नवग्रह यन्त्र

नवग्रह यन्त्र

नौ ग्रहों की संयुक्त शान्ति का यन्त्र

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नवग्रह यन्त्र क्या है?

नवग्रह यन्त्र — नौ ग्रहों (सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु) की संयुक्त शान्ति-यन्त्र। यह यन्त्र समस्त ग्रह-दोषों — कालसर्प, मंगल, शनि साढ़ेसाती, मांगलिक — के निवारण हेतु अति-प्रभावशाली।

जिनकी जन्म-कुण्डली में अनेक अशुभ ग्रह-योग हों, अथवा जिनकी कुण्डली में नवग्रह-दोष हो — उनके लिए यह यन्त्र सर्वोत्तम। प्रत्येक ग्रह का अपना बीज-मन्त्र अंकित है, जिनके सम्मिलित जप से सम्पूर्ण ग्रह-शान्ति होती है।

मन्दिरों में नवग्रह-स्थान पर विशाल नवग्रह यन्त्र होता है। गृह-स्थान में लघु आकार का यन्त्र पूजा-गृह में स्थापित किया जाता है। प्रत्येक ग्रह के दिन (रवि-सूर्य, सोम-चन्द्र, आदि) अनुसार पूजा करें।

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ज्यामितीय रचना

३×३ का जादुई वर्ग — मध्य में सूर्य, और चारों ओर ८ ग्रह। प्रत्येक कोष्ठ में ग्रह का बीज-मन्त्र। बाहर अष्ट-दल कमल, द्वादश-दल कमल (राशियों के लिए), २७-दल कमल (नक्षत्रों के लिए), वृत्त एवं भूपुर। प्रत्येक ग्रह की रंग-संकेतिक छवि।

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अधिष्ठात्री देवता

नवग्रह — सूर्य (आत्मा), चन्द्र (मन), मंगल (पराक्रम), बुध (बुद्धि), बृहस्पति (ज्ञान), शुक्र (प्रेम), शनि (कर्म-फल), राहु (चन्द्र पात बिन्दु उत्तर), केतु (चन्द्र पात बिन्दु दक्षिण)। प्रत्येक ग्रह का अपना अधिष्ठात्री देवता।

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मन्त्र

ॐ ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च। गुरुश्च शुक्रः शनि राहु केतवः सर्वे ग्रहाः शान्ति करा भवन्तु॥

Om Brahma Murari Tripurantakari · Bhanuh Shashi Bhumisuto Budhashcha · Gurushcha Shukrah Shani Rahu Ketavah · Sarve Grahah Shanti-Kara Bhavantu

अर्थ: ब्रह्मा, विष्णु, शिव की कृपा से सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु एवं केतु — सभी ग्रह शान्ति प्रदान करें।

ॐ ह्रीं श्रीं नवग्रह स्थापनाय नमः

Om Hreem Shreem Navagraha-sthapanaya Namah

अर्थ: नवग्रह स्थापन को नमन — सम्पूर्ण ग्रह-शान्ति का बीज मन्त्र।

अनुशंसित जप: 108 बार

लाभ एवं फल

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सभी ग्रह-दोष शान्ति
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कालसर्प एवं मंगल दोष निवारण
शनि साढ़ेसाती में राहत
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स्वास्थ्य-लाभ
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मानसिक शान्ति
जीवन की समस्त बाधाओं का नाश
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स्थापना नियम

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सामग्री

अष्टधातु (सर्वोत्तम — आठ धातुओं का संयोग प्रत्येक ग्रह की धातु से सम्बन्धित), ताम्र, स्वर्ण-रजत संयोग।

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दिशा

पूजा-गृह में पूर्व अथवा उत्तर दीवार। यन्त्र का मुख पूर्व। प्रत्येक ग्रह की दिशा का ध्यान रखें।

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मुहूर्त

अमावस्या (विशेषतः शनि अमावस्या), ग्रहण-काल समाप्ति के बाद, शनिवार, गुरु पुष्य योग। प्रत्येक ग्रह के अपने दिन भी विशेष शुभ।