पूर्णिमा एवं अमावस्या — हिन्दू पंचांग के दो सबसे महत्वपूर्ण चन्द्र-पर्व। पूर्णिमा वह तिथि है जब चन्द्रमा पूर्ण रूप से उज्ज्वल होता है — सूर्य से 180° दूर। अमावस्या वह तिथि है जब चन्द्रमा पूर्णतः अदृश्य — सूर्य के साथ 0°। दोनों तिथियाँ चन्द्र मास के दो छोर हैं — पूर्णिमा शुक्ल पक्ष का अंत, अमावस्या कृष्ण पक्ष का अंत।
चन्द्रमा का प्रभाव पृथ्वी पर सर्वाधिक इन दोनों तिथियों पर होता है। समुद्र में सबसे ऊँचा ज्वार-भाटा (high tide) पूर्णिमा एवं अमावस्या पर। मानव शरीर 70% जल से बना है — चन्द्रमा का आकर्षण मन एवं भावनाओं पर भी पड़ता है। पूर्णिमा शुभ कार्यों हेतु, अमावस्या पितृ-कार्य हेतु। 2026 की 12 पूर्णिमा एवं 12 अमावस्या तिथियाँ इस लेख में।
✦ पूर्णिमा का धार्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व
पूर्णिमा शुभ कार्यों एवं पूजा हेतु अत्यंत शुभ मानी जाती है। चन्द्रमा सूर्य के 180° दूर होने से उसका सम्पूर्ण प्रकाश पृथ्वी पर पड़ता है — आध्यात्मिक रूप से इसे "पूर्ण ब्रह्म" का प्रतीक माना जाता है। सत्यनारायण व्रत एवं कथा पूर्णिमा पर ही की जाती है।
विशेष पूर्णिमा: चैत्र पूर्णिमा (हनुमान जयंती), वैशाख पूर्णिमा (बुद्ध पूर्णिमा), आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा), श्रावण पूर्णिमा (रक्षा बंधन), भाद्रपद पूर्णिमा (भाद्र पूर्णिमा), आश्विन पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा), कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली), मार्गशीर्ष पूर्णिमा, पौष पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा, फाल्गुन पूर्णिमा (होली)।
वैज्ञानिक प्रभाव: समुद्र में सबसे ऊँची ज्वार। मनुष्य की नींद-जागरण चक्र प्रभावित। मानसिक रोगियों में लक्षण तीव्र (इसी कारण अंग्रेजी में "lunatic" शब्द — Luna = चन्द्र)। शरीर में जल-संतुलन बदलता है।
✦ 2026 की 12 पूर्णिमा
4 जनवरी 2026 (रवि) — पौष पूर्णिमा। प्रारम्भ: 3 जनवरी 11:35 AM, समाप्ति: 4 जनवरी 12:48 PM। शाकम्भरी पूर्णिमा। 4 फरवरी 2026 (बुध) — माघ पूर्णिमा। प्रारम्भ: 3 फरवरी 9:00 PM, समाप्ति: 4 फरवरी 9:25 PM। माघ स्नान का अंतिम दिन।
3 मार्च 2026 (मंगल) — फाल्गुन पूर्णिमा / होलिका दहन। 4 मार्च — रंग-होली (धुलण्डी)। 2 अप्रैल 2026 (गुरु) — चैत्र पूर्णिमा / हनुमान जयंती।
1 मई 2026 (शुक्र) — वैशाख पूर्णिमा / बुद्ध पूर्णिमा। 31 मई 2026 (रवि) — ज्येष्ठ पूर्णिमा / वट सावित्री पूर्णिमा।
1 जुलाई 2026 (बुध) — आषाढ़ पूर्णिमा / गुरु पूर्णिमा। प्रारम्भ: 30 जून 12:35 PM, समाप्ति: 1 जुलाई 11:30 AM। गुरु-पूजन। 31 जुलाई 2026 (शुक्र) — श्रावण पूर्णिमा / रक्षा बंधन। प्रारम्भ: 30 जुलाई 7:00 PM, समाप्ति: 31 जुलाई 5:35 PM।
29 अगस्त 2026 (शनि) — भाद्रपद पूर्णिमा। प्रारम्भ: 28 अगस्त 1:30 AM, समाप्ति: 28 अगस्त 11:00 PM। पितृ पक्ष का प्रारम्भ। 28 सितम्बर 2026 (सोम) — आश्विन पूर्णिमा / शरद पूर्णिमा। प्रारम्भ: 27 सितम्बर 12:30 PM, समाप्ति: 28 सितम्बर 9:30 AM। चन्द्रमा की किरणों में अमृत — रात्रि-जागरण।
