जन्माष्टमी-व्रत-विधि — श्री-कृष्ण के जन्म-दिवस का कठोर-व्रत। निशीथ-काल (मध्य-रात्रि) में मुख्य-पूजा। 4 सितम्बर 2026 (शुक्र) मुख्य-दिन।
✦ सम्पूर्ण-व्रत-विधि
सप्तमी-रात्रि: हल्का-सात्विक भोजन। सूर्यास्त-बाद कुछ-नहीं।
अष्टमी-प्रात: स्नान। पीला/नीला वस्त्र। संकल्प।
दिन-भर निर्जला/फलाहारी। चावल-वर्जित।
108 बार "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"। हरे-कृष्ण-महामन्त्र।
सायं: कृष्ण-कथा। भागवत-दशम-स्कन्ध। ISKCON-दर्शन।
मध्य-रात्रि (11:50 PM-12:45 AM): मुख्य-पूजा। पञ्चामृत-अभिषेक। बाल-कृष्ण को झूला।
मक्खन-मिश्री-तुलसी भोग। आरती।
पारण: स्मार्त 5 सितम्बर सूर्योदय बाद। वैष्णव रात्रि 9 PM बाद।
📚स्रोत एवं सन्दर्भ-ग्रन्थ
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- ▪सूर्य सिद्धान्त — शास्त्रीय संस्कृत खगोलशास्त्र ग्रन्थ (~5वीं सदी ईसवी)
- ▪बृहत् पाराशर होरा शास्त्र — महर्षि पराशर रचित वैदिक ज्योतिष का मूल-ग्रन्थ
- ▪मुहूर्त चिन्तामणि — राम दैवज्ञ रचित (16वीं सदी), मुहूर्त-शास्त्र का मानक-ग्रन्थ
- ▪Astronomical Algorithms — Jean Meeus (Willmann-Bell, 1998); इस साइट के सभी खगोलीय गणनाओं का आधार
- ▪लाहिरी अयनांश — भारतीय कैलेण्डर सुधार समिति (1955) द्वारा अंगीकृत मानक सायन-निरयण रूपान्तरण
✦ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
दही-हाण्डी कब?▼
5 सितम्बर 2026 — जन्माष्टमी के अगले-दिन। महाराष्ट्र-गुजरात मुख्य।
🔗सम्बन्धित विषय
सूचना: यह सामग्री शैक्षिक एवं सांस्कृतिक सन्दर्भ हेतु प्रकाशित है। व्यक्तिगत धार्मिक/ज्योतिषीय निर्णयों के लिए कृपया योग्य पंडित अथवा ज्योतिषी से परामर्श लें।