सन्ध्या-वन्दना — दिन के तीन-संधि-काल पर वैदिक-पूजा। प्रातः, मध्याह्न, सायं। द्विजों (ब्राह्मण-क्षत्रिय-वैश्य) के लिए नित्य-कर्म।
सूर्य-पूजा + गायत्री-जप मूल। उपनयन-संस्कार के बाद आरम्भ। आजीवन।
✦ 3 सन्ध्या
1. **प्रातः-सन्ध्या**: सूर्योदय से पहले-बाद। ताराओं के दिखने तक।
2. **माध्यान्ह-सन्ध्या**: सूर्य-मध्य-स्थान। 11 AM — 1 PM।
3. **सायं-सन्ध्या**: सूर्यास्त से पहले-बाद। ताराओं के दिखने तक।
✦ विधि (10 चरण)
1. **आचमन**: जल-घूँट।
2. **प्राणायाम**: 3 गायत्री-सहित।
3. **संकल्प**।
4. **मार्जन**: जल-छिड़काव।
5. **अघमर्षण**: पाप-नाश-मन्त्र।
6. **सूर्य-अर्घ्य**: 3 बार।
7. **गायत्री-आवाहन**।
8. **गायत्री-जप**: 10/108 बार।
9. **उपस्थान**: सूर्य-स्तुति।
10. **अभिवादन**: देव-नमस्कार।
✦ गायत्री-मन्त्र (मूल)
ॐ भूर्भुवः स्वः
तत्सवितुर्वरेण्यम्
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात्॥
✦ महत्त्व और लाभ
प्राण-संतुलन (दिन-रात-संक्रमण)।
सूर्य की शक्ति-ग्रहण।
मानसिक-स्पष्टता।
कर्मानुसार पाप-नाश।
द्विज-धर्म-पालन।
जीवन-नियमित।
15 मिनट दैनिक काफी।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या स्त्रियाँ कर सकतीं?▼
पारम्परिक: मात्र पुरुष-द्विज। आधुनिक: सब-वर्ण-स्त्री-पुरुष। कई-गुरु अनुमति देते।
आधुनिक-नौकरी में 3-समय कैसे?▼
प्रातः 10 मिनट + सायं 10 मिनट न्यूनतम। दोपहर मानसिक/संक्षिप्त।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।