अष्टकवर्ग — वैदिक-ज्योतिष की उन्नत-भविष्यवाणी-प्रणाली। प्रत्येक ग्रह की 8 बिन्दु-आधार पर शक्ति। 7 ग्रह + लग्न = सर्वाष्टकवर्ग (कुल 337 बिन्दु)।
मुख्य-उपयोग: किस-राशि-भाव में कौन-सा ग्रह कितना-शक्तिशाली। ट्रांजिट-गोचर-फल। दशा-विश्लेषण।
✦ सिद्धान्त
7 ग्रह: सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि।
+ लग्न = 8 कारक।
प्रत्येक-राशि के लिए 8 अवलोकन।
शुभ = बिन्दु। अशुभ = रिक्त।
प्रत्येक-ग्रह की 12-राशियों में बिन्दु-गणना।
बिन्दु अधिक = ग्रह-शक्ति अधिक।
✦ व्यक्तिगत-अष्टकवर्ग
सूर्य-अष्टकवर्ग: 48 बिन्दु अधिकतम।
चन्द्र: 49 बिन्दु।
मंगल: 39 बिन्दु।
बुध: 54 बिन्दु।
गुरु: 56 बिन्दु।
शुक्र: 52 बिन्दु।
शनि: 39 बिन्दु।
कुल: 337 बिन्दु।
✦ सर्वाष्टकवर्ग
सब 7 ग्रहों के बिन्दु जोड़कर।
प्रत्येक-राशि का कुल-बिन्दु।
25-30 = औसत।
30+ = शुभ।
35+ = अति-शुभ।
25 से कम = कमजोर-राशि।
✦ भविष्यवाणी-में-उपयोग
ट्रांजिट: ग्रह जब उच्च-बिन्दु-राशि में → शुभ-फल।
दशा: ग्रह की दशा में बिन्दु-अनुसार-फल।
यात्रा-दिशा: उच्च-बिन्दु-दिशा।
नौकरी-व्यापार: 10वें भाव में बिन्दु।
विवाह: 7वें भाव में बिन्दु।
सम्पत्ति: 4वें-भाव-बिन्दु।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अष्टकवर्ग कैसे जानें?▼
मुफ्त-वेबसाइट: AstroSage, Drik Panchang। सटीक-जन्म-समय आवश्यक।
अष्टकवर्ग बनाम मुख्य-कुण्डली?▼
मुख्य-कुण्डली ग्रह-स्थिति। अष्टकवर्ग ग्रह-शक्ति। दोनों एक-साथ श्रेष्ठ।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।