27 अक्टूबर 2026 (मंगल) — कार्तिक पूर्णिमा / देव दीपावली। प्रारम्भ: 26 अक्टूबर 11:00 PM, समाप्ति: 27 अक्टूबर 7:35 PM। पुष्कर मेला। 25 नवम्बर 2026 (बुध) — मार्गशीर्ष पूर्णिमा। 25 दिसम्बर 2026 (शुक्र) — पौष पूर्णिमा।
✦ अमावस्या का महत्व एवं उपयोग
अमावस्या को पारम्परिक रूप से शुभ कार्यों (विवाह, गृह प्रवेश) हेतु अशुभ माना जाता है। परंतु पितृ-तर्पण, श्राद्ध, ध्यान-साधना, पितृ-पूजा हेतु अत्यंत शुभ। शास्त्रों के अनुसार अमावस्या पर पितृ देव सूक्ष्म रूप में पृथ्वी पर आते हैं — श्राद्ध-तर्पण से सर्वाधिक सन्तुष्टि।
विशेष अमावस्या: सोमवती अमावस्या (सोमवार + अमावस्या) — अत्यंत शुभ, स्त्रियों द्वारा पीपल-पूजन, पति की दीर्घायु। मौनी अमावस्या (माघ अमावस्या) — मौन व्रत। महालय अमावस्या (आश्विन अमावस्या, पितृ पक्ष का अंत) — पितृ-तर्पण का सर्वोच्च दिन। दीवाली अमावस्या (कार्तिक अमावस्या) — माता लक्ष्मी का पर्व, धन-समृद्धि।
सोमवती अमावस्या 2026: 22 जून (सोमवार + अमावस्या) — एकमात्र सोमवती अमावस्या। महिलाओं द्वारा 108 पीपल-परिक्रमा।
✦ 2026 की 12 अमावस्या
19 जनवरी 2026 (सोम) — पौष अमावस्या। 18 फरवरी 2026 (बुध) — माघ अमावस्या / मौनी अमावस्या। पवित्र स्नान, मौन व्रत। 19 मार्च 2026 (गुरु) — फाल्गुन अमावस्या। 17 अप्रैल 2026 (शुक्र) — चैत्र अमावस्या।
16 मई 2026 (शनि) — वैशाख अमावस्या। 15 जून 2026 (सोम) — ज्येष्ठ अमावस्या / सोमवती अमावस्या। वट-सावित्री व्रत भी। 12 अगस्त 2026 (बुध) — आषाढ़ अमावस्या / हरियाली अमावस्या।
13 अगस्त 2026 (गुरु) — श्रावण अमावस्या / हरियाली अमावस्या (दूसरी)। 12 सितम्बर 2026 (शनि) — भाद्रपद अमावस्या / पिठौरी अमावस्या।
11 अक्टूबर 2026 (रवि) — आश्विन अमावस्या / सर्वपितृ महालय अमावस्या। पितृ पक्ष का अंत — सर्वोच्च श्राद्ध-दिन। 8 नवम्बर 2026 (रवि) — कार्तिक अमावस्या / दीवाली। महालक्ष्मी पूजन।
7 दिसम्बर 2026 (सोम) — मार्गशीर्ष अमावस्या / सोमवती अमावस्या (दूसरी)। 6 जनवरी 2027 — पौष अमावस्या।
✦ पूर्णिमा-अमावस्या व्रत विधि
पूर्णिमा व्रत: प्रातः स्नान-संकल्प। पीले/श्वेत वस्त्र। पूरे दिन सात्विक भोजन (एक समय)। संध्या काल सत्यनारायण कथा। चन्द्र-दर्शन के बाद पारण। चन्द्रमा को दूध-चावल से अर्घ्य। दान — सफेद वस्तुएँ (दूध, चावल, चांदी, मोती)।
अमावस्या व्रत/श्राद्ध: प्रातः गंगा/नदी/घर पर पवित्र स्नान। काले/सफेद वस्त्र। पितृ-तर्पण — दक्षिण दिशा में बैठकर जल, तिल, चावल, जौ अर्पण। ब्राह्मण-भोजन। दान — काली वस्तुएँ (काले तिल, कम्बल, जूते, छाता)। मांस-मदिरा-नाख़ून-काटना सर्वथा वर्जित।
सोमवती अमावस्या: स्त्रियों द्वारा पीपल-पूजन — पीपल वृक्ष पर जल, दूध, चना, गुड़ चढ़ाकर 108 परिक्रमा। पति की दीर्घायु एवं सौभाग्य की कामना।
📊2026 की 12 पूर्णिमा — सम्पूर्ण-तालिका
