महाशिवरात्रि — फाल्गुन-कृष्ण-चतुर्दशी की रात्रि। शिव-पार्वती-विवाह + शिव का "तांडव-नृत्य" का स्मरण। 2026 में महाशिवरात्रि 15 फरवरी (रविवार)। 12 ज्योतिर्लिंगों में रात्रि-पूजा। चार-प्रहर पूजन।
पुराण: शिव ने इस-रात्रि "तांडव" किया। पार्वती से विवाह भी इसी-दिन। शिव-भक्तों का सर्वोच्च-पर्व। निर्जला-व्रत + रात्रि-जागरण।
✦ महाशिवरात्रि 2026 — 4-प्रहर पूजा-समय
चतुर्दशी प्रारम्भ: 15 फरवरी 2026 प्रात: 9:30 AM। समाप्त: 16 फरवरी 6:00 AM।
प्रथम-प्रहर: सायं 6:00-9:00 PM — दूध-अभिषेक।
द्वितीय-प्रहर: रात्रि 9:00-12:00 AM — दही-अभिषेक।
तृतीय-प्रहर: 12:00-3:00 AM — घी-अभिषेक।
चतुर्थ-प्रहर: 3:00-6:00 AM — शहद-अभिषेक।
निशीथ-काल (मुख्य-पूजा): रात्रि 12:00-1:30 AM।
✦ व्रत-विधि
चतुर्दशी प्रात: स्नान। श्वेत वस्त्र। निर्जला-व्रत संकल्प।
दिन-भर निराहार। शिव-स्मरण। "ॐ नमः शिवाय" 108 बार × कई-बार।
4-प्रहर अभिषेक: प्रत्येक प्रहर में अलग-द्रव्य। बेल-पत्र अनिवार्य।
रात्रि-जागरण: शिव-भजन, शिव-पुराण, शिव-तांडव-स्तोत्र।
पारण: 16 फरवरी सूर्योदय बाद — फलाहार से।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
महाशिवरात्रि-व्रत में क्या खा सकते हैं?▼
पूर्ण-निर्जला सर्वश्रेष्ठ। यदि न-सम्भव — फल, दूध, सिंघाड़ा, साबूदाना। चावल-गेहूँ-दाल वर्जित।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।