विवाह — हिन्दू धर्म के सोलह संस्कारों में से सर्वाधिक महत्वपूर्ण। इसी कारण विवाह मुहूर्त निर्धारण में अद्वितीय सावधानी एवं सटीकता की आवश्यकता होती है। एक सही मुहूर्त न केवल समारोह की सफलता सुनिश्चित करता है, बल्कि वर-वधू के सम्पूर्ण वैवाहिक जीवन की दिशा भी निर्धारित करता है।
विवाह मुहूर्त चयन एक जटिल विज्ञान है। मुहूर्त चिन्तामणि के "विवाह प्रकरण" अध्याय में 50+ नियम दिए गए हैं — तिथि, नक्षत्र, योग, करण, वार, मास, लग्न, चन्द्र-तारा, गुरु-शुक्र की स्थिति, मांगलिक दोष — सभी का संयोजन देखा जाता है। इस लेख में हम सभी मुख्य विवाह मुहूर्त नियमों एवं 2026 के लिए उपयुक्त तिथियों का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
✦ विवाह के लिए शुभ मास
पारम्परिक रूप से विवाह के लिए पाँच मास सर्वोत्तम माने जाते हैं — माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ, और मार्गशीर्ष। इन मासों में सूर्य उत्तरायण में होता है (उत्तर की ओर बढ़ता है), जो शुभ कार्यों के लिए अनुकूल है। आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक — ये पाँच मास "चातुर्मास" कहलाते हैं और विवाह वर्जित।
चातुर्मास में विवाह वर्जित होने का कारण: देवशयनी एकादशी (आषाढ़ शुक्ल एकादशी) से देवोत्थानी एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) तक भगवान विष्णु निद्रा में होते हैं — इस अवधि में कोई भी मांगलिक संस्कार नहीं किया जाता। 2026 में देवशयनी 26 जुलाई, देवोत्थानी 21 नवम्बर — अर्थात् इन तिथियों के बीच विवाह वर्जित।
पौष मास में सूर्य धनु राशि में होने से "मलमास" समान माना जाता है — विवाह वर्जित। 2026 में पौष मास 14 दिसम्बर 2025 से 13 जनवरी 2026 तक है। इसी प्रकार होलाष्टक (होली से 8 दिन पूर्व) में भी विवाह नहीं किया जाता।
✦ विवाह की शुभ तिथियाँ
शुक्ल पक्ष की तिथियाँ अधिक शुभ मानी जाती हैं — विशेषतः द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी। चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी "रिक्ता" तिथियाँ हैं — विवाह वर्जित। अष्टमी एवं अमावस्या भी सामान्यतः टाली जाती हैं।
कृष्ण पक्ष की कुछ तिथियाँ भी शुभ हैं — कृष्ण द्वितीया, तृतीया, पंचमी (कुछ शाखाओं में स्वीकार्य)। परंतु शुक्ल पक्ष को सर्वोत्तम माना जाता है क्योंकि उस समय चन्द्रमा बढ़ रहा होता है — सकारात्मक ऊर्जा का संकेत।
विशेष शुभ दिन: अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया) — पूरे वर्ष का सबसे शुभ दिन, "अबूझ मुहूर्त" — कोई भी कार्य बिना मुहूर्त देखे शुभ। बसंत पंचमी (माघ शुक्ल पंचमी), विवाह पंचमी (मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी) — श्री राम-सीता विवाह दिवस। देवोत्थानी एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) — विवाह सीज़न का प्रारम्भ।
