भूमि पूजन मुहूर्त 2026

अक्षय-तृतीया (20 अप्रैल 2026) सर्वोच्च-शुभ

सर्वोत्तम-दिन

20 Apr (अक्षय-तृतीया)

चातुर्मास

16 Jul-11 Nov ✗

देवउठनी

21 Nov

भूमि-पूजन (शिलान्यास, खात-मुहूर्त) — किसी निर्माण-कार्य (घर, मन्दिर, कारखाना, बहुमंजिला) के पूर्व भूमि की पूजा। वास्तु-पुरुष को आमन्त्रण। आधुनिक-निर्माण से पूर्व 5,000+ वर्षों से प्रचलित।

2026 के लिए भूमि-पूजन के सर्वश्रेष्ठ-मुहूर्त माघ-फाल्गुन-वैशाख-ज्येष्ठ में। अक्षय-तृतीया (20 अप्रैल 2026) सर्वोच्च-शुभ। चातुर्मास (25 जुलाई-20 नवम्बर) वर्जित।

भूमि-पूजन का धार्मिक एवं वास्तु महत्त्व

वास्तु-पुरुष: ब्रह्मा द्वारा सृष्ट विशाल पुरुष। पृथ्वी के सब-स्थानों पर निवास। निर्माण से पूर्व उन्हें आमन्त्रण आवश्यक — उनकी अनुमति के बिना निर्माण-दोष।

धार्मिक: भूमि-माता का सम्मान। निर्माण से पहले माफी-संकल्प। पंच-तत्त्व (पृथ्वी-जल-अग्नि-वायु-आकाश) का संरेखण।

व्यावहारिक: निर्माण-स्थल का तत्त्व-शुद्धिकरण। नकारात्मक-ऊर्जा-निवारण। श्रमिकों-इंजीनियरों के लिए सुरक्षा-कवच।

2026 भूमि-पूजन शुभ-तिथियाँ

जनवरी: 16, 22, 26। फरवरी: 6, 8, 13, 18, 25।

मार्च: 4, 13, 18, 20। अप्रैल: 14, 16, 17, 19, 20 (अक्षय-तृतीया), 22, 25, 28।

मई: 1, 5, 11, 14, 20, 25। जून: 1, 4।

जुलाई-अक्टूबर: ✗ चातुर्मास।

नवम्बर: 21 (देवउठनी), 22, 25, 27, 30। दिसम्बर: 2, 3, 4, 9, 11।

भूमि-पूजन की विधि

मुहूर्त-समय: अमृत/शुभ/लाभ चौघड़िया। अभिजित-मुहूर्त (दोपहर) सर्वोत्तम।

सामग्री: नारियल, पञ्चरत्न (हीरा-मोती-माणिक्य-पन्ना-नीलम), 5 धान्य, गाय का घी, पञ्चामृत, गंगाजल, हल्दी, कुंकुम, फूल, धूप-दीप।

विधि: 1) गणेश-पूजन 2) कलश-स्थापना 3) नवग्रह-पूजन 4) वास्तु-पुरुष-आवाहन 5) भूमि के मध्य में गड्ढा खोदें 6) पञ्चरत्न-पञ्चधान्य गड्ढे में अर्पित 7) नारियल-कलश रखें 8) नारियल फोड़कर पहली-कुदाल मारें 9) ब्राह्मण-भोज + दान।

दिशा: पूर्व/उत्तर-कोण से शुरू। नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) कोने में पहली-नींव।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भूमि-पूजन और गृह-प्रवेश में अंतर?

भूमि-पूजन = निर्माण-शुरू-संस्कार (खाली भूमि पर)। गृह-प्रवेश = बने-घर में पहली बार प्रवेश-संस्कार। दोनों अलग-संस्कार। दोनों के लिए शुभ-मुहूर्त अनिवार्य।

क्या किरायेदार के लिए भी भूमि-पूजन?

किरायेदार पुनर्निर्माण/बड़ी-मरम्मत कर रहे हों — संक्षिप्त भूमि-पूजन उचित। केवल किराये पर लेने पर — गृह-प्रवेश पर्याप्त।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।