मुण्डन-संस्कार (चूड़ाकरण) — हिन्दू धर्म के 16 संस्कारों में से 8वाँ। बच्चे के पहले बाल (जन्म-केश) को काटकर देवता को अर्पित करना। यह जन्म से 1, 3, 5 या 7 वर्ष की आयु में किया जाता है (सम-वर्ष वर्जित)। मूल मन्त्र मनुस्मृति, गृह्य-सूत्र (आश्वलायन, पारस्कर) में।
मुण्डन का धार्मिक अर्थ: जन्म-केश में पिछले जन्मों के संस्कार जुड़े होते हैं — उनका त्याग। वैज्ञानिक: नये बाल अधिक स्वस्थ और घने आते हैं। बालक की बुद्धि और आयु में वृद्धि। 2026 के लिए मुण्डन के शुभ-मुहूर्त माघ-फाल्गुन से ज्येष्ठ तक (मार्च से जून) श्रेष्ठ — गर्मियों में।
✦ मुण्डन-संस्कार का उपयुक्त समय
आयु: 1 वर्ष (एकवर्षीय — ज्येष्ठ-सर्वोत्तम), 3 वर्ष (त्रिवर्षीय), 5 वर्ष, 7 वर्ष। सम-संख्या (2, 4, 6) वर्जित। कन्या के लिए कम प्रचलित — कुल-परम्परा अनुसार। पहली पुत्री का मुण्डन कुछ क्षेत्रों में।
मास: चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, माघ, फाल्गुन सर्वोत्तम। आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन — चातुर्मास में वर्जित (देवता सोते हैं — यज्ञोपवीत-मुण्डन शुभ नहीं)। कार्तिक से माघ — मध्यम। पौष — वर्जित।
तिथि: द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशी सर्वोत्तम। चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, अमावस्या, पूर्णिमा वर्जित। कृष्ण-पक्ष से शुक्ल-पक्ष श्रेष्ठ।
वार: सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार सर्वोत्तम। मंगलवार, शनिवार, रविवार वर्जित। नक्षत्र: मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती।
✦ 2026 के मुण्डन-शुभ-मुहूर्त
जनवरी 2026: 15, 16, 22, 28, 29। फरवरी: 4, 5, 11, 12, 18, 19, 25, 26। मार्च: 4, 5, 11, 12, 18, 25, 26। अप्रैल: 1, 2, 8, 9, 15, 16, 22, 23, 29, 30।
मई: 6, 7, 13, 14, 20, 21, 27, 28। जून: 3, 4, 10, 11, 17, 18, 24, 25। जुलाई-अगस्त: चातुर्मास — वर्जित। नवम्बर: 18, 19, 25, 26। दिसम्बर: 2, 3, 9, 10, 16, 17, 23, 24, 30, 31।
श्रेष्ठ-समय (अभिजित-मुहूर्त): प्रातः 11:50 से दोपहर 12:38 तक — सबसे शुभ। चौघड़िया: शुभ, चर, अमृत, लाभ — श्रेष्ठ। काल, रोग, उद्वेग — वर्जित।
विशेष-मुहूर्त: अक्षय-तृतीया (20 अप्रैल 2026), बसन्त-पंचमी (23 जनवरी 2026), गुरुपूर्णिमा (29 जुलाई 2026 — पर चातुर्मास में होने से कम पसन्द)। तीर्थ-स्थलों पर: तिरुपति-बालाजी, हरिद्वार, बैद्यनाथ, सिद्धि-विनायक — सबसे शुभ।
✦ मुण्डन की पूर्ण विधि
पूर्व-तैयारी: एक दिन पूर्व बच्चे को स्नान, सात्विक भोजन। माता-पिता उपवास/फलाहार। पुरोहित बुलायें। सामग्री: नया उस्तरा (तेज), मक्खन/तेल, दूध, हल्दी, गंगाजल, चांदी का सिक्का, बच्चे के नये कपड़े, फूल-माला, मिठाई, हवन-सामग्री।