✦ विवाह के लिए शुभ नक्षत्र
विवाह के लिए 11 नक्षत्र विशेष शुभ माने जाते हैं — रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, और रेवती। ये "विवाह नक्षत्र" कहलाते हैं। मृदु एवं स्थिर स्वभाव के होने से पति-पत्नी का सम्बन्ध स्थायी एवं सुखद रहता है।
वर्जित नक्षत्र: भरणी, कृत्तिका, आर्द्रा, आश्लेषा, ज्येष्ठा, मूल (कुछ शाखाओं में), पूर्व फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, पूर्व भाद्रपद, चित्रा, धनिष्ठा (विशेष रूप से मघा-शाखा हेतु)। इन नक्षत्रों में विवाह से वैवाहिक जीवन में कलह, बीमारी, अथवा वैधव्य की आशंका मानी जाती है।
जन्म नक्षत्र (वर अथवा वधू का) में विवाह नहीं किया जाता — इसे "जन्म-दोष" कहते हैं। विशेषतः वधू के जन्म नक्षत्र में विवाह सर्वथा वर्जित।
✦ चन्द्र, गुरु, शुक्र की स्थिति
चन्द्र बल विवाह में सर्वोपरि है। वर एवं वधू दोनों के लिए चन्द्र-राशि से 1, 3, 6, 7, 10, 11वीं राशि में चन्द्र होना शुभ। 4, 8, 12वीं राशि में होने पर "अष्टम चन्द्र" दोष बनता है।
गुरु बल भी अनिवार्य है। गुरु यदि अस्त (combust), वक्री (retrograde), अथवा बालावस्था में हो — विवाह वर्जित। 2026 में गुरु 30 दिसम्बर 2025 से 22 अप्रैल 2026 तक वक्री रहेंगे — इस अवधि में कुछ ज्योतिषाचार्य विवाह की सलाह नहीं देते (हालांकि कई आधुनिक मत इसे लागू नहीं मानते)।
शुक्र बल विशेष रूप से वधू के लिए महत्वपूर्ण। शुक्र अस्त (combust) हो तो विवाह वर्जित। 2026 में शुक्र अस्त: 30 जनवरी से 8 मार्च 2026 तक (कुम्भ-मीन में अस्त)। इस अवधि में विवाह से बचना चाहिए।
✦ मांगलिक दोष एवं अन्य परीक्षण
मांगलिक दोष विवाह से पूर्व सबसे महत्वपूर्ण परीक्षण है। यदि वर अथवा वधू में से किसी एक की कुंडली में मंगल 1, 2, 4, 7, 8, अथवा 12वें भाव में हो — वह "मांगलिक" है। यदि दोनों मांगलिक हों — दोष रद्द (कैंसल) हो जाता है। यदि एक मांगलिक हो — विवाह से पूर्व मंगल शान्ति, कुम्भ विवाह जैसे उपाय किए जाते हैं।
कुण्डली मिलान (अष्टकूट गुण मिलान) दूसरा अनिवार्य परीक्षण है। 36 गुणों में से 18+ अंक न्यूनतम (विवाह की अनुमति), 24+ शुभ, 28+ बहुत अच्छा, 32+ उत्तम। नाड़ी दोष (दोनों की एक ही नाड़ी), भकूट दोष (6-8 या 2-12 राशि-स्थिति), गण दोष (देव-राक्षस संयोग) — ये तीन प्रमुख दोष विशेष ध्यान देने योग्य हैं।
षड् दोष (विवाह में 6 प्रकार के दोष) भी देखे जाते हैं: सूर्य-संक्रान्ति दोष (संक्रान्ति के दिन विवाह वर्जित), तिथि-संक्रान्ति दोष, मास-संक्रान्ति दोष, ग्रहण दोष (ग्रहण से 7 दिन पूर्व-पश्चात् वर्जित), श्राद्ध दोष (पितृ पक्ष में वर्जित), और भद्रा दोष।
