निकालें (स्थान की देशांतर एवं अक्षांश के अनुसार)। 2) मध्यान्ह = (सूर्योदय + सूर्यास्त) / 2। 3) दिन की अवधि = सूर्यास्त − सूर्योदय। 4) अभिजित प्रारम्भ = मध्यान्ह − (दिन-अवधि / 30); अभिजित समाप्त = मध्यान्ह + (दिन-अवधि / 30)।
उदाहरण: 28 अप्रैल 2026, दिल्ली। सूर्योदय 5:42 AM, सूर्यास्त 6:55 PM। दिन की अवधि = 13 घंटे 13 मिनट = 793 मिनट। मध्यान्ह = (5:42 + 18:55) / 2 = 12:18 PM। अभिजित खण्ड = 793/30 ≈ 26 मिनट प्रत्येक ओर। अभिजित मुहूर्त: 11:52 AM से 12:44 PM (52 मिनट)।
सरल अनुमान: अधिकांश दिनों में, अभिजित मुहूर्त लगभग 11:50 AM से 12:30 PM के बीच रहता है। हालांकि सटीक समय आपके शहर और दिनांक पर निर्भर करता है। हमारे कैलकुलेटर में 200+ शहरों के लिए स्थानीय अभिजित गणना उपलब्ध है।
✦ अभिजित मुहूर्त के लिए शुभ कार्य
सर्वश्रेष्ठ कार्य: नये कार्य का आरम्भ, युद्ध एवं विजय यात्रा, राज्याभिषेक एवं उच्च पद ग्रहण, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर, चुनाव लड़ना, साक्षात्कार के लिए जाना, व्यवसाय आरम्भ, नवीन प्रोजेक्ट, चिकित्सा एवं औषधि आरम्भ, परीक्षा देने जाना। अभिजित में आरम्भ किया कार्य पारम्परिक रूप से अवश्य "विजय" प्राप्त करता है।
विशेष ध्यान: हालांकि अभिजित सर्वथा शुभ है, परंतु विवाह संस्कार के लिए अभिजित मुहूर्त की सलाह नहीं दी जाती। विवाह के लिए शाम का समय अधिक उपयुक्त है। साथ ही दक्षिण दिशा की यात्रा अभिजित में वर्जित है — यह मात्र पारम्परिक नियम है।
व्यापारिक उपयोग: नये व्यवसाय का आरम्भ, दुकान का उद्घाटन, ऑफिस का प्रथम दिन, बड़े वित्तीय निवेश, सम्पत्ति क्रय, वाहन क्रय — अभिजित में अत्यंत शुभ। आधुनिक corporate समय में अभिजित में पहली मीटिंग, contract signing, product launch — इन सबको शुभ माना जाता है।
✦ बुधवार का अभिजित अपवाद
अभिजित मुहूर्त का एकमात्र अपवाद बुधवार है। बुधवार को अभिजित शुभ नहीं माना जाता — मुहूर्त चिन्तामणि स्पष्ट रूप से इसे वर्जित करता है। कारण: बुध (मरकरी) ग्रह अभिजित नक्षत्र (जिसका देवता ब्रह्मा है) के साथ अनुकूल नहीं — इसी कारण बुधवार के मध्यान्ह की ऊर्जा "विजयी" प्रकृति की नहीं रहती।
आधुनिक मत: कुछ ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि बुधवार को भी अभिजित में सामान्य कार्य किए जा सकते हैं — परंतु विशेष कार्य (विवाह, गृह प्रवेश, बड़े समझौते) टाले जाने चाहिए। यह व्यक्तिगत आस्था का विषय है।
सुरक्षित विकल्प: यदि बुधवार का अभिजित आवश्यक हो, तो विशेष शान्ति-कर्म करें — गणेश पूजा, बुध के लिए हरे वस्त्र दान, "ॐ बुं बुधाय नमः" मन्त्र का 108 बार जाप।
✦ अभिजित मुहूर्त के व्यावहारिक उदाहरण
भारत के प्रमुख शहरों के लिए अभिजित मुहूर्त (28 अप्रैल 2026, अनुमानित): दिल्ली 11:52 AM-12:44 PM, मुम्बई 12:23 PM-1:11 PM, बेंगलुरु 12:14 PM-1:01 PM, चेन्नई 11:56 AM-12:43 PM, कोलकाता 11:34 AM-12:19 PM, अहमदाबाद 12:25 PM-1:13 PM, हैदराबाद 12:08 PM-12:55 PM, पुणे 12:24 PM-1:12 PM।