विधि-क्रम: 1) गणपति-पूजन 2) कलश-स्थापना 3) नवग्रह-पूजन 4) क्षेत्र-पाल/कुलदेवता-पूजन 5) रक्षा-सूत्र बच्चे को बांधना 6) पिता पहली शिखा (आगे की लट) काटते हैं 7) नाई/पुरोहित बाकी बाल काटते हैं 8) बच्चे के सिर पर हल्दी-तेल मलना 9) गंगाजल से स्नान 10) नये कपड़े पहनाना 11) हवन 12) ब्राह्मण-भोज, दान।
बाल-समर्पण: कटे हुए बाल पवित्र-नदी (गंगा, यमुना, गोदावरी) में प्रवाहित, या तीर्थ-स्थल (तिरुपति, बैद्यनाथ, बलाजी) में अर्पित। चांदी से बाल तौल कर ब्राह्मण को दान — सर्वोत्तम। बालों को घर में नहीं रखें — अशुभ।
✦ मुण्डन के लिए प्रसिद्ध तीर्थ-स्थल
तिरुपति बालाजी (आन्ध्र-प्रदेश): कल्याण-कट्टा में मुण्डन — विश्व-प्रसिद्ध। 50,000+ श्रद्धालु प्रतिदिन बाल अर्पित करते हैं। बालों से वार्षिक ₹100 करोड़ राजस्व — विदेशों में निर्यात (हेयर-एक्सटेंशन)। शुल्क: ₹0 (निःशुल्क)।
बैजनाथ-धाम (देवघर, झारखण्ड): सावन में 1 करोड़+ श्रद्धालु। मुण्डन-स्थल मन्दिर के पीछे। श्रावण-सोमवार सर्वोत्तम।
सिद्धि-विनायक (मुम्बई): बच्चे के प्रथम मुण्डन के लिए लोकप्रिय। मंगलवार दर्शन के साथ।
अन्य तीर्थ: हरिद्वार (हर की पौड़ी), वाराणसी (अस्सी-घाट), उज्जैन (राम-घाट), पुष्कर, राजगृह (बिहार), श्रीरंगपट्टण (कर्नाटक)। स्थानीय मन्दिर — कुलदेवी/कुलदेवता मन्दिर भी श्रेष्ठ।
✦ मुण्डन में सावधानियाँ
क्या न करें: 1) पुराने/जंग-लगे उस्तरे का प्रयोग — संक्रमण का खतरा। 2) ज्वर-बीमारी में मुण्डन। 3) चातुर्मास में (जुलाई-अक्टूबर)। 4) ग्रहण-काल। 5) श्राद्ध-पक्ष (पितृ-पक्ष)। 6) कुल में मरण के 13 दिनों में।
क्या करें: 1) नया स्टील-उस्तरा या प्रोफेशनल नाई। 2) सिर पर हल्दी-दूध मलकर त्वचा-कोमल। 3) कटाव हो तो गुलाब-जल/नारियल-तेल। 4) मुण्डन के बाद धूप से सिर ढकें (तौलिया/टोपी)। 5) तीन दिन तक सिर पर तेल नहीं।
चिकित्सा-सावधानी: यदि बच्चे को चर्म-रोग (एक्जिमा, फंगस) है — मुण्डन स्थगित। थैलेसिमिया/सिकल-सेल बच्चों के लिए डॉक्टर-परामर्श। क्षेत्र-दर-क्षेत्र साफ-सफाई का ध्यान।
📊मुण्डन-आयु — विषम-वर्ष नियम
| आयु | नाम | स्थिति | विशेष-टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| 1 वर्ष | एकवर्षीय | ✓ सर्वश्रेष्ठ | पारम्परिक प्राथमिक-विकल्प, बच्चे को कम-कष्ट |
| 2 वर्ष | — | ✗ वर्जित (सम) | सम-वर्ष पूर्ण-वर्जित |
| 3 वर्ष | त्रिवर्षीय | ✓ श्रेष्ठ | द्वितीय-विकल्प, अधिक-प्रचलित |
| 4 वर्ष | — | ✗ वर्जित (सम) | — |
| 5 वर्ष | पंचवर्षीय | ✓ स्वीकार्य | — |
| 6 वर्ष | — | ✗ वर्जित (सम) | — |
| 7 वर्ष | सप्तवर्षीय | ✓ स्वीकार्य | अन्तिम सरल-विकल्प |
| 11+ वर्ष | — | उपनयन के साथ | अलग-मुण्डन नहीं — यज्ञोपवीत-संस्कार के साथ |
सम-वर्ष (2, 4, 6, 8, 10) पूर्ण-वर्जित — पारम्परिक नियम।
