नवदुर्गा अर्थात् माँ दुर्गा के नौ रूप — शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। नवरात्रि के नौ दिनों में क्रमशः इन रूपों की पूजा की जाती है। प्रत्येक रूप का अपना मन्त्र, रंग, भोग और शक्ति है।
चैत्र नवरात्रि 2026: 19 मार्च (गुरुवार) से 27 मार्च (शुक्रवार) तक — रामनवमी 27 मार्च। शारदीय नवरात्रि 2026: 11 अक्टूबर (रविवार) से 19 अक्टूबर (सोमवार) तक — विजयादशमी (दशहरा) 20 अक्टूबर। साथ ही दो गुप्त नवरात्रियाँ — माघ (जनवरी) और आषाढ़ (जुलाई) — साधक तंत्र-साधना के लिए मनाते हैं। इस लेख में हम नौ देवियों का विस्तृत वर्णन, मन्त्र, भोग और साधना-विधि बता रहे हैं।
✦ दिन 1: माँ शैलपुत्री
पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने से शैलपुत्री। पूर्व जन्म में सती (दक्ष-कन्या) थीं, इस जन्म में हिमालय की पुत्री। दाहिने हाथ में त्रिशूल, बायें में कमल। वाहन — वृषभ (नंदी)। मूलाधार चक्र की देवी।
मन्त्र: "ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः"। रंग: लाल (शक्ति, ऊर्जा का प्रतीक)। भोग: देसी घी या घी से बनी मिठाई। फल: रोग-निवारण, लम्बी आयु। चन्द्रमा शैलपुत्री के दोषों से मुक्त होते हैं।
✦ दिन 2: माँ ब्रह्मचारिणी
ब्रह्म + चारिणी = ब्रह्म (तप) में विचरने वाली। शिवजी को पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों की कठोर तपस्या की — केवल बेल-पत्र खाकर। दाहिने हाथ में जप-माला, बायें में कमण्डलु। श्वेत वस्त्र पहने पैदल चलती हैं।
मन्त्र: "ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः"। रंग: नीला (शान्ति)। भोग: चीनी या पंचामृत। फल: तपस्या-बल, संयम, ज्ञान। विद्यार्थियों के लिए विशेष पूजा। स्वाधिष्ठान चक्र की देवी।
✦ दिन 3: माँ चन्द्रघण्टा
मस्तक पर अर्धचन्द्र घण्टे के आकार में — इसलिए चन्द्रघण्टा। दस भुजायें — खड्ग, बाण, धनुष, गदा, त्रिशूल, कमण्डलु, कमल, माला, अभय और वर मुद्रा। वाहन — सिंह। शरीर सुवर्ण-कान्ति। सौम्य भी, युद्ध के लिए तत्पर भी।
मन्त्र: "ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः"। रंग: पीला (तेज, साहस)। भोग: दूध से बनी मिठाई — खीर, बर्फी। फल: साहस, निर्भयता, शत्रु-नाश। मणिपुर चक्र की देवी। शुक्र ग्रह नियन्त्रण।
✦ दिन 4: माँ कूष्माण्डा
कु (छोटा) + ऊष्म (ऊर्जा) + अण्ड (ब्रह्माण्ड) = ब्रह्माण्ड को छोटे अण्डे की तरह उत्पन्न करने वाली। सृष्टि की आदि-शक्ति। आठ भुजायें — कमण्डलु, धनुष, बाण, कमल, अमृत-कलश, चक्र, गदा, जप-माला। वाहन — सिंह।
मन्त्र: "ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः"। रंग: हरा (समृद्धि)। भोग: मालपुआ। फल: स्वास्थ्य, ऐश्वर्य, यश। अनाहत चक्र की देवी। सूर्य ग्रह की अधिष्ठात्री — सूर्य-दोष निवारण।
