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प्रदोष व्रत (Pradosh Vrat) — सभी शहर · सभी वर्ष · Drik-parity गणना
प्रदोष व्रत — दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि (शुक्ल 13 व कृष्ण 13)। शिवजी का व्रत, प्रदोष-काल (सूर्यास्त-संधि) में किया जाता है। माह में दो बार। वार-अनुसार नाम — सोम-प्रदोष, भौम-प्रदोष, गुरु-प्रदोष आदि। नीचे नगर चुनकर 2026 की सम्पूर्ण सूची देखें।
त्रयोदशी तिथि को सूर्यास्त के समय (प्रदोष-काल) किया जाने वाला शिव-व्रत।
सोमवार + प्रदोष = शिवजी का दोहरा वार। संतान-प्राप्ति के लिए विशेष फलदायी माना गया है।
शनि-दोष के निवारण के लिए सर्वोत्तम। शनि व शिव दोनों की कृपा एक साथ मिलती है।
फलाहार — फल, दूध, मेवा। अनाज वर्जित। शाम के पूजन के बाद सात्विक भोजन।
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