✦ 2026 के प्रमुख विवाह मुहूर्त
जनवरी 2026: 16, 17, 19, 20, 21, 22, 26, 27, 30 जनवरी विशेष शुभ। माघ मास का प्रारम्भ — विवाह सीज़न उच्चतम।
फरवरी 2026: 1, 2, 6, 7, 8, 12, 13, 14, 16, 17, 18, 19, 20, 24, 25 — फाल्गुन मास के अनेक शुभ मुहूर्त।
अप्रैल 2026: 14, 15, 16, 19, 20, 21, 22, 23, 24, 25, 27, 28, 29 — वैशाख मास, अक्षय तृतीया (20 अप्रैल) विशेष शुभ।
मई 2026: 1, 2, 3, 4, 5, 6, 8, 11, 12, 14, 19, 20, 21, 25, 27, 28 — ज्येष्ठ मास के मुहूर्त।
जून 2026: 1, 2, 4, 5 — आषाढ़ मास से पूर्व अंतिम शुभ तिथियाँ। 26 जुलाई से देवशयनी एकादशी, उसके बाद 4 मास विवाह बंद।
नवम्बर 2026: देवोत्थानी एकादशी 21 नवम्बर — विवाह सीज़न पुनः प्रारम्भ। 21, 22, 23, 24, 26, 27, 30 नवम्बर शुभ।
दिसम्बर 2026: 1, 2, 3, 4, 5, 6, 8, 9, 11, 12 — मार्गशीर्ष मास के अंतिम मुहूर्त। 14 दिसम्बर से पौष — विवाह वर्जित।
📊2026 में विवाह के सर्वोत्तम मास — मास-वार तालिका
| मास | अंग्रेज़ी | विवाह स्थिति | कुल मुहूर्त | विशेष तिथियाँ |
|---|---|---|---|---|
| माघ | जनवरी-फरवरी | ✓ श्रेष्ठ | 15+ | बसंत-पंचमी 23 जनवरी |
| फाल्गुन | फरवरी-मार्च | ✓ श्रेष्ठ | 14+ | महाशिवरात्रि 15 फरवरी |
| चैत्र | मार्च-अप्रैल | ✗ वर्जित (कुछ शाखाएँ) | 0 | राम-नवमी |
| वैशाख | अप्रैल-मई | ✓ सर्वोत्तम | 13+ | अक्षय-तृतीया 20 अप्रैल |
| ज्येष्ठ | मई-जून | ✓ श्रेष्ठ | 16+ | — |
| आषाढ़ | जून-जुलाई | देवशयनी से बंद | 4+ (25 जुलाई तक) | देवशयनी 25 जुलाई |
| श्रावण-कार्तिक | जुलाई-नवम्बर | ✗ चातुर्मास वर्जित | 0 | — |
| मार्गशीर्ष | नवम्बर-दिसम्बर | ✓ देवउठनी से शुरू | 8+ | देवउठनी 20 नवम्बर |
| पौष | दिसम्बर-जनवरी | ✗ खर-मास वर्जित | 0 | — |
2026 में कुल लगभग 70 विवाह-मुहूर्त — अधिकांश जनवरी-जून में।
📊विवाह नक्षत्र — शुभ बनाम वर्जित
| वर्ग | नक्षत्र | फल | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| सर्वोत्तम (मृदु) | रोहिणी, मृगशिरा, हस्त, अनुराधा, रेवती | सुख-शान्ति, स्थिर-गृहस्थी | पहली-पसन्द |
| श्रेष्ठ (स्थिर) | उत्तरा-फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तर-भाद्रपद, मघा | दृढ़ता, धन-समृद्धि | विशेष-दिनों के लिए |
| स्वीकार्य (लघु) | अश्विनी, पुष्य, स्वाति | मध्यम-शुभ | — |
| वर्जित (उग्र) | भरणी, मघा (कुछ), पूर्व-फाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, पूर्व-भाद्रपद | कलह-रोग | पूर्ण-वर्जन |
| वर्जित (तीक्ष्ण) | मूल, ज्येष्ठा, आर्द्रा, आश्लेषा | दुर्भाग्य | पूर्ण-वर्जन |
