KP-ज्योतिष (कृष्णमूर्ति-पद्धति) — आधुनिक-वैदिक-ज्योतिष। श्री के.एस. कृष्णमूर्ति (1908-1972) रचित। पारम्परिक से अधिक-सटीक माना जाता।
मुख्य-विशेषता: कुस्प-सब-लॉर्ड-थ्योरी। कोई भी प्रश्न का सटीक-उत्तर 24 घण्टे में।
✦ पारम्परिक से भिन्नता
पारम्परिक: सम्पूर्ण-कुण्डली-विश्लेषण।
KP: विशिष्ट-प्रश्न-केन्द्रित।
पारम्परिक: नक्षत्र-स्वामी।
KP: सब-स्वामी (sub-lord) मुख्य।
पारम्परिक: ग्रह-स्थिति।
KP: कुस्प-स्थिति-अधिक-महत्वपूर्ण।
पारम्परिक: 9-ग्रह।
KP: रुलिंग-प्लैनेट्स (5)।
✦ सब-लॉर्ड-थ्योरी
प्रत्येक-नक्षत्र को 9-भागों में बाँटा।
प्रत्येक-भाग का अपना ग्रह-स्वामी।
कुस्प (भाव-आरम्भ-बिन्दु) किस सब-लॉर्ड में = फल।
गणना: कम्प्यूटर/ज्योतिषीय-सॉफ्टवेयर।
✦ KP के 5 रुलिंग-ग्रह
1. लग्न-राशि-स्वामी।
2. लग्न-नक्षत्र-स्वामी।
3. चन्द्र-राशि-स्वामी।
4. चन्द्र-नक्षत्र-स्वामी।
5. वार-स्वामी (दिन का ग्रह)।
✦ उपयोग और सॉफ्टवेयर
प्रश्न-कुण्डली (होरारी): प्रश्न के समय का चार्ट।
सटीक-यात्रा-समय।
विवाह-समय।
नौकरी-परिवर्तन।
सॉफ्टवेयर: KP Stellar, Jagannatha Hora, AstroSage Pro।
सीखने में: 6 माह से 2 वर्ष।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
KP या वैदिक-ज्योतिष?▼
KP: सटीक-समय-भविष्यवाणी। वैदिक: सम्पूर्ण-जीवन-विश्लेषण। दोनों एक-साथ श्रेष्ठ।
KP सीखना कठिन?▼
पारम्परिक से कठिन। गणितीय-कौशल आवश्यक। पुस्तकें: KS कृष्णमूर्ति की मूल-पुस्तकें। ऑनलाइन-कोर्स।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।