नवग्रह-पूजा — 9 ग्रहों (सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु) की पूजा। ग्रह-दोष-निवारण के लिए। मुख्य-शुभ-कार्य से पूर्व अनिवार्य। नया-घर, नया-व्यापार, विवाह, यज्ञ।
✦ नवग्रह-यन्त्र-स्थापना
सूर्य: मध्य। चन्द्र: दक्षिण-पूर्व। मंगल: दक्षिण। बुध: पूर्व। गुरु: उत्तर-पूर्व। शुक्र: पश्चिम। शनि: पश्चिम-दक्षिण। राहु: दक्षिण-पश्चिम। केतु: उत्तर।
धान्य-स्थापन: सूर्य=गेहूँ, चन्द्र=चावल, मंगल=मसूर, बुध=मूँग, गुरु=चना, शुक्र=कमल-बीज/चावल, शनि=तिल/उड़द, राहु=उड़द, केतु=कुलथी।
✦ विधि
गणेश-स्मरण → नवग्रह-स्थापना → 9 ग्रहों का क्रमश: षोडशोपचार-पूजन।
प्रत्येक ग्रह का बीज-मन्त्र 108 बार।
नवग्रह-स्तोत्र-पाठ।
हवन: 108 आहुति।
दान: ग्रह-वार वस्तुएँ।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नवग्रह-शान्ति कब करें?▼
विवाह, गृह-प्रवेश, नया-व्यापार, ग्रह-दोष-निवारण, साढ़े-साती। हर 6-12 महीने रखें।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।