✦ दिन 5: माँ स्कन्दमाता
भगवान स्कन्द (कार्तिकेय) की माता। चार भुजायें — दो में कमल, एक में बाल-स्कन्द को गोद में, एक अभय मुद्रा में। वाहन — सिंह। श्वेत वर्ण, कमल पर विराजमान।
मन्त्र: "ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः"। रंग: सफेद (पवित्रता)। भोग: केले। फल: सन्तान-सुख, मातृत्व, ज्ञान-वृद्धि। विशुद्ध चक्र। बुध ग्रह नियन्त्रक। माँ-बच्चे का प्रेम-भाव सर्वोच्च।
✦ दिन 6: माँ कात्यायनी
कत्य ऋषि की पुत्री रूप में अवतार — महिषासुर वध के लिए। चार भुजायें — खड्ग, कमल, अभय, वर मुद्रा। वाहन — सिंह। स्वर्ण-वर्ण, अति तेजस्वी।
मन्त्र: "ॐ देवी कात्यायन्यै नमः"। रंग: लाल। भोग: शहद। फल: विवाह-योग, मनवांछित वर। ब्रजवासी कन्यायें कृष्ण को पति रूप में पाने के लिए कात्यायनी की पूजा करती थीं (भागवत-पुराण)। आज्ञा चक्र। बृहस्पति-नियन्त्रक।
✦ दिन 7: माँ कालरात्रि
काल (समय/मृत्यु) की भी रात्रि — काल का भी अन्त करने वाली। शुम्भ-निशुम्भ-रक्तबीज वध। श्याम-वर्ण, बिखरे केश, गले में विद्युत-माला, चार भुजायें — कटार, लोहे का काँटा, अभय, वर। वाहन — गधा। तीन नेत्र। श्वास से अग्नि निकलती है।
मन्त्र: "ॐ देवी कालरात्र्यै नमः"। रंग: नीला/नीला-काला। भोग: गुड़। फल: भूत-प्रेत-बाधा नाश, शनि-दोष शान्ति, रोग-निवारण। सहस्रार चक्र। शनि ग्रह की अधिष्ठात्री। तंत्र-साधक की प्रिय।
✦ दिन 8: माँ महागौरी
अति श्वेत-वर्ण — श्वेत वस्त्र, श्वेत आभूषण। पार्वती ने कठोर तप से शिवजी को पाया, तप से शरीर श्याम हो गया। शिवजी ने गंगा-जल से स्नान कराया तो अति गौर हो गयीं। चार भुजायें — त्रिशूल, डमरू, अभय, वर। वाहन — वृषभ। आयु आठ वर्ष की कन्या के समान।
मन्त्र: "ॐ देवी महागौर्यै नमः"। रंग: गुलाबी। भोग: नारियल। फल: पाप-नाश, सौभाग्य, सुख-समृद्धि। राहु ग्रह नियन्त्रक। अष्टमी पूजन — कन्या-पूजन (8 कन्यायें भोजन कराकर पूजी जाती हैं — महागौरी के प्रतिनिधि रूप में)।
✦ दिन 9: माँ सिद्धिदात्री
अष्ट-सिद्धियाँ देने वाली — अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व, वशित्व। चार भुजायें — गदा, चक्र, शंख, कमल। वाहन — सिंह या कमल। स्वयं शिवजी ने सिद्धिदात्री से ही सिद्धियाँ प्राप्त कीं — अर्धनारीश्वर रूप का रहस्य।
मन्त्र: "ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः"। रंग: बैंगनी। भोग: तिल या हलवा-पूड़ी-चना। फल: सर्व-सिद्धि, मोक्ष, मनोकामना पूर्ति। नवमी पूजन — हवन। केतु ग्रह नियन्त्रक।
✦ नवरात्रि व्रत-नियम और साधना
व्रत-प्रकार: निर्जला (केवल जल) — कठिन, फलाहारी (फल, दूध, सिंघाड़े का आटा, कुट्टू, साबूदाना) — साधारण, एक-समय भोजन — सात्विक। प्याज-लहसुन त्याग। नौ दिन ब्रह्मचर्य।
