✦ नवग्रह ✦
✦ नौ ज्योतिषीय शक्तियाँ — जीवन-कर्म-फल के अधिष्ठाता ✦
✦ नवग्रह परिचय ✦
अन्य नाम / उपाधियाँ: नवग्रह, ग्रह-राज, अष्ट-दिक्पाल, ग्रहाधिप
नवग्रह वैदिक ज्योतिष के नौ प्रमुख खगोलीय पिण्ड एवं उनकी देवता-शक्तियाँ हैं — सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु। ये "ग्रह" शब्द से ज्ञात होते हैं — जो ग्रहण करते हैं, अर्थात् जीव के कर्म-फल को नियन्त्रित करते हैं।
सात भौतिक ग्रह (सूर्य से शनि तक) वास्तविक खगोलीय पिण्ड हैं। राहु एवं केतु "छाया-ग्रह" हैं — चन्द्र-कक्षा एवं सूर्य-कक्षा के संगम-बिन्दु (lunar nodes)। इन्हें भी देवता-रूप दिया गया क्योंकि ये ग्रहण के कारक हैं।
नवग्रह की पूजा प्रत्येक हिन्दू मन्दिर में अनिवार्य — गर्भ-गृह के बाहर "नवग्रह स्थान" होता है। प्रत्येक ग्रह का अपना दिन, धातु, रत्न, मन्त्र, अधिष्ठात्री देवता एवं भोग। जन्म-कुण्डली में इनकी स्थिति से जीवन के सुख-दुःख निर्धारित होते हैं।
✦ स्वरूप एवं चित्रण ✦
नौ अलग देव-मूर्तियाँ — मध्य में सूर्य पूर्वाभिमुख, अन्य आठ चारों ओर अलग-अलग दिशाओं में, अपने-अपने वाहनों एवं आयुधों के साथ। सूर्य रथ पर सात अश्व, चन्द्र रथ पर हिरण, मंगल मेष पर, बुध सिंह पर, गुरु हाथी पर, शुक्र अश्व पर, शनि कौवा पर, राहु सिंह पर, केतु गिद्ध पर।
✦ परिवार एवं सम्बन्ध ✦
✦ प्रमुख मन्त्र ✦
ॐ ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः सर्वे ग्रहाः शान्ति करा भवन्तु॥
Om Brahma Murari Tripurantakari · Bhanuh Shashi Bhumisuto Budhashcha · Gurushcha Shukrah Shani Rahu Ketavah · Sarve Grahah Shanti-Kara Bhavantu
अर्थ: ब्रह्मा, विष्णु, शिव की कृपा से सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु — सभी ग्रह शान्ति प्रदान करें।
ॐ नवग्रहाय नमः
Om Navagrahaya Namah
अर्थ: नौ ग्रहों को सम्मिलित नमस्कार।
✦ दार्शनिक प्रतीक ✦
नवग्रह कर्म-सिद्धान्त के साकार रूप हैं — पूर्व-कर्म जीव की वर्तमान कुण्डली में ग्रह-स्थिति के रूप में अंकित होते हैं। ग्रह "दण्ड" नहीं देते — वे केवल कर्म-फल का माध्यम हैं। जैसे न्यायाधीश दण्ड नहीं करता, परन्तु अपराध के अनुसार न्याय देता है — ग्रह भी कर्मानुसार फल देते हैं। शान्ति-पूजन से कर्म-फल मृदु होता है, टलता नहीं।