मौनी-अमावस्या — माघ-अमावस्या। मौन-व्रत + पवित्र-स्नान। 2026 में 17 फरवरी (मंगलवार) — सूर्य-ग्रहण भी। महाकुम्भ-स्नान-तिथि।
"मौनी" = "मौन-धारक"। ऋषि-मुनियों का दिन। प्रयागराज-संगम पर करोड़ों श्रद्धालु।
✦ मौनी-अमावस्या 2026 — विशेष
अमावस्या प्रारम्भ: 16 फरवरी रात्रि 11 PM। समाप्त: 17 फरवरी रात्रि 9 PM।
सूर्य-ग्रहण भी इसी-दिन — दोगुना-पुण्य।
पवित्र-स्नान-समय: सूर्योदय से दोपहर 12 PM।
✦ विधि
मौन-व्रत: सूर्योदय से दोपहर 12 तक।
पवित्र-स्नान: गंगा/यमुना/संगम। तिल-मिश्रित जल।
तिल-तर्पण पितरों को।
दान: तिल, गुड़, वस्त्र, गाय।
मन-ही-मन गायत्री-मन्त्र, ॐ नमः शिवाय।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पूर्ण-मौन कठिन?▼
सूर्योदय से दोपहर 12 तक मौन। उसके बाद आवश्यक-बात। मौन-असम्भव हो — कम-बात + मधुर-वाणी।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।