| वर्जित (चर) | पुनर्वसु, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा | अस्थिरता | विवाह में नहीं |
📋11-चरण विवाह-मुहूर्त निर्धारण विधि
- 1
वर-वधू दोनों की कुण्डली बनवायें
जन्म-तिथि, समय, स्थान सटीक हों — समय में 5+ मिनट की त्रुटि से लग्न बदल सकता है। हमारे "जन्म-कुण्डली कैल्कुलेटर" से मुफ्त।
- 2
अष्टकूट गुण-मिलान
36 गुणों में से न्यूनतम 18+ अनिवार्य। 24+ शुभ। 28+ अति-उत्तम। 32+ सर्वोत्तम। नाड़ी-दोष, भकूट-दोष, गण-दोष विशेष देखें।
- 3
मांगलिक-दोष परीक्षण
दोनों की कुण्डली में मंगल 1, 4, 7, 8, 12वें भाव में देखें। यदि एक मांगलिक — दूसरा भी मांगलिक हो तो दोष-समता। एक-तरफा मांगलिक हो — कुम्भ-विवाह उपाय।
- 4
गुरु-शुक्र-स्थिति जाँचें
गुरु अस्त/वक्री/बालावस्था में नहीं हो। शुक्र अस्त नहीं हो। 2026 में गुरु-अस्त 23 अप्रैल-22 मई — टालें।
- 5
चातुर्मास से बचें
25 जुलाई 2026 (देवशयनी) से 20 नवम्बर 2026 (देवउठनी) तक विवाह वर्जित। पौष-मास (दिसम्बर-जनवरी) भी वर्जित।
- 6
शुभ मास चुनें
माघ, फाल्गुन, वैशाख, ज्येष्ठ, मार्गशीर्ष — 5 श्रेष्ठ-मास। चैत्र, आषाढ़ — सीमित-शुभ। श्रावण-कार्तिक, पौष — पूर्ण-वर्जित।
- 7
शुभ तिथि चुनें
शुक्ल-पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी। चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या वर्जित।
- 8
शुभ नक्षत्र चुनें
रोहिणी, मृगशिरा, हस्त, अनुराधा, रेवती — सर्वोत्तम। दोनों के जन्म-नक्षत्र वर्जित।
- 9
शुभ वार चुनें
सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार सर्वश्रेष्ठ। मंगलवार, शनिवार, रविवार वर्जित (कुछ अपवाद)।
- 10
चन्द्र-तारा-योग सत्यापित करें
दोनों के लिए अनुकूल चन्द्रबल और ताराबल। 4, 8, 12वीं चन्द्र-राशि वर्जित। तारा-वध, विपत, प्रत्यरि वर्जित।
- 11
लग्न-शुद्धि के साथ अंतिम-समय
विवाह-समय के लग्न में पाप-ग्रह न हों। शुक्र-गुरु लग्न में हों तो श्रेष्ठ। अभिजित-मुहूर्त (दोपहर 11:50-12:38) सर्व-दोष-निवारक।
⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें
✗ केवल "शुभ-तिथियों की लिस्ट" देखकर विवाह तय करना
क्यों: जो तिथि एक जोड़े के लिए शुभ है, दूसरे के लिए अशुभ हो सकती है — कुण्डली-वार। सामान्य-शुभ-तिथि = generic। आपकी कुण्डली के अनुसार वो शुभ हो — यह व्यक्ति-विशेष।
✓ सही उपाय: सामान्य-शुभ-तिथियों की list से प्रारम्भिक 5-10 विकल्प चुनें — फिर कुण्डली-वार ज्योतिषी से final-selection।
✗ मांगलिक का गैर-मांगलिक से बिना उपाय विवाह
क्यों: पारम्परिक मान्यता — मांगलिक-दोष से वैवाहिक-कलह, अकाल-मृत्यु। आधुनिक अध्ययन में सीधा सम्बन्ध नहीं — पर मनोवैज्ञानिक-असुरक्षा हो सकती है।
