शुभ दिन 2026

श्री शुभ दिन

— अबूझ मुहूर्त एवं पुष्य नक्षत्र दिन — २०२६ —

सर्वोत्तम शुभ दिन २०२६

नवीन कार्य आरम्भ हेतु अबूझ मुहूर्त — वे दिन जिनमें अलग से मुहूर्त देखने की आवश्यकता ही नहीं।

🌟 सर्वोत्तम ५ शुभ दिन

20अप्र
💎

अक्षय तृतीया

📅 20 अप्रैल 2026

शुभ

अक्षय फल — कोई भी कार्य चिरस्थायी

14जनवर
☀️

मकर संक्रान्ति

📅 14 जनवरी 2026

शुभ

उत्तरायण प्रारम्भ

8नवम्
🪔

दीवाली

📅 8 नवम्बर 2026

शुभ

धन-समृद्धि दिवस

6नवम्
💰

धनतेरस

📅 6 नवम्बर 2026

शुभ

सोना-चाँदी-वाहन क्रय हेतु श्रेष्ठ

19मार्
🌅

गुड़ी पाडवा / उगादि

📅 19 मार्च 2026

शुभ

हिन्दू नववर्ष

पुष्य नक्षत्र दिन (मासिक)

पुष्य "नक्षत्रों का राजा" है — सोना एवं अन्य खरीदी हेतु सर्वश्रेष्ठ। गुरु पुष्य एवं रवि पुष्य विशेष शुभ।

5 Jan 2026 (Mon)

1 Feb 2026 (Sun)

1 Mar 2026 (Sun)

28 Mar 2026 (Sat)

24 Apr 2026 (Fri)

21 May 2026 (Thu)

18 Jun 2026 (Thu)

15 Jul 2026 (Wed)

12 Aug 2026 (Wed)

8 Sep 2026 (Tue)

5 Oct 2026 (Mon)

1 Nov 2026 (Sun)

29 Nov 2026 (Sun)

26 Dec 2026 (Sat)

🌟

अबूझ मुहूर्त

इन दिनों इतने शुभ हैं कि किसी अलग मुहूर्त की आवश्यकता ही नहीं —

💎अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया)
🏹विजयादशमी / दशहरा
🌅कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (बेस्तू वरस)
🌸बसन्त पंचमी
🌙देव उठनी एकादशी

शुभ दिन के घटक

📅शुभ तिथि (१, २, ३, ५, ७, १०, ११, १३)
शुभ नक्षत्र (पुष्य, हस्त, अनुराधा, रोहिणी, स्वाती)
🪐शुभ वार (सोम, बुध, गुरु, शुक्र)
🌟शुभ योग (सिद्धि, अमृत, सर्वार्थ सिद्धि)
🌙अनुकूल चन्द्रबल एवं ताराबल

— शुभ दिन में आरम्भ, सर्व कार्य सिद्धि एवं समृद्धि —

शुभ दिन — जीवन के विशेष अवसरों के लिए सर्वोत्तम तिथियों का चयन। हिन्दू ज्योतिष में प्रत्येक दिन का अपना विशिष्ट महत्व है — कुछ दिन सर्वथा शुभ, कुछ अशुभ, कुछ विशेष कार्यों हेतु अनुकूल। शुभ दिन का निर्धारण पंचांग के पाँच अंगों — तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार — के संयोजन से होता है।

शुभ दिन की पहचान पारम्परिक हिन्दू जीवन का अंग है। विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, अन्नप्राशन, उपनयन, व्यवसाय आरम्भ, यात्रा — प्रत्येक के लिए विशिष्ट शुभ दिन हैं। इस लेख में हम 2026 के सभी प्रमुख शुभ दिन, अबूझ मुहूर्त, गुरु पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, एवं रवि पुष्य योग का विस्तृत अध्ययन करेंगे।

अबूझ मुहूर्त — बिना मुहूर्त देखे शुभ दिन

अबूझ मुहूर्त वे विशेष दिन हैं जब किसी भी कार्य हेतु मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं — पूरा दिन सर्वथा शुभ। यह दिन इतने शुभ माने जाते हैं कि "अबूझ" (बिना खोजे) मुहूर्त माने जाते हैं।

अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया, 20 अप्रैल 2026) — सर्वोपरि अबूझ मुहूर्त। पूरे वर्ष का सबसे शुभ दिन। शास्त्रों के अनुसार इस दिन किया गया कोई भी कार्य "अक्षय" (अनन्त) फल देता है। विवाह, गृह प्रवेश, सम्पत्ति क्रय, सोना-चांदी क्रय, व्यवसाय आरम्भ — सब शुभ। पूरे भारत में अनेक विवाह इसी दिन सम्पन्न होते हैं।

भीष्म अष्टमी (माघ शुक्ल अष्टमी, 26 जनवरी 2026) — दूसरा प्रमुख अबूझ मुहूर्त। महाभारत के पितामह भीष्म ने इसी दिन प्राण त्यागे। पितृ-कार्य के लिए विशेष शुभ। अन्य कार्यों हेतु भी अनुकूल।

विजयादशमी / दशहरा (आश्विन शुक्ल दशमी, 20 अक्टूबर 2026) — तीसरा अबूझ मुहूर्त। भगवान राम की रावण पर विजय। शस्त्र-पूजन, वाहन-पूजन, नये कार्य आरम्भ — सब शुभ। हिन्दू नव वर्ष (कुछ क्षेत्रों में)।

देवोत्थानी एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी, 21 नवम्बर 2026) — चौथा अबूझ मुहूर्त। चातुर्मास का अंत — विवाह सीज़न का प्रारम्भ। 4 मास के विश्राम के बाद देवताओं का जागरण।

गुड़ी पाडवा / उगादि (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, 19 मार्च 2026) — हिन्दू नव वर्ष। नये कार्य-संकल्प हेतु शुभ। बसंत पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी, 24 जनवरी 2026) — माता सरस्वती-कृपा हेतु। शिक्षा-आरम्भ, अक्षर-लेखन हेतु विशेष।

गुरु पुष्य योग — महाशुभ संयोग

गुरु पुष्य योग वर्ष का सबसे शुभ संयोग है — जब गुरुवार को पुष्य नक्षत्र हो। पुष्य "नक्षत्रों का राजा" है (देवता बृहस्पति, स्वामी शनि), गुरुवार बृहस्पति का दिन। दोनों का संयोग दिव्य ज्ञान, समृद्धि, एवं सर्व-कार्य-सिद्धि देता है। वर्ष में 13 बार आता है।

2026 में गुरु पुष्य योग की तिथियाँ: 22 जनवरी, 19 फरवरी, 19 मार्च, 16 अप्रैल, 14 मई, 11 जून, 9 जुलाई, 6 अगस्त, 3 सितम्बर, 1 अक्टूबर, 29 अक्टूबर, 26 नवम्बर, 24 दिसम्बर। प्रत्येक तिथि सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक शुभ।

गुरु पुष्य पर सर्वोत्तम कार्य: सोना-चांदी क्रय (अक्षय तृतीया के अतिरिक्त), सम्पत्ति क्रय, वाहन क्रय, व्यवसाय आरम्भ, बैंक खाता खोलना, बड़े वित्तीय निवेश, धार्मिक संस्कार, गुरु-दीक्षा।

सर्वार्थ सिद्धि योग एवं अमृत सिद्धि योग

सर्वार्थ सिद्धि योग — जब विशेष वार + विशेष नक्षत्र का संयोग हो। यह वर्ष में 100+ बार आता है। उदाहरण: रविवार + अश्विनी/पुष्य/उत्तरा फाल्गुनी/उत्तराषाढ़ा/उत्तर भाद्रपद। सोमवार + रोहिणी/मृगशिरा/पुष्य/अनुराधा/श्रवण। मंगलवार + अश्विनी/उत्तर भाद्रपद/अनुराधा/मूल। बुधवार + अनुराधा/कृत्तिका/रोहिणी/मृगशिरा। गुरुवार + पुष्य/अनुराधा/रेवती/अश्विनी। शुक्रवार + अश्विनी/पुनर्वसु/अनुराधा/श्रवण/रेवती। शनिवार + रोहिणी/स्वाती/विशाखा/अनुराधा।

