सूर्य-नमस्कार — सूर्य-देव की 12 आसनों में पूजा। प्रात:-काल सूर्योदय-समय। 12 मन्त्रों के साथ 12 आसन।
फल: स्वास्थ्य-वृद्धि, ऊर्जा, मानसिक-स्थिरता, दीर्घायु। आधुनिक-योग-केन्द्र भी इसे सर्वश्रेष्ठ-योगाभ्यास मानते।
✦ 12 आसन एवं मन्त्र
1. प्रणामासन — ॐ मित्राय नमः
2. हस्त-उत्तानासन — ॐ रवये नमः
3. पाद-हस्तासन — ॐ सूर्याय नमः
4. अश्व-संचालनासन — ॐ भानवे नमः
5. पर्वतासन — ॐ खगाय नमः
6. अष्टांग-नमस्कार — ॐ पूष्णे नमः
7. भुजंगासन — ॐ हिरण्यगर्भाय नमः
8. पर्वतासन — ॐ मरीचये नमः
9. अश्व-संचालनासन — ॐ आदित्याय नमः
10. पाद-हस्तासन — ॐ सावित्रे नमः
11. हस्त-उत्तानासन — ॐ अर्काय नमः
12. प्रणामासन — ॐ भास्कराय नमः
✦ विधि
सूर्योदय-समय श्रेष्ठ। पूर्व-दिशा-मुख।
खुले-स्थान या छत पर। ताज़ी-हवा।
12 आसन = 1 चक्र। दैनिक 3-12 चक्र।
धीरे-गति। श्वास के साथ। मन्त्र-स्मरण।
समापन: शवासन 5 मिनट।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सूर्य-नमस्कार कब करें?▼
प्रात:-काल सूर्योदय-समय। यदि न-सम्भव — कभी-भी (पर खाली-पेट)। संध्या-समय भी।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।