भगवद्गीता

महाभारत के भीष्म-पर्व में 18 अध्याय, 700 श्लोक

अध्याय

18

श्लोक

700

योग

कर्म-भक्ति-ज्ञान

भगवद्गीता — महाभारत के भीष्म-पर्व में 18 अध्याय, 700 श्लोक। कुरुक्षेत्र-युद्ध-भूमि पर श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को उपदेश। हिन्दू-धर्म का सर्वाधिक-पठित-ग्रन्थ।

तीन-योग: कर्म, भक्ति, ज्ञान। आत्मा-अमर, शरीर-नाशवान। निष्काम-कर्म ही जीवन-धर्म।

18 अध्यायों का संक्षेप

1. अर्जुन-विषाद-योग — मोह-संशय।

2. सांख्य-योग — आत्मा-अमर, स्थितप्रज्ञ-लक्षण।

3. कर्म-योग — निष्काम-कर्म।

4. ज्ञान-कर्म-संन्यास-योग — अवतार-तत्त्व।

5-8. कर्म-संन्यास, ध्यान, ज्ञान-विज्ञान, अक्षर-ब्रह्म।

9-11. राजविद्या, विभूति, विश्वरूप-दर्शन।

12. भक्ति-योग।

13-17. क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ, गुण, पुरुषोत्तम, दैवासुर, श्रद्धा।

18. मोक्ष-संन्यास-योग।

मुख्य-शिक्षाएँ

"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन" — कर्म पर ही अधिकार, फल पर नहीं।

"यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत" — धर्म-हानि पर अवतार।

"सर्वधर्मान् परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज" — सब-धर्म छोड़ मेरी शरण।

गुण-त्रय: सत्त्व-रजस्-तमस्। मन-नियन्त्रण।

अध्ययन-कैसे

प्रतिदिन एक-अध्याय।

गीता-पाठ हिन्दी-अनुवाद-सहित।

गीता-जयन्ती (मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी) पर सम्पूर्ण-पाठ।

15वाँ अध्याय — दैनिक-पाठ।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गीता कब-लिखी गयी?

महाभारत-काल। वेदव्यास द्वारा संकलित। 700 श्लोक।

सबसे महत्वपूर्ण-अध्याय?

12वाँ (भक्ति-योग) सरलतम। 2रा (आत्म-तत्त्व) मूल। 18वाँ (निचोड़) सम्पूर्ण।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।