जगन्नाथ मन्दिर

पुरी में बड़ा-चार-धाम का पूर्व-धाम

देवता

3 भाई-बहन

रथ-यात्रा 2026

16 जुलाई

दैनिक-भोग

56 प्रकार

जगन्नाथ-मन्दिर — ओडिशा के पुरी में। बड़ा-चार-धाम में पूर्व-धाम। 12वीं सदी का। कृष्ण-बलराम-सुभद्रा (तीन-भाई-बहन) की लकड़ी-प्रतिमाएँ।

हर 12-19 वर्ष: नवकलेवर — पुराने प्रतिमाएँ बदली जातीं नए नीम-वृक्ष की।

मन्दिर-विशेषताएँ

ध्वज: हमेशा हवा के विपरीत-दिशा में।

छाया-नहीं: मन्दिर-शिखर की।

सिंह-द्वार पार-करते ही समुद्र-ध्वनि बन्द।

अन्दर: सुनाई दे।

भोग: 56 प्रकार दैनिक। 56-भोग।

महाप्रसाद: कभी कम-नहीं — चाहे 1000 या 1 लाख यात्री।

रसोई विश्व की सबसे-बड़ी।

रथ-यात्रा

जून-जुलाई (आषाढ़ शुक्ल द्वितीया)।

3 रथ — कृष्ण (नन्दीघोष), बलराम (तालध्वज), सुभद्रा (दर्पदलन)।

45-50 फीट ऊँचे। 14-16 पहिए।

भक्तों को रथ खींचना — विशेष-पुण्य।

3 किमी की यात्रा गुण्डीचा-मन्दिर तक।

9 दिन गुण्डीचा में रहते। बहुडा-यात्रा से वापसी।

2026 रथ-यात्रा: 16 जुलाई।

दर्शन-नियम

गैर-हिन्दू को अनुमति-नहीं (सख्त परम्परा)।

दर्शन-समय: सुबह 5 — रात्रि 12।

VIP-दर्शन: ₹500।

सामान्य-दर्शन: निःशुल्क, 1-3 घण्टे।

केवल-धोती (पुरुष), साड़ी (स्त्री) — सिले-वस्त्र वर्जित (कुछ-दर्शन-कक्षों में)।

चमड़ा निषिद्ध।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रथ-यात्रा 2026 कब?

16 जुलाई 2026 (बृहस्पतिवार)। बहुडा-यात्रा: 24 जुलाई।

गैर-हिन्दू दर्शन?

मन्दिर-अन्दर अनुमति-नहीं। बाहर रघुनन्दन-पुस्तकालय की छत से दर्शन (मन्दिर-शिखर का)।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।