दुर्गा सप्तशती

श्री दुर्गा सप्तशती

— चण्डी पाठ — मार्कण्डेय पुराण का देवी माहात्म्य —

⚔️७०० श्लोक

दुर्गा सप्तशती (चण्डी पाठ)

मार्कण्डेय पुराण का देवी माहात्म्य

📜 १३ अध्याय⚔️ ३ चरित्र
⚔️

क्या है दुर्गा सप्तशती?

दुर्गा सप्तशती (चण्डी पाठ) हिन्दू धर्म का सर्वाधिक शक्तिशाली देवी पाठ है। मार्कण्डेय पुराण के ७०० श्लोकों में १३ अध्यायों में संकलित यह ग्रन्थ ३ चरित्रों में देवी के ३ रूपों — महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती — द्वारा ३ असुरों के संहार की कथा कहता है।

त्रि-चरित्र

1
⚔️

प्रथम चरित्र (मधु कैटभ)

देवी: महाकाली

📜 अध्याय 1

मधु-कैटभ राक्षसों का योगनिद्रा (महाकाली) द्वारा वध। १ अध्याय, १०४ मन्त्र।

2
🦁

मध्यम चरित्र (महिषासुर)

देवी: महालक्ष्मी

📜 अध्याय 2-4

महिषासुर का महालक्ष्मी द्वारा वध। ३ अध्याय, २२४ मन्त्र।

3
🦢

उत्तर चरित्र (शुम्भ-निशुम्भ)

देवी: महासरस्वती

📜 अध्याय 5-13

शुम्भ-निशुम्भ का महासरस्वती द्वारा वध। ९ अध्याय, ३७२ मन्त्र।

🛡

पाठ के पाँच अंग

1
🛡️

देवी कवचम्

रक्षा कवच

2
🗝

अर्गला स्तोत्रम्

वर प्राप्ति हेतु

3
🔑

कीलकम्

पाठ शक्ति का खोलना

4
📜

सप्तशती पाठ (७०० मन्त्र)

मुख्य पाठ — १३ अध्याय

5
🪷

मूर्ति रहस्य

देवी रूपों का रहस्य

📿

पाठ के नियम

  • 🛁स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें।
  • 🧭पूर्व या उत्तर मुख होकर बैठें।
  • 🪴कुश आसन या लाल वस्त्र पर बैठें।
  • 🪔दीपक प्रज्वलित कर देवी का आह्वान।
  • 📖शुद्ध उच्चारण के साथ पाठ करें।
  • 🙏पाठ के बाद आरती एवं क्षमा प्रार्थना।
🌟

सर्वोत्तम समय

  • 🌸नवरात्रि के नौ दिन — सर्वोत्तम
  • 🔴मंगलवार एवं शुक्रवार
  • 🌙अष्टमी, नवमी
  • 🌕पूर्णिमा एवं अमावस्या

— या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता — नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः —

दुर्गा-सप्तशती (देवी-माहात्म्य / चण्डी-पाठ) — मार्कण्डेय-पुराण के 13 अध्याय (700 श्लोक — इसलिए "सप्तशती")। माँ दुर्गा द्वारा महिषासुर, शुम्भ, निशुम्भ, रक्तबीज वध की कथा। शक्ति-उपासना का सर्वोच्च-ग्रन्थ — वेदों के समान पवित्र।

रचना-काल: लगभग 4वीं-7वीं सदी ईसवी। अनेक पुराणों में सन्दर्भ। नवरात्रि में दुर्गा-सप्तशती-पाठ अनिवार्य। एक-पाठ से सर्व-कष्ट निवारण। 9 पाठ = चण्डी-पुरश्चरण। 1000 पाठ = शत-चण्डी। 1 लाख पाठ = कोटि-चण्डी।

