सन्ध्या वन्दना

दिन के 3-संधि-काल पर वैदिक-पूजा

समय

3

मूल-मन्त्र

गायत्री

अवधि

15-30 मिनट

सन्ध्या-वन्दना — दिन के तीन-संधि-काल पर वैदिक-पूजा। प्रातः, मध्याह्न, सायं। द्विजों (ब्राह्मण-क्षत्रिय-वैश्य) के लिए नित्य-कर्म।

सूर्य-पूजा + गायत्री-जप मूल। उपनयन-संस्कार के बाद आरम्भ। आजीवन।

3 सन्ध्या

1. **प्रातः-सन्ध्या**: सूर्योदय से पहले-बाद। ताराओं के दिखने तक।

2. **माध्यान्ह-सन्ध्या**: सूर्य-मध्य-स्थान। 11 AM — 1 PM।

3. **सायं-सन्ध्या**: सूर्यास्त से पहले-बाद। ताराओं के दिखने तक।

विधि (10 चरण)

1. **आचमन**: जल-घूँट।

2. **प्राणायाम**: 3 गायत्री-सहित।

3. **संकल्प**।

4. **मार्जन**: जल-छिड़काव।

5. **अघमर्षण**: पाप-नाश-मन्त्र।

6. **सूर्य-अर्घ्य**: 3 बार।

7. **गायत्री-आवाहन**।

8. **गायत्री-जप**: 10/108 बार।

9. **उपस्थान**: सूर्य-स्तुति।

10. **अभिवादन**: देव-नमस्कार।

गायत्री-मन्त्र (मूल)

ॐ भूर्भुवः स्वः

तत्सवितुर्वरेण्यम्

भर्गो देवस्य धीमहि

धियो यो नः प्रचोदयात्॥

महत्त्व और लाभ

प्राण-संतुलन (दिन-रात-संक्रमण)।

सूर्य की शक्ति-ग्रहण।

मानसिक-स्पष्टता।

कर्मानुसार पाप-नाश।

द्विज-धर्म-पालन।

जीवन-नियमित।

15 मिनट दैनिक काफी।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या स्त्रियाँ कर सकतीं?

पारम्परिक: मात्र पुरुष-द्विज। आधुनिक: सब-वर्ण-स्त्री-पुरुष। कई-गुरु अनुमति देते।

आधुनिक-नौकरी में 3-समय कैसे?

प्रातः 10 मिनट + सायं 10 मिनट न्यूनतम। दोपहर मानसिक/संक्षिप्त।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।