मुण्डन मुहूर्त 2026

श्री चूड़ाकर्म मुहूर्त

— शिशु के प्रथम मुण्डन के शुभ तिथि एवं समय —

🧒

क्या है मुण्डन संस्कार?

मुण्डन (चूड़ाकर्म) संस्कार षोडश संस्कारों में से एक है — शिशु के जन्म-केशों का प्रथम मुण्डन। यह जन्म-जन्मान्तर के पाप-दोषों को हटाकर बुद्धि एवं तेज की वृद्धि करता है।

📜

मुण्डन के नियम

🧒
शिशु की आयु १, ३, ५ या ७वें वर्ष में करें।
🌙
जन्म नक्षत्र एवं जन्म माह से बचें।
☀️
सूर्य उत्तरायण में करना अति शुभ।
📅
सोमवार, बुधवार, गुरुवार सर्वोत्तम।
शुभ नक्षत्र: पुष्य, रेवती, अनुराधा, रोहिणी, मृगशिरा, स्वाती।
🪐
चन्द्र बल एवं तारा बल देखकर करें।
🛕
मन्दिर या तीर्थ क्षेत्र में सर्वोत्तम।
🤝
मामा बालक को गोद में बिठाते हैं।
🌟

मुण्डन के लाभ

🙏
जन्म-जन्मान्तर के पाप एवं ऋण से मुक्ति।
💪
दीर्घायु, स्वास्थ्य एवं बुद्धि-वृद्धि।
🧠
मस्तिष्क की शक्ति का विकास।
🛡
नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा।
🧒

जनवरी 2026

2 शुभ मुहूर्त

✂️ मुण्डन
5Mon

कृष्ण द्वितीया

नक्षत्र: पुष्य

समय

7:30 AM - 12:00 PM

21Wed

शुक्ल तृतीया

नक्षत्र: धनिष्ठा

समय

7:45 AM - 12:00 PM

ॐ चूड़ाकर्म संस्कारः
🧒

फरवरी 2026

2 शुभ मुहूर्त

✂️ मुण्डन
1Sun

पूर्णिमा

नक्षत्र: पुष्य

समय

7:00 AM - 11:00 AM

20Fri

शुक्ल तृतीया

नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद

समय

6:50 AM - 11:30 AM

ॐ चूड़ाकर्म संस्कारः
🧒

मार्च 2026

1 शुभ मुहूर्त

✂️ मुण्डन
1Sun

शुक्ल त्रयोदशी

नक्षत्र: पुष्य

समय

6:35 AM - 11:30 AM

ॐ चूड़ाकर्म संस्कारः
🧒

अप्रैल 2026

2 शुभ मुहूर्त

✂️ मुण्डन
20Mon

शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया)

नक्षत्र: रोहिणी

समय

6:00 AM - 12:00 PM

24Fri

शुक्ल अष्टमी

नक्षत्र: पुष्य

समय

5:55 AM - 12:00 PM

ॐ चूड़ाकर्म संस्कारः
🧒

मई 2026

2 शुभ मुहूर्त

✂️ मुण्डन
18Mon

शुक्ल द्वितीया

नक्षत्र: रोहिणी

समय

5:40 AM - 11:00 AM

21Thu

शुक्ल पंचमी

नक्षत्र: पुष्य

समय

5:35 AM - 11:30 AM

ॐ चूड़ाकर्म संस्कारः
🧒

जून 2026

2 शुभ मुहूर्त

✂️ मुण्डन
17Wed

शुक्ल तृतीया

नक्षत्र: पुनर्वसु

समय

5:30 AM - 11:00 AM

18Thu

शुक्ल चतुर्थी

नक्षत्र: पुष्य

समय

5:30 AM - 11:00 AM

ॐ चूड़ाकर्म संस्कारः
🧒

नवम्बर 2026

2 शुभ मुहूर्त

✂️ मुण्डन
24Tue

पूर्णिमा (कार्तिक)

