गंगा स्नान का महत्व

पवित्र-नदी गंगा में स्नान

मकर-संक्रान्ति

14 जनवरी

गंगा-दशहरा

26 मई

कार्तिक-पूर्णिमा

24 अक्टूबर

गंगा-स्नान — पवित्र-नदी गंगा में स्नान का धार्मिक-कर्म। पाप-नाश + मोक्ष-मार्ग। श्रावण-सोमवार, मकर-संक्रान्ति, गंगा-दशहरा, कार्तिक-पूर्णिमा, कुम्भ-मेला विशेष।

मुख्य-स्थल: हरिद्वार (हर की पौड़ी), वाराणसी (दशाश्वमेध-घाट), प्रयागराज (त्रिवेणी-संगम), गंगासागर (बंगाल)।

गंगा-स्नान का धार्मिक-महत्त्व

मनुस्मृति: "गंगा-स्नान करोति यः, सर्व-पाप-विनाशनम्।"

भगीरथ-कथा: सूर्यवंशी-पूर्वजों के मोक्ष हेतु पृथ्वी पर अवतरण।

सहस्र-अश्वमेध-यज्ञ के बराबर-पुण्य।

अकाल-मृत्यु-निवारण।

विधि

प्रात: सूर्योदय-समय श्रेष्ठ।

दक्षिण-दिशा-मुख। तिल-मिश्रित जल।

3 डुबकी। प्रत्येक "ॐ नमो गंगायै नमः" मन्त्र।

सूर्य-अर्घ्य।

तर्पण: पितरों को।

दान: तिल, गुड़, वस्त्र।

नया-वस्त्र पहनकर मन्दिर-दर्शन।

2026 गंगा-स्नान-तिथियाँ

मकर-संक्रान्ति: 14 जनवरी।

मौनी-अमावस्या: 17 फरवरी।

महाशिवरात्रि: 15 फरवरी।

गंगा-दशहरा: 26 मई।

गुरु-पूर्णिमा: 29 जुलाई।

कार्तिक-पूर्णिमा: 24 अक्टूबर।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गंगा-न-पास हो तो?

घर के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान। मानसिक-गंगा-स्मरण। फल समान।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।