| मास | दिनांक | विशेष-नाम | मुख्य-व्रत/त्यौहार |
|---|---|---|---|
| पौष | 3 जनवरी 2026 (शनि) | पौष-पूर्णिमा | शाकम्भरी-नवरात्रि-समाप्ति |
| माघ | 1 फरवरी (रवि) | माघी-पूर्णिमा | पवित्र-स्नान, माघ-मेला-समापन |
| फाल्गुन | 3 मार्च (मंगल) | फाल्गुन-पूर्णिमा | होली, होलिका-दहन (2 मार्च) |
| चैत्र | 1 अप्रैल (बुध) | चैत्र-पूर्णिमा | हनुमान-जयन्ती (4 अप्रैल) |
| वैशाख | 1 मई (शुक्र) | वैशाख-पूर्णिमा | बुद्ध-पूर्णिमा |
| ज्येष्ठ | 30 मई (शनि) | ज्येष्ठ-पूर्णिमा | वट-पूर्णिमा-व्रत |
| आषाढ़ | 29 जून (सोम) | आषाढ़-पूर्णिमा | गुरु-पूर्णिमा |
| श्रावण | 28 अगस्त (शुक्र) | श्रावण-पूर्णिमा | रक्षाबन्धन |
| भाद्रपद | 27 अगस्त (गुरु) | भाद्रपद-पूर्णिमा | पितृ-पक्ष-प्रारम्भ |
| आश्विन | 25 सितम्बर (शुक्र) | शरद-पूर्णिमा | खीर-चन्द्र-दर्शन, कोजागरी |
| कार्तिक | 24 अक्टूबर (शनि) | कार्तिक-पूर्णिमा | देव-दीवाली, गुरु-नानक-जयन्ती |
| मार्गशीर्ष | 23 नवम्बर (सोम) | मार्गशीर्ष-पूर्णिमा | दत्तात्रेय-जयन्ती |
गुरु-पूर्णिमा (29 जून) + शरद-पूर्णिमा (25 सितम्बर) सबसे-शुभ।
📊2026 की 12 अमावस्या — पितृ-कर्म एवं विशेष
| मास | दिनांक | विशेष-नाम | मुख्य-कार्य |
|---|---|---|---|
| पौष | 18 जनवरी 2026 (रवि) | पौष-अमावस्या | पितृ-तर्पण |
| माघ | 17 फरवरी (मंगल) | मौनी-अमावस्या | मौन-व्रत, गंगा-स्नान, सूर्य-ग्रहण-दिन |
| फाल्गुन | 18 मार्च (बुध) | फाल्गुन-अमावस्या | पितृ-कार्य |
| चैत्र | 17 अप्रैल (शुक्र) | चैत्र-अमावस्या | पितृ-तर्पण |
| वैशाख | 16 मई (शनि) | वैशाख-अमावस्या / सतुआ | सतुआ-दान |
| ज्येष्ठ | 15 जून (सोम) | ज्येष्ठ-अमावस्या | वट-सावित्री-व्रत |
| आषाढ़ | 14 जुलाई (मंगल) | आषाढ़-अमावस्या / हलहारिणी | — |
| श्रावण | 12 अगस्त (बुध) | हरियाली-अमावस्या / सूर्य-ग्रहण | पौधा-रोपण, ग्रहण-दिन |
| भाद्रपद | 11 सितम्बर (शुक्र) | पिठोरी / कुशोत्पाटिनी | कुश-संग्रह |
| आश्विन | 22 सितम्बर (मंगल) | सर्व-पितृ-अमावस्या / महालया | सबसे-बड़ा पितृ-कर्म |
| कार्तिक | 9 नवम्बर (सोम) | कार्तिक-अमावस्या / दीपावली-पूर्व | पितृ-कार्य |
| मार्गशीर्ष | 9 दिसम्बर (बुध) | मार्गशीर्ष-अमावस्या | पितृ-तर्पण |
महालया (22 सितम्बर) + मौनी-अमावस्या (17 फरवरी) सर्वोच्च-पितृ-दिवस।
📋पूर्णिमा/अमावस्या सम्पूर्ण-व्रत-विधि — 7-चरण
- 1
दिन-निर्धारण (पूर्णिमा vs अमावस्या)
पूर्णिमा: सत्यनारायण-पूजा, चन्द्र-दर्शन, शुभ-कार्य। अमावस्या: पितृ-तर्पण, श्राद्ध, पितर-स्मरण। दोनों के नियम भिन्न।
- 2
प्रात:-पवित्र-स्नान
पूर्णिमा: गंगा/यमुना/पवित्र-नदी में स्नान सर्वोत्तम। यदि न हो — घर के जल में थोड़ा गंगाजल। अमावस्या: स्नान बाद काले/सफेद-वस्त्र।
- 3
व्रत-संकल्प
पूर्णिमा: सात्विक-फलाहार/एक-समय-भोजन। अमावस्या: निर्जला-व्रत (कठोर) या फलाहार। मांस-मदिरा-प्याज-लहसुन-वर्जित।
- 4
पूर्णिमा-पूजा