सर्वार्थ सिद्धि योग में आरम्भ किया कोई भी कार्य "सर्व-अर्थ" (सभी इच्छाओं) की सिद्धि देता है। दैनिक कार्यों, यात्रा, साक्षात्कार, मीटिंग के लिए विशेष शुभ।

अमृत सिद्धि योग — सर्वार्थ सिद्धि का विशेष रूप। सात विशेष वार-नक्षत्र संयोग: रविवार + हस्त, सोमवार + मृगशिरा, मंगलवार + अश्विनी, बुधवार + अनुराधा, गुरुवार + पुष्य, शुक्रवार + रेवती, शनिवार + रोहिणी। यह संयोग दिव्य अमृत के समान फल देते हैं — दीर्घायु एवं स्थायी सफलता।

रवि पुष्य योग एवं अन्य संयोग

रवि पुष्य योग — जब रविवार को पुष्य नक्षत्र हो। गुरु पुष्य से कम प्रसिद्ध परंतु अत्यंत शुभ। 2026 में रवि पुष्य की तिथियाँ: 4 जनवरी, 1 फरवरी, 1 मार्च, 29 मार्च, 26 अप्रैल, 24 मई, 21 जून, 19 जुलाई, 16 अगस्त, 13 सितम्बर, 11 अक्टूबर, 8 नवम्बर, 6 दिसम्बर।

द्विपुष्कर एवं त्रिपुष्कर योग — जब विशेष तिथि (1, 6, 11) + विशेष वार (मंगल, शनि, रवि) + विशेष नक्षत्र (कृत्तिका, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा अथवा पुनर्वसु, विशाखा, उत्तर भाद्रपद) संयोग बनाएँ। द्विपुष्कर: कार्य का फल 2 गुणा। त्रिपुष्कर: फल 3 गुणा।

रवियोग एवं ब्रह्मयोग — रवियोग में सूर्य की प्रबल कृपा होती है — सरकारी कार्य, नेतृत्व-कार्य हेतु शुभ। ब्रह्मयोग ज्ञान-कार्य, शिक्षण, धर्म-कार्य हेतु शुभ।

सिद्ध योग, साध्य योग — दोनों सर्व-कार्य-शुभ। शुभ ग्रहों का प्रभावी संयोग। पंचांग में दैनिक रूप से सूचीबद्ध।

कार्य-विशिष्ट शुभ दिन

विवाह: माघ-फाल्गुन-वैशाख-ज्येष्ठ-मार्गशीर्ष मास, शुक्ल पक्ष की द्वितीया-तृतीया-पंचमी-सप्तमी-दशमी-एकादशी-त्रयोदशी, सोमवार/बुधवार/गुरुवार/शुक्रवार, रोहिणी/मृगशिरा/मघा/उत्तरा फाल्गुनी/हस्त/स्वाती/अनुराधा/मूल/उत्तराषाढ़ा/उत्तर भाद्रपद/रेवती नक्षत्र।

गृह प्रवेश: माघ-फाल्गुन-वैशाख-ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष शुभ तिथियाँ, सोमवार/बुधवार/गुरुवार/शुक्रवार, अश्विनी/रोहिणी/पुनर्वसु/पुष्य/उत्तरा फाल्गुनी/हस्त/स्वाती/अनुराधा/श्रवण/रेवती नक्षत्र।

व्यवसाय आरम्भ: बुध/गुरु/शुक्र वार सर्वोत्तम। पुष्य/हस्त/स्वाती/अनुराधा/उत्तरा फाल्गुनी/उत्तराषाढ़ा/उत्तर भाद्रपद नक्षत्र। शुक्ल पक्ष द्वितीया/तृतीया/पंचमी/दशमी/एकादशी।

वाहन क्रय: शुक्र/गुरु/बुध वार। पुष्य/अश्विनी/रेवती/हस्त/चित्रा/अनुराधा/स्वाती नक्षत्र। अक्षय तृतीया, धनतेरस, दिवाली विशेष शुभ।

सोना-चांदी क्रय: अक्षय तृतीया (सर्वोत्तम), धनतेरस, दिवाली, गुरु पुष्य योग। बुध/गुरु/शुक्र वार।