दुर्गा-सप्तशती की संरचना

13 अध्याय 3 चरित्रों में बंटे: 1) प्रथम-चरित्र (अध्याय 1) — महाकाली / मधु-कैटभ-वध। ब्रह्मा द्वारा देवी-स्तुति। 2) मध्यम-चरित्र (अध्याय 2-4) — महालक्ष्मी / महिषासुर-वध। देव-समूह का तेज दुर्गा बना। 3) उत्तर-चरित्र (अध्याय 5-13) — महासरस्वती / शुम्भ-निशुम्भ-वध। चण्डिका, काली, शक्तियों का प्राकट्य।

700 मन्त्रों में: 535 श्लोक मार्कण्डेय-कथा, 165 कीलक-कवच-अर्गला-स्तोत्र। पूर्व-अंग: कवच (38 श्लोक), अर्गला (27 श्लोक), कीलक (14 श्लोक), रात्रि-सूक्तम्, देवी-सूक्तम्। उत्तर-अंग: सिद्ध-कुञ्जिका-स्तोत्र, श्राप-विमोचन।

पाठ-नियम: सम्पूर्ण-पाठ — कवच + अर्गला + कीलक + 13 अध्याय + सिद्ध-कुञ्जिका = 2.5-3 घंटे। मध्यम — केवल 13 अध्याय = 1.5-2 घंटे। सप्ताह-पाठ: 7 दिन में पूरा। नवरात्रि-पाठ: 9 दिन में पूरा (एक अध्याय प्रति-दिन — पर पाठ-क्रम भिन्न)।

महिषासुर-वध की कथा (मध्यम-चरित्र)

महिषासुर — महिष (भैंसा) + असुर। ब्रह्मा से वर पाया — कोई पुरुष न मार सके। देव-असुर-युद्ध में देवों को हराकर स्वर्ग छीन लिया। इन्द्र-वासव बेसहारा।

देव-तेज मिलकर बना दुर्गा: ब्रह्मा-विष्णु-शिव-इन्द्र-कुबेर-वरुण-यम-वायु — सब के तेज से उत्पन्न माँ दुर्गा। शिव से त्रिशूल, विष्णु से चक्र, इन्द्र से वज्र, वायु से धनुष-बाण, हिमालय से सिंह-वाहन — सब अस्त्र।

9-दिन का युद्ध: अष्टमी-नवमी-दशमी सबसे प्रबल। महिषासुर ने भैंसा, सिंह, हाथी, मनुष्य रूप बदले। दशमी (विजयादशमी) को त्रिशूल से वध। माँ का "महिषासुर-मर्दिनी" नाम।

नैतिक सन्देश: जब अधर्म बढ़े, सब मिलकर शक्ति का सम्मिलन करें। कोई एक नहीं — सम्मिलित-शक्ति विजय-दायी। आधुनिक "टीम-वर्क" का प्राचीन उदाहरण।

शुम्भ-निशुम्भ-वध की कथा (उत्तर-चरित्र)

शुम्भ-निशुम्भ — दो भाई-असुर। महिषासुर के बाद देवों को पुनः परास्त किया। पार्वती ने स्नान करते हुए "कौशिकी" नाम से कोशा-त्याग द्वारा अति-सुन्दर देवी प्रकट की। पार्वती स्वयं काली-काला-वर्ण-रूप।

चण्ड-मुण्ड वध (अध्याय 7): शुम्भ के सेनापति। काली ने भयंकर रूप से वध — इसलिए "चामुण्डा" नाम।

रक्तबीज वध (अध्याय 8): वर — रक्त की एक बूँद से नये रक्तबीज। माँ काली ने जीभ फैलायी — रक्त गिरने न दिया। चण्डिका वार करती, काली रक्त पीती। अद्भुत-युद्ध। आधुनिक-प्रतीक — व्यसन (नशा) रक्तबीज जैसा — एक छोड़ें, अनेक उठते। माँ-शक्ति से ही जीत।

निशुम्भ-वध (अध्याय 9), शुम्भ-वध (अध्याय 10): दशमी को विजय। 9 दिन का युद्ध। माँ ने इसके बाद भी "जब-जब अधर्म बढ़ेगा, मैं अवतरित होऊँगी" का वर दिया।