दैनिक विधि: प्रातः स्नान कर पूजा-स्थल पर माँ का चित्र/मूर्ति। कलश-स्थापना (प्रथम दिन) — मिट्टी के कलश में जौ बोयें, नौ दिन में अंकुरित होते हैं। अखण्ड-ज्योति प्रज्वलित। दुर्गा-सप्तशती पाठ। आरती।
अष्टमी/नवमी कन्या-पूजन: 2-10 वर्ष की कन्यायें (8 या 9) तथा एक बालक (बटुक भैरव)। चरण-धोकर तिलक, खाना (पूरी, हलवा, चना), दक्षिणा-वस्त्र। यह नवदुर्गा का साक्षात् रूप माना जाता है।
✦ 2026 के मुख्य नवरात्रि-तिथियाँ
चैत्र नवरात्रि 2026: 19 मार्च (शैलपुत्री-घटस्थापना) → 20 मार्च (ब्रह्मचारिणी) → 21 मार्च (चन्द्रघण्टा) → 22 मार्च (कूष्माण्डा) → 23 मार्च (स्कन्दमाता) → 24 मार्च (कात्यायनी) → 25 मार्च (कालरात्रि) → 26 मार्च (महागौरी, अष्टमी) → 27 मार्च (सिद्धिदात्री, रामनवमी)।
शारदीय नवरात्रि 2026: 11 अक्टूबर (शैलपुत्री-घटस्थापना) → 12 अक्टूबर (ब्रह्मचारिणी) → 13 अक्टूबर (चन्द्रघण्टा-कूष्माण्डा एक दिन) → 14 अक्टूबर (स्कन्दमाता) → 15 अक्टूबर (कात्यायनी) → 16 अक्टूबर (कालरात्रि) → 17 अक्टूबर (महागौरी, अष्टमी) → 18 अक्टूबर (सिद्धिदात्री, नवमी) → 19 अक्टूबर (विजयादशमी/दशहरा) → 20 अक्टूबर (दशहरा-शोभायात्रा)।
घटस्थापना मुहूर्त (चैत्र 19 मार्च 2026): प्रातः 06:18 से 07:42 तक (शुभ चौघड़िया), अभिजित-मुहूर्त 11:55 से 12:42 तक (सर्वश्रेष्ठ)।
📊नवदुर्गा — 9 रूप, मन्त्र, रंग, भोग एवं फल
| दिन | रूप | मन्त्र | रंग | भोग | मुख्य-फल |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | शैलपुत्री | ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः | लाल | देसी-घी | रोग-निवारण, चन्द्र-दोष-शान्ति |
| 2 | ब्रह्मचारिणी | ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः | नीला | चीनी/पंचामृत | तप-संयम, विद्या-ज्ञान |
| 3 | चन्द्रघण्टा | ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः | पीला | दूध-खीर-बर्फी | साहस, शत्रु-नाश |
| 4 | कूष्माण्डा | ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः | हरा | मालपुआ | स्वास्थ्य, सूर्य-दोष-निवारण |
| 5 | स्कन्दमाता | ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः | सफेद | केले | सन्तान-सुख, बुध-दोष-शान्ति |
| 6 | कात्यायनी | ॐ देवी कात्यायन्यै नमः | लाल | शहद | विवाह-योग, बृहस्पति-नियन्त्रण |
| 7 | कालरात्रि | ॐ देवी कालरात्र्यै नमः | नीला/नीला-काला | गुड़ | भूत-बाधा-नाश, शनि-दोष-शान्ति |
| 8 | महागौरी | ॐ देवी महागौर्यै नमः | गुलाबी | नारियल | पाप-नाश, राहु-दोष-शान्ति |
| 9 | सिद्धिदात्री | ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः | बैंगनी | तिल/हलवा-पूरी | सर्व-सिद्धि, मोक्ष, केतु-नियन्त्रण |
प्रत्येक रूप एक चक्र-जागरण से जुड़ा। 9 दिन = 9 चक्र-शुद्धि।
📊2026 के दोनों नवरात्रि — सम्पूर्ण-तालिका