मुंडन: अश्विनी/मृगशिरा/पुनर्वसु/पुष्य/हस्त/चित्रा/स्वाती/जेष्ठा/श्रवण/धनिष्ठा/शतभिषा/रेवती नक्षत्र। सोमवार/बुधवार/गुरुवार/शुक्रवार/शनिवार।

अन्नप्राशन: मृगशिरा/पुनर्वसु/पुष्य/हस्त/चित्रा/स्वाती/अनुराधा/श्रवण/रेवती नक्षत्र। 6, 8, अथवा 10 मास पूर्ण होने पर।

📊7 वार — स्वामी, स्वभाव, श्रेष्ठ-कार्य

वारस्वामीस्वभावश्रेष्ठ-कार्यटालें
रविवारसूर्यपुरुषार्थ, यशसरकारी-कार्य, राज-कीयविवाह, यात्रा-दक्षिण
सोमवारचन्द्रमन, स्थिरताविवाह, गृह-प्रवेश, यात्रा, सम्पत्ति-क्रय
मंगलवारमंगलऊर्जा, क्रोधसेना-कार्य, खेल, हनुमान-पूजाविवाह, यात्रा-शुरू
बुधवारबुधबुद्धि, व्यापारव्यापार-प्रारम्भ, शिक्षा, हस्ताक्षरअभिजित-मुहूर्त (वर्जित)
गुरुवारगुरुधर्म, समृद्धिविवाह, गृह-प्रवेश, सब-शुभ-कार्य
शुक्रवारशुक्रसौन्दर्य, प्रेम, कलाविवाह-सगाई, खरीदारी, कलायुद्ध-कार्य
शनिवारशनिसंयम, सेवासेवा, ध्यान, अंतिम-संस्कारविवाह, उत्सव

सोम/बुध/गुरु/शुक्र अधिकांश-कार्य के लिए श्रेष्ठ। मंगल/शनि/रवि विशेष-कार्य के लिए।

📊2026 के विशेष शुभ-दिन (अबूझ-मुहूर्त + त्यौहार)

तिथिदिनांकविशेषताश्रेष्ठ-कार्य
बसन्त-पंचमी23 जनवरी 2026 (शुक्र)सरस्वती-पूजन-दिवसविद्या-प्रारम्भ, कला, संगीत
महाशिवरात्रि15 फरवरी 2026 (रवि)शिव-पूजा सर्वश्रेष्ठशिव-अभिषेक, मंत्र-दीक्षा
गुड़ी-पाडवा19 मार्च 2026 (गुरु)हिन्दू-नव-वर्षनया-व्यापार, घर-सजावट
राम-नवमी27 मार्च 2026 (शुक्र)राम-जन्म-दिवस (दोपहर 12)धार्मिक-कार्य
अक्षय-तृतीया20 अप्रैल 2026 (सोम)सर्वोच्च-अबूझ-मुहूर्तसब-कार्य-शुभ — मुहूर्त-न-चाहिए
गंगा-दशहरा26 मई 2026 (मंगल)गंगा-स्नान-दिवसपवित्र-स्नान, दान
गुरु-पूर्णिमा29 जून 2026 (सोम)गुरु-पूजा-दिवसमन्त्र-दीक्षा, गुरु-दर्शन
विजयादशमी19 अक्टूबर 2026 (सोम)दशहरा अबूझ-मुहूर्तसब-कार्य-शुभ, शस्त्र-पूजन
धनतेरस6 नवम्बर 2026 (शुक्र)सोना-चांदी-वाहन-खरीदारीधन-निवेश
दीपावली8 नवम्बर 2026 (रवि)लक्ष्मी-पूजनसब-कार्य-शुभ
देवउठनी-एकादशी20 नवम्बर 2026 (शुक्र)चातुर्मास-समाप्तविवाह-गृहप्रवेश-पुनः-शुरू

