रुद्राभिषेक — शिव-लिंग पर पञ्चामृत-गंगाजल का अभिषेक। शिव-कृपा का सर्वोच्च-साधन। श्रावण-सोमवार + महाशिवरात्रि + प्रदोष-काल पर विशेष।
✦ रुद्राभिषेक-सामग्री
पञ्चामृत: दूध-दही-शहद-घी-शक्कर।
गंगाजल, बेल-पत्र, सफेद-फूल, धतूरा, भांग।
चन्दन, भस्म, अक्षत, कुशा।
नैवेद्य: फल-मिठाई। तुलसी वर्जित।
✦ विधि
गणेश-स्मरण → शिव-संकल्प।
पञ्चामृत-स्नान: दूध→दही→शहद→घी→शक्कर। प्रत्येक के साथ "ॐ नमः शिवाय"।
गंगाजल-अभिषेक।
बेल-पत्र (3 पत्ते वाला) अर्पण। 108 बेल-पत्र श्रेष्ठ।
रुद्र-सूक्त (श्री-रुद्रम्) पाठ। 11 बार।
महामृत्युञ्जय-मन्त्र 108 बार।
आरती + प्रसाद-वितरण।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
घर पर सम्भव?▼
हाँ — छोटा शिवलिंग। सरल अभिषेक। पंडित न मिले तो स्वयं हिन्दी-मन्त्र-पाठ।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।