| दिन | चैत्र-नवरात्रि (मार्च) | शारदीय-नवरात्रि (अक्टूबर) |
|---|---|---|
| 1 (शैलपुत्री) | 19 मार्च 2026 (गुरु) - घटस्थापना | 11 अक्टूबर 2026 (रवि) - घटस्थापना |
| 2 (ब्रह्मचारिणी) | 20 मार्च (शुक्र) | 12 अक्टूबर (सोम) |
| 3 (चन्द्रघण्टा) | 21 मार्च (शनि) | 13 अक्टूबर (मंगल) |
| 4 (कूष्माण्डा) | 22 मार्च (रवि) | 13 अक्टूबर (मंगल) - दो-तिथियाँ-एक-दिन |
| 5 (स्कन्दमाता) | 23 मार्च (सोम) | 14 अक्टूबर (बुध) |
| 6 (कात्यायनी) | 24 मार्च (मंगल) | 15 अक्टूबर (गुरु) |
| 7 (कालरात्रि) | 25 मार्च (बुध) | 16 अक्टूबर (शुक्र) |
| 8 (महागौरी / अष्टमी) | 26 मार्च (गुरु) - कन्या-पूजन | 17 अक्टूबर (शनि) - कन्या-पूजन |
| 9 (सिद्धिदात्री / नवमी) | 27 मार्च (शुक्र) - रामनवमी | 18 अक्टूबर (रवि) |
| 10 (विजयादशमी) | चैत्र में नहीं | 19 अक्टूबर (सोम) - दशहरा |
📋नवरात्रि-व्रत सम्पूर्ण-विधि — 9-चरण
- 1
पूर्व-तैयारी (1 दिन पहले)
घर-शुद्धि। पूजा-स्थल साफ। दुर्गा-माँ की प्रतिमा/चित्र। लाल-वस्त्र, लाल-फूल, गुड़हल। मिट्टी का कलश + जौ-बीज + आम-पत्ते।
- 2
घटस्थापना (दिन 1 — सूर्योदय बाद शुभ-मुहूर्त)
मिट्टी के कलश में पवित्र-जल + सिक्का + पंचरत्न। आम-पत्ते + नारियल। जौ-बीज बोयें (9 दिन में अंकुरित)। अखण्ड-ज्योति प्रज्वलित।
- 3
दैनिक-पूजा-क्रम (दिन 1-9)
प्रात:-स्नान + लाल/नये-वस्त्र। दुर्गा-सप्तशती-पाठ या न्यूनतम 1 अध्याय। 21 नाम-पाठ। उस-दिन-के रूप का मन्त्र-जप 108 बार। संधि-काल आरती।
- 4
दैनिक-भोग
उस-दिन-के रूप-के अनुसार भोग (ऊपर-तालिका)। तुलसी-पत्र वर्जित (तुलसी कृष्ण के लिए)। फल-मेवे-दूध-मिठाई।
- 5
दैनिक-व्रत
फलाहार/निर्जला/एक-समय-भोजन। चावल-गेहूँ-दाल वर्जित (व्रत-नियम)। केवल फल-दूध-सिंघाड़ा-कुट्टू-राजगीरा-साबूदाना।
- 6
अष्टमी (8वाँ दिन) — कन्या-पूजन
9 कन्यायें (2-10 वर्ष) + 1 बालक (बटुक-भैरव) बुलायें। चरण-धोकर तिलक। पूरी-हलवा-चना भोजन। दक्षिणा-वस्त्र। यह नवदुर्गा का साक्षात्-रूप।
- 7
नवमी (9वाँ दिन) — हवन
हवन-कुण्ड में आहुति। दुर्गा-सप्तशती-संक्षिप्त-पाठ। चामुण्डा-स्तोत्र। 108 आहुति। पूर्णाहुति।
- 8
रामनवमी (चैत्र 9वाँ दिन) — विशेष
चैत्र-नवरात्रि के 9वें दिन रामनवमी (27 मार्च 2026)। रामायण-पाठ, श्री-राम-पूजन। दोपहर 12:00 बजे रामजन्म।
- 9
विजयादशमी (शारदीय 10वाँ दिन)
19 अक्टूबर 2026। दशहरा। शस्त्र-पूजन, अपराजिता-पूजन, सीमोल्लंघन (सीमा-लांघना), शमी-वृक्ष पूजन। रावण-दहन।
⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें
✗ सब 9 दिन एक-ही रंग के कपड़े पहनना
क्यों: प्रत्येक दिन एक रूप — एक रंग। 9 दिन के 9 अलग-रंग। एक-रंग पहनना = रूप-विशेष-ऊर्जा-संग-संरेखण नहीं।
