श्राद्ध-पक्ष (पितृ-पक्ष) — आश्विन-कृष्ण-पक्ष के 16 दिन। पितरों को तर्पण-पिण्ड-दान। 2026 में 7 सितम्बर-22 सितम्बर। महालया (22 सितम्बर) — सर्व-पितृ-दिवस।
✦ 2026 श्राद्ध-तिथियाँ
पूर्णिमा-श्राद्ध: 7 सितम्बर। प्रतिपदा से चतुर्दशी: 8-21 सितम्बर। महालया: 22 सितम्बर।
मातृ-नवमी: 16 सितम्बर। चतुर्दशी (अकाल-मृत्यु): 21 सितम्बर।
तिथि-वार: मृत्यु-तिथि के अनुसार। याद-न-हो → महालया।
✦ विधि
प्रात: स्नान। यज्ञोपवीत बायें-कन्धे से दायें-कमर तक।
दक्षिण-दिशा-मुख। तिल-जल-तर्पण 3 बार।
पिण्ड-दान: चावल-तिल-घी-शहद के 6 पिण्ड।
ब्राह्मण-भोज + पंच-बलि (कौवा-गाय-कुत्ता-चींटी-मछली)।
दान: तिल, गुड़, गाय, चांदी, सफेद-वस्त्र।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
श्राद्ध कौन कर सकता?▼
पारम्परिक: ज्येष्ठ-पुत्र। पुत्र-न-हो → पुत्री, बेटी का पति, भाई, भतीजा।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।