हिन्दू कैलेंडर

✦ हिन्दू कैलेंडर ✦

✦ सूर्य-चांद्र पंचांग · द्वादश मास · षड् ऋतु · एकादशी व त्योहार ✦

✦ हिन्दू कैलेंडर क्या है?

हिन्दू कैलेंडर (पंचांग) विश्व की सबसे प्राचीन कालगणना पद्धतियों में से एक है। यह सूर्य और चंद्रमा दोनों की गति पर आधारित है — इसलिए सूर्य-चांद्र कैलेंडर (Lunisolar Calendar) कहलाता है।

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✦ हिन्दू कैलेंडर की विशेषताएँ ✦

  1. 1

    चांद्र मास

    अमावस्या से अमावस्या (अमांत) या पूर्णिमा से पूर्णिमा (पूर्णिमांत) तक एक मास।

  2. 2

    सौर वर्ष

    सूर्य के मेष राशि में प्रवेश से नया वर्ष — मेष संक्रांति।

  3. 3

    अधिक मास

    हर 2-3 वर्ष में एक अतिरिक्त मास (चंद्र-सौर वर्ष का संतुलन)।

  4. 4

    षड् ऋतुएँ

    वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर।

📜

✦ द्वादश हिन्दू मास ✦

🌸

1.

चैत्र

March-April

🍃 वसंत

🌼

2.

वैशाख

April-May

🍃 वसंत

☀️

3.

ज्येष्ठ

May-June

🍃 ग्रीष्म

🌞

4.

आषाढ़

June-July

🍃 ग्रीष्म

🌧️

5.

श्रावण

July-August

🍃 वर्षा

6.

भाद्रपद

Aug-September

🍃 वर्षा

🍂

7.

आश्विन

Sept-October

🍃 शरद

🪔

8.

कार्तिक

Oct-November

🍃 शरद

🌫️

9.

मार्गशीर्ष

Nov-December

🍃 हेमंत

❄️

10.

पौष

Dec-January

🍃 हेमंत

🌬️

11.

माघ

January-February

🍃 शिशिर

🎨

12.

फाल्गुन

February-March

🍃 शिशिर

🌸

चैत्र

March-April

चैत्र नवरात्रि

शुक्ल प्रतिपदा से नवमी (9 दिन)

राम नवमी

शुक्ल नवमी

हनुमान जयंती

पूर्णिमा

हिन्दू नव वर्ष

शुक्ल प्रतिपदा (गुड़ी पड़वा / उगादि)

🌼

वैशाख

April-May

अक्षय तृतीया

शुक्ल तृतीया (सोना खरीदने का शुभ दिन)

बुद्ध पूर्णिमा

पूर्णिमा

आषाढ़-श्रावण

July-August

गुरु पूर्णिमा

आषाढ़ पूर्णिमा

रक्षाबंधन

श्रावण पूर्णिमा

नाग पंचमी

श्रावण शुक्ल पंचमी

🐘

भाद्रपद

August-September

कृष्ण जन्माष्टमी

कृष्ण अष्टमी

गणेश चतुर्थी

शुक्ल चतुर्थी

🪷

आश्विन

September-October

शारदीय नवरात्रि

शुक्ल प्रतिपदा से नवमी (9 दिन)

दशहरा / विजयदशमी

शुक्ल दशमी

🪔

कार्तिक

October-November

करवा चौथ

कृष्ण चतुर्थी

धनतेरस

कृष्ण त्रयोदशी

दिवाली

अमावस्या

गोवर्धन पूजा

शुक्ल प्रतिपदा

भाई दूज

शुक्ल द्वितीया

छठ पूजा

शुक्ल षष्ठी

🌬️

माघ

January-February

मकर संक्रांति

14 जनवरी (सौर तिथि)