अंतर देशांतर के कारण है — पूर्वी शहरों (कोलकाता) में अभिजित जल्दी, पश्चिमी शहरों (मुम्बई/अहमदाबाद) में देर से। यदि आप यात्रा कर रहे हैं, तो गन्तव्य के अभिजित का समय जाँचें।
गुरु पुष्य योग में अभिजित: यदि किसी गुरुवार को पुष्य नक्षत्र हो — इसे "गुरु पुष्य योग" कहते हैं। यदि उस दिन का अभिजित मुहूर्त लें — यह सर्वोत्तम संयोग बनता है। 2026 में यह वर्ष में 13 बार आता है।
📊भारत के 10 प्रमुख-शहरों में अभिजित-मुहूर्त (28 अप्रैल 2026)
| शहर | सूर्योदय | सूर्यास्त | मध्यान्ह | अभिजित-समय |
|---|---|---|---|---|
| दिल्ली | 5:42 AM | 6:55 PM | 12:18 PM | 11:52 AM-12:44 PM |
| मुम्बई | 6:11 AM | 7:00 PM | 12:35 PM | 12:23 PM-1:11 PM |
| कोलकाता | 5:00 AM | 6:09 PM | 11:34 AM | 11:34 AM-12:19 PM |
| चेन्नई | 5:50 AM | 6:25 PM | 12:07 PM | 11:56 AM-12:43 PM |
| बेंगलुरु | 6:01 AM | 6:32 PM | 12:16 PM | 12:14 PM-1:01 PM |
| हैदराबाद | 5:46 AM | 6:36 PM | 12:11 PM | 12:08 PM-12:55 PM |
| अहमदाबाद | 6:16 AM | 6:54 PM | 12:35 PM | 12:25 PM-1:13 PM |
| पुणे | 6:11 AM | 6:54 PM | 12:32 PM | 12:24 PM-1:12 PM |
| जयपुर | 5:50 AM | 6:51 PM | 12:20 PM | 11:55 AM-12:43 PM |
| लखनऊ | 5:24 AM | 6:33 PM | 11:58 AM | 11:42 AM-12:30 PM |
देशान्तर-वार अंतर — पूर्वी शहर (कोलकाता) में अभिजित जल्दी, पश्चिमी (मुम्बई) में देर से।
📊अभिजित-मुहूर्त — किन-कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ
| कार्य | अभिजित-में करना उचित? | विशेष-टिप्पणी |
|---|---|---|
| नये-कार्य का प्रारम्भ | ✓ सर्वोत्तम | सब विघ्न-नाशक |
| युद्ध / प्रतियोगिता | ✓ सर्वोत्तम | विजय-दायक मुहूर्त |
| राज्याभिषेक / पद-ग्रहण | ✓ सर्वोत्तम | श्री-राम का राज्याभिषेक यहीं तय था |
| गृह-प्रवेश / भूमि-पूजन | ✓ शुभ | सब वास्तु-दोष-निवारक |
| महत्त्वपूर्ण समझौते / हस्ताक्षर | ✓ शुभ | विवाद-निवारक |
| चुनाव / साक्षात्कार | ✓ शुभ | विजय-दायक |
| व्यापार-प्रारम्भ / project-launch | ✓ शुभ | दीर्घकालिक-सफलता |
| चिकित्सा-प्रारम्भ | ✓ शुभ | रोग-निवारक |
| विवाह (बुधवार-छोड़कर) | ✓ शुभ | बुधवार को वर्जित |
| यात्रा-प्रारम्भ (दीर्घ) | ⚠ सावधानी | अधिकांश यात्रा-नक्षत्र देखें |
| मृत्यु/शोक-कर्म | ✗ वर्जित | अभिजित मांगलिक-काल — शोक-वर्जित |
📋अभिजित-मुहूर्त की गणना एवं उपयोग — 5-चरण
- 1
स्थानीय सूर्योदय-सूर्यास्त-समय जानें
पंचांग या हमारी साइट से उस-दिन-शहर का सटीक सूर्योदय-सूर्यास्त। उदाहरण दिल्ली 28 अप्रैल: 5:42 AM - 6:55 PM।
- 2
दिवस-मध्यान्ह निकालें
मध्यान्ह = सूर्योदय + (सूर्यास्त - सूर्योदय)/2। उदाहरण: 5:42 + (793/2 मिनट) = 5:42 + 6:36 = 12:18 PM।
- 3
अभिजित-काल = मध्यान्ह ± 24 मिनट
अभिजित मध्यान्ह से 24 मिनट पूर्व शुरू, 24 मिनट बाद समाप्त। दिल्ली: 11:54 AM - 12:42 PM (कुल 48 मिनट)।
