द्वादश-ज्योतिर्लिंग — भगवान शिव के 12 स्वयम्भू ज्योतिर्लिंग। शिव-पुराण के अनुसार। प्रत्येक स्थान पर शिव-स्वयं प्रकट हुए। द्वादश-ज्योतिर्लिंग-स्तोत्र (आदि शंकराचार्य रचित) पाठ करने से सम्पूर्ण-दर्शन-फल।
सबसे-शक्तिशाली शिव-तीर्थ। जीवन में एक-बार सब 12 के दर्शन = मोक्ष-प्राप्ति। महाशिवरात्रि (15 फरवरी 2026) पर सब-ज्योतिर्लिंगों में रात्रि-पूजा।
✦ 12 ज्योतिर्लिंग — सम्पूर्ण-सूची
1. सोमनाथ (गुजरात, वेरावल) — सबसे प्रथम। समुद्र-तट। मोहम्मद-गज़नवी द्वारा 17 बार लूटा-नष्ट किया गया, 17 बार पुनर्निर्माण।
2. मल्लिकार्जुन (आन्ध्र-प्रदेश, श्रीशैलम) — दक्षिण-काशी। शिव + पार्वती (मल्लिका + अर्जुन) रूप।
3. महाकालेश्वर (मध्य-प्रदेश, उज्जैन) — एकमात्र दक्षिण-मुखी। भस्म-आरती विश्व-प्रसिद्ध। काल का स्वामी।
4. ओंकारेश्वर (मध्य-प्रदेश, खण्डवा) — नर्मदा-तट। द्वीप-रूप — "ॐ" आकार।
5. केदारनाथ (उत्तराखण्ड, 3,583m) — हिमालय में। चार-धाम-यात्रा। सबसे-दुर्गम। अप्रैल-नवम्बर खुले।
6. भीमशंकर (महाराष्ट्र, पुणे) — सह्याद्रि। भीम-नामक राक्षस से रक्षा।
7. काशी-विश्वनाथ (वाराणसी) — गंगा-तट। "मोक्ष-नगरी"। प्रति-दिन 50,000+ श्रद्धालु।
8. त्र्यम्बकेश्वर (नासिक) — गोदावरी-उद्गम। 3-नेत्र-शिव। काल-सर्प-दोष-निवारण-स्थल।
9. वैद्यनाथ (झारखण्ड, देवघर) — रावण द्वारा स्थापित। श्रावण-सावन में 1 करोड़ श्रद्धालु।
10. नागेश्वर (गुजरात, द्वारका के पास) — समुद्र-तट। नाग-सर्प से रक्षा।
11. रामेश्वरम (तमिलनाडु) — श्रीराम द्वारा स्थापित। चार-धाम। दक्षिण-भारत का सर्वोच्च-तीर्थ।
12. घृष्णेश्वर (महाराष्ट्र, औरंगाबाद, एलोरा-गुफा) — सबसे-अन्तिम। घुश्ण-नामक भक्त की कथा।
✦ द्वादश-ज्योतिर्लिंग-स्तोत्र
आदि शंकराचार्य रचित। 12 श्लोक — एक-एक ज्योतिर्लिंग के लिए।
मूल-श्लोक: "सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये, ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्। भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं, तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये॥"
पाठ-फल: सम्पूर्ण-12 ज्योतिर्लिंग-दर्शन के बराबर। दैनिक-पाठ शिव-कृपा।
श्रावण-सोमवार + महाशिवरात्रि-दिन विशेष-शुभ।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सबसे-दुर्गम ज्योतिर्लिंग?▼
केदारनाथ (3,583m हिमालय)। गौरीकुण्ड से 16 km पैदल/घोड़ा/हेलिकॉप्टर। अप्रैल-नवम्बर ही खुला (सर्दियों में बर्फ-बन्द)। 2013 में बाढ़-त्रासदी।
सब 12 कब-कब-कितना समय?▼
न्यूनतम 21 दिन की यात्रा। उत्तर-भारत: सोमनाथ-नागेश्वर-त्र्यम्बकेश्वर-भीमशंकर-घृष्णेश्वर-केदारनाथ-काशी-वैद्यनाथ। दक्षिण: रामेश्वरम-मल्लिकार्जुन। मध्य: महाकालेश्वर-ओंकारेश्वर। बहुत-धैर्य + व्यवस्था।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।