📊2026 मुण्डन शुभ-मुहूर्त — मास-वार
| मास | शुभ-तिथियाँ | विशेष-दिन | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| जनवरी | 15, 16, 22, 28, 29 | बसंत-पंचमी 23 जनवरी | माघ-मास सर्वश्रेष्ठ |
| फरवरी | 4, 5, 11, 12, 18, 19, 25, 26 | महाशिवरात्रि-पूर्व | — |
| मार्च | 4, 5, 11, 12, 18, 25, 26 | फाल्गुन शुभ | होली से पूर्व |
| अप्रैल | 1, 2, 8, 9, 15, 16, 22, 23, 29, 30 | — | चैत्र-वैशाख |
| अप्रैल | 20, 22, 24, 26, 27, 29 | अक्षय-तृतीया 20 अप्रैल | सर्वोत्तम-मास |
| जून | 3, 4, 10, 11, 17, 18, 24, 25 | — | देवशयनी-पूर्व अन्तिम |
| जुलाई-अक्टूबर | ✗ चातुर्मास | — | पूर्ण-वर्जित |
| नवम्बर | 18, 19, 25, 26 | देवउठनी 20 नवम्बर | मुण्डन पुनः-शुरू |
| दिसम्बर | 2, 3, 9, 10, 16, 17, 23, 24, 30, 31 | — | मार्गशीर्ष शुभ |
अभिजित-मुहूर्त (दोपहर 11:50-12:38) सर्व-दोष-निवारक — किसी भी मास में।
📋मुण्डन-संस्कार सम्पूर्ण विधि — 12-चरण
- 1
मुहूर्त-निर्धारण (1-2 माह पूर्व)
पंडित से बच्चे की कुण्डली अनुसार शुभ-तिथि-समय। आयु 1, 3, 5, 7 वर्ष में से चुनें (सम-वर्ष नहीं)।
- 2
तीर्थ-स्थल चयन (वैकल्पिक)
घर पर कर सकते हैं या प्रसिद्ध तीर्थ — तिरुपति-बालाजी (निःशुल्क), बैद्यनाथ-धाम, सिद्धि-विनायक, पुष्कर। तीर्थ-मुण्डन सर्वश्रेष्ठ-फल।
- 3
सामग्री-संग्रह
नया स्टील-उस्तरा (नाई का), तेल/मक्खन, हल्दी, दूध, गंगाजल, चांदी का सिक्का (बाल-तौलने हेतु), बच्चे के नये कपड़े, फूल-माला, मिठाई-प्रसाद, हवन-सामग्री।
- 4
दशमी (एक दिन पूर्व)
बच्चे को स्नान, सात्विक भोजन। पुजारी/नाई बुलायें। माता-पिता उपवास/फलाहार।
- 5
गणपति-कलश-स्थापना
सूर्योदय बाद पूजा-स्थल पर गणेश-पूजन, कलश-स्थापना, नवग्रह-पूजन, क्षेत्रपाल-कुलदेवता पूजन।
- 6
रक्षा-सूत्र
बच्चे के दाहिने हाथ में रक्षा-सूत्र (मौली) बाँधें। माता-पिता के लिए भी।
- 7
पिता द्वारा प्रथम-कटाव
पिता बच्चे की आगे की लट (शिखा) सबसे पहले काटें — मन्त्र: "ॐ क्षुरस्य धारा निशिता दुरत्यया" (शुक्ल-यजुर्वेद)।
- 8
नाई द्वारा पूर्ण-मुण्डन
पुजारी/नाई बाकी बाल काटें। हल्दी-तेल पहले से लगायें — त्वचा कोमल। चाकू-कटाव से बचाव।
- 9
गंगाजल-स्नान
मुण्डन के बाद गंगाजल/शुद्ध-जल से सिर-स्नान। नये कपड़े पहनायें।
- 10
हवन
हवन-कुण्ड में आहुति। मन्त्र-पाठ। बच्चे के दीर्घायु-सुख की प्रार्थना।
- 11
बाल-समर्पण
कटे बालों को चांदी से तौलें — समान-वजन चांदी ब्राह्मण को दान। बाल पवित्र-नदी (गंगा/यमुना/गोदावरी) में प्रवाहित या तीर्थ-स्थल में अर्पित।
- 12
ब्राह्मण-भोज एवं प्रसाद-वितरण
कम-से-कम 1 ब्राह्मण को सात्विक-भोजन + दक्षिणा-वस्त्र। उपस्थित सभी को मीठा प्रसाद।
⚠️सामान्य भूलें — क्या न करें
✗ सम-वर्ष (2, 4, 6 साल) में मुण्डन