- 4
वार-जाँच (बुधवार-वर्जना)
यदि बुधवार है — अभिजित-मुहूर्त शुभ नहीं। मुहूर्त-चिन्तामणि स्पष्ट। अन्य 6 वार में सर्व-शुभ।
- 5
कार्य-निष्पादन
चुने-कार्य को इन 48 मिनटों के अन्दर शुरू करें। यदि कार्य लम्बा हो — कम-से-कम "प्रथम-संकल्प" अभिजित में। शेष-कार्य बाद में।
⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें
✗ अभिजित-मुहूर्त को "Fixed 11:48-12:36 हर-दिन" मानना
क्यों: अभिजित स्थानीय-सूर्योदय-सूर्यास्त के मध्य निर्भर। दिल्ली बनाम मुम्बई में 30+ मिनट का अंतर। मौसमी-अंतर (गर्मी-सर्दी) भी।
✓ सही उपाय: अपने शहर-तिथि का सटीक-समय हमारे कैल्कुलेटर से। "Fixed-time" नहीं — दैनिक-गतिशील।
✗ बुधवार को अभिजित-मुहूर्त में विवाह
क्यों: मुहूर्त-चिन्तामणि स्पष्ट: बुधवार को अभिजित नहीं। शास्त्रीय-वर्जन। पारिवारिक-बुजुर्गों का असन्तोष।
✓ सही उपाय: बुधवार छोड़कर अन्य-दिन। यदि बुधवार-कार्य अनिवार्य — अमृत/शुभ चौघड़िया चुनें।
✗ शोक-कर्म (श्राद्ध, अंतिम-संस्कार) अभिजित में
क्यों: अभिजित मांगलिक-काल। शोक-कर्म तामसिक। दोनों-तत्त्व विरोधी। शास्त्र-वर्जना।
✓ सही उपाय: शोक-कर्म दोपहर 12-3 (अपराह्न) में। अभिजित से बाहर। मांगलिक-कार्य ही अभिजित में।
✗ 48 मिनट की पूरी-अवधि छोड़कर 1-2 मिनट का संकल्प
क्यों: अभिजित का "ऊर्जा-शिखर" मध्य 24 मिनट में सर्वाधिक। केवल छोटा-संकल्प = आंशिक-लाभ।
✓ सही उपाय: पूरे 48 मिनट का उपयोग। यदि कार्य छोटा — अभिजित में पूर्ण-कार्य। यदि बड़ा — कम-से-कम "मुख्य-संकल्प + प्रथम-कार्य" अभिजित में।
✗ अभिजित को "लग्न" समझना
क्यों: अभिजित = "मुहूर्त" (समय-काल)। लग्न = "उदय-राशि"। दोनों भिन्न-अवधारणा। अभिजित में लग्न-शुद्धि अलग से देखी जाती।
✓ सही उपाय: अभिजित-समय में जो लग्न उदित हो — वह अलग। विवाह में लग्न-शुद्धि भी देखें।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अभिजित मुहूर्त एवं अभिजित नक्षत्र क्या एक हैं?▼
दोनों सम्बन्धित परंतु भिन्न हैं। अभिजित नक्षत्र आकाशीय 28वाँ नक्षत्र है (4° का छोटा खण्ड)। अभिजित मुहूर्त दिन का 8वाँ मुहूर्त है (48 मिनट)। दोनों का देवता ब्रह्मा है — इसी कारण नाम। आधुनिक पंचांग में नक्षत्र-स्थिति में अभिजित नहीं गिना जाता, केवल समय में।
क्या अभिजित मुहूर्त सब दिन उपलब्ध है?▼
हाँ। प्रत्येक दिन अभिजित मुहूर्त होता है — सूर्योदय और सूर्यास्त के मध्य। यह कभी "रद्द" नहीं होता। केवल बुधवार पर पारम्परिक रूप से शुभ नहीं माना जाता। अन्य 6 वारों में सर्वथा शुभ।
अभिजित में काम करने पर सफलता गारंटी है?▼
गारंटी नहीं — परंतु सम्भावना बढ़ती है। अभिजित एक "अनुकूल वातावरण" है। सफलता के लिए कर्म, परिश्रम, सही निर्णय भी आवश्यक। मुहूर्त एक "अच्छी शुरुआत" देता है — आगे का यश आपके प्रयास पर निर्भर।
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सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।