तुलसी-विवाह — माँ तुलसी का भगवान विष्णु (शालिग्राम-स्वरूप) से विवाह। कार्तिक-शुक्ल-एकादशी (देवउठनी) से कार्तिक-पूर्णिमा तक। 2026 में तुलसी-विवाह 20-24 नवम्बर। मुख्य-दिन देवउठनी एकादशी (20 नवम्बर) — चातुर्मास-समाप्ति का प्रतीक।
पुराण-कथा: तुलसी (वृन्दा) पूर्व-जन्म में जलंधर की पत्नी। उसकी पतिव्रता-शक्ति से जलंधर अजेय। विष्णु ने जलंधर का रूप धारण कर वृन्दा को छला — शिव ने जलंधर का वध किया। वृन्दा ने श्राप दिया — विष्णु पत्थर बनेंगे (शालिग्राम)। फिर तुलसी रूप में पुनर्जन्म। विष्णु से विवाह।
✦ तुलसी-विवाह 2026 — मुहूर्त
मुख्य-दिन: 20 नवम्बर 2026 (शुक्र) — देवउठनी एकादशी। चातुर्मास-समाप्ति। विष्णु-निद्रा से जागरण।
विकल्प-तिथियाँ: 21-24 नवम्बर। सबसे श्रेष्ठ — 20 नवम्बर (देवउठनी) या 24 नवम्बर (कार्तिक-पूर्णिमा)।
पूजा-समय: सायं 5:30 PM के बाद (प्रदोष-काल)। चन्द्रोदय बाद विशेष शुभ।
विवाह की पूर्ण-सम्पन्नता: 20 नवम्बर के बाद — सब मांगलिक-कार्य पुनः-शुरू।
✦ तुलसी-विवाह की विधि
पूजा-स्थल: तुलसी-वृक्ष या तुलसी-पौधा। यदि न हो — कलश में तुलसी-शाखा।
सजावट: तुलसी-पौधे को साड़ी पहनायें (छोटी पीली-लाल साड़ी)। फूल-माला। मेहंदी।
दूल्हा: शालिग्राम-पत्थर (विष्णु-स्वरूप) या विष्णु-मूर्ति। पीला धोती-दुपट्टा।
मण्डप: तुलसी के चारों ओर 4 खम्बे (गन्ना)। केले के पत्ते से छत। फूल-सजावट।
पूजा-क्रम: कन्या-दान (तुलसी), सप्तपदी, मंगल-सूत्र, सिन्दूर — सब विवाह-संस्कार। पंडित द्वारा या परिवार स्वयं।
भोग: पंजीरी, मीठा-भात, फल, मिठाई। पुष्प-आरती।
समापन: तुलसी-शालिग्राम का वैवाहिक-जोड़ा। तुलसी-पौधा घर-मन्दिर में स्थापित।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।
- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
तुलसी-विवाह क्यों करते हैं?▼
धार्मिक: चातुर्मास-समाप्ति का संकेत — विष्णु-जागरण। पारिवारिक: पुत्री के बिना दम्पत्ति "कन्यादान" का पुण्य प्राप्त करते हैं। प्रचलित-मान्यता: एक बार तुलसी-विवाह करने वाले को पुत्री-कन्यादान का सम्पूर्ण-फल।
शालिग्राम क्या है?▼
गण्डकी-नदी (नेपाल) से प्राप्त काला-पत्थर। प्राकृतिक-अंकन (आभूषण/चक्र) होते। शास्त्र-मान्यता: साक्षात्-विष्णु-स्वरूप। तुलसी-विवाह में दूल्हा-स्वरूप। यदि शालिग्राम न हो — विष्णु की मूर्ति/चित्र भी स्वीकार्य।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।