प्रदोष व्रत — भगवान शिव को समर्पित मासिक व्रत, जो प्रत्येक त्रयोदशी (शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्ष की) के सायंकाल किया जाता है। "प्रदोष" शब्द संस्कृत के "प्र + दोष" से बना है — "प्र" अर्थात् पूर्ण, "दोष" अर्थात् रात्रि का प्रारम्भिक काल। प्रदोष काल सूर्यास्त से लगभग 90 मिनट तक का समय है (45 मिनट पूर्व + 45 मिनट पश्चात्) — यही व्रत का प्रमुख समय।
शास्त्रों के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर नंदी के सामने आनन्द-तांडव करते हैं। सभी देवता एकत्र होकर शिव-स्तुति करते हैं। इस समय शिव को प्रसन्न करना सबसे सरल — एक प्रदोष व्रत वर्ष की 24 प्रदोष तिथियों के पुण्य के बराबर। इस लेख में हम 2026 की सभी 24 प्रदोष तिथियाँ — सटीक दिनांक, प्रदोष काल समय, पूजा विधि, मन्त्र, एवं विशेष प्रदोष का विस्तृत विवरण देंगे।
✦ प्रदोष काल की सटीक गणना
प्रदोष काल = सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व से 45 मिनट पश्चात् तक (कुल 90 मिनट)। यह वही समय है जब दिन और रात्रि का संगम होता है — "संध्या काल"। आधुनिक खगोलीय शब्दों में यह "civil twilight" का अंतिम भाग है।
उदाहरण: यदि दिल्ली में 28 अप्रैल 2026 को सूर्यास्त 6:55 PM है — प्रदोष काल 6:10 PM से 7:40 PM तक। प्रत्येक स्थान-दिनांक के लिए अलग। हमारा कैलकुलेटर 200+ शहरों के लिए स्थानीय प्रदोष काल देता है।
त्रयोदशी तिथि का प्रदोष-काल में होना अनिवार्य। यदि त्रयोदशी सूर्यास्त के पहले समाप्त हो जाए — व्रत द्वादशी को ही माना जाएगा। यदि त्रयोदशी अगले दिन के सूर्यास्त के बाद ही प्रारम्भ हो — व्रत चतुर्दशी की रात्रि को।
✦ 2026 की 24 प्रदोष तिथियाँ
जनवरी 2026: 7 जनवरी (बुध) — पौष शुक्ल त्रयोदशी। प्रदोष काल 5:55-7:25 PM। 22 जनवरी (गुरु) — पौष कृष्ण त्रयोदशी। प्रदोष काल 6:00-7:30 PM।
फरवरी 2026: 6 फरवरी (शुक्र) — माघ शुक्ल त्रयोदशी। प्रदोष काल 6:10-7:40 PM। 20 फरवरी (शुक्र) — माघ कृष्ण त्रयोदशी। प्रदोष काल 6:20-7:50 PM।
मार्च 2026: 7 मार्च (शनि) — फाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी (शनि प्रदोष — शनि-दोष निवारण हेतु विशेष शुभ)। प्रदोष काल 6:25-7:55 PM। 22 मार्च (रवि) — फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी। प्रदोष काल 6:35-8:05 PM।
अप्रैल 2026: 5 अप्रैल (रवि) — चैत्र शुक्ल त्रयोदशी (रवि प्रदोष — आरोग्य हेतु शुभ)। प्रदोष काल 6:40-8:10 PM। 20 अप्रैल (सोम) — चैत्र कृष्ण त्रयोदशी (सोम प्रदोष — सर्वश्रेष्ठ, इच्छा पूर्ति हेतु)। प्रदोष काल 6:50-8:20 PM।