✓ सही उपाय: दिन-वार रंग पहनें (ऊपर-तालिका)। 9 साड़ी/कुर्ती की व्यवस्था कठिन हो — कम-से-कम दुपट्टा/स्कार्फ का रंग बदलें।
✗ अष्टमी कन्या-पूजन में कन्याओं को मना करना/भोजन कम देना
क्यों: कन्या-पूजन = साक्षात्-नवदुर्गा-पूजन। कन्याओं का अनादर = माँ-दुर्गा का अनादर। शास्त्र-कठोर-निषेध।
✓ सही उपाय: 9 कन्यायें + 1 बटुक बुलायें। पूरी-हलवा-चना-नारियल भोजन। ₹51-101 दक्षिणा प्रति-कन्या। नये-वस्त्र (ribbon/clip-bracelet)। चरण-छुयें।
✗ व्रत-दिन तामसिक-भोजन (मांस-मदिरा-प्याज-लहसुन)
क्यों: नवरात्रि सात्विक-काल। तामसिक से माँ-दुर्गा-असन्तुष्ट। पुण्य-निरस्त।
✓ सही उपाय: 9 दिन पूर्ण-शाकाहार + प्याज-लहसुन-त्याग। ब्रह्मचर्य-पालन। मद्य-सेवन निषिद्ध।
✗ अखण्ड-ज्योति बीच में बुझ जाने पर अनदेखा करना
क्यों: अखण्ड-ज्योति = निरन्तर-दीपक 9 दिन। बुझना = अशुभ-संकेत। तुरन्त-समाधान आवश्यक।
✓ सही उपाय: घी/तेल भरा रखें। मोमबत्ती के साथ (backup)। यदि बुझे — माँ से क्षमा-प्रार्थना, पुनः-प्रज्वलित।
✗ मासिक-धर्म में पूजा-स्पर्श करना
क्यों: पारम्परिक-नियम मासिक-धर्म में पूजा-स्थल-स्पर्श वर्जित। 4-5 दिन पूजा-कक्ष में प्रवेश नहीं।
✓ सही उपाय: मासिक-धर्म में मानसिक-व्रत + मन्त्र-जप कर सकती हैं। पूजा-स्पर्श न करें। 4-5 दिन बाद स्नान करके पुनः-पूजा।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवदुर्गा का क्रम क्यों यही है?▼
दुर्गा-सप्तशती और मार्कण्डेय-पुराण में यह क्रम चक्र-जागरण से जुड़ा है — मूलाधार से सहस्रार तक। शैलपुत्री से सिद्धिदात्री तक नौ चक्रों का क्रमशः जागरण होता है। तंत्र-साधक के लिए नौ रात्रि = नौ चक्र-शुद्धि।
क्या स्त्रियाँ मासिक-धर्म में नवरात्रि व्रत कर सकती हैं?▼
पारम्परिक नियम — मासिक-धर्म में पूजा-स्पर्श वर्जित। परन्तु व्रत स्वयं चालू रख सकती हैं — मानसिक जप, मन्त्र-स्मरण कर सकती हैं। 4-5 दिन बाद स्नान कर पुनः पूजा प्रारम्भ। आधुनिक आचार्य कहते हैं — यह जीव-विज्ञान है, अशुद्धता नहीं — मन से माँ को स्मरण ही पर्याप्त।
क्या केवल चैत्र-शारदीय नवरात्रि होती है?▼
नहीं — चार नवरात्रियाँ हैं। 1) चैत्र (मार्च-अप्रैल) 2) शारदीय (सितम्बर-अक्टूबर) — सबसे प्रसिद्ध 3) माघ-गुप्त (जनवरी-फरवरी) 4) आषाढ़-गुप्त (जुलाई-अगस्त)। दो गुप्त नवरात्रियाँ तंत्र-साधना के लिए विशेष — दस-महाविद्या पूजा।
दशहरा-विजयादशमी का क्या अर्थ है?▼
विजयादशमी = विजय + दशमी (दशवें दिन की विजय)। माँ दुर्गा ने महिषासुर पर नौ दिन के युद्ध के बाद दसवें दिन विजय पायी। साथ ही श्री राम ने रावण-वध दशमी को किया (वाल्मीकि-रामायण के अनुसार)। शस्त्र-पूजन, अपराजिता-पूजन, सीमोल्लंघन (सीमा-लांघना — नया कार्य प्रारम्भ), शमी-वृक्ष पूजन — मुख्य कार्य।
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