बसंत पंचमी

शुक्ल पंचमी

🎨

फाल्गुन

February-March

महा शिवरात्रि

कृष्ण चतुर्दशी

होली / होलिका दहन

पूर्णिमा

✦ एकादशी व्रत

प्रत्येक मास में दो एकादशी आती हैं — एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है — अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है। वर्ष में कुल 24 एकादशी होती हैं (अधिक मास में 2 अतिरिक्त)।

🏛️

✦ संवत प्रणालियाँ ✦

👑

विक्रम संवत (Vikram Samvat)

राजा विक्रमादित्य द्वारा स्थापित। ग्रेगोरियन से 57 वर्ष आगे (2026 = विक्रम 2083)।

🏛️

शक संवत (Shaka Samvat)

भारत सरकार का आधिकारिक कैलेंडर। ग्रेगोरियन से 78 वर्ष पीछे (2026 = शक 1948)।

🪔

गुजराती संवत (Gujarati Samvat)

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (दिवाली के बाद) से नया वर्ष आरम्भ।

✦ आज का पंचांग देखें

आज की तिथि, नक्षत्र, व्रत व त्योहार जानने के लिए पंचांग पेज पर जाएँ।

✦ कालः सर्वस्य निदानम् · काल ही सबका आधार है ✦

हिन्दू कैलेंडर — विश्व का सबसे प्राचीन व सबसे जटिल कैलेंडर सिस्टम। यह न केवल तिथियों का संगठन है, बल्कि एक सम्पूर्ण खगोलीय एवं धार्मिक प्रणाली है जो सूर्य और चन्द्र दोनों की गति पर आधारित है। इसी कारण इसे "सूर्य-चन्द्र कैलेंडर" (Lunisolar Calendar) कहा जाता है।

हिन्दू कैलेंडर का इतिहास 5,000 वर्षों से अधिक पुराना है। ऋग्वेदिक काल से ही भारतीय ऋषियों ने आकाश का सूक्ष्म अध्ययन करके इस सिस्टम को विकसित किया। आधुनिक खगोल विज्ञान कई बातों में हिन्दू कैलेंडर के प्राचीन सिद्धान्तों की पुष्टि करता है।

हिन्दू कैलेंडर की मूलभूत संरचना

हिन्दू कैलेंडर मूलतः चन्द्र मास पर आधारित है। एक चन्द्र मास लगभग 29.5 दिनों का होता है — अमावस्या से अमावस्या (अमान्त पद्धति) अथवा पूर्णिमा से पूर्णिमा (पूर्णिमान्त पद्धति) तक। उत्तर भारत में पूर्णिमान्त, दक्षिण और पश्चिम भारत में अमान्त पद्धति प्रचलित है।

एक हिन्दू वर्ष में 12 चन्द्र मास होते हैं — चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ, फाल्गुन। प्रत्येक मास का नाम उस नक्षत्र से लिया गया है जिसमें उस मास की पूर्णिमा होती है। उदाहरणतः चैत्र मास की पूर्णिमा "चित्रा" नक्षत्र में होती है।

चन्द्र मास और सौर वर्ष के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर है (354 vs 365 दिन)। इसे संतुलित करने के लिए प्रति 2-3 वर्ष में एक "अधिक मास" (intercalary month) जोड़ा जाता है — जिसे "मलमास" अथवा "पुरुषोत्तम मास" भी कहते हैं। 2026 में अधिक ज्येष्ठ मास है (17 मई-14 जून); अगला अधिक मास 2029 में होगा।

पक्ष — दो पाक्षिक खण्ड

प्रत्येक चन्द्र मास दो पक्षों में बँटता है — शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। शुक्ल पक्ष में चन्द्रमा बढ़ता है (अमावस्या से पूर्णिमा), कृष्ण पक्ष में घटता है (पूर्णिमा से अमावस्या)। प्रत्येक पक्ष में 15 तिथियाँ — प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, और पूर्णिमा/अमावस्या।