मई 2026: 5 मई (मंगल) — वैशाख शुक्ल त्रयोदशी (मंगल प्रदोष — कर्ज मुक्ति, ऋण-वसूली हेतु)। प्रदोष काल 7:00-8:30 PM। 19 मई (मंगल) — वैशाख कृष्ण त्रयोदशी। प्रदोष काल 7:05-8:35 PM।
जून 2026: 4 जून (बुध) — ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी (बुध प्रदोष — विद्या-व्यापार हेतु)। प्रदोष काल 7:15-8:45 PM। 18 जून (गुरु) — ज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी (गुरु प्रदोष — ज्ञान, समृद्धि)। प्रदोष काल 7:20-8:50 PM।
जुलाई 2026: 3 जुलाई (शुक्र) — आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी (शुक्र प्रदोष — सौभाग्य)। प्रदोष काल 7:25-8:55 PM। 17 जुलाई (शुक्र) — आषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी। प्रदोष काल 7:25-8:55 PM।
अगस्त 2026: 1 अगस्त (शनि) — श्रावण शुक्ल त्रयोदशी (शनि प्रदोष — श्रावण मास में शिव-कृपा का सर्वोच्च समय)। प्रदोष काल 7:20-8:50 PM। 16 अगस्त (रवि) — श्रावण कृष्ण त्रयोदशी। प्रदोष काल 7:10-8:40 PM। 31 अगस्त (सोम) — भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी (सोम प्रदोष)। प्रदोष काल 6:55-8:25 PM।
सितम्बर 2026: 14 सितम्बर (सोम) — भाद्रपद कृष्ण त्रयोदशी (सोम प्रदोष)। प्रदोष काल 6:40-8:10 PM। 30 सितम्बर (बुध) — आश्विन शुक्ल त्रयोदशी। प्रदोष काल 6:20-7:50 PM।
अक्टूबर 2026: 14 अक्टूबर (बुध) — आश्विन कृष्ण त्रयोदशी (धनतेरस — विशेष शुभ)। प्रदोष काल 6:00-7:30 PM। 30 अक्टूबर (शुक्र) — कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी। प्रदोष काल 5:50-7:20 PM।
नवम्बर 2026: 7 नवम्बर (शनि) — कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (धनतेरस + शनि प्रदोष — महा-शुभ)। प्रदोष काल 5:35-7:05 PM। 13 नवम्बर (शुक्र) — कार्तिक शुक्ल त्रयोदशी। प्रदोष काल 5:25-6:55 PM। 27 नवम्बर (शुक्र) — मार्गशीर्ष कृष्ण त्रयोदशी। प्रदोष काल 5:15-6:45 PM।
दिसम्बर 2026: 12 दिसम्बर (शनि) — मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी (शनि प्रदोष)। प्रदोष काल 5:25-6:55 PM। 27 दिसम्बर (रवि) — पौष कृष्ण त्रयोदशी। प्रदोष काल 5:35-7:05 PM।
✦ विशेष प्रदोष व्रत — वार-अनुसार फल
सोम प्रदोष (Monday Pradosh) — सर्वश्रेष्ठ। चन्द्र शिव का प्रिय ग्रह। इच्छा-पूर्ति हेतु अद्वितीय। इस दिन का व्रत 100 वर्षों के पाप मिटाता है।
मंगल प्रदोष (Tuesday/Mars Pradosh) — कर्ज मुक्ति, ऋण-वसूली हेतु विशेष। मंगल ऋण का कारक ग्रह। इस प्रदोष पर हनुमान-शिव दोनों की पूजा।