दुर्गा-सप्तशती-पाठ की विधि

तैयारी: नवरात्रि का प्रथम-दिन कलश-स्थापना। दुर्गा-सप्तशती-पुस्तक (गीता-प्रेस गोरखपुर सबसे शुद्ध)। लाल-वस्त्र, लाल-फूल, सुपारी, अक्षत, धूप, दीप, कुंकुम। माँ दुर्गा का चित्र/मूर्ति।

विधि-क्रम: 1) "ॐ नमश्चण्डिकायै" - मूल मन्त्र 2) कवच-पाठ 3) अर्गला-स्तोत्र 4) कीलक-स्तोत्र 5) रात्रि-सूक्त 6) देवी-सूक्त 7) नवार्ण-मन्त्र (108 बार) "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" 8) 13 अध्याय का पाठ 9) सिद्ध-कुञ्जिका-स्तोत्र 10) क्षमा-प्रार्थना 11) आरती।

शीघ्र-पाठ (विशेष-कामना): 9 अध्याय = 9 लाख चण्डी-पुरश्चरण-फल। मध्यम-पाठ: सम्पूर्ण-पाठ नियमित। शत-चण्डी (100 पाठ): 9 ब्राह्मणों से। सहस्र-चण्डी (1000): विशेष-संकल्प। कोटि-चण्डी: राष्ट्र-कल्याण।

सावधानी: स्त्रियाँ मासिक-धर्म में पाठ रोकें। ब्रह्मचर्य-पालन। प्याज-लहसुन त्याग। साफ-स्वच्छ-स्थान। पाठ बीच में बाधा न आये। अध्याय अधूरा न छोड़ें।

दुर्गा-सप्तशती के प्रसिद्ध मन्त्र

नवार्ण-मन्त्र: "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" — 9 अक्षरीय। महाकाली-महालक्ष्मी-महासरस्वती तीनों का बीज। 1.25 लाख जप = सिद्धि।

सर्व-मंगल-मांगल्ये: "सर्वमंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥" — सबसे प्रसिद्ध माँ-वन्दना। दैनिक-पाठ।

या देवी सर्व-भूतेषु: "या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥" — माँ सब प्राणियों में। 16 बार दोहरायी जाती है।

दुर्गा-द्वात्रिंशत-नाम-माला: 32 दिव्य-नाम। शाप-निवारण के लिए। "दुर्गा दुर्गार्तिशमनी दुर्गापद्विनिवारिणी..."

क्षमा-प्रार्थना: "अपराधसहस्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया। दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वरि॥" — समापन-समय।

📊दुर्गा-सप्तशती के 13 अध्याय — संरचना

चरित्रअध्यायदेवी-रूपमुख्य-कथाश्लोक-संख्या (लगभग)
प्रथम1महाकालीमधु-कैटभ-वध, ब्रह्मा द्वारा देवी-स्तुति104
मध्यम2महालक्ष्मीदेव-तेज से दुर्गा-प्राकट्य70
मध्यम3महालक्ष्मीमहिषासुर के साथ युद्ध-प्रारम्भ40
मध्यम4महालक्ष्मीमहिषासुर-वध (दशमी)36
उत्तर5महासरस्वतीदेवी-तत्त्व, दूत-संवाद129
उत्तर6महासरस्वतीधूम्रलोचन-वध24
उत्तर7महासरस्वतीचण्ड-मुण्ड-वध — चामुण्डा-नाम27
उत्तर8महासरस्वतीरक्तबीज-वध (काली का जीभ)63
उत्तर9महासरस्वतीनिशुम्भ-वध40
उत्तर10महासरस्वतीशुम्भ-वध (मुख्य-असुर)32
उत्तर11महासरस्वतीदेवी-स्तुति, वर-प्रदान55
उत्तर12महासरस्वतीसप्तशती-माहात्म्य40
उत्तर13महासरस्वतीसुरथ-समाधि कथा17

कुल 700 श्लोक (इसलिए "सप्तशती")। पूर्व-अंग (कवच-अर्गला-कीलक) + 13 अध्याय + उत्तर-अंग।