✓ सही उपाय: यदि दोष-तीव्र हो — कुम्भ-विवाह, अश्वत्थ-विवाह, मूंगा-धारण, मंगल-शान्ति-पाठ। दोष-मध्यम हो — हनुमान-चालीसा, मंगलवार-व्रत।
✗ जन्म-नक्षत्र पर विवाह तय करना
क्यों: वर/वधू के अपने जन्म-नक्षत्र में विवाह — "जन्म-दोष"। पारम्परिक रूप से वैवाहिक-कलह का सूचक। विशेषतः वधू के जन्म-नक्षत्र पर सर्वथा वर्जित।
✓ सही उपाय: दोनों के जन्म-नक्षत्र छोड़कर अन्य 25 नक्षत्रों में से शुभ-वर्ग (मृदु, स्थिर) चुनें।
✗ चातुर्मास में "हम तो मानते नहीं" कहकर विवाह करना
क्यों: चातुर्मास वर्जना सहस्राब्दियों से। देव-निद्रा-काल। शास्त्रीय-वर्जन। मनोवैज्ञानिक-दृष्टि से भी — परिवार के बुजुर्गों का असन्तोष भविष्य में कलह का कारण।
✓ सही उपाय: चातुर्मास से पूर्व (25 जुलाई 2026 से पहले) या बाद (20 नवम्बर 2026 के बाद) में तिथि चुनें। यदि अनिवार्य — विष्णु-पूजा, सत्यनारायण-कथा कर के।
✗ गुरु-अस्त/शुक्र-अस्त-काल में विवाह
क्यों: गुरु-शुक्र विवाह के मुख्य ग्रह। अस्त (combust) हो तो शक्ति-कम। पारम्परिक मान्यता — अस्त-काल में विवाह से वैवाहिक-सुख-कमी।
✓ सही उपाय: 2026 गुरु-अस्त: 23 अप्रैल-22 मई। शुक्र-अस्त: मार्च-मई के बीच (पंचांग देखें)। इन काल को टालें।
✗ विवाह-दिन ग्रहण-काल पड़ना
क्यों: विवाह-दिन यदि सूर्य/चन्द्र-ग्रहण हो — सर्वथा वर्जित। 2026 के ग्रहण: 17 फरवरी (सूर्य), 3 मार्च (चन्द्र), 12 अगस्त (सूर्य), 28 अगस्त (चन्द्र)।
✓ सही उपाय: विवाह तिथि ग्रहण-दिन से 7 दिन पहले/बाद हो। पंचांग में ग्रहण-तिथियाँ चिह्नित होती हैं।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विवाह के लिए सबसे अच्छी तिथि कौन सी है?▼
अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया) — 2026 में 20 अप्रैल — पूरे वर्ष का सबसे शुभ दिन। इसे "अबूझ मुहूर्त" कहते हैं — किसी भी कार्य के लिए मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं। इसके अतिरिक्त बसंत पंचमी (24 जनवरी 2026), विवाह पंचमी, देवोत्थानी एकादशी विशेष शुभ।
क्या वक्री गुरु में विवाह कर सकते हैं?▼
पारम्परिक मत: नहीं। 2026 में गुरु 30 दिसम्बर 2025 से 22 अप्रैल 2026 तक वक्री हैं। कुछ शास्त्रीय ग्रन्थ इस अवधि में विवाह वर्जित मानते हैं। आधुनिक मत: वक्री गुरु शुभ कार्यों में बाधक नहीं — परंतु कुंडली मिलान सटीक होना चाहिए।
चातुर्मास में विवाह क्यों वर्जित है?▼
देवशयनी एकादशी से देवोत्थानी एकादशी तक 4 मास भगवान विष्णु निद्रा में होते हैं — मांगलिक संस्कार वर्जित। 2026 में 26 जुलाई से 21 नवम्बर तक। यह वैज्ञानिक भी है — इस अवधि में मानसून, फसल कटाई, धार्मिक पर्व — विवाह जैसे बड़े समारोह के लिए असुविधाजनक।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।