बुध प्रदोष (Wednesday Pradosh) — विद्या-प्राप्ति, व्यापार में सफलता। शिक्षा एवं व्यवसाय आरम्भ हेतु शुभ।
गुरु प्रदोष (Thursday Pradosh) — पितृ-दोष निवारण। ज्ञान, समृद्धि, मान-सम्मान। बृहस्पति-शिव दोनों ज्ञान के अधिष्ठाता।
शुक्र प्रदोष (Friday Pradosh) — सौभाग्य, धन-समृद्धि, वैवाहिक सुख। महिलाओं हेतु विशेष शुभ। पति की दीर्घायु।
शनि प्रदोष (Saturday Pradosh) — शनि-दोष, साढ़े साती, ढैय्या निवारण। सर्वाधिक प्रसिद्ध। शिव शनि के गुरु — शिव-कृपा से शनि-कृपा।
रवि/भौम प्रदोष (Sunday Pradosh) — आरोग्य लाभ, सूर्य-दोष निवारण। नेतृत्व, सरकारी कार्यों हेतु।
✦ प्रदोष व्रत विधि
दिन भर: प्रातः उठकर स्नान, श्वेत/भगवा वस्त्र। पूरे दिन सात्विक भोजन (एक समय)। मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन, मसूर दाल वर्जित। मन में "ॐ नमः शिवाय" का जाप।
सूर्यास्त से पूर्व: स्नान करें, ध्यान केन्द्रित। प्रदोष काल आरम्भ होने से पहले शिवालय अथवा घर के मंदिर में जाएँ। शिवलिंग पर पंचामृत स्नान (दूध, दही, घी, शहद, चीनी), जल-दूध अभिषेक, बेल-पत्र (3 पत्तियाँ एक डंडी में, उल्टी रखें), भांग, धतूरा, सफेद पुष्प, चंदन, अक्षत अर्पण।
मन्त्र-जाप: "ॐ नमः शिवाय" (पंचाक्षरी, सर्वश्रेष्ठ) कम से कम 108 बार। महामृत्युञ्जय मन्त्र — "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे..." 11/108 बार। शिव चालीसा अथवा शिव तांडव स्तोत्र।
प्रदोष काल पूजा: सूर्यास्त के 45 मिनट पूर्व प्रारम्भ। दीप जलाएँ — 5/7/11 दीप शिव के सम्मुख। अगरबत्ती-धूप। प्रदोष व्रत कथा सुनें/पढ़ें (वार-अनुसार)। आरती करें — "ॐ जय शिव ओंकारा"।
पारण: व्रत प्रदोष काल समाप्त होने (सूर्यास्त के 45 मिनट बाद) पर खुलता है। एकभुक्त (एक समय) फलाहारी अथवा सात्विक भोजन। दान — दूध, सफेद वस्त्र, चांदी।
विशेष ध्यान: शिवलिंग पर हल्दी, सिंदूर, केवड़ा का फूल, चम्पा का फूल वर्जित। तुलसी पत्र भी शिव-पूजन में नहीं। बेल-पत्र शिव का सर्वाधिक प्रिय।
✦ प्रदोष व्रत के लाभ
धार्मिक लाभ: समस्त पाप-कर्मों का नाश, मोक्ष-प्राप्ति। शिव-कृपा से सभी इच्छाएँ पूर्ण। महामृत्युञ्जय का संरक्षण — असाध्य रोग, अकाल मृत्यु से रक्षा। पितृ-दोष, कालसर्प, सर्प-दोष का निवारण।
ग्रह-शान्ति: प्रत्येक वार के प्रदोष से उस ग्रह की कृपा। शनि-दोष, राहु-केतु, चन्द्र-दोष, मंगल-दोष — सभी ग्रहों के दोष शान्त।
मानसिक लाभ: मन-शान्ति, ध्यान में एकाग्रता, क्रोध एवं अहंकार पर विजय। गृह-कलह से मुक्ति। दाम्पत्य सुख।
विशेष: संतान-प्राप्ति हेतु प्रदोष विशेष फलदायी। महिलाओं द्वारा 16 प्रदोष का व्रत-संकल्प से पुत्र-प्राप्ति की मान्यता।
