✦ यन्त्र पूजा विधि ✦
✦ — यन्त्र स्थापना से प्राण-प्रतिष्ठा तक १० चरण — ✦
✦ सामान्य परिचय ✦
यन्त्र की स्थापना एवं पूजन तान्त्रिक विज्ञान का सूक्ष्म कार्य है। केवल यन्त्र खरीद कर रख देने से उसका फल नहीं मिलता — आवश्यक है मुहूर्त, मन्त्र-जप, प्राण-प्रतिष्ठा, एवं नियमित पूजन। यह विधि सर्व यन्त्रों के लिए सामान्य है — विशेष यन्त्र की विशेष विधि के लिए उस यन्त्र का पृष्ठ देखें।
सर्वश्रेष्ठ — किसी सिद्ध गुरु से दीक्षा लेकर ही गोपनीय मन्त्र (जैसे श्री विद्या, बगलामुखी) का जप करें। सामान्य देव-यन्त्र (गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती) के लिए यह विधि स्वयं भी की जा सकती है।
✦ १० चरण विधि ✦
शुभ मुहूर्त चयन
दीवाली, धनतेरस, अक्षय तृतीया, गुरु पुष्य योग, गुरुवार प्रात:काल — शुभ मुहूर्त। पंचांग देखकर शुभ तिथि एवं अभिजित मुहूर्त निश्चित करें। राहु काल, यमगण्ड, गुलिक काल त्याग करें।
स्थान एवं स्वयं की शुद्धि
पूजा-स्थल को गोबर अथवा गंगा-जल से पवित्र करें। स्नान कर शुद्ध श्वेत अथवा पीत वस्त्र धारण करें। यन्त्र को पंचगव्य अथवा गंगा-जल से स्नान कराएँ।
संकल्प
दाहिने हाथ में जल, अक्षत, पुष्प लेकर अपना नाम, गोत्र, तिथि, स्थान बोलते हुए संकल्प लें — किस उद्देश्य से इस यन्त्र की स्थापना कर रहे हैं। संकल्प के बाद जल छोड़ें।
यन्त्र को आसन पर स्थापित करें
पूजा-वेदी पर लाल रेशमी अथवा पीत वस्त्र बिछाएँ। उस पर अष्टदल कमल अथवा रंगोली बनाएँ। यन्त्र को मध्य में रखें — मुख पूर्व अथवा उत्तर की ओर।
पंचोपचार स्नान
यन्त्र को क्रमशः जल, दूध, दही, घृत, मधु एवं शक्कर — फिर पुनः शुद्ध जल से स्नान कराएँ (पंचामृत स्नान)। प्रत्येक स्नान के समय यन्त्र-देवता का बीज मन्त्र बोलें।
षोडशोपचार पूजन
१६ उपचारों से पूजन — आसन, पाद्य, अर्घ्य, आचमनीय, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गन्ध (चन्दन/रोली), पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, ताम्बूल, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा। प्रत्येक उपचार के साथ देवता का मन्त्र।
मन्त्र-जप
यन्त्र के मूल मन्त्र का १०८ बार जप करें — रुद्राक्ष अथवा स्फटिक माला से। श्री यन्त्र के लिए पञ्चदशी, गणेश यन्त्र के लिए "ॐ गं गणपतये नमः", कुबेर यन्त्र के लिए "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः"।
प्राण प्रतिष्ठा
यन्त्र में देवता की प्राण-स्थापना करें — प्राण-प्रतिष्ठा मन्त्र बोलते हुए, यन्त्र के तीन भागों (हृदय, चक्षु, मुख) पर अंगुष्ठ से स्पर्श करें। इसके बाद यन्त्र देवता-स्वरूप हो जाता है — इसे मूर्ति समान पवित्र मानें।
नैवेद्य अर्पण
देवता को प्रिय नैवेद्य अर्पित करें — गणेश को मोदक, लक्ष्मी को क्षीर, सरस्वती को दूध-शक्कर, कुबेर को मेवा-मिष्ठान्न। तुलसी-पत्र अथवा बेल-पत्र भी अर्पित करें।
दैनिक पूजा का संकल्प
प्रतिदिन प्रात:काल स्नान के बाद यन्त्र की पूजा करें — दीप जलाएँ, धूप-गन्ध अर्पित करें, मन्त्र-जप करें (न्यूनतम ११ बार)। शुक्रवार/संक्रान्ति/पूर्णिमा पर विशेष पूजन। तीस दिन में पूर्ण सिद्धि।