शिव ताण्डव स्तोत्रम्

रावण-रचित शक्तिशाली शिव-स्तुति

श्लोक

17

छन्द

पंथक

पाठ-समय

8-10 मिनट

शिव-ताण्डव-स्तोत्रम् — रावण-रचित शिव-स्तुति। 17 श्लोक। पंथक-छन्द (अद्वितीय)। शिव के ताण्डव-नृत्य का वर्णन।

रावण ने कैलाश-पर्वत उठाने के बाद शिव-कोप-शान्ति हेतु रचा। शिव प्रसन्न → चन्द्रहास-तलवार दी।

रचना-कथा

रावण कैलाश-पर्वत को उठाकर लंका ले जाना चाहता।

शिव ने अंगूठा-दबाकर पर्वत-स्थिर किया।

रावण का हाथ दब गया।

दर्द से रावण ने स्तुति-गाई।

शिव प्रसन्न → रिहाई + चन्द्रहास।

तब से ताण्डव-स्तोत्र शक्तिशाली।

अद्वितीय-छन्द

पंथक-छन्द: 16-अक्षर-प्रति-पाद।

तीव्र-लय (rapid rhythm)।

गायन-कठिन।

नागेश्वर-राव, उमा-मोहन-भट्ट प्रसिद्ध-गायक।

सुनना-स्वयं भक्ति-वर्द्धक।

मुख्य-श्लोक

"जटाटवी-गलज्जल-प्रवाह-पावित-स्थले।"

"गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्ग-तुङ्ग-मालिकाम्।"

"डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं।"

"चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिव शिवम्।"

पाठ के लाभ

मानसिक-शक्ति।

शत्रु-नाश।

साहस-वर्धन।

भय-नाश।

चित्त-शुद्धि।

शिव-कृपा।

तपस्या-समान-फल।

सोमवार-शिवरात्रि-विशेष।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाठ कितना समय?

सम्पूर्ण: 8-10 मिनट। तेज: 5 मिनट। उच्चारण कठिन — पहले सुनकर सीखें।

क्या रावण-रचित होने से अशुभ?

नहीं। रावण महाज्ञानी और शिव-भक्त था। उसकी शिव-भक्ति प्रशंसनीय। स्तोत्र शुद्ध-शिव-स्तुति।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।