📊7 वार पर प्रदोष-व्रत — विशेष-फल
| वार | नाम | विशेष-फल | विशिष्ट-कार्य |
|---|---|---|---|
| सोमवार | सोम-प्रदोष | चन्द्र-दोष-निवारण, मानसिक-शान्ति | दूध-अभिषेक |
| मंगलवार | भौम-प्रदोष | ऋण-मुक्ति, मांगलिक-दोष-शान्ति | सिन्दूर-अर्पण, हनुमान-पूजा |
| बुधवार | सौम्य-प्रदोष | सन्तान-प्राप्ति, विद्या-वृद्धि | पञ्चामृत-अभिषेक |
| गुरुवार | गुरु-प्रदोष | धन-समृद्धि, शत्रु-नाश | पीला-वस्त्र-दान |
| शुक्रवार | भृगु-प्रदोष | दाम्पत्य-सुख, सौभाग्य-वृद्धि | सफेद-वस्त्र-कमल |
| शनिवार | शनि-प्रदोष | पुत्र-प्राप्ति (सर्वश्रेष्ठ), साढ़े-साती-शान्ति | तेल-तिल-काला-वस्त्र-दान |
| रविवार | भानु-प्रदोष | आरोग्य-दीर्घायु, यश-वृद्धि | गुड़-गेहूँ-तांबा-दान |
शनि-प्रदोष + सोम-प्रदोष सबसे-शक्तिशाली। 16 प्रदोष-व्रत = पुत्र-प्राप्ति-योग।
📊2026 के मुख्य प्रदोष-व्रत — मास-वार
| मास | कृष्ण-प्रदोष | शुक्ल-प्रदोष | विशेष |
|---|---|---|---|
| जनवरी | 5 जनवरी (सोम) | 20 जनवरी (मंगल) | सोम-प्रदोष |
| फरवरी | 4 फरवरी (बुध) | 19 फरवरी (गुरु) | — |
| मार्च | 5 मार्च (गुरु) | 20 मार्च (शुक्र) | — |
| अप्रैल | 4 अप्रैल (शनि) | 18 अप्रैल (शनि) | ✓ दो शनि-प्रदोष |
| मई | 4 मई (सोम) | 18 मई (सोम) | ✓ दो सोम-प्रदोष |
| जून | 2 जून (मंगल) | 17 जून (बुध) | — |
| जुलाई | 10 जुलाई (शुक्र) | 25 जुलाई (शनि) | — |
| अगस्त | 14 अगस्त (शुक्र) | 29 अगस्त (शनि) | ✓ शनि-प्रदोष |
| सितम्बर | 13 सितम्बर (रवि) | 28 सितम्बर (सोम) | — |
| अक्टूबर | 13 अक्टूबर (मंगल) | 27 अक्टूबर (मंगल) | — |
| नवम्बर | 5 नवम्बर (गुरु) | 20 नवम्बर (शुक्र) | देवउठनी |
| दिसम्बर | 11 दिसम्बर (शुक्र) | 25 दिसम्बर (शुक्र) | — |
📋प्रदोष-व्रत सम्पूर्ण-विधि — 8-चरण
- 1
द्वादशी (एक-दिन पूर्व)
सायं हल्का सात्विक भोजन। मसूर-दाल-चावल-मांस-प्याज-लहसुन वर्जित। सूर्यास्त के बाद कुछ नहीं।
- 2
त्रयोदशी प्रात:
सूर्योदय से पूर्व उठें। स्नान। श्वेत/हल्के-वस्त्र। संकल्प: "मैं [नाम] _____ कामना से प्रदोष-व्रत करता/करती हूँ।"
- 3
दिन-भर व्रत
निर्जला/फलाहारी। चावल-अन्न-दाल वर्जित। फल, दूध, सिंघाड़े-कुट्टू-राजगीरा। दिन-भर शिव-स्मरण।
- 4
दैनिक मन्त्र-जप
"ॐ नमः शिवाय" 108 बार × कई-बार। महामृत्युञ्जय-मन्त्र। शिव-तांडव-स्तोत्र। शिव-चालीसा।
- 5
प्रदोष-काल (सूर्यास्त ± 45 मिनट)
मुख्य-पूजा-काल। सूर्यास्त से 45 मिनट पहले से 45 मिनट बाद तक। 1.5 घंटे का "प्रदोष-काल"।
- 6
षोडशोपचार पूजन
