शनि-गोचर 2026

शनि-गोचर 2026

कर्म-कारक — साढ़े-साती, ढैय्या, धैर्य-परीक्षक

शनि

Saturn (Shani)

राशि-काल

~2.5 वर्ष

देवता

यम-छाया-पुत्र

30-वर्ष-चक्र

पूर्ण-राशि-चक्र

ग्रह-परिचय

शनि-गोचर — सबसे-धीमी-गति-ग्रह, ~2.5 वर्ष प्रति-राशि, पूर्ण-चक्र 30 वर्ष। 2026 में शनि मीन-राशि में रहेगा (मार्च 2025 से 2027 तक)।

शनि कर्म-कारक, आयु-कारक, सेवक-कारक, दुःख-विघ्न-कारक। कठोर-गुरु — कर्मफल-दाता। शनि-स्थिति से व्यक्ति का कर्म-निष्ठा, धैर्य, सहनशीलता।

साढ़े-साती (= शनि का जन्म-राशि के पूर्व, उसी, एवं अगली राशि में होना — कुल 7.5 वर्ष) सबसे-महत्वपूर्ण शनि-गोचर। 2026 में: मीन/मेष-राशि वालों को साढ़े-साती, धनु/कुम्भ-राशि वालों को ढैय्या (2.5 वर्ष)।

📅

2026 राशि-गोचर

1 जन॰

राशि-प्रवेश: मीन

पूर्ण-वर्ष — मीन में जारी (2025-2027)

🔮

12 राशियों पर प्रभाव

मेष (Aries)

मेष-राशि — साढ़े-साती (शनि 12वें भाव में)। प्रथम-चरण। व्यय-स्थान।

वृषभ (Taurus)

वृषभ — आय-स्थान। मित्र-लाभ। शनि-शुभ।

मिथुन (Gemini)

मिथुन — कर्म-स्थान। मेहनत का फल मिलेगा।

कर्क (Cancer)

कर्क — भाग्य-स्थान। आध्यात्म-यात्रा।

सिंह (Leo)

सिंह — अष्टम-स्थान। सावधानी का काल।

कन्या (Virgo)

कन्या — षष्ठम (शत्रु) स्थान। ऋण-शत्रु-नाश।

तुला (Libra)

तुला — पञ्चम (सन्तान) स्थान। पढ़ाई-संतान-सावधानी।

वृश्चिक (Scorpio)

वृश्चिक — चतुर्थ (माता-गृह) स्थान। गृह-कलह।

धनु (Sagittarius)

धनु — ढैय्या जारी (तृतीय शनि — पराक्रम-स्थान)। शनि-शुभ-काल।

मकर (Capricorn)

मकर — द्वितीय शनि (धन-स्थान)। वाणी-धन-सावधानी।

कुम्भ (Aquarius)

कुम्भ — साढ़े-साती तृतीय-चरण समाप्त। राहत-काल।

मीन (Pisces)

मीन — साढ़े-साती द्वितीय-चरण। शनि स्व-स्थान पर। मानसिक-दबाव।

🪔

उपाय एवं शान्ति-कर्म

  1. 1

    प्रत्येक शनिवार शनि-स्तोत्र, हनुमान-चालीसा।

  2. 2

    "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मन्त्र 108 बार।

  3. 3

    काला-तिल, सरसों-तेल, उड़द-दाल, काला-वस्त्र, लोहा दान।

  4. 4

    पीपल-वृक्ष की पूजा। नीलम-रत्न (शास्त्रोक्त-परीक्षण-अनिवार्य — विपरीत-फल भी संभव)।

प्रश्न-उत्तर

Q. साढ़े-साती के 3 चरण?

चरण-1: शनि 12वें भाव (व्यय)। चरण-2: शनि लग्न (आत्मा-तन)। चरण-3: शनि 2रे भाव (धन-वाणी)। प्रत्येक 2.5 वर्ष।

Q. नीलम-रत्न परीक्षण-विधि?

3 दिन तकिए-नीचे रखें। दु:स्वप्न-स्वास्थ्य-हानि-दुर्घटना-कलह न हो तो धारण-योग्य। शनि-वार-शाम पञ्च-धातु-अङ्गूठी में मध्य-अङ्गुली में।