✦ चौघड़िया क्या है? ✦
चौघड़ियावैदिक ज्योतिष का एक प्राचीन समय-निर्धारण पद्धति है जो दिन और रात्रि को आठ-आठ भागों में विभाजित करती है। शब्द "चौघड़िया" संस्कृत के "चतुर्घटिका" से आया है — चार घटी (लगभग 96 मिनट) की अवधि। हर चौघड़िया एक विशेष ग्रह से शासित होता है और शुभ या अशुभ माना जाता है।
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है — इन्हें "दिन के चौघड़िया" कहते हैं। इसी प्रकार सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक के समय को आठ भागों में बाँटा जाता है — "रात्रि के चौघड़िया"। चौघड़िया की अवधि स्थान और दिन के अनुसार बदलती रहती है क्योंकि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में अंतर होता है।
सात प्रकार के चौघड़िया
- अमृत — चन्द्र शासित — सर्वश्रेष्ठ शुभ चौघड़िया। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य, यात्रा, पूजा-पाठ, विवाह आदि के लिए सर्वोत्तम।
- शुभ — गुरु शासित — विवाह, गृह प्रवेश, मुहूर्त, नई परियोजनाओं हेतु अत्यंत शुभ।
- लाभ — बुध शासित — व्यापार, निवेश, धन-सम्बन्धी कार्यों हेतु उत्तम।
- चर — शुक्र शासित — गतिशील स्वभाव, यात्रा एवं आवागमन के लिए शुभ।
- रोग — मंगल शासित — सामान्यत: अशुभ, परंतु शत्रुओं पर विजय या प्रतिस्पर्धा हेतु अनुकूल।
- काल — शनि शासित — नये शुभ कार्य वर्जित, परंतु धन संचय हेतु अनुकूल।
- उद्वेग — सूर्य शासित — सरकारी कार्य व अधिकारियों से भेंट के लिए उपयुक्त।
चौघड़िया का उपयोग कैसे करें?
कोई भी नया कार्य आरम्भ करने से पूर्व उस समय के चौघड़िया की जाँच करें। यदि वह अमृत, शुभ, लाभ या चर चौघड़िया है तो कार्य सफल होने की सम्भावना अधिक होती है। रोग, काल, उद्वेग चौघड़िया में नये कार्यों से बचना चाहिए। हालांकि अपवादस्वरूप — रोग में प्रतिस्पर्धा, काल में धन संचय, और उद्वेग में सरकारी कार्य अनुकूल माने जाते हैं।
हमारे चौघड़िया कैलकुलेटर का उपयोग करके आप अपने शहर के सटीक सूर्योदय व सूर्यास्त के अनुसार आज के सभी 16 चौघड़िया (8 दिन + 8 रात) देख सकते हैं। हम Lahiri Ayanamsa पर आधारित Vedic खगोलीय गणना का उपयोग करते हैं जो ±2 मिनट की सटीकता देती है।
चौघड़िया का दैनिक क्रम
दिन के पहले चौघड़िया का स्वामी ग्रह उस दिन के स्वामी ग्रह से निर्धारित होता है। उदाहरण: रविवार को दिन का पहला चौघड़िया उद्वेग (सूर्य) से शुरू होता है, सोमवार को अमृत (चन्द्र) से, मंगलवार को रोग (मंगल) से, इत्यादि। आठ चौघड़िया का क्रम होता है: स्वामी → शनि → गुरु → मंगल → सूर्य → शुक्र → बुध → चन्द्र (पुनः)।
चौघड़िया एवं अन्य मुहूर्त पद्धतियाँ
चौघड़िया एक त्वरित और सरल मुहूर्त-निर्धारण पद्धति है। अधिक विस्तृत मुहूर्त गणना के लिए तिथि, नक्षत्र, योग, करण सहित पंचांग के पाँच अंगों का अध्ययन किया जाता है। महत्वपूर्ण कार्यों जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन इत्यादि के लिए सम्पूर्ण पंचांग व कुंडली विश्लेषण की सलाह दी जाती है। चौघड़िया को सामान्य दैनिक कार्यों, यात्रा, व्यापारिक निर्णय, साक्षात्कार जैसे कार्यों के लिए सर्वोत्तम माना जाता है।
राहु काल से अंतर
राहु काल दिन का एक विशेष अशुभ समय है जो लगभग डेढ़ घंटा चलता है — इसमें कोई भी शुभ कार्य आरम्भ नहीं किया जाता। चौघड़िया दिन का सम्पूर्ण विभाजन है (16 भाग) जबकि राहु काल केवल एक 90 मिनट का अशुभ खण्ड है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं — चौघड़िया चुनते समय राहु काल से अवश्य बचें।