नवग्रह पूजा

विवाह/गृह-प्रवेश/नया-व्यापार से पूर्व

सूर्य-स्थान

मध्य

चन्द्र-स्थान

दक्षिण-पूर्व

गुरु-स्थान

उत्तर-पूर्व

नवग्रह-पूजा — 9 ग्रहों (सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु) की पूजा। ग्रह-दोष-निवारण के लिए। मुख्य-शुभ-कार्य से पूर्व अनिवार्य। नया-घर, नया-व्यापार, विवाह, यज्ञ।

नवग्रह-यन्त्र-स्थापना

सूर्य: मध्य। चन्द्र: दक्षिण-पूर्व। मंगल: दक्षिण। बुध: पूर्व। गुरु: उत्तर-पूर्व। शुक्र: पश्चिम। शनि: पश्चिम-दक्षिण। राहु: दक्षिण-पश्चिम। केतु: उत्तर।

धान्य-स्थापन: सूर्य=गेहूँ, चन्द्र=चावल, मंगल=मसूर, बुध=मूँग, गुरु=चना, शुक्र=कमल-बीज/चावल, शनि=तिल/उड़द, राहु=उड़द, केतु=कुलथी।

विधि

गणेश-स्मरण → नवग्रह-स्थापना → 9 ग्रहों का क्रमश: षोडशोपचार-पूजन।

प्रत्येक ग्रह का बीज-मन्त्र 108 बार।

नवग्रह-स्तोत्र-पाठ।

हवन: 108 आहुति।

दान: ग्रह-वार वस्तुएँ।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवग्रह-शान्ति कब करें?

विवाह, गृह-प्रवेश, नया-व्यापार, ग्रह-दोष-निवारण, साढ़े-साती। हर 6-12 महीने रखें।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।