चातुर्मास — आषाढ़-शुक्ल-एकादशी (देवशयनी) से कार्तिक-शुक्ल-एकादशी (देवउठनी) तक 4 मास। भगवान विष्णु निद्रा-काल। 2026 में 25 जुलाई-20 नवम्बर।
सब मांगलिक-कार्य वर्जित: विवाह, गृह-प्रवेश, मुण्डन, यज्ञोपवीत, नया-व्यापार। केवल पूजा-व्रत-दान-तपस्या-तीर्थ-यात्रा शुभ।
✦ चातुर्मास के नियम
मांगलिक-कार्य पूर्ण-वर्जित।
मांस-मदिरा-तामसिक त्याग।
सात्विक-भोजन। एक-समय भोजन व्रत श्रेष्ठ।
दैनिक विष्णु-पूजा। सत्यनारायण-कथा।
तीर्थ-यात्रा (केदार-बद्री-वैष्णो) श्रेष्ठ-काल।
साधना, ध्यान, मन्त्र-सिद्धि का सर्वोत्तम-समय।
भागवत-गीता पाठ। श्रीमद्भागवत 12 स्कन्ध।
✦ क्षेत्रीय परम्परा
महाराष्ट्र: चातुर्मास-व्रत प्रसिद्ध। पैदल-तीर्थ।
गुजरात: साधु-समुदाय एक-स्थान निवास (वर्षायोग)।
दक्षिण-भारत: विशेष पूजा-अनुष्ठान।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चातुर्मास में विवाह-तय?▼
देवशयनी (25 जुलाई 2026) से देवउठनी (20 नवम्बर) तक विवाह-वर्जित। पंजीकरण-स्तर पर बात कर सकते — विवाह-समारोह 20 नवम्बर बाद।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।