नक्षत्र: कृत्तिका

समय

6:42 AM - 12:30 PM

29Sun

कृष्ण षष्ठी

नक्षत्र: पुष्य

समय

6:45 AM - 12:30 PM

ॐ चूड़ाकर्म संस्कारः
🧒

दिसम्बर 2026

2 शुभ मुहूर्त

✂️ मुण्डन
13Sun

शुक्ल चतुर्थी

नक्षत्र: श्रवण

समय

6:55 AM - 12:30 PM

26Sat

शुक्ल चतुर्दशी

नक्षत्र: पुष्य

समय

7:05 AM - 12:30 PM

ॐ चूड़ाकर्म संस्कारः

* तिथियाँ सामान्य पंचांग के अनुसार हैं। शिशु की कुण्डली देखकर पंडित से सलाह लें।

— मुण्डन से शिशु को दीर्घायु एवं तेजस्विता का वरदान —

मुण्डन-संस्कार (चूड़ाकरण) — हिन्दू धर्म के 16 संस्कारों में से 8वाँ। बच्चे के पहले बाल (जन्म-केश) को काटकर देवता को अर्पित करना। यह जन्म से 1, 3, 5 या 7 वर्ष की आयु में किया जाता है (सम-वर्ष वर्जित)। मूल मन्त्र मनुस्मृति, गृह्य-सूत्र (आश्वलायन, पारस्कर) में।

मुण्डन का धार्मिक अर्थ: जन्म-केश में पिछले जन्मों के संस्कार जुड़े होते हैं — उनका त्याग। वैज्ञानिक: नये बाल अधिक स्वस्थ और घने आते हैं। बालक की बुद्धि और आयु में वृद्धि। 2026 के लिए मुण्डन के शुभ-मुहूर्त माघ-फाल्गुन से ज्येष्ठ तक (मार्च से जून) श्रेष्ठ — गर्मियों में।

मुण्डन-संस्कार का उपयुक्त समय

आयु: 1 वर्ष (एकवर्षीय — ज्येष्ठ-सर्वोत्तम), 3 वर्ष (त्रिवर्षीय), 5 वर्ष, 7 वर्ष। सम-संख्या (2, 4, 6) वर्जित। कन्या के लिए कम प्रचलित — कुल-परम्परा अनुसार। पहली पुत्री का मुण्डन कुछ क्षेत्रों में।

मास: चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, माघ, फाल्गुन सर्वोत्तम। आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन — चातुर्मास में वर्जित (देवता सोते हैं — यज्ञोपवीत-मुण्डन शुभ नहीं)। कार्तिक से माघ — मध्यम। पौष — वर्जित।

तिथि: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी सर्वोत्तम। चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या, पूर्णिमा वर्जित। कृष्ण-पक्ष से शुक्ल-पक्ष श्रेष्ठ।

वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार सर्वोत्तम। मंगलवार, शनिवार, रविवार वर्जित। नक्षत्र: मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती।

2026 के मुण्डन-शुभ-मुहूर्त

जनवरी 2026: 15, 16, 22, 28, 29। फरवरी: 4, 5, 11, 12, 18, 19, 25, 26। मार्च: 4, 5, 11, 12, 18, 25, 26। अप्रैल: 1, 2, 8, 9, 15, 16, 22, 23, 29, 30।

मई: 6, 7, 13, 14, 20, 21, 27, 28। जून: 3, 4, 10, 11, 17, 18, 24, 25। जुलाई-अगस्त: चातुर्मास — वर्जित। नवम्बर: 18, 19, 25, 26। दिसम्बर: 2, 3, 9, 10, 16, 17, 23, 24, 30, 31।

श्रेष्ठ-समय (अभिजित-मुहूर्त): प्रातः 11:50 से दोपहर 12:38 तक — सबसे शुभ। चौघड़िया: शुभ, चर, अमृत, लाभ — श्रेष्ठ। काल, रोग, उद्वेग — वर्जित।

विशेष-मुहूर्त: अक्षय-तृतीया (20 अप्रैल 2026), बसन्त-पंचमी (23 जनवरी 2026), गुरुपूर्णिमा (29 जुलाई 2026 — पर चातुर्मास में होने से कम पसन्द)। तीर्थ-स्थलों पर: तिरुपति-बालाजी, हरिद्वार, बैद्यनाथ, सिद्धि-विनायक — सबसे शुभ।

मुण्डन की पूर्ण विधि

पूर्व-तैयारी: एक दिन पूर्व बच्चे को स्नान, सात्विक भोजन। माता-पिता उपवास/फलाहार। पुरोहित बुलायें। सामग्री: नया उस्तरा (तेज), मक्खन/तेल, दूध, हल्दी, गंगाजल, चांदी का सिक्का, बच्चे के नये कपड़े, फूल-माला, मिठाई, हवन-सामग्री।

