शिव-ताण्डव-स्तोत्रम् — रावण-रचित शिव-स्तुति। 17 श्लोक। पंथक-छन्द (अद्वितीय)। शिव के ताण्डव-नृत्य का वर्णन।
रावण ने कैलाश-पर्वत उठाने के बाद शिव-कोप-शान्ति हेतु रचा। शिव प्रसन्न → चन्द्रहास-तलवार दी।
✦ रचना-कथा
रावण कैलाश-पर्वत को उठाकर लंका ले जाना चाहता।
शिव ने अंगूठा-दबाकर पर्वत-स्थिर किया।
रावण का हाथ दब गया।
दर्द से रावण ने स्तुति-गाई।
शिव प्रसन्न → रिहाई + चन्द्रहास।
तब से ताण्डव-स्तोत्र शक्तिशाली।
✦ अद्वितीय-छन्द
पंथक-छन्द: 16-अक्षर-प्रति-पाद।
तीव्र-लय (rapid rhythm)।
गायन-कठिन।
नागेश्वर-राव, उमा-मोहन-भट्ट प्रसिद्ध-गायक।
सुनना-स्वयं भक्ति-वर्द्धक।
✦ मुख्य-श्लोक
"जटाटवी-गलज्जल-प्रवाह-पावित-स्थले।"
"गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्ग-तुङ्ग-मालिकाम्।"
"डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं।"
"चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिव शिवम्।"
✦ पाठ के लाभ
मानसिक-शक्ति।
शत्रु-नाश।
साहस-वर्धन।
भय-नाश।
चित्त-शुद्धि।
शिव-कृपा।
तपस्या-समान-फल।
सोमवार-शिवरात्रि-विशेष।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पाठ कितना समय?▼
सम्पूर्ण: 8-10 मिनट। तेज: 5 मिनट। उच्चारण कठिन — पहले सुनकर सीखें।
क्या रावण-रचित होने से अशुभ?▼
नहीं। रावण महाज्ञानी और शिव-भक्त था। उसकी शिव-भक्ति प्रशंसनीय। स्तोत्र शुद्ध-शिव-स्तुति।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।