नामकरण — हिन्दू 16 संस्कारों में से 5वाँ। नवजात-शिशु को नाम देने का संस्कार। पारम्परिक रूप से जन्म के 11वें या 12वें दिन (कुछ शाखाओं में 100वें दिन या 1 वर्ष पर)। 2026 में नामकरण के सर्वश्रेष्ठ-मुहूर्त।
नाम जन्म-नक्षत्र-पाद के अक्षर से शुरू होना चाहिए — पारम्परिक नियम। 27 नक्षत्र × 4 पाद = 108 अक्षर। प्रत्येक नक्षत्र-पाद का अपना-अक्षर। बच्चे का नाम उसी से।
✦ नामकरण के लिए शुभ-तिथियाँ
दिन: 11वाँ या 12वाँ (पारम्परिक) सर्वोत्तम। यदि उस-दिन अशुभ हो — 16 दिन तक स्वीकार्य।
मास-वार-तिथि-नक्षत्र पंचांग देखें। चातुर्मास में भी नामकरण किया जा सकता है (पर मांगलिक-कार्य न हो — केवल नाम घोषणा)।
वार: सोम, बुध, गुरु, शुक्र। मंगल/शनि/रवि वर्जित।
नक्षत्र: अश्विनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, रेवती।
अभिजित-मुहूर्त (दोपहर 11:54-12:42) सर्वोत्तम।
✦ नाम-चयन की विधि
जन्म-नक्षत्र पता करें (हमारे "जन्म-नक्षत्र कैल्कुलेटर" से)।
नक्षत्र-पाद का अक्षर निकालें। उदाहरण: पुष्य-नक्षत्र पाद 1 = "हू"।
उस अक्षर से शुरू होने वाला अर्थपूर्ण-नाम चुनें। 2-4 अक्षर का नाम सर्वोत्तम।
कुल-देवी/देवता का सम्बन्ध-संकेत हो — हरि, कृष्ण, शिव, राम, गणेश आदि।
दो नाम (पारम्परिक): गुप्त-नाम (नक्षत्र-वार) + व्यवहार-नाम (आधुनिक)। दोनों एक ही अक्षर से श्रेष्ठ।
✦ नामकरण-संस्कार की पूर्ण-विधि
11वें/12वें दिन प्रात: सब-तैयारी। पूजा-स्थल में गणेश-कलश-नवग्रह।
बच्चे को दूध-स्नान। नये कपड़े-आभूषण। पुजारी पूजन प्रारम्भ।
कलश-स्थापना। नवग्रह-शान्ति। गणेश-षोडशोपचार-पूजन।
पिता बच्चे के दाहिने कान में 3 बार नाम-उच्चारण। फिर बायें कान में।
सब रिश्तेदार बच्चे को आशीर्वाद। उपहार-वितरण। ब्राह्मण-भोज।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
11वाँ या 12वाँ दिन — कौन-सा?▼
दोनों स्वीकार्य। उत्तर-भारत में 11वाँ, दक्षिण-भारत में अधिकांश 12वाँ। यदि उस-दिन अशुभ-नक्षत्र हो — 16 दिन तक के बीच कोई शुभ-दिन।
क्या आधुनिक-नाम पारम्परिक-अक्षर से अनिवार्य?▼
पारम्परिक नियम — हाँ। आधुनिक-काल में 2 नाम रखे जाते हैं: पारम्परिक (नक्षत्र-अक्षर से, घर में) + आधुनिक (स्कूल-कानूनी)। आदर्श: दोनों एक ही अक्षर से।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।