विधि-क्रम: 1) गणपति-पूजन 2) कलश-स्थापना 3) नवग्रह-पूजन 4) क्षेत्र-पाल/कुलदेवता-पूजन 5) रक्षा-सूत्र बच्चे को बांधना 6) पिता पहली शिखा (आगे की लट) काटते हैं 7) नाई/पुरोहित बाकी बाल काटते हैं 8) बच्चे के सिर पर हल्दी-तेल मलना 9) गंगाजल से स्नान 10) नये कपड़े पहनाना 11) हवन 12) ब्राह्मण-भोज, दान।

बाल-समर्पण: कटे हुए बाल पवित्र-नदी (गंगा, यमुना, गोदावरी) में प्रवाहित, या तीर्थ-स्थल (तिरुपति, बैद्यनाथ, बलाजी) में अर्पित। चांदी से बाल तौल कर ब्राह्मण को दान — सर्वोत्तम। बालों को घर में नहीं रखें — अशुभ।

मुण्डन के लिए प्रसिद्ध तीर्थ-स्थल

तिरुपति बालाजी (आन्ध्र-प्रदेश): कल्याण-कट्टा में मुण्डन — विश्व-प्रसिद्ध। 50,000+ श्रद्धालु प्रतिदिन बाल अर्पित करते हैं। बालों से वार्षिक ₹100 करोड़ राजस्व — विदेशों में निर्यात (हेयर-एक्सटेंशन)। शुल्क: ₹0 (निःशुल्क)।

बैजनाथ-धाम (देवघर, झारखण्ड): सावन में 1 करोड़+ श्रद्धालु। मुण्डन-स्थल मन्दिर के पीछे। श्रावण-सोमवार सर्वोत्तम।

सिद्धि-विनायक (मुम्बई): बच्चे के प्रथम मुण्डन के लिए लोकप्रिय। मंगलवार दर्शन के साथ।

अन्य तीर्थ: हरिद्वार (हर की पौड़ी), वाराणसी (अस्सी-घाट), उज्जैन (राम-घाट), पुष्कर, राजगृह (बिहार), श्रीरंगपट्टण (कर्नाटक)। स्थानीय मन्दिर — कुलदेवी/कुलदेवता मन्दिर भी श्रेष्ठ।

मुण्डन में सावधानियाँ

क्या न करें: 1) पुराने/जंग-लगे उस्तरे का प्रयोग — संक्रमण का खतरा। 2) ज्वर-बीमारी में मुण्डन। 3) चातुर्मास में (जुलाई-अक्टूबर)। 4) ग्रहण-काल। 5) श्राद्ध-पक्ष (पितृ-पक्ष)। 6) कुल में मरण के 13 दिनों में।

क्या करें: 1) नया स्टील-उस्तरा या प्रोफेशनल नाई। 2) सिर पर हल्दी-दूध मलकर त्वचा-कोमल। 3) कटाव हो तो गुलाब-जल/नारियल-तेल। 4) मुण्डन के बाद धूप से सिर ढकें (तौलिया/टोपी)। 5) तीन दिन तक सिर पर तेल नहीं।

चिकित्सा-सावधानी: यदि बच्चे को चर्म-रोग (एक्जिमा, फंगस) है — मुण्डन स्थगित। थैलेसिमिया/सिकल-सेल बच्चों के लिए डॉक्टर-परामर्श। क्षेत्र-दर-क्षेत्र साफ-सफाई का ध्यान।

📊मुण्डन-आयु — विषम-वर्ष नियम

आयुनामस्थितिविशेष-टिप्पणी
1 वर्षएकवर्षीय✓ सर्वश्रेष्ठपारम्परिक प्राथमिक-विकल्प, बच्चे को कम-कष्ट
2 वर्ष✗ वर्जित (सम)सम-वर्ष पूर्ण-वर्जित
3 वर्षत्रिवर्षीय✓ श्रेष्ठद्वितीय-विकल्प, अधिक-प्रचलित
4 वर्ष✗ वर्जित (सम)
5 वर्षपंचवर्षीय✓ स्वीकार्य
6 वर्ष✗ वर्जित (सम)
7 वर्षसप्तवर्षीय✓ स्वीकार्यअन्तिम सरल-विकल्प
11+ वर्षउपनयन के साथअलग-मुण्डन नहीं — यज्ञोपवीत-संस्कार के साथ