शुक्ल पक्ष को सामान्यतः शुभ माना जाता है — चन्द्रमा बढ़ रहा है, ऊर्जा बढ़ रही है। अधिकांश शुभ कार्य — विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन — इसी में किए जाते हैं। कृष्ण पक्ष को कुछ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है — पितृ-तर्पण, श्राद्ध, शनि-पूजा, तांत्रिक साधना।

पक्ष-निर्धारण पंचांग का आधार है। प्रत्येक पक्ष में पाँच विशेष तिथियाँ होती हैं जिन्हें "पञ्च पर्व" कहते हैं — चतुर्थी (गणेश), अष्टमी (दुर्गा), एकादशी (विष्णु), चतुर्दशी (शिव), पूर्णिमा/अमावस्या। प्रत्येक का अपना विशेष देवता एवं व्रत है।

सौर वर्ष व ऋतु

हिन्दू सौर वर्ष "मेष संक्रांति" (अप्रैल मध्य) से प्रारम्भ होता है — यह तब होता है जब सूर्य निरयण मेष राशि में प्रवेश करता है। तमिलनाडु, केरल, बंगाल, ओडिशा, पंजाब, असम — इन क्षेत्रों में सौर नव वर्ष विशेष धूमधाम से मनाया जाता है (पुथांडु, विशु, पोयला बैशाख, पाना संक्रांति, बैसाखी, बिहु)।

हिन्दू कैलेंडर में 6 ऋतुएँ हैं — वसंत (फाल्गुन-चैत्र), ग्रीष्म (वैशाख-ज्येष्ठ), वर्षा (आषाढ़-श्रावण), शरद (भाद्रपद-आश्विन), हेमंत (कार्तिक-मार्गशीर्ष), शिशिर (पौष-माघ)। प्रत्येक ऋतु में 2 चन्द्र मास होते हैं। यह वर्गीकरण भारतीय जलवायु पर सटीक रूप से लागू होता है।

दक्षिणायन और उत्तरायण भी सौर कैलेंडर के अंग हैं। उत्तरायण (मकर संक्रांति, 14 जनवरी से कर्क संक्रांति, 16 जुलाई तक) सूर्य के उत्तर की ओर बढ़ने का काल — यह अत्यंत शुभ माना जाता है। दक्षिणायन (कर्क संक्रांति से मकर संक्रांति तक) पितृ-कार्यों के लिए अनुकूल।

विभिन्न संवत्सर — हिन्दू वर्ष की गिनती

हिन्दू कैलेंडर में कई "संवत्" (वर्ष-गणना पद्धति) हैं। विक्रम संवत् सबसे प्रचलित है — यह 57 BCE में राजा विक्रमादित्य के राज्याभिषेक से शुरू हुआ। 2026 CE = विक्रम संवत् 2083। शक संवत् (78 CE से) भारत सरकार का राष्ट्रीय कैलेंडर है — 2026 CE = शक 1948। बंगाल, ओडिशा, असम में बंगाली संवत् (593 CE से) चलता है — 2026 CE = बंगाली 1432।

अन्य संवत्: कलि संवत् (3102 BCE से, सबसे प्राचीन — हिन्दू मान्यता के अनुसार कलियुग का प्रारम्भ), सप्तर्षि संवत् (3076 BCE से, कश्मीर में), नेपाली संवत् (879 CE से), और राजस्थान का चूँकि पंजाब-जम्मू में नानकशाही संवत् (1469 CE से, गुरु नानक देव के जन्म से)।

अधिक मास — चन्द्र-सौर संतुलन

चन्द्र वर्ष (354 दिन) और सौर वर्ष (365.25 दिन) के बीच 11 दिनों का अंतर है। इसे संतुलित करने के लिए हर 32-33 चन्द्र मास में एक अतिरिक्त मास — "अधिक मास" — जोड़ा जाता है। इसे "मलमास" (अशुद्ध मास) अथवा "पुरुषोत्तम मास" (विष्णु-स्वरूप का मास) भी कहते हैं।