सत्यनारायण-कथा (शाम 4-7 PM श्रेष्ठ), विष्णु-सहस्रनाम, चन्द्र-दर्शन एवं अर्घ्य। दूध-खीर भोग।
- 5
अमावस्या-पितृ-तर्पण
दक्षिण-दिशा-मुख। तिल+जल+चावल+जौ अंजलि से 3 बार। "ॐ पितृभ्यः नमः"। पिता-पितामह-प्रपितामह।
- 6
दान-पुण्य
पूर्णिमा: सफेद-वस्त्र, चावल, खीर, चांदी, दूध। अमावस्या: काले-वस्त्र, तिल, जूते, छाता, कम्बल। ब्राह्मण-भोज।
- 7
समापन
पूर्णिमा: चन्द्रोदय बाद चन्द्र-अर्घ्य से पारण। अमावस्या: सूर्यास्त बाद हल्का-भोजन। पीपल-वृक्ष को जल।
⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें
✗ पूर्णिमा-अमावस्या में मांगलिक-कार्य
क्यों: पूर्णिमा शुभ-पर मांगलिक-कार्य के लिए विशेष-स्थिति। अमावस्या पूर्ण-वर्जित (पितृ-दिवस)।
✓ सही उपाय: पूर्णिमा पर सत्यनारायण-पूजा, गृह-प्रवेश-संस्तुत। अमावस्या पर केवल पितृ-कर्म, दान, धार्मिक-कार्य।
✗ अमावस्या-दिन नाख़ून/बाल-काटना
क्यों: पारम्परिक-वर्जना — अमावस्या-दिन शरीर-संस्कार वर्जित। पितृ-दिवस।
✓ सही उपाय: नाख़ून/बाल-काटना अमावस्या-पूर्व या बाद। पूर्णिमा भी अधिकांश-शाखा-वर्जित।
✗ मौनी-अमावस्या में "बिल्कुल मौन" का गलत अर्थ
क्यों: मौनी-अमावस्या = "मनन-अमावस्या" — आत्म-मनन। पूर्ण-मौन कठिन। अधिकांश आधुनिक-पारम्परिक — कम-बात + ध्यान।
✓ सही उपाय: सूर्योदय से दोपहर 12 तक मौन-व्रत। पवित्र-स्नान। पूर्ण-मौन सम्भव न हो — कम-बात + मन्त्र-जप।
✗ सर्व-पितृ-अमावस्या (महालया) पर श्राद्ध छोड़ना
क्यों: महालया = सबसे-महत्त्वपूर्ण पितृ-दिवस। तिथि याद न हो तो सब-पितरों के लिए इसी दिन। छोड़ना = पितृ-दोष।
✓ सही उपाय: 22 सितम्बर 2026 (मंगल) — महालया। पितृ-तर्पण + ब्राह्मण-भोज + अन्न-दान अनिवार्य।
✗ शरद-पूर्णिमा पर खीर बिना-चन्द्र-दर्शन के खा लेना
क्यों: शरद-पूर्णिमा = "कोजागरी"। चाँदनी में रखी खीर अमृत-तुल्य। चन्द्र-दर्शन-पूर्व खाना = फल-नहीं।
✓ सही उपाय: 25 सितम्बर 2026 — रात्रि चाँदनी में खीर रखें। चन्द्र-दर्शन-अर्घ्य के बाद ही प्रसाद।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पूर्णिमा-अमावस्या में अंतर क्या है?▼
पूर्णिमा = पूर्ण चन्द्र (शुक्ल पक्ष का अंत)। अमावस्या = कोई चन्द्र नहीं (कृष्ण पक्ष का अंत)। पूर्णिमा शुभ कार्य/पूजा हेतु। अमावस्या पितृ-कार्य/श्राद्ध हेतु। दोनों चन्द्र-चक्र के दो छोर।
अमावस्या को विवाह क्यों नहीं?▼
अमावस्या में चन्द्रमा अदृश्य — चन्द्रमा शुभ-कार्यों का कारक। अंधकार पक्ष होने से शुभ-कार्य निष्फल माना जाता है। हालांकि अपवाद: सोमवती अमावस्या एवं दीवाली अमावस्या पर कुछ कार्य शुभ।
क्या शरद पूर्णिमा पर खीर रखना चाहिए?▼
हाँ। शरद पूर्णिमा (28 सितम्बर 2026) पर पारम्परिक रूप से चाँदी/मिट्टी के बर्तन में दूध-चावल की खीर बनाकर रात भर चन्द्रमा की किरणों के नीचे रखी जाती है। शास्त्रों के अनुसार चन्द्रमा से अमृत-कण उसमें समाहित होते हैं। प्रातः खाली पेट खाने से रोग-निवारण।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।