महा मन्त्र (हरे कृष्ण)

हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे — 16 शब्द, 32 अक्षर

अक्षर

32

ISKCON दैनिक

16 माला

स्रोत

कलि-सन्तरण-उप

महा-मन्त्र: "हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥" 16-शब्द, 32-अक्षर।

कलि-सन्तरण-उपनिषद् में प्रथम उल्लेख। चैतन्य महाप्रभु (16वीं सदी) ने विश्व-प्रसारित। ISKCON द्वारा वैश्विक।

अर्थ

"हरे" = श्री-राधा (या भक्ति-शक्ति)।

"कृष्ण" = सर्व-आकर्षक।

"राम" = आनन्द-स्रोत।

मन्त्र-अर्थ: "हे राधा! हे कृष्ण! हे राम! कृपया मुझे अपनी सेवा में लगायें।"

जप-विधि

तुलसी-माला (108 दाने)।

दैनिक न्यूनतम 1 माला।

ISKCON: 16 माला/दिन।

स्नान-शुद्ध। पूर्व/उत्तर-मुख।

धीमी, स्पष्ट, भाव-सहित।

चार-नियम (ISKCON)

1. मांस-मछली-अण्डा त्याग।

2. नशा (शराब, चाय/कॉफी, तम्बाकू, ड्रग्स) त्याग।

3. अवैध-यौन-सम्बन्ध त्याग।

4. जुआ त्याग।

लाभ

कलि-युग में मात्र नाम-संकीर्तन से मुक्ति।

मानसिक-शान्ति।

चिन्ता-अवसाद-नाश।

हृदय-शुद्धिकरण।

📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ

इस लेख की सामग्री निम्नलिखित शास्त्रीय एवं आधुनिक प्रामाणिक स्रोतों से सत्यापित है। पाठक मूल-स्रोतों से स्वतन्त्र-सत्यापन कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मांस-छोड़ना क्यों ज़रूरी?

तामसिक-भोजन मानसिक-कम्पन कम करता।

मन-न-लगे तो?

सामान्य प्रारम्भ में। निरन्तर-अभ्यास से धीरे-धीरे रस।

🔗सम्बन्धित विषय

सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।