अधिक मास का नियम: यदि किसी चन्द्र मास में सूर्य-संक्रमण न हो (अर्थात् सूर्य उस मास में किसी राशि में प्रवेश न करे), तो वह मास "अधिक" कहलाता है। इस मास के नाम से अगले मास का प्रथम संक्रमण होता है। उदाहरण: यदि श्रावण में सूर्य संक्रमण नहीं, तो वह "अधिक श्रावण"।

अधिक मास में नये कार्य — विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन — वर्जित हैं। परंतु यह मास भगवान विष्णु को समर्पित है — उनकी पूजा, व्रत, ध्यान, स्वाध्याय अत्यंत फलदायी। महीने भर सत्यनारायण कथा, श्रीमद्भागवत पाठ, विष्णु सहस्रनाम का जाप किया जाता है।

क्षय मास — कभी-कभार दो सूर्य-संक्रमण एक चन्द्र मास में आ जाते हैं — तब वह मास "लुप्त" हो जाता है (क्षय मास)। यह बहुत दुर्लभ है — 19 वर्ष में लगभग 1 बार। 2026 में क्षय मास नहीं है।

हिन्दू कैलेंडर का आधुनिक उपयोग

आज भी हिन्दू कैलेंडर भारत में लाखों परिवारों के दैनिक जीवन का अंग है। विवाह की तिथि, संस्कारों के मुहूर्त, व्रत-पर्व का निर्धारण, श्राद्ध-तिथि — सब हिन्दू कैलेंडर से ही तय होते हैं। दिवाली, होली, रक्षा बंधन, गणेश चतुर्थी जैसे प्रमुख त्यौहार चन्द्र-तिथि पर आधारित हैं।

भारत सरकार का राष्ट्रीय कैलेंडर "शक संवत्" है — यह 22 मार्च 1957 को अपनाया गया। ग्रेगोरियन (अंग्रेजी) कैलेंडर के साथ हिन्दू कैलेंडर भी सरकारी प्रकाशनों, गजट, रेडियो प्रसारण में दिखाया जाता है।

हमारे ऑनलाइन हिन्दू कैलेंडर में हम Lahiri Ayanamsa एवं Jean Meeus की उच्च-परिशुद्धि गणनाओं का उपयोग करते हैं। 200+ शहरों के लिए स्थानीय सूर्योदय, सूर्यास्त, चन्द्रोदय, चन्द्रास्त — सभी समय सटीक रूप से दिखाए जाते हैं। प्रमुख व्रत-त्यौहार, मुहूर्त, ग्रहण-तिथियाँ, संक्रांति-तिथियाँ — सब एक साथ उपलब्ध हैं।

📊हिन्दू कैलेंडर के 12 मास — अंग्रेज़ी समकक्ष + प्रमुख-त्यौहार

क्रमहिन्दू-मासअंग्रेज़ी (लगभग)मुख्य-त्यौहार2026 में आरम्भ
1चैत्रमार्च-अप्रैलगुड़ी-पाडवा, राम-नवमी, हनुमान-जयन्ती19 मार्च
2वैशाखअप्रैल-मईअक्षय-तृतीया, बुद्ध-पूर्णिमा17 अप्रैल
3ज्येष्ठमई-जूनगंगा-दशहरा, निर्जला-एकादशी17 मई
4आषाढ़जून-जुलाईदेवशयनी-एकादशी, गुरु-पूर्णिमा15 जून
5श्रावणजुलाई-अगस्तश्रावण-सोमवार, रक्षाबन्धन15 जुलाई
6भाद्रपदअगस्त-सितम्बरगणेश-चतुर्थी, कृष्ण-जन्माष्टमी14 अगस्त
7आश्विनसितम्बर-अक्टूबरपितृ-पक्ष, शारदीय-नवरात्रि, दशहरा13 सितम्बर
8कार्तिकअक्टूबर-नवम्बरदीपावली, गोवर्धन, देवउठनी12 अक्टूबर
9मार्गशीर्षनवम्बर-दिसम्बरविवाह-पंचमी, गीता-जयन्ती13 दिसम्बर
10पौषदिसम्बर-जनवरीपौष-पुत्रदा-एकादशी, मकर-संक्रांति11 दिसम्बर
11माघजनवरी-फरवरीबसन्त-पंचमी, माघी-पूर्णिमा10 जनवरी
12फाल्गुनफरवरी-मार्चमहाशिवरात्रि, होली8 फरवरी