क्यों: पारम्परिक नियम — सम-वर्ष पूर्ण-वर्जित। मनुस्मृति, गृह्यसूत्र दोनों में स्पष्ट। पूर्वजों के अनुसार सम-संख्या-वर्ष "अपूर्ण-संख्या" — संस्कार-दोष।
✓ सही उपाय: 1, 3, 5, 7 वर्ष में से चुनें। यदि बच्चा 2 वर्ष का है — 1 वर्ष देरी से 3 साल में करें। यदि 4 — 5 या 3 साल में।
✗ चातुर्मास (जुलाई-नवम्बर) में मुण्डन
क्यों: देव-निद्रा-काल। 25 जुलाई 2026 (देवशयनी) से 20 नवम्बर (देवउठनी) तक सब मांगलिक-कार्य वर्जित। इसमें मुण्डन भी।
✓ सही उपाय: देवशयनी से पूर्व या देवउठनी के बाद मुहूर्त चुनें। यदि अनिवार्य — तुलसी-विवाह के बाद।
✗ पुराने/जंग-लगे उस्तरे का प्रयोग
क्यों: संक्रमण का उच्च-जोखिम। बच्चे की त्वचा कोमल — कटाव से tetanus, infection। पारम्परिक "दादी का उस्तरा" अब वर्जित।
✓ सही उपाय: नया स्टील-उस्तरा या प्रोफेशनल-बार्बर। प्रत्येक बच्चे के लिए नया-blade। हल्दी-दूध पहले से लगायें।
✗ कटे बालों को घर में रखना या जलाना
क्यों: पारम्परिक मान्यता — मुण्डन-बाल "जन्म-कर्म" के अंश। घर में रखने से नकारात्मक-ऊर्जा, जलाने से अशुभ।
✓ सही उपाय: पवित्र-नदी में विसर्जन, तीर्थ-स्थल में अर्पण, या पीपल-वृक्ष के पास भूमि-समाधि (दबाना)।
✗ श्राद्ध-पक्ष (पितृ-पक्ष) में मुण्डन तय करना
क्यों: श्राद्ध-पक्ष पितृ-कर्म-काल। बाल-काटना, नये-कपड़े, उत्सव सब वर्जित। 2026 श्राद्ध-पक्ष: 7-22 सितम्बर।
✓ सही उपाय: श्राद्ध-पक्ष से पूर्व या बाद। 22 सितम्बर के बाद कुछ-दिन रुककर शुभ-तिथि।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मुण्डन कितनी आयु में करें?▼
सर्वश्रेष्ठ — 1 वर्ष (एकवर्षीय)। दूसरा विकल्प — 3 वर्ष (त्रिवर्षीय)। फिर 5, 7 वर्ष। सम-वर्ष (2, 4, 6) वर्जित। अधिकतम 11 वर्ष से पूर्व आवश्यक — उसके बाद उपनयन-संस्कार के साथ करें।
क्या लड़कियों का भी मुण्डन होता है?▼
पारम्परिक रूप से कम प्रचलित — पुत्री के लिए केवल चूल-कर्म (बाल-संवारना)। परन्तु कुछ क्षेत्रों — महाराष्ट्र, दक्षिण-भारत — में कन्या-मुण्डन भी। तिरुपति में लाखों लड़कियाँ बाल अर्पित करती हैं। पारिवारिक-परम्परा अनुसार निर्णय करें।
चातुर्मास में मुण्डन क्यों वर्जित?▼
आषाढ़ शुक्ल एकादशी (देवशयनी, 25 जुलाई 2026) से कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी, 20 नवम्बर 2026) तक देवता निद्रा में होते हैं — कोई शुभ-कार्य नहीं। मुण्डन भी इसमें वर्जित। यदि अनिवार्य — तुलसी-विवाह के बाद।
कटे बालों का क्या करें?▼
सबसे श्रेष्ठ: 1) तीर्थ-स्थल (तिरुपति, बैद्यनाथ) में अर्पित। 2) पवित्र-नदी (गंगा, यमुना) में प्रवाहित। 3) चांदी से तौल कर ब्राह्मण को दान। 4) पीपल-वृक्ष के पास गाड़ें। कभी न करें: घर में रखें, कूड़े में फेंकें, जलायें (अशुभ)।
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