सम-वर्ष (2, 4, 6, 8, 10) पूर्ण-वर्जित — पारम्परिक नियम।

📊2026 मुण्डन शुभ-मुहूर्त — मास-वार

मासशुभ-तिथियाँविशेष-दिनटिप्पणी
जनवरी15, 16, 22, 28, 29बसंत-पंचमी 23 जनवरीमाघ-मास सर्वश्रेष्ठ
फरवरी4, 5, 11, 12, 18, 19, 25, 26महाशिवरात्रि-पूर्व
मार्च4, 5, 11, 12, 18, 25, 26फाल्गुन शुभहोली से पूर्व
अप्रैल1, 2, 8, 9, 15, 16, 22, 23, 29, 30चैत्र-वैशाख
अप्रैल20, 22, 24, 26, 27, 29अक्षय-तृतीया 20 अप्रैलसर्वोत्तम-मास
जून3, 4, 10, 11, 17, 18, 24, 25देवशयनी-पूर्व अन्तिम
जुलाई-अक्टूबर✗ चातुर्मासपूर्ण-वर्जित
नवम्बर18, 19, 25, 26देवउठनी 20 नवम्बरमुण्डन पुनः-शुरू
दिसम्बर2, 3, 9, 10, 16, 17, 23, 24, 30, 31मार्गशीर्ष शुभ

अभिजित-मुहूर्त (दोपहर 11:50-12:38) सर्व-दोष-निवारक — किसी भी मास में।

📋मुण्डन-संस्कार सम्पूर्ण विधि — 12-चरण

  1. 1

    मुहूर्त-निर्धारण (1-2 माह पूर्व)

    पंडित से बच्चे की कुण्डली अनुसार शुभ-तिथि-समय। आयु 1, 3, 5, 7 वर्ष में से चुनें (सम-वर्ष नहीं)।

  2. 2

    तीर्थ-स्थल चयन (वैकल्पिक)

    घर पर कर सकते हैं या प्रसिद्ध तीर्थ — तिरुपति-बालाजी (निःशुल्क), बैद्यनाथ-धाम, सिद्धि-विनायक, पुष्कर। तीर्थ-मुण्डन सर्वश्रेष्ठ-फल।

  3. 3

    सामग्री-संग्रह

    नया स्टील-उस्तरा (नाई का), तेल/मक्खन, हल्दी, दूध, गंगाजल, चांदी का सिक्का (बाल-तौलने हेतु), बच्चे के नये कपड़े, फूल-माला, मिठाई-प्रसाद, हवन-सामग्री।

  4. 4

    दशमी (एक दिन पूर्व)

    बच्चे को स्नान, सात्विक भोजन। पुजारी/नाई बुलायें। माता-पिता उपवास/फलाहार।

  5. 5

    गणपति-कलश-स्थापना

    सूर्योदय बाद पूजा-स्थल पर गणेश-पूजन, कलश-स्थापना, नवग्रह-पूजन, क्षेत्रपाल-कुलदेवता पूजन।

  6. 6

    रक्षा-सूत्र

    बच्चे के दाहिने हाथ में रक्षा-सूत्र (मौली) बाँधें। माता-पिता के लिए भी।

  7. 7

    पिता द्वारा प्रथम-कटाव

    पिता बच्चे की आगे की लट (शिखा) सबसे पहले काटें — मन्त्र: "ॐ क्षुरस्य धारा निशिता दुरत्यया" (शुक्ल-यजुर्वेद)।

  8. 8

    नाई द्वारा पूर्ण-मुण्डन

    पुजारी/नाई बाकी बाल काटें। हल्दी-तेल पहले से लगायें — त्वचा कोमल। चाकू-कटाव से बचाव।

  9. 9

    गंगाजल-स्नान

    मुण्डन के बाद गंगाजल/शुद्ध-जल से सिर-स्नान। नये कपड़े पहनायें।

  10. 10

    हवन

    हवन-कुण्ड में आहुति। मन्त्र-पाठ। बच्चे के दीर्घायु-सुख की प्रार्थना।

  11. 11

    बाल-समर्पण

    कटे बालों को चांदी से तौलें — समान-वजन चांदी ब्राह्मण को दान। बाल पवित्र-नदी (गंगा/यमुना/गोदावरी) में प्रवाहित या तीर्थ-स्थल में अर्पित।