अमान्त-पद्धति (दक्षिण-भारत) — अमावस्या से अमावस्या। पूर्णिमान्त (उत्तर-भारत) — पूर्णिमा से पूर्णिमा।

📊विभिन्न क्षेत्रीय हिन्दू-कैलेंडर — 6 मुख्य

कैलेंडरक्षेत्रयुग-शुरुआतनव-वर्ष-तिथि2026 का वर्ष-संख्या
विक्रमीउत्तर-भारत57 ईसा-पूर्वचैत्र शुक्ल प्रतिपदा2083
शकराष्ट्रीय (भारत-सरकार)78 ईसवीचैत्र शुक्ल प्रतिपदा1948
तमिलतमिलनाडु78 ईसवीमेष-संक्रांति (14 अप्रैल)
मलयालम कोल्लमकेरल825 ईसवीचिंगम-1 (अगस्त)1201
बंगालीबंगाल593 ईसवीपोइला-बैसाख (15 अप्रैल)1432
गुजरातीगुजरात57 ईसा-पूर्वकार्तिक शुक्ल प्रतिपदा2083

📋हिन्दू-कैलेंडर देखने एवं उपयोग की 6-चरण विधि

  1. 1

    अपना क्षेत्रीय कैलेंडर चुनें

    उत्तर-भारत: विक्रमी (पूर्णिमान्त)। दक्षिण-भारत: शालिवाहन शक (अमान्त)। बंगाल: बंगाली। केरल: मलयालम। हम विक्रमी + अमान्त समर्थन करते हैं।

  2. 2

    दैनिक-पंचांग खोलें

    अंग्रेज़ी-तिथि से अपनी हिन्दू-तिथि जानें — दिन की तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार। चन्द्र-राशि एवं सूर्य-राशि भी।

  3. 3

    मास-पक्ष पहचानें

    चैत्र/वैशाख आदि कौन-सा मास। शुक्ल-पक्ष (बढ़ता-चन्द्र) या कृष्ण-पक्ष (घटता-चन्द्र)। शुभ-कार्य के लिए शुक्ल श्रेष्ठ।

  4. 4

    अधिक-मास/क्षय-मास जाँचें

    2026 में अधिक-मास नहीं। क्षय-मास भी नहीं। यदि हो — विशेष-नियम (अधिक-मास में विवाह वर्जित)।

  5. 5

    त्यौहार-तिथियाँ नोट करें

    दीपावली, होली, रक्षाबन्धन, ईद-अनुसार-नहीं — चन्द्र-तिथियों पर। हमारी साइट पर पूर्ण-वार्षिक त्यौहार-कैलेंडर।

  6. 6

    मुहूर्त एवं ग्रहण

    विवाह/गृह-प्रवेश के शुभ-मुहूर्त। ग्रहण-तिथियाँ एवं सूतक-काल। चातुर्मास-काल नोट करें।

⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें

  • केवल अंग्रेज़ी-कैलेंडर देखकर त्यौहार-तिथि अनुमान

    क्यों: हिन्दू-त्यौहार चन्द्र-तिथियों पर आधारित। प्रत्येक वर्ष अंग्रेज़ी-तिथि बदलती। 2025 में दीपावली 21 अक्टूबर, 2026 में 8 नवम्बर। केवल अंग्रेज़ी-कैलेंडर से अनुमान गलत।