📊विशेष-कामना के लिए पाठ-संख्या

कामनापाठ-संख्याअनुष्ठान-नामअनुमानित-समय
सामान्य-शान्ति1 पाठदैनिक-पाठ2 घंटे
मनोकामना-पूर्ति7 पाठसप्ताह-पाठ7 दिन
विशेष-कामना-सिद्धि9 पाठचण्डी-पुरश्चरण9 दिन (नवरात्रि-काल)
सम्पत्ति-वृद्धि100 पाठशत-चण्डी (9 ब्राह्मण से)~11 दिन
रोग-शान्ति1000 पाठसहस्र-चण्डी40-100 दिन
राष्ट्र-कल्याण/राज्य-प्राप्ति1 करोड़ पाठकोटि-चण्डी (विशाल-यज्ञ)वर्षों
नवार्ण-मन्त्र-सिद्धि1.25 लाख जपनवार्ण-पुरश्चरण40 दिन (3,125 जप/दिन)

📋दुर्गा-सप्तशती-पाठ सम्पूर्ण विधि — 11-चरण

  1. 1

    दिन-निर्धारण

    नवरात्रि सर्वोत्तम (चैत्र: 19-27 मार्च 2026, शारदीय: 11-19 अक्टूबर 2026)। दैनिक भी कर सकते। शुक्रवार/मंगलवार विशेष।

  2. 2

    पुस्तक-स्रोत

    गीताप्रेस गोरखपुर का सम्पूर्ण-दुर्गा-सप्तशती सबसे शुद्ध। हिन्दी-अर्थ-सहित संस्करण लें — समझकर पाठ अधिक-असरदार।

  3. 3

    सामग्री-संग्रह

    दुर्गा-माँ की प्रतिमा/चित्र, लाल-वस्त्र, लाल-फूल (गुड़हल), कुंकुम, अक्षत, सुपारी, धूप-दीप, कलश, मीठा-प्रसाद (खीर/हलवा)।

  4. 4

    कलश-स्थापना (नवरात्रि-दिवस)

    मिट्टी के कलश में जौ-बीज बोयें। 9 दिन में अंकुरित होंगे। आम-पत्ते, नारियल, स्वस्तिक चिह्न।

  5. 5

    मूल-मन्त्र-स्मरण

    "ॐ नमश्चण्डिकायै" 3 बार। नवार्ण-मन्त्र "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" 108 बार। पाठ-संकल्प।

  6. 6

    पूर्व-अंग-पाठ

    कवच (38 श्लोक) → अर्गला-स्तोत्र (27 श्लोक) → कीलक-स्तोत्र (14 श्लोक) → रात्रि-सूक्त + देवी-सूक्त।

  7. 7

    13 अध्याय-पाठ

    क्रमश: 1 से 13 अध्याय। मध्यम-गति। प्रत्येक अध्याय के अन्त में संक्षिप्त-विश्राम। पूरा 1.5-2 घंटे।

  8. 8

    उत्तर-अंग-पाठ

    सिद्ध-कुञ्जिका-स्तोत्र (विशेष-शक्तिशाली)। श्राप-विमोचन-स्तोत्र। दुर्गा-32-नाम-माला।

  9. 9

    क्षमा-प्रार्थना

    "अपराध-सहस्राणि..." पाठ। मन्त्र-उच्चारण-दोष क्षमा।

  10. 10

    आरती + प्रसाद

    दुर्गा-आरती। मीठा-प्रसाद माँ को अर्पण। कन्या/परिवार में वितरण।

  11. 11

    विसर्जन (नवमी/दशमी)

    9 दिन का अनुष्ठान पूरा होने पर कलश-विसर्जन। जौ-अंकुर परिवार-जन को बाँटें (शुभ-संकेत)।

⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें

  • पूर्व-अंग (कवच-अर्गला-कीलक) छोड़कर सीधे 13 अध्याय

    क्यों: पूर्व-अंग = "रक्षा-कवच"। बिना-कवच पाठ = असुरक्षित। पाठ-दोष का प्रभाव। शास्त्र: "कवच-अर्गला-कीलक के बिना सप्तशती-पाठ निष्फल।"

