तीर्थ यात्रा के नियम

मोक्ष-प्राप्ति का साधन

भोजन

सात्विक

व्रत

ब्रह्मचर्य

दान

अनिवार्य

तीर्थ-यात्रा — पवित्र-स्थलों की धार्मिक-यात्रा। हिन्दू-धर्म में मोक्ष-प्राप्ति का साधन। नियम-पालन से अधिक-फल।

चार-धाम (बद्रीनाथ-द्वारका-पुरी-रामेश्वरम), 12 ज्योतिर्लिंग, 51 शक्तिपीठ, सप्तपुरी (अयोध्या-मथुरा-माया-काशी-काञ्ची-अवन्तिका-द्वारका)।

तीर्थ-यात्रा के 10 नियम

1. ब्रह्मचर्य-पालन।

2. सात्विक-भोजन। मांस-मदिरा-त्याग।

3. नंगे-पैर मन्दिर-दर्शन।

4. पवित्र-स्नान पहले।

5. क्रोध-त्याग। मधुर-वाणी।

6. दान-पुण्य अनिवार्य।

7. साथी-यात्री में भेदभाव-न।

8. यात्रा-कथा-स्मरण।

9. पैदल-यात्रा अधिक-पुण्य।

10. मन्त्र-जप यात्रा-काल में।

श्रेष्ठ-तीर्थ-यात्रा-समय

चार-धाम: मई-जून, सितम्बर-अक्टूबर।

वैष्णो-देवी: नवरात्रि (मार्च, अक्टूबर)।

तिरुपति: ब्रह्मोत्सव (सितम्बर-अक्टूबर)।

कुम्भ-मेला: 12 साल में एक बार।

गंगा-स्नान: मकर-संक्रान्ति, गंगा-दशहरा, कार्तिक-पूर्णिमा।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अकेले-यात्रा या समूह?

समूह-यात्रा श्रेष्ठ — सहायता, सुरक्षा, श्रद्धा-संगत। अकेले भी सम्भव — विशेषतः साधक।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।