आदित्य हृदय स्तोत्रम्

वाल्मीकि-रामायण की सूर्य-स्तुति — अगस्त्य-दत्त

श्लोक

30

पाठ

3-11 बार

विशेष-दिन

रविवार

आदित्य-हृदय स्तोत्रम् — सूर्य-स्तुति। वाल्मीकि-रामायण के युद्ध-काण्ड में। अगस्त्य-मुनि ने राम को रावण-वध-पूर्व सिखाई।

30 श्लोक। सूर्य-देव की महिमा। शत्रु-विजय, स्वास्थ्य, यश के लिए सर्व-श्रेष्ठ।

कथा-सन्दर्भ

राम-रावण-युद्ध 7 दिनों से।

राम थक चुके। रावण नए-नए शस्त्र लाता।

अगस्त्य-मुनि प्रकट।

"हे राम! आदित्य-हृदय का पाठ करो।"

3-बार पाठ।

फिर रावण-वध।

तब से शक्ति-स्तोत्र।

मुख्य-शिक्षाएँ

सूर्य = सब-देवों का स्वरूप।

ब्रह्मा-विष्णु-शिव सूर्य में।

तेज-स्वास्थ्य-शक्ति-दाता।

सर्व-रोग-नाशक।

दिव्य-दृष्टि-वर्द्धक।

सत्य-धर्म-संरक्षक।

पाठ-विधि

प्रात:-सूर्योदय-समय।

स्नान-शुद्ध।

पूर्व-मुख।

सूर्य-दर्शन।

अर्घ्य।

3 बार पाठ (या 11 बार विशेष)।

गायत्री-संग।

सूर्य-नमस्कार के साथ।

दैनिक-15 मिनट।

लाभ और विशेष-दिन

रविवार-विशेष।

सूर्य-संक्रान्ति।

रथ-सप्तमी।

छठ-पूजा।

नेत्र-स्वास्थ्य।

हृदय-स्वास्थ्य।

सरकारी-कार्य-सफलता।

नेतृत्व-वृद्धि।

यश-कीर्ति।

रोग-नाश।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आदित्य-हृदय और सूर्य-नमस्कार साथ?

श्रेष्ठ-संयोजन। प्रथम सूर्य-नमस्कार 12 बार। फिर आदित्य-हृदय। शक्ति-वर्द्धक।

रात्रि-पाठ?

सम्भव किन्तु प्रातः सर्वोत्तम। सूर्य-समय शक्ति अधिक। रात्रि मानसिक-पाठ ठीक।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।