✦ महालक्ष्मी ✦
✦ विष्णु-पत्नी, ऐश्वर्य की देवी, अष्ट-लक्ष्मी रूपा ✦
✦ महालक्ष्मी परिचय ✦
अन्य नाम / उपाधियाँ: श्री, कमला, पद्मा, इन्दिरा, चन्द्रा, हिरण्या, रमा, समुद्र-तनया
महालक्ष्मी — विष्णु की शाश्वत पत्नी एवं हिन्दू त्रिदेवी (लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती) में स्थान रखने वाली परम-ऐश्वर्य की देवी। समुद्र-मन्थन से उनका प्रकट होना सर्वाधिक प्रसिद्ध कथा है। नाम "लक्ष्मी" लक्ष्य ("उद्देश्य/शुभ-संकल्प") से सम्बन्धित है — जो शुभ-संकल्प को फलित करती हैं।
महालक्ष्मी "स्थिर लक्ष्मी" नहीं — वे "चञ्चला" हैं। जहाँ धर्म, स्वच्छता, श्रद्धा, परिश्रम है, वहीं वे निवास करती हैं। आलसी, अनैतिक, अहंकारी से दूर हो जाती हैं। उनके नाना रूप — आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, सन्तान लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी।
दीवाली रात्रि अमावस्या को महालक्ष्मी का परम-शुभ पूजन है। शुक्रवार उनका विशेष दिन। महालक्ष्मी अष्टकम् एवं श्री सूक्त का नित्य पाठ अति-फलदायी।
✦ स्वरूप एवं चित्रण ✦
चतुर्भुज स्वर्ण-वर्णा — हाथों में दो पद्म (कमल), अभय-मुद्रा एवं वरद-मुद्रा। पद्मासना — पूर्ण-विकसित कमल पर विराजमान। दो हाथियों द्वारा अभिषेक करते हुए (गज लक्ष्मी रूप)। लाल अथवा गुलाबी रेशमी वस्त्र, सुवर्ण-आभूषण, कर्ण-कुण्डल, मुकुट, हार। दो ओर से धन की वर्षा होती हुई।
✦ परिवार एवं सम्बन्ध ✦
✦ प्रमुख मन्त्र ✦
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
Om Shreem Mahalakshmyai Namah
अर्थ: महालक्ष्मी देवी को नमस्कार — सर्व-समृद्धि की देवी।
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै कमलवासिन्यै स्वाहा
Om Hreem Shreem Kleem Mahalakshmyai Kamalavasinyai Svaha
अर्थ: कमल पर विराजमान महालक्ष्मी — मुझे अक्षय श्री प्रदान करें।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
Om Shreem Hreem Shreem Kamale Kamalalaye Praseed Praseed Om Shreem Hreem Shreem Mahalakshmyai Namah
अर्थ: कमलासना देवी, प्रसन्न हों — दीवाली रात्रि का परम-मन्त्र।
✦ दार्शनिक प्रतीक ✦
कमल = शुद्धता, अनासक्ति (कीचड़ में रहकर भी निर्लिप्त)। चार हाथ = धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष — चार पुरुषार्थ। दो हाथी = धरती (कीर्ति) एवं स्वर्ग (आध्यात्मिक उन्नति) से अभिषेक। चार कमल = चार दिशाओं में फैलती समृद्धि। उल्लू वाहन = रात्रि में भी अदृश्य देखने वाला विवेक — धन-संचय में सावधानी का प्रतीक। श्री सूक्त वैदिक काल का सर्व-प्राचीन लक्ष्मी-स्तोत्र।