📋दैनिक शुभ-दिन निर्धारण की 6-चरण विधि

  1. 1

    अंग्रेज़ी-तिथि से हिन्दू-तिथि निकालें

    पंचांग में आज की तिथि देखें। शुक्ल/कृष्ण-पक्ष + तिथि-नाम।

  2. 2

    वार पहचानें

    सप्ताह का दिन। ऊपर तालिका से उसका स्वामी एवं स्वभाव।

  3. 3

    नक्षत्र देखें

    आज-का चन्द्र-नक्षत्र। 27 में से एक। शुभ-वर्ग (मृदु, स्थिर) या अशुभ-वर्ग।

  4. 4

    योग-करण देखें

    आज का योग (27 में से) एवं करण (11 में से)। शुभ-अशुभ निर्णय।

  5. 5

    राहु-काल टालें

    दैनिक 1.5 घंटे का अशुभ-काल। शुभ-कार्य न करें।

  6. 6

    अंतिम-निर्णय: समग्र शुभता

    तिथि-वार-नक्षत्र-योग-करण सब शुभ हों — सर्व-शुभ-दिन। 3-4 शुभ हों — मध्यम-शुभ। 2 या कम — टालें।

⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें

  • चातुर्मास (25 जुलाई-20 नवम्बर 2026) में मांगलिक-कार्य

    क्यों: देव-निद्रा-काल। शास्त्रीय-वर्जन। पारिवारिक-बुजुर्गों का असन्तोष।

    सही उपाय: चातुर्मास से पहले या बाद। यदि अनिवार्य — विष्णु-पूजा, सत्यनारायण-कथा।

  • मंगलवार/शनिवार/रविवार पर बड़े-शुभ-कार्य

    क्यों: इन वारों के स्वामी (मंगल, शनि, सूर्य) उग्र-स्वभाव। विवाह/उत्सव वर्जित।

    सही उपाय: सोम/बुध/गुरु/शुक्र चुनें। मंगल/शनि/रवि केवल विशेष-कार्यों के लिए।

  • अबूझ-मुहूर्त को सामान्य-दिन समझना

    क्यों: अक्षय-तृतीया, विजयादशमी जैसे अबूझ-मुहूर्त-पूरे-वर्ष का सबसे-शुभ। मुहूर्त-न-देखकर अनदेखी।

    सही उपाय: इन-दिनों किसी-भी कार्य के लिए मुहूर्त-न-चाहिए। पहले-से-योजना बनायें।

  • पौष-मास (दिसम्बर-जनवरी) में विवाह

    क्यों: खर-मास / मलमास। शास्त्रीय-वर्जन।

    सही उपाय: 2026 पौष: 14 दिसम्बर 2025-13 जनवरी 2026। फिर 14 दिसम्बर 2026 से। टालें।

  • राहु-काल/यमगण्ड में शुभ-कार्य प्रारम्भ

    क्यों: दैनिक-अशुभ-काल। शुभ-तिथि होने पर भी इन-काल वर्जित।

    सही उपाय: पंचांग में दैनिक राहु-काल देखें। उन्हें छोड़कर समय चुनें।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 का सबसे शुभ दिन कौन सा है?

अक्षय तृतीया (20 अप्रैल 2026) — सर्वोपरि अबूझ मुहूर्त। पूरे वर्ष का सबसे शुभ दिन। बिना मुहूर्त देखे कोई भी कार्य कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त गुरु पुष्य योग की 13 तिथियाँ, देवोत्थानी एकादशी (21 नवम्बर), विजयादशमी (20 अक्टूबर), बसंत पंचमी (24 जनवरी)।

क्या अमावस्या को कोई शुभ कार्य कर सकते हैं?

सामान्यतः अमावस्या वर्जित — विवाह, गृह प्रवेश आदि नहीं। अपवाद: दिवाली अमावस्या (कार्तिक) — माता लक्ष्मी की पूजा हेतु शुभ। पितृ अमावस्या — पितृ-कार्य हेतु शुभ। महालय अमावस्या — श्राद्ध हेतु। सोमवती अमावस्या — व्रत हेतु।

चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी क्यों वर्जित हैं?

ये "रिक्ता" (खाली) तिथियाँ हैं — शुभ कार्य का फल कम मानी जाती हैं। चतुर्थी गणेश-तिथि (सकट हेतु शुभ, अन्य कार्यों हेतु नहीं), नवमी काली-तिथि, चतुर्दशी शिव-तिथि (शिवरात्रि शुभ, अन्य कार्य नहीं)। अपवाद हैं विशेष व्रत-दिनों में।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।