  12. 12

    ब्राह्मण-भोज एवं प्रसाद-वितरण

    कम-से-कम 1 ब्राह्मण को सात्विक-भोजन + दक्षिणा-वस्त्र। उपस्थित सभी को मीठा प्रसाद।

⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें

  • सम-वर्ष (2, 4, 6 साल) में मुण्डन

    क्यों: पारम्परिक नियम — सम-वर्ष पूर्ण-वर्जित। मनुस्मृति, गृह्यसूत्र दोनों में स्पष्ट। पूर्वजों के अनुसार सम-संख्या-वर्ष "अपूर्ण-संख्या" — संस्कार-दोष।

    सही उपाय: 1, 3, 5, 7 वर्ष में से चुनें। यदि बच्चा 2 वर्ष का है — 1 वर्ष देरी से 3 साल में करें। यदि 4 — 5 या 3 साल में।

  • चातुर्मास (जुलाई-नवम्बर) में मुण्डन

    क्यों: देव-निद्रा-काल। 25 जुलाई 2026 (देवशयनी) से 20 नवम्बर (देवउठनी) तक सब मांगलिक-कार्य वर्जित। इसमें मुण्डन भी।

    सही उपाय: देवशयनी से पूर्व या देवउठनी के बाद मुहूर्त चुनें। यदि अनिवार्य — तुलसी-विवाह के बाद।

  • पुराने/जंग-लगे उस्तरे का प्रयोग

    क्यों: संक्रमण का उच्च-जोखिम। बच्चे की त्वचा कोमल — कटाव से tetanus, infection। पारम्परिक "दादी का उस्तरा" अब वर्जित।

    सही उपाय: नया स्टील-उस्तरा या प्रोफेशनल-बार्बर। प्रत्येक बच्चे के लिए नया-blade। हल्दी-दूध पहले से लगायें।

  • कटे बालों को घर में रखना या जलाना

    क्यों: पारम्परिक मान्यता — मुण्डन-बाल "जन्म-कर्म" के अंश। घर में रखने से नकारात्मक-ऊर्जा, जलाने से अशुभ।

    सही उपाय: पवित्र-नदी में विसर्जन, तीर्थ-स्थल में अर्पण, या पीपल-वृक्ष के पास भूमि-समाधि (दबाना)।

  • श्राद्ध-पक्ष (पितृ-पक्ष) में मुण्डन तय करना

    क्यों: श्राद्ध-पक्ष पितृ-कर्म-काल। बाल-काटना, नये-कपड़े, उत्सव सब वर्जित। 2026 श्राद्ध-पक्ष: 7-22 सितम्बर।

    सही उपाय: श्राद्ध-पक्ष से पूर्व या बाद। 22 सितम्बर के बाद कुछ-दिन रुककर शुभ-तिथि।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुण्डन कितनी आयु में करें?

सर्वश्रेष्ठ — 1 वर्ष (एकवर्षीय)। दूसरा विकल्प — 3 वर्ष (त्रिवर्षीय)। फिर 5, 7 वर्ष। सम-वर्ष (2, 4, 6) वर्जित। अधिकतम 11 वर्ष से पूर्व आवश्यक — उसके बाद उपनयन-संस्कार के साथ करें।

क्या लड़कियों का भी मुण्डन होता है?

पारम्परिक रूप से कम प्रचलित — पुत्री के लिए केवल चूल-कर्म (बाल-संवारना)। परन्तु कुछ क्षेत्रों — महाराष्ट्र, दक्षिण-भारत — में कन्या-मुण्डन भी। तिरुपति में लाखों लड़कियाँ बाल अर्पित करती हैं। पारिवारिक-परम्परा अनुसार निर्णय करें।

चातुर्मास में मुण्डन क्यों वर्जित?

आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी, 25 जुलाई 2026) से कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी, 20 नवम्बर 2026) तक देवता निद्रा में होते हैं — कोई शुभ-कार्य नहीं। मुण्डन भी इसमें वर्जित। यदि अनिवार्य — तुलसी-विवाह के बाद।

कटे बालों का क्या करें?

सबसे श्रेष्ठ: 1) तीर्थ-स्थल (तिरुपति, बैद्यनाथ) में अर्पित। 2) पवित्र-नदी (गंगा, यमुना) में प्रवाहित। 3) चांदी से तौल कर ब्राह्मण को दान। 4) पीपल-वृक्ष के पास गाड़ें। कभी न करें: घर में रखें, कूड़े में फेंकें, जलायें (अशुभ)।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।