रुद्राभिषेक

श्रावण-सोमवार + महाशिवरात्रि + प्रदोष-काल

पञ्चामृत

दूध-दही-शहद-घी-शक्कर

बेल-पत्र

108 (3-पत्ते)

मन्त्र

श्री-रुद्रम् 11 बार

रुद्राभिषेक — शिव-लिंग पर पञ्चामृत-गंगाजल का अभिषेक। शिव-कृपा का सर्वोच्च-साधन। श्रावण-सोमवार + महाशिवरात्रि + प्रदोष-काल पर विशेष।

रुद्राभिषेक-सामग्री

पञ्चामृत: दूध-दही-शहद-घी-शक्कर।

गंगाजल, बेल-पत्र, सफेद-फूल, धतूरा, भांग।

चन्दन, भस्म, अक्षत, कुशा।

नैवेद्य: फल-मिठाई। तुलसी वर्जित।

विधि

गणेश-स्मरण → शिव-संकल्प।

पञ्चामृत-स्नान: दूध→दही→शहद→घी→शक्कर। प्रत्येक के साथ "ॐ नमः शिवाय"।

गंगाजल-अभिषेक।

बेल-पत्र (3 पत्ते वाला) अर्पण। 108 बेल-पत्र श्रेष्ठ।

रुद्र-सूक्त (श्री-रुद्रम्) पाठ। 11 बार।

महामृत्युञ्जय-मन्त्र 108 बार।

आरती + प्रसाद-वितरण।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

घर पर सम्भव?

हाँ — छोटा शिवलिंग। सरल अभिषेक। पंडित न मिले तो स्वयं हिन्दी-मन्त्र-पाठ।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।