शिवलिंग पर पञ्चामृत (दूध-दही-शहद-घी-शक्कर) + गंगाजल अभिषेक। बिल्व-पत्र, भस्म, सफेद-फूल अर्पण।
- 7
प्रदोष-कथा-श्रवण
त्रयोदशी की पौराणिक-कथा सुनें/पढ़ें। शिव-पुराण की त्रयोदशी-व्रत-महिमा। आरती।
- 8
पारण
त्रयोदशी समाप्ति के बाद। ब्राह्मण-भोज + दान (सफेद-वस्त्र, चावल, खीर)। फिर स्वयं भोजन।
⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें
✗ प्रदोष-काल छोड़कर रात-में पूजा
क्यों: प्रदोष-काल = सूर्यास्त ± 45 मिनट। यह सबसे-शक्तिशाली शिव-पूजा-काल। रात-में पूजा = आधा-फल।
✓ सही उपाय: सूर्यास्त-समय पंचांग में देखें। 45 मिनट पहले से तैयार रहें। 1.5 घंटे का यह "Golden Window"।
✗ प्रदोष-व्रत में चावल खाना
क्यों: व्रत-दिन अन्न पूर्ण-वर्जित (एकादशी की तरह)। चावल विशेष-वर्जित।
✓ सही उपाय: फलाहार। साबूदाना-खिचड़ी, सिंघाड़े-हलवा, कुट्टू-पकौड़ी। पानी अनुमत।
✗ शिव-पूजा में तुलसी-पत्र
क्यों: तुलसी विष्णु-प्रिया। शिव-पूजा में बिल्व-पत्र। तुलसी = दोष।
✓ सही उपाय: शिव को बिल्व-पत्र अर्पण। तुलसी कभी न। पूजा-स्थल पर अलग-स्थान।
✗ शिवलिंग पर हल्दी/केसर लगाना
क्यों: शिवलिंग पर हल्दी-केसर-कुमकुम वर्जित। केवल भस्म एवं सफेद-चन्दन।
✓ सही उपाय: भस्म + सफेद-चन्दन + सफेद-फूल। हल्दी-केसर देवी-पूजा के लिए।
✗ सोम-प्रदोष/शनि-प्रदोष को सामान्य-समझकर अनदेखा करना
क्यों: सोम-प्रदोष = चन्द्र+शिव संयोग = सर्वश्रेष्ठ। शनि-प्रदोष = पुत्र-प्राप्ति-योग। दोनों चमत्कारी।
✓ सही उपाय: 2026 में सोम-प्रदोष: 5 जनवरी, 4 मई, 18 मई, 28 सितम्बर। शनि-प्रदोष: 4 अप्रैल, 18 अप्रैल, 29 अगस्त। ये विशेष-दिवस।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या त्रयोदशी एवं प्रदोष व्रत एक हैं?▼
हाँ। प्रत्येक त्रयोदशी (शुक्ल एवं कृष्ण पक्ष) पर प्रदोष व्रत किया जाता है। "त्रयोदशी" तिथि का नाम है, "प्रदोष" काल का नाम है। दोनों मिलकर पूर्ण व्रत बनाता है।
क्या प्रदोष में पूरा दिन व्रत आवश्यक है?▼
पारम्परिक रूप से हाँ। प्रातः से प्रदोष काल तक उपवास, फिर पूजा, फिर पारण। हालांकि कठिन हो तो "एकभुक्त" (एक समय भोजन) सायंकाल फलाहारी कर सकते हैं। मुख्य महत्व प्रदोष काल की पूजा का है।
क्या मासिक प्रदोष करना चाहिए या केवल विशेष प्रदोष?▼
जो सम्भव हो। नियमित मासिक प्रदोष (2 प्रति माह = 24 प्रति वर्ष) सर्वश्रेष्ठ। यदि सम्भव नहीं, तो शनि प्रदोष, सोम प्रदोष, श्रावण मास के प्रदोष — विशेष शुभ। महाशिवरात्रि से एक दिन पूर्व का प्रदोष विशेष फलदायी।
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सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।