    सही उपाय: सम्पूर्ण-पाठ करें। कवच + अर्गला + कीलक → रात्रि-सूक्त + देवी-सूक्त → 13 अध्याय → सिद्ध-कुञ्जिका। कुल 2.5-3 घंटे।

  • अध्याय बीच में रोककर अगले-दिन पूरा करना

    क्यों: एक-अध्याय अखण्ड पढ़ना चाहिए। बीच में रुकने से ऊर्जा-प्रवाह टूटता। शास्त्र-वर्जना।

    सही उपाय: पूरा अध्याय एक-बार में पढ़ें। यदि समय न हो — कम अध्याय (2-3) पढ़ें — पर पूर्ण। कभी अधूरे न छोड़ें।

  • मासिक-धर्म में पाठ करना

    क्यों: पारम्परिक-नियम मासिक-धर्म में देवी-पूजा-वर्जन। 4-5 दिन रोकें।

    सही उपाय: मासिक-धर्म के 4-5 दिन पाठ रोकें। मानसिक-स्मरण कर सकती हैं। पुनः-स्नान के बाद पूर्ण-पाठ शुरू।

  • पाठ-काल में मांस-मदिरा-तामसिक-भोजन

    क्यों: सप्तशती-पाठ सात्विक-साधना। तामसिक-भोजन से ऊर्जा-असंतुलन। पाठ-फल नष्ट।

    सही उपाय: पाठ-काल (नवरात्रि या अनुष्ठान-दिन) में पूर्ण-शाकाहार + प्याज-लहसुन-त्याग। ब्रह्मचर्य।

  • "शत-चण्डी" करवा कर खर्च भूल जाना

    क्यों: शत-चण्डी पारम्परिक 9 ब्राह्मणों से 100 पाठ। पंडित-दलाल इसमें ₹50,000-2 लाख माँगते। सब आवश्यक नहीं।

    सही उपाय: शत-चण्डी के लिए मन्दिर-trust (दुर्गा-कुण्ड वाराणसी, वैष्णो-देवी, कामाख्या) से सम्पर्क। official-rate ₹15,000-50,000। private-पंडित से सावधान।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा-सप्तशती को कितनी बार पढ़ना चाहिए?

न्यूनतम — एक बार वर्ष में नवरात्रि में। श्रेष्ठ — दैनिक-पाठ। विशेष-कामना के लिए — 9 पाठ (चण्डी-पुरश्चरण), 100 पाठ (शत-चण्डी), 1000 पाठ (सहस्र-चण्डी)। शत-चण्डी से सम्पत्ति-वृद्धि, सहस्र-चण्डी से रोग-शान्ति, कोटि-चण्डी से राज्य-प्राप्ति।

सम्पूर्ण-पाठ का समय कितना लगता है?

2.5-3 घंटे (पूर्व-अंग + 13 अध्याय + उत्तर-अंग)। मध्यम-पाठ (केवल 13 अध्याय) — 1.5-2 घंटे। शीघ्र-पाठ (केवल मुख्य-श्लोक) — 1 घंटा। पहली बार पढ़ने में 4 घंटे — अभ्यास से 2.5 घंटे।

क्या स्त्रियाँ दुर्गा-सप्तशती पढ़ सकती हैं?

अवश्य पढ़ें! माँ-दुर्गा स्त्री-शक्ति का सर्वोच्च-रूप। स्त्रियों को विशेष-फल। मासिक-धर्म में 4-5 दिन रोकें। पुनः शुरू कर सकती हैं। मानसिक-पाठ कभी भी सम्भव।

दुर्गा-सप्तशती और देवी-भागवत में अंतर?

दुर्गा-सप्तशती = मार्कण्डेय-पुराण का 13-अध्याय अंश (700 श्लोक)। देवी-भागवत = स्वतन्त्र-पुराण (12 स्कन्ध, 18,000 श्लोक) — माँ-शक्ति का विस्तृत-वर्णन। दुर्गा-सप्तशती मन्त्र-प्रधान, देवी-भागवत कथा-प्रधान। दोनों अति-पवित्र।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।