    सही उपाय: हिन्दू-कैलेंडर/पंचांग देखें। हमारी साइट पर 200+ शहरों के लिए स्थानीय-तिथियाँ। मुख्य-त्यौहार 1 वर्ष पहले से जान लें।

  • अमान्त-पूर्णिमान्त-पद्धति में भ्रम

    क्यों: उत्तर-भारत पूर्णिमान्त, दक्षिण-भारत अमान्त। एक ही पूर्णिमा अलग-अलग मासों की हो सकती है। यह जानकर रिश्तेदारों के बीच त्यौहार-तिथि-विवाद होता है।

    सही उपाय: अपने क्षेत्र की पद्धति जानें। हमारी साइट पर दोनों pretty-शीर्षक से दिखाते हैं। तिथि की संख्या वही — केवल मास का नाम भिन्न।

  • अधिक-मास में विवाह/गृह-प्रवेश तय करना

    क्यों: अधिक-मास "मलमास" — सब शुभ-कार्य वर्जित। केवल पूजा-व्रत-तप-दान शुभ। 2026 में अधिक-मास नहीं — पर 2027 में हो सकता है।

    सही उपाय: अधिक-मास पंचांग में चिह्नित होता है। उस-मास में मांगलिक-कार्य न करें। केवल विष्णु-पूजा, सत्यनारायण-कथा।

  • क्षेत्रीय-कैलेंडर भिन्न होने पर रिश्तेदारों के साथ-साथ-त्यौहार-मनाना

    क्यों: पंजाब वैसाखी 14 अप्रैल, बंगाल पोइला-बैसाख 15 अप्रैल, तमिल पुथांडु 14 अप्रैल। एक-ही दिन सब अलग-अलग नव-वर्ष। मिलाने में confusion।

    सही उपाय: प्रत्येक क्षेत्रीय-समुदाय का अपना नव-वर्ष। आप अपने क्षेत्र का मनायें। रिश्तेदारों को बधाई — उनके त्यौहार-दिन पर।

  • ग्रहण-दिन त्यौहार/शुभ-कार्य

    क्यों: ग्रहण-दिन सब मांगलिक-कार्य वर्जित। यदि त्यौहार ग्रहण-दिन पड़े — विशेष-नियम। 2026 के ग्रहण: 17 फरवरी, 3 मार्च, 12 अगस्त, 28 अगस्त।

    सही उपाय: पंचांग में ग्रहण-तिथियाँ पहले से चिह्नित। उन-दिनों को मांगलिक-कार्य न तय करें। केवल साधना-दान-तर्पण।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिन्दू कैलेंडर का नया वर्ष कब है?

2026 में हिन्दू नव वर्ष कई तिथियों पर मनाया जाता है: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (गुड़ी पाडवा/उगादि) — 19 मार्च 2026; मेष संक्रांति (पुथांडु/विशु/बैसाखी) — 14 अप्रैल 2026; कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (विक्रम संवत् नया वर्ष, गुजरात) — 9 नवम्बर 2026।

अमान्त और पूर्णिमान्त में क्या अंतर है?

दोनों पद्धतियों में मास का प्रारम्भ-अंत अलग है। अमान्त (दक्षिण/पश्चिम भारत): अमावस्या से अमावस्या तक एक मास। पूर्णिमान्त (उत्तर भारत): पूर्णिमा से पूर्णिमा तक। दोनों में एक ही पूर्णिमा अलग-अलग मासों की हो सकती है। हम अमान्त पद्धति का उपयोग करते हैं।

क्या हिन्दू कैलेंडर वैज्ञानिक है?

हाँ, यह पूर्णतः खगोलीय है। चन्द्र मास सूर्य-चन्द्र कोण से, नक्षत्र चन्द्र की स्थिति से, संक्रांति सूर्य के राशि-प्रवेश से। आधुनिक खगोल विज्ञान इसकी पुष्टि करता है। हम Jean Meeus algorithms (